Profile cover photo
Profile photo
DudhwaLive
45 followers -
Journal of Natural History and Wildlife
Journal of Natural History and Wildlife

45 followers
About
Posts

Post has attachment

Post has attachment
दुधवा लाइव पत्रिका का मई-जून २०१६ का प्रकाशित अंक पीडीएफ के रूप में यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं.
जल-विशेषांक

Dear Friends,
I am pleased to share Dudhwa Live International Magazine Vol.6 Issue 5-6, May-June 2016, please check the link below to download the 44 pages Print edition (PDF)

Dudhwa Live Magazine has been assigned ISSN number as a continuing resource (ISSN Number - 2395 - 5791) from Jan 2010. This will help in electronic archiving and act as a bibliographical tool so that students, researchers, librarians can use it to give the precise references of a serial publication.
To contribute articles to Dudhwa Live Magazine, mail to editor.dudhwalive@gmail.com
I look forward to your inputs and support in preserving our natural treasure. For other interesting articles and images check –

http://www.dudhwalive.com

http://radiodudhwalive.com

https://www.facebook.com/dudhwalive/

https://twitter.com/dudhwalive

https://in.linkedin.com/in/dudhwa-live-journal-a762834b

Please feel free to email, circulate in your network to raise awareness.
Regards,
Krishna Kumar Mishra
Add a comment...

