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Pramod Singh
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काम करनेवाली लड़की का ब्‍लडी ब्‍लंडरिंग जीवन: दो
काम करनेवाली लड़की के माथे बचपन में साइकिल पर बैठने के मोह में हुए झगड़े से लगी चोट का एक निशान है, इससे अलग सिर पर ज़रा से बाल हैं. इतने नहीं कि वह उनका जुड़ा बांध सके. अलबत्‍ता बेमतलब इधर-उधर गिरती पतली चोटी को वो 'जुड़ी' में बांधकर, चुन्‍नी से कमर कस कर ...

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काम करनेवाली लड़की का ब्‍लडी ब्‍लंडरिंग जीवन
काम करनेवाली लड़की के दो बच्चे हैं और हंसता-खेलता एक असंभव-सा जीवन है. काम करनेवाली लड़की अब लड़की नहीं रही, लेकिन देखनेवाले बीच-बीच में दिखा लजवा ही देते, कि अरे, तेरा चेहरा तेरह साल की लड़की से बहुत जुदा नहीं लगता, सुनकर काम करनेवाली लड़की हंस लेती और काम ...

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हंसो हंसो जल्‍दी हंसो
कभी-कभी चेहरे पर हंसी आ जाती है. बीच दोपहर, कचौड़ि‍यों से अघाये पेट और बरसात नहाये वृक्षों की हरियाली छांह में आती है, और ज़ाहिर है मित्र समझता है, दु:ख के अनंत में सुख का एक अटका क्षण है, हंसी आई है, और अनायास आई है. जबकि मैं जानता हूं खराब अभिनय की पारंगत...

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स्‍मार्ट सिटी का स
(गुड़गांव है. दो दिन पहले की फोटो है, गुड़ इसमें कहीं नहीं दिख रहा) मैं खोजी पत्रकार नहीं
हूं, होता तो पुरानी इच्‍छा थी, पता करता महानगरों में मलबा किन सूरतों कलेक्‍ट
होकर चैनलाइज होता अंत में जाता कहां है. या सीवर की साफ़-सफ़ाई, प्रबंधन और
निकासी की व्‍यवस...

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सम्‍मान और गौरव से सात हाथ की दूरी पर..
देश का फ्रिज खराब
है. मंचों पर खुद की पीठ ठोंककर बजवाई तालियां हैं, और हरियाली और उसके विज्ञापनों की
होड़ है, मगर सांसों में बहनेवाली जो वास्‍तविक हवा है, उसका लय बिगड़ा और गति
उखड़ी हुई है. सब्जियों की खरीदारी के लिए घर से निकलिए, लगता है किसी लड़ाई की
तैय...

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फिल्‍मी बातें..
कभी इटली में कुछ समय गुज़रा था, तो रह-रहकर वहां की फिल्‍मों में झांक आने का मोह स्‍वाभाविक है. कभी-कभी कुछ अच्‍छा हाथ चढ़ता भी है, लेकिन मोस्‍टली, ऐसे सिरजनहारे दिखते हैं कि दिल फांक-फांक हो जाता है. अभी एक , दो और तीन दिखे ये.. दिक्‍कत क्‍या है? पाओलो विर्...

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कोई होगा मेरा अपना..
आपकी किस्‍मत होगी मगर हमारे में पता नहीं कितने और कैसे-कैसे हेर-फेर चलते रहते हैं. कहीं भी एक छोटा नलका खुल जाये, बाजू घनघोर बरसने लगता है. आदमी कितना इकॉनमिस्‍ट और जीवन के अनार्किस्‍ट पन्‍नों में बहता उनकी थाह पाता रहे. किसी बिंदु पर पहुंचकर आंखें खुद भी ख...

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टिम की टाइमली पगड‍ंडियां..
टिम पार्क्‍स का कवनो अनुवाद पढ़ा है आपने? ताबुक्‍की, मााकियावेल्‍ली, मोराविया, कल्विनो, कलास्‍सो, इटैलियन में खूब हाथ साफा है जवान ने, और बीच-बीच में अपनो, अंग्रेजी वाली, लिखाइयो, इंडिपेंंडेटली, फरियाते रहे हैं, अंदाजे से बोल रहा हूं, दस किताबें तो होंगी ही...

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लीक के दूसरे छोर पर..
अपनी किताब के पहले चैप्‍टर की शुरुआत वह इकॉनमिस्‍ट के एक क्‍वोट से करती है, "Governments have always been lousy at picking winners, and they are likely to become more so, as legions of entrepreneurs and tinkerers swap designs online, turn them into products...

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रात का टूटा सुबह सिला नहीं जा सकता? या रात की चोरी, सुबह अन-डू नहीं हो सकती?
एक ज़रा रात भर का समय होगा, मैं नहाती औरतों के ख़यालों में फैलने की सोच रहा था, खिड़की के उस ओर अंधेरों के धुंधलके में बारिश की लहरें बन रही थीं, पहली मुसलाधार के संगीत जैसा कुछ समां सा बन रहा था, रह-रहकर बिजलियां भी कड़क रही थीं, रह-रहकर मैं डर भी रहा था, ...
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