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Satyaprakash Pandey
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Oriental White-eye ये अंग्रेजी नाम है। हिंदी में इसे बबूना, संस्कृत में चटकिका, नेपाली में कांकीर और मराठी भाषा में इस खूबसूरत पक्षी को चाळीशीवाला कहते हैं। जितना छोटा उतना ही खूबसूरत और चंचल। तस्वीर मध्यप्रदेश के अमरकंटक में खींची गई है, इस रंग और फ्रेम पर बबूना का मिलना यकीनन मेरे लिए किसी बड़ी ख़ुशी से कम नहीं है। आप भी देखिये और बताइये हैं ना खूबसूरत ...
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खेलने की उम्र में खतरों से खेलना फिर जीविकोपार्जन का सामान जुटाना दुःसाहस से कम नहीं। एक ट्यूब में भरी हुई हवा के भरोसे सैकड़ो मीटर जलाशय में जाल बिछाना फिर उसे समेटकर मछलियों को निकालना आसान काम नहीं मगर ये रमेश केंवट की दिनचर्या का हिस्सा है।
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सुना है जंगल के कुछ अफ़सर मुझसे नाराज़ हो गए है, होना भी चाहिए । उनकी ख़ुशी के लिए मैं वन्य जीवों पर होते जुल्म, कटते जंगल और वहाँ की कारगुजारियों पर आखिर खामोश कैसे रह सकता हूँ । मेरी पहचान मेरा कर्म है ना कि अफसरों की चरणवंदना । आखिर मैं उस सच पर कैसे पर्दा डालता जिसमे सिर्फ लापरवाही के चलते एक मूक पशु की जान चली गई हो । मुझे ख़बर मिली की पिछले दिनों पद्मावती की मौत पर मैंने जो कुछ लिखा वो चन्द अफसरों को नागवार गुजरा, तो साहब इतना जान लीजिये...
" कुछ लोग यूँ ही शहर में हमसे भी ख़फा हैं
हर एक से अपनी भी तबीयत नहीं मिलती"
सच है । मेरी तबीयत और मिज़ाज उन लोगों से मेल नही खाती जिन्हें चरण वन्दना में आत्मस्वाभिमान नज़र आता है । सरगुजा वन मण्डल के प्रतापपुर वन परिक्षेत्र का नवाधक्की गाँव जहां 12 नवम्बर को एक हथनी 18 फुट गहरे गढ्ढे में गिर गई, गढ्ढे में तड़पती हथनी गिरते वक्त बेनाम थी लेकिन जब बाहर निकाली गई तो उसका एक नाम भी था । रेस्क्यू के लिए पहुंचे अफ़सर ने मौके पर तड़पती उस हथनी का पहले नामकरण किया 'पद्मावती' । अच्छा हुआ इस दौर में 'बेंडिट क्वीन' सुर्ख़ियों में नही थी वरना पद्मावती शायद 'बेंडिट क्वीन' होती । आपरेशन पद्मावती का ये वीडियो जंगल विभाग की कर्मठता और आपरेशन पद्मावती को लेकर उनकी गम्भीरता का सच चीख चीख कर कह रहा है ।
आपरेशन पद्मावती का ये वीडियो जंगल विभाग के उन अफसरों को नंगा करता है जिन्होंने ना सिर्फ घायल हथनी पर जुल्म करवाया बल्कि मौके पर तमाशाइयों का मज़मा लगाकर रेस्क्यू आपरेशन को केवल मजाक बना दिया । इस वीडियो में आप साफ़ देख सकते है कि कैसे रेस्क्यू वाली जगह पर लोगों का हुजूम लगा है । ये भीड़ रेस्क्यू की जगह तक कैसे पहुंची ? इस भीड़ पर आखिर नियंत्रण क्यों नही किया गया जबकि मौके पर पुलिस की मौजूदगी के दावे किये गए ? विभाग ने रेस्क्यू आपरेशन के पहले किन किन सावधानियों का ख्याल रखा ? इस आपरेशन में गोपनीयता दूर की कौड़ी थी, सुरक्षा के भी कोई इंतज़ाम नही थे । अगर यहां किसी दिशा से हाथियों का झुण्ड बिछड़े साथी की तलाश में लौट आता और कोई घटना होती तो जिम्मेदार कौन होता ? इस तरह के कई सवाल है जो मनमर्जी के मालिक बने अफसरों के चेहरे बेनकाब करते हैं । आप देखिये इस वीडियो में अफसर से लेकर कुछ चाटुकार और तमाशाई दर्द से छटपटाती हथनी का मोबाइल पर फ़ोटो लेते साफ़ दिखाई दे रहे है । इस आपरेशन में यहां सिर्फ फ़ोटो सेशन और वीडियोग्राफी होती दिखाई पड़ रही है । घायल हथनी विभागीय प्रयास से छटपटा रही है और संवेदनहीन लोग उसे रिकार्ड कर रहे हैं । मौके पर सैकड़ों तमाशाइयों का शोर उस दर्द की चिंघाड़ को दबाता रहा जो पिछले 40 घण्टे से बना हुआ था । वीडियो के मुताबिक मौके पर हर कोई जानकार और सलाहकार दिखाई दे रहा है । ये आपरेशन किसी तमाशे से कम नही दिखाई पड़ता जिसमे मृत संवेदनाओं से घिरी भीड़ के बीच एक हथनी इलाज की जरूरत का शोर मचा रही थी । ख़बर तो ये भी है कि मौके पर ही एक अफ़सर ने घायल हथनी के इलाज और उसके इंतजाम के लिए 3 लाख रूपये का बजट भी तैयार करवा लिया था ।
तमाम तमाशे के बीच छटपटाती पद्मावती ट्रक में लादकर रेस्क्यू सेंटर भिजवा दी गई । शायद मौत को विभागीय संवेदना पर घिन्न आई और पद्मावती के दर्द पर रहम आ गया । 16 नवम्बर की दोपहर वो दबे पाँव आई और संवेदनहीन लोगों के बीच से बचाकर मौत पद्मावती को अपने साथ ले गई । 18 फुट गढ्ढे में गिरी पद्मावती वहीं 14 फुट गढ्ढे में दफन कर दी गई है मगर पीछे कई सवाल छूटे हैं जिनका जवाब हम मांगेंगे । पद्मावती की मौत से पहले के तमाशे को पहले सरकार को दिखाया जायेगा फिर न्यायालय की मदद ली जायेगी । मगर इस तमाशे से पल्ला झाड़ने वालों को पद्मावती की रूह कभी माफ़ नही करेगी, हर उस शख्स को कहीं ना कहीं जवाब देना होगा जिन्होंने मौत से संघर्ष करती एक हथनी को लेकर सिर्फ और सिर्फ तमाशा मचाया ।
पद्मावती मेरी पहचान तुम जैसे ना जाने कितने मूक पशु-पक्षियों से है फिर कोई अफ़सर नाराज हो या संवेदनहीन शख्स, मुझे कोई फर्क नही पड़ता ।
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छत्तीसगढ़ सरकार का दिव्यांगों के प्रति कथनी-करनी में अंतर् दिखाई पड़ता है।
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मुख्यमंत्री द्वारा हाथियों के बढ़ते आतंक पर चिंता जाहिर करते हुए अधिकारीयों पर नाराजगी व्यक्त की
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बिलासपुर जिले में ओडीएफ का सच बताती कुछ तस्वीरें
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यदुवंशियों ने अपने शौर्य का खुलकर प्रदर्शन किया
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एक तस्वीर जिस पर दैनिक छत्तीसगढ़ ने कटाक्ष किया
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