Post has attachment
मैं भारतीय गणराज्य के नागरिक होने के नाते, साधिकार भारत के पर्यावरण एवं वन मंत्री श्री प्रकाश जावेडकर के उस आदेश की भर्त्सना करता हूँ जिसमें उन्होंने नीलगाय को मारने के आदेश जारी किए, और बुद्ध की भूमि पर यह हिंसक खेल शुरू हो चुका है, पारिस्थितिकी असंतुलन की जिम्मेदार ये सरकारी योजनाएं जिनके कारण जल जंगल जमीन सब प्रदूषित व् अव्यवस्थित हो चुका है, उसे सुधारने के बजाए, तात्कालिक समस्या निवारण के विकल्प के रूप में जो ख़ूनी खेल खेलने की इजाजत महोदय ने दी है व् अनैतिक व् अप्राकृतिक है, वन्य जीवन सरंक्षण से जुड़े होने के कारण मुझे जहाँ तक कानून की जानकारी है तो वाइल्ड लाइफ एक्ट 1972 में नीलगाय सरंक्षित श्रेणी 3 का जीव है, और पशुक्रूरता निवारण अधिनियम भी इनके इस गैरवाजिब आदेश के मध्य मौजूद है, साथ ही इकोलॉजी में इस जीव की भूमिका और उसके दुष्परिणामों के अध्धयन के बगैर यह फरमान पूर्णतया अवैध है, चीन में माओ ने अपनी सत्ता के दौरान वहां गौरैया चिड़िया को मारने का आदेश जारी किया, देखते ही देखते शिकारी प्रवत्ति की आदम जात ने वहां से चिड़ियों का सफाया कर दिया, माओ को बताया गया था की ये चिड़िया फसलों को उजाड़ रही है, नतीजतन गौरैया का सफाया होने के बावजूद एक नई समस्या उत्पन्न हुई जिससे वहां के किसानों की सारी फसले बेकार हो गयी, कारण था फसलों में कीट पतंगों की भरमार, जिन्हें कभी गौरैया अपना भोजन बनाती थी, वह चिड़िया फसल के दानों के साथ साथ इन कीट पतंगो को भी खाती थी सो संतुलन कायम था। अब इस नई समस्या के आने से उस माओ ने दूसरे देशों से गौरैया मंगवा कर उनका प्रजनन शुरू करवाया ताकि फसले इन कीट पतंगों से बची रहे। कहने का मतलब यह है की प्रकृति में कुछ भी बेकार नही, सब जरुरी है किसी न किसी के लिए और चूँकि सब एक दूसरे से जुड़े है, तो एक की रिक्तता दूसरों को प्रभावित किए बिना नही छोड़ेगी, आदमी ने शेर बन कुत्ते भेडिए मारे तो शाकाहारी जानवरों की तादाद बड़ी नतीजा ये हुआ की उन जानवरों ने कृषि क्षेत्रों की तरफ रुख़ किया, इन्सानिन ने इन शाकाहारी जानवरों को भी मारकर खाना शुरू किया, लेकिन इनके पीछे पीछे, जब शेर बाघ इंसानी रिहाइशों की तरफ आये तब आदमी जानवर के मध्य संघर्ष शुरू हुआ, अब आप बताइये, आपने जंगल कटवाए, तालाब पटवाये, चरागाहों, खलिहानों, ग्राम समाज व् नदियों के किनारों की जमीनों के पट्टे करवाये, जो कभी चारागाह और रिहाइश होती थी जंगली और डांगर मवेशियों की, उनके घर ख़त्म हुए तो वो आपके घरों की तरफ चले तो फिर काहे चिल्ला रहे है, दोषी तो आप है, कभी देशी विदेशी रसूखदारों को सरकारी अमलों के साथ सुविधाजनक शिकार पार्टियों की व्यवस्था की, फिर जंगलों से निकलकर आने वाले जानवरों को मारने पर इनाम रखा, लेकिन फिर भी हालात जस के तस, क्योंकि आपकी (आदम जात) गन्दगी इतनी ज्यादा वीभत्स हो गई है की सन्तुलन असंभव सा प्रतीत होता है।
यहाँ दुधवा के जंगलों की कहानी बताऊँ आपको, कभी यहाँ वन कुत्ते, और जंगली भैंसे भी हुआ करते थे अंधाधुन्द शिकार के चलते ये दो प्रजातियां यहाँ से विलुप्त हो गयी, गैंडे भी विलुप्त हुए किन्तु उन्हें दुबारा स्थापित किया गया आसाम से लाकर, अब चूँकि गैंडा पर्यटन की दृष्टी से महत्वपूर्ण था सो उसे दुबारा बसाया गया, और जंगली कुत्तों और जंगली भैंसों को दरकिनार किया गया बिना इस अध्धयन के की पारिस्थितिकी तन्त्र में उनकी नामौजूदगी का कितना बुरा असर होगा, पहले मारिए फिर कही लाभ दिखे तो फिर से बसाइए, हमारे अखिलेश यादव जी भी तो शेर बसा रहे हैं सैफई में कितना सफल है जाहिर है सभी को! कुलमिलाकर प्रकृति की चीजें प्रकृति में रहने दे और उनके बसेरें उन्हें लौट सकें तो लौट दे, समस्याएं खुद ब खुद दूर हो जाएंगी। और फिर भी सब लूट लेने की इच्छा है तो अल्लाह मालिक।
वैसे ये जल जंगल और जमीन किसी व्यक्ति, कम्पनी या सरकारों के बाप की जागीर नही, इसे इसके हाल पर छोड़ दे मौज़ूदा मानवता की ख़ैरियत इसी में है, अपनी कथित सभ्यताओं के विकास और प्रसार में प्रकृति की प्राकृतिक सभ्यताओं को न उजाड़े।
कृष्ण कुमार मिश्र
www.DudhwaLive.com
#MoEF #Bluebull #Narendramodi #animalcruelty #Wildlife
Photo
Add a comment...

Post has attachment
तालाब सरंक्षण की मुहिम के तहत सिकन्द्राबाद में की गयी तालाबों की खुदाई।
जल सरंक्षण पर दुधवा लाइव द्वारा आयोजित की गयी गोष्ठी
जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा मदरसों को तालाब गोद लेने की सिफारिश

सिकन्दराबाद-खीरी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग एवं दुधवा लाइव डॉट कॉम के सहयोग से तालाब बचाओ जन अभियान के तहत कुम्भी विकास क्षेत्र के ग्राम सिकन्दराबाद में एक विशाल जन सभा का आयोजन हुआ, जिसमे ग्रामीणों के अलावा मदरसा हुसैनिया ग़रीब नवाज़ के छात्र छात्राओं ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विधान परिषद सदस्य शशांक यादव ने की, विशिष्ठ अतिथि के तौर पर विधान सभा गोला के विधायक विनय तिवारी, व् विधान सभा कस्ता के विधायक सुनील कुमार लाला मौजूद रहे और ग्रामीणों का जल सरंक्षण के लिए उत्साहवर्धन किया, कार्यक्रम में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी डॉ प्रियंका अवस्थी ने बच्चों से शपथ ली की पानी का बेजा इस्तेमाल न करे।
मोहम्मदी नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन मोबीन खान ने कहा की पानी बुनियादी जरूरत है और खीरी जनपद में हमें लोगों को जल सरंक्षण के लिए तैयार करना होगा, ताकि हम दुनिया के लिए मिशाल बन सकें।

