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Sahitya Darshan
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अरे यार! ये औरतें भी न,
बड़ी बेवकूफ होती हैं।
दो मिनट की आरामदायक और
बच्चों के पसंद की ज़ायकेदार मैगी को छोड़,
किचन में गर्मी में तप कर
हरी सब्ज़ियाँ बनाती फिरती हैं।
बच्चे मुँह बिचकाकर
नाराज़गी दिखलाते हैं सो अलग,
फिर भी बाज नहीं आती।
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अरे यार! ये औरतें भी न,
बड़ी बेवकूफ होती हैं।
दो मिनट की आरामदायक और
बच्चों के पसंद की ज़ायकेदार मैगी को छोड़,
किचन में गर्मी में तप कर
हरी सब्ज़ियाँ बनाती फिरती हैं।
बच्चे मुँह बिचकाकर
नाराज़गी दिखलाते हैं सो अलग,
फिर भी बाज नहीं आती।
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सच्चा छिपा झूठ के पीछे ,
चमक रहा है रंग काला !
सच गलत है ,झूठ सत्य है
शासन है जपता माला !!
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जिनके चरणों में चारो धाम है
हे जननी ! तुझे शत् शत् प्रणाम है।

माँ होती है धरती पे देवी स्वरुप
इनकी आँचल की छाया में पलते सभी
जिनकी ममता का ना कोई दाम है।
हे जननी ! तुझे शत् शत् प्रणाम है।

जिनकी ममता को पाने के खातिर यहाँ
देवता भी आये थे स्वर्ग से यहाँ
ऐसी नारी में सति अनुसुइया महान है
हे जननी ! तुझे शत् शत् प्रणाम है।
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जिंदगी........एक अधूरा सफ़र
बरसात का मौसम था, और फिर अभी - अभी अजय से बात की है, तो उसने भी बताया है, कि “कविता हरिद्वार में पिछले दो-तीन दिन से भारी बारिस हो रही है”, समाचार चैनल लगातार चेतावनी दे रहे हैं, कि अभी 1-2 दिन और बारिस हो सकती है। हरिद्वार भी जाना जरूरी था, क्योंकि कविता को अपने मम्मी और पापा दोनों की अस्थि विसर्जन करना था l

आँखों में आंसू थे, लेकिन कविता किसे कहे, एक अजय के सिवाय, है ही कौन कविता का। और अजय उसे भी मम्मी से अभी मिलवाया था, केवल 10 दिन पहले मिलवाया था l मम्मी ने पूछा था, नहीं तो मेरे अन्दर कहां इतनी हिम्मत थी, कि मैं अपने दोस्त अजय को मम्मी से मिलवा दूँ l लेकिन मम्मी
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जिंदगी........एक अधूरा सफ़र
अध्याय-1
बरसात का मौसम था, और फिर अभी - अभी अजय से बात की है, तो उसने भी बताया है, कि “कविता हरिद्वार में पिछले दो-तीन दिन से भारी बारिस हो रही है”, समाचार चैनल लगातार चेतावनी दे रहे हैं, कि अभी 1-2 दिन और बारिस हो सकती है। हरिद्वार भी जाना जरूरी था, क्योंकि कविता को अपने मम्मी और पापा दोनों की अस्थि विसर्जन करना था l

आँखों में आंसू थे, लेकिन कविता किसे कहे, एक अजय के सिवाय, है ही कौन कविता का। और अजय उसे भी मम्मी से अभी मिलवाया था, केवल 10 दिन पहले मिलवाया था l मम्मी ने पूछा था, नहीं तो मेरे अन्दर कहां इतनी हिम्मत थी, कि मैं अपने दोस्त अजय को मम्मी से मिलवा दूँ l लेकिन मम्मी बिस्तर पर अपनी अन्तिम साँसें गिन रही थी l मैं करती भी क्या, मम्मी ने अजय से क्या बात की ये मुझे अभी तक नहीं पता, लेकिन उन्होंने मुझे हमेशा के लिए अजय की बना दिया था, हालांकि मेरी अजय से दोस्ती को दो महीने हो गये थे l लेकिन जो मम्मी ने किया उसे मैं मना नहीं कर पायी, करती भी कैसे, इस दुनिया में अजय के आने से पहले, मेरा मेरी मम्मी के अलावा था ही कौन, और फिर मम्मी ने मुझे, मम्मी और पापा दोनों का प्यार ...


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