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Ajay Singh
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Modi and Mahatma Gandhi have many things common.
Read the article to understand.
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गीता का ग्यारह अध्याय और विश्व समाज
अ र्जुन कह रहा है कि मैं जो कुछ देख रहा हूं उसकी शक्ति अनन्त है, भुजाएं अनन्त हैं, सूर्य चन्द्र उसके नेत्र हैं, मुंह जलती हुई आग के समान है। वह अपने तेज से सारे विश्व को तपा रहा है। वह सर्वत्र व्याप्त होता दीख रहा है-सर्वत्र विस्तार पाता दीख रहा है। आपके इस...
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गीता का आठवां अध्याय और विश्व समाज
स्वामी चिन्मयानन्द जी की बात में बहुत बल है। आज के वैज्ञानिकों ने 'गॉड पार्टीकल' की खोज के लिए अरबों की धनराशि व्यय की और फिर भी वह 'गॉड पार्टीकल' अर्थात ब्रह्मतत्व की वैसी खोज नहीं कर पाये-जैसी हमारे श्री ऋषि-महर्षियों ने हमें युगों पूर्व करा दी थी। उसी पर...
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राम से बड़ा राम का नाम
"एक राम दशरथ घर डोले, एक राम घट घट में बोले। एक राम का सकल पसारा, एक राम त्रिभुवन ते न्यारा।।" पहला राम रामचंद्र जी महाराज हिंदुस्तान के राजा हुए हैं जो त्रेता युग में आए और अपना काम करके चले गए। दूसरा राम मन है जो अभी यहां है अभी मुंबई चला गया कोलकाता चला ...
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*प्रकृति, विकृति और संस्कृति*
एक प्रसिद्ध कहावत है कि अपनी रोटी खाना प्रकृति, दूसरे की रोटी खा लेना विकृति, तथा अपनी रोटी दूसरे को खिला देना संस्कृति है। इस संबंध में एक पुराना प्रसंग श्री गुरुजी सुनाते थे। युधिष्ठिर ने एक बार राजसूय यज्ञ किया। यज्ञ के बाद दूर-दूर से आये विद्वानों को ...
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सफलता के 20 मँत्र
1.खुद की कमाई  से कम   खर्च हो ऐसी जिन्दगी   बनाओ..! 2. दिन  मेँ कम  से कम   3 लोगो की प्रशंसा करो..! 3. खुद की भुल स्वीकारने   मेँ कभी भी संकोच मत    करो..! 4. किसी  के सपनो पर  हँसो     मत..! 5. आपके पीछे खडे व्यक्ति    को भी कभी कभी आगे    जाने का मौका द...
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गीता का कर्मयोग और आज का विश्व,
''तुझे पर्वतों में खोजा तो लिये पताका खड़ा था। तुझे सागर में  खोजा तो मां के चरणों में पड़ा था। सर्वत्र तेरे कमाल से विस्मित सा था मैं, मुझे पता चल गया तू सचमुच सबसे बड़ा था।।'' ईश्वर को खोजने वाली दृष्टि होनी चाहिए-फिर सारी सृष्टि में वही दिखायी देगा। वह द...
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उमा कहऊँ मैं अनुभव अपना, सत हरि भजन जगत सब सपना
                 गो-स्वामी तुलसी दास जी द्वारा रचित श्री राम चरित मानस की एक चौपाई में भगवान शिव माँ पार्वती से कहते हैं “ उमा कहऊँ मैं अनुभव अपना, सत हरि भजन जगत सब सपना ” अर्थात केवल हरि का निरंतर स्मरण ही एक मात्र सत्य है बाकी इस जगत में सभी कुछ केवल स्व...
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