विधायक विनय तिवारी ने तराई में भी जल संकट की आहट का ज़िक्र किया और ग्राम सभाओं में तालाबों के उद्धार के लिए पूर्ण सहयोग देने की बात कही।
विधायक कस्ता सुनील कुमार लाला ने अपनी विधान सभा में तालाबों की दशा सुधारने का निश्चय लिया साथ मितौली ग्रामसभा में उनके प्रधान पद के कार्यकाल में बनवाये गए विशाल तालाब का ज़िक्र करते हुए कहा की उस वक्त में वह एक आदर्श तालाब था जिसकी तारीफ़ जिले के सभी आला अफसरों ने की, साथ ही उन्होंने तालाब सरंक्षण की मुहिम को आगे बढ़ाने में पूर्ण सहयोग देने की बात कही।

पूर्व ब्लॉक प्रमुख कुम्भी राजेन्द्र भदौरिया ने अपने सम्बोधन में तालाबों के सरंक्षण के लिए जनता आह्वाहन किया, ताकि धरती हरी भरी रह सके।
कार्यक्रम के सह आयोजक और वन्य जीव विशेषज्ञ केके मिश्र ने तराई के गिरते भूगर्भ जल पर चिंता व्यक्त की, साथ ही उन्होंने तालाबों के प्राकृतिक स्वरूप को बनाये रखने की सलाह देते हुए कहा की ये तालाब सिर्फ जल को सरंक्षित ही नही करते वरन ग्रामीण जीवन के तमाम समुदायों को रोजगार व् भोजन भी उपलब्ध कराते हैं, तालाब लबालब भरे होंगे तो परिंदों और जानवरों को पानी मिलता रहेगा, पर्यावरण में तालाब एक महत्त्व पूर्ण स्थान रखते हैं।

कार्यक्रम के आयोजन मण्डल के सदस्य एडवोकेट व् प्रधानपति कपिल त्रिवेदी ने तालाब सरंक्षण की मुहिम में अपना योगदान सुनश्चित किया तथा दो तालाबों की खुदाई व् उनके सौंदर्यीकरण का निश्चय किया।
अध्यक्षीय सम्बोधन में एम् एल सी शशांक यादव ने ग्रामीणों को हिदायत दी की खेती में वे फासले ज्यादा उगाये जिनमे पानी कम खर्च होता है, साथ ही इज़राइल की तकनीक ड्रिप एरिगेशन के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया
कार्यक्रम का संचालन इक़बाल अकरम वारसी ने किया, और ये शेर पढ़ा।
हरियाली अगर आपको जीवन में चाहिए, धरती ये कह रही है की पानी चाहिए।
गोष्ठी के उपरान्त दो तालाबों की खुदाई और उसके सौन्दर्यीकण का स्थलीय निरीक्षण किया गया जिसमें सभी ने श्रमदान दिया।
जल सरंक्षण के इस कार्यक्रम में सलमान रजा, प्रधान अमीर नगर इरफ़ान खान, शारिक खान, सुधाकर मिश्रा विमल मिश्रा, आयुष श्रीवास्तव, अवनीश अवस्थी, संजय गिरि और सैकड़ों ग्रामीणों ने हिस्सा लिया।
Photo
Add a comment...

