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L.S. Bisht
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एक आंसू का सफरनामा (16 अप्रैल जन्मदिवस पर)
आज जब दुनिया से हंसी गायब हो रही है बरबस याद आते है चार्ली चैपलिन । दुनिया भर के बच्चे जिस चेहरे को आसानी से पहचान लेते है वह चार्ली चैपलिन का ही है। चैपलिन की फिल्म 'द किड' 1921 में बनी थी उसमे चैपलिन के साथ एक चार साल के बच्चे जैकी कूगन ने अदभुत अभिनय किय...
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वसंतोत्सवों का चरम है होली
साहित्य में कामदेव
की कल्पना एक अत्यन्त रूपवान युवक के रूप में की गई है और ऋतुराज वसंत को उसका
मित्र माना गया है ।कामदेव के पास पांच तरह के बाणों की कल्पना भी की गई है ।य़ह
हैं सफेद कमल, अशोक पुष्प, आम्रमंजरी, नवमल्लिका, और नीलकमल । वह तोते में बैठ कर
भ्रमण ...
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नाकाम मोहब्बत की एक दास्तां / मधुबाला (पुण्य तिथि 23 फरबरी )
“ हमे काश तुमसे मुहब्बत न
होती , कहानी हमारी हकीकत न होती ......... शायद यह किसी को भी न पता था
कि सिनेमा के परदे पर अनारकली बनी मधुबाला पर फिल्माया यह गीत उनकी असल जिंदगी का
भी एक दर्दनाक गीत बन   जाएगा   और बेमिसाल हुस्न की मलिका की जिंदगी नाकाम
मोहब्बत क...
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लड़की की आंखों मे लट्टू होता मीडिया
एक लड़की ने आंख क्या मारी
पूरा देश मानो उसका दीवाना हो गया | अपने को जिम्मेदार चौथा खंभा कहने वाले भारतीय
मीडिया को तो मानो मन मांगी मुराद मिल गई हो | वह आंख मारने के तौर तरीकों , किस्मों
और उसके विशेष प्रभावों पर चौपाल लगाने लगा | बड़े बड़े मुद्दे पीछे छूट गए...
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सेक्स अपराधों मे पुरूष ही कटघरे मे क्यों ?
वाकई हम एक भेड़चाल समाज है | एक सुर
मे चलने वाले लोग | जब पहला सुर टूटता है तब दूसरे को पकड़ लेते है और
इसी तरह तीसरे सुर को | इस तरह ताले बजाने वाले इस सुर से उस सुर मे शिफ्ट
हो जाते है |        आजकल महिला सशक्तिकरण का शोर है | शोर ही नही जोश भी है और इस
जोश...
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ओनली लिपिस्टिक इज नाट अंडर योर बुर्का
       आश्चर्य होता है कभी कभी कि राजनीति से
जुडी एक घटिया गोसिप पर मीडिया के सभी माध्यमों से लेकर सोशल मीडिया मे भी कई कई
दिन तक बहस हो सकती है लेकिन प्रयोगवादी फिल्म के लबादे मे प्रदर्शित हाल की दो
फिल्मों यानी “ बेगम जान “  व लिपिस्टिक अंडर माई बुर्का “ ...
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