Post has attachment
तालाब और कुएं हमारी गौरवशाली संस्कृति का हिस्सा हैं-
नदियों की दुर्दशा, नष्ट होते भूगर्भ जल स्तर, नदारद होते कुँए और तालाबों के चलते तराई के भू भाग भी प्रभावित हुए हैं, जो कभी जलमग्न रहते थे, बुंदेलखंड और लातूर का सुख सिर्फ चेतावनी है, और इस सूखी धरती का कारण सिर्फ़ इंसानी गतिविधियाँ हैं, नतीज़तन परिन्दें और जानवर प्यास से तड़प कर मर रहे है इंसान को भी प्रदूषित पानी मिल रहा है साथ जल स्तर के लगातार नीचे गिरने से भयावह स्थित उतपन्न हो रही है, जल्दी नही चेते तो यह हरी भरी वसुंधरा वीरान होगी, और इंसानियत त्राहि त्राहि के अतिरिक्त कुछ नही कर पाएगी, धरती से जितना हम ले रहे हैं जल अन्न धन क्या उतना वापस कर रहे हैं? नही, बिलकुल नही, और यही वजह है की प्रकृति की दी हुई इस नियामत को हम बेजा इस्तेमाल के चलते बर्बाद कर रहे हैं।
चलिए तालाबों और कुओं को पुनर्जीवित करें, ताकि जलस्तर बढे और परिंदों और जानकारों की प्यास बुझ सके, यह शबाब इंसानी दुनिया को बचा सकता है।
जल सरंक्षण व् पर्यावरण सरंक्षण का एक प्रयास हम सब खीरी जनपद में कर रहे हैं उसी श्रंखला में आज जनपद के कुम्भी ब्लॉक में सिकंदराबाद में तालाब की सफाई व् जीर्णोद्धार की शुरुवात होगी, जिसमें कस्ता विधान सभा के विधायक सुनील कुमार लाला, गोला विधान सभा के विधायक विनय तिवारी, एवं जनपद के वरिष्ठ समाजवादी नेता व् विधान परिषद सदस्य शशांक यादव जनता के बीच मौजूद रहेंगे ताकि जल सरंक्षण की मुहीम में जनमानस में उत्साहवर्धन हो और एक गोष्ठी में विमर्श द्वारा प्रकृति की दी हुई नियामतों के मूल्यों का उचित निर्धारण हो इस पर चर्चा की जायेगी, मानवीय संवेदनाओं की भी उत्कृष्टता व् अपने नैतिक दायित्वों का भी पुनर्मूल्यांकन हम सब मिलकर करेंगे ताकि हमारी वसुंधरा शस्य स्यामल बनी रहे।

कार्यक्रम का आयोजन आज दिनांक 31 मई 2016 की प्रात: 10 बजे मदरसा हुसैनिया गरीब नवाज़ सिकन्द्राबाद में होगा उसके बाद बड़े चौराहे पर स्थित तालाब की सफ़ाई की जायेगी।
आयोजन जिला अल्पसंख्यक आयोग द्वारा व् शैक्षणिक सहयोग दुधवालाइव डॉट कॉम का होगा।
आप सभी बन्धुओं से अनुरोध है की कार्यक्रम स्थल पर पहुँच कर अपना सहयोग अवश्य दें।
www.DudhwaLive.com
#Lake #Pond #Water #Lakhimpur #Krishnakumarmishra #Environment
Photo
Add a comment...

Post has attachment
दुधवा लाइव पत्रिका का अप्रैल २०१६ का प्रकाशित अंक पीडीएफ के रूप में यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं.

Dear Friends,
I am pleased to share Dudhwa Live International Magazine Vol.6 Issue4, April 2016, please check the link below to download the 24 pages Print edition (PDF)

Dudhwa Live Magazine has been assigned ISSN number as a continuing resource (ISSN Number - 2395 - 5791) from Jan 2010. This will help in electronic archiving and act as a bibliographical tool so that students, researchers, librarians can use it to give the precise references of a serial publication.
To contribute articles to Dudhwa Live Magazine, mail to editor.dudhwalive@gmail.com
I look forward to your inputs and support in preserving our natural treasure. For other interesting articles and images check –
http://www.dudhwalive.com

http://radiodudhwalive.com

https://www.facebook.com/dudhwalive/

https://twitter.com/dudhwalive

https://in.linkedin.com/in/dudhwa-live-journal-a762834b

Please feel free to email, circulate in your network to raise awareness.
Regards,
Krishna Kumar Mishra
Add a comment...

Post has attachment
एक किताबघर जहाँ शब्दों के समन्दर से हमने भावनाओं के मोती चुने थे...
यह है मेरी अध्ययन स्थली, विलोबी मेमोरियल हॉल, 1934 के आस पास स्थानीय मुअज्जिज लोगों ने यह भवन डिप्टी कलेक्टर विलियम डगलस विलोबी की हत्या के तकरीबन एक दशक बाद उसकी स्मृति में बनवाया, मौजूदा समय में इसका नाम बदल दिया गया है, जबकि किसी भी मेमोरियल ट्रस्ट व् उसके द्वारा निर्मित भवन आदि के नाम को बदलना कानूनी तौर पर कहाँ तक उचित है यह विमर्श का मुद्दा है!?☺
खैर यहाँ स्थापित लाइब्रेरी जो लगभग एक शताब्दी पुरे करने को है, इसमें मौजूद पुस्तके 1850 से लेकर 1940 ईस्वी तक के समय काल में मौजूद हैं साथ ही आजादी के बाद नवीन समय के प्रकाशन भी उपलब्ध है, जब मैं कक्षा 9 में धर्म सभा इंटर कालेज का विद्यार्थी था तब मैं इस जगह से परिचित हुआ, मैनहन गाँव से आने के पश्चात् इस पुरानी ब्रिटिश इण्डिया की इमारत के आकर्षण ने मुझे इस जगह से परिचित कराया, इमारत में मौजूद लाइब्रेरी के संचालक एडवोकेट श्री विनय मिश्र जी मेरे ननिहाल पक्ष के परिचित निकले, इनके नाना इस लाइब्रेरी के संस्थापक लाइब्रेरियन थे, और उस परम्परा को विनय दादा अभी भी निर्वहन कर रहे हैं बड़ी शिद्दत के साथ, यह ट्रस्ट लखीमपुर की प्रतिष्ठित हस्ती से जुड़ा है, उस जमाने मशहूर बैरिस्टर श्री लक्ष्मी नारायण आगा इस ट्रस्ट व् इमारत के संस्थापकों में रहे और मौजूदा वक्त में उनके पौत्र हमारे बड़े भाई जन्तु विज्ञान प्रवक्ता श्री अजय आगा इस ट्रस्ट के सेक्रेटरी है। तमाम सांस्कृतिक गतिविधियों व् धरना प्रदर्शनों का यह मुख्य स्थल है।

कक्षा 9 में साइकिल से अपने घर से यहाँ तक मैं हर रोज शाम को आता, जाड़ों में 5 से 7 और गर्मियों में 5 से 8:30 तक खुलने का समय था, पर बड़े बुजुर्गों की मौजूदगी में मुबाहिसों के दौर रात के 10 कब बजा देते पता ही नही चलता, यहीं मैं उस किशोरावस्था में परिचित हुआ मोहनदास से, नेहरू से, चर्चिल, व्लादीमिर लेनिन, जोसेफ स्टालिन, बेनिटो मुसोलिनी, जयशंकर प्रसाद, प्रेमचंद, शरत और बंकिम बाबू से भी बावस्ता हुआ, न जाने कितने नवोदित रचनाकारों को पढ़ने का मौका मिला, और हाँ माडर्न!😊 महिलाओं की लोकप्रिय लेखिका अमृता प्रीतम से भी मुखातिब हुआ यहीं, तमाम अनुभवी ब्रिटिश इण्डिया के दौर के बुजुर्गों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और राजनीतिज्ञों के दर्शन भी हुए इस स्थल पर, कुलमिलाकर तमाम बेहतरीन सरंक्षक व् मार्गदर्शक मिले मुझे इस ऐतिहासिक इमारत से, शब्दों का ताना बाना बुनना भी यहीं से सीखा हमने, और बहुत बाद में कई अखबारों और पत्रिकाओं में इस जगह की खासियतों को लिखकर मैंने आभार प्रगट करने की भी मामूली कोशिशे की, इस पवित्र किताब घर से जहाँ शब्दों के समन्दर में भावनाओं के मोती लगते है उन्हें चुनने में जो सर्वाधिक श्रेय जाता है वह है मेरी माँ और उनके द्वारा दिए हुए वो लाइब्रेरी सदस्यता शुल्क के लिए 100 रूपये जो उस जमाने में किसी बच्चे की जेब में एक बड़ी रकम मानी जाती थी। इति। कृष्ण
#Lakhimpur #Kheri #Krishnakumarmishra #Willoughbymemorial #Library #Lenin #Premchand #Churchill #Gandhi
Photo
Add a comment...

Post has attachment

Post has attachment

Post has attachment
Wait while more posts are being loaded