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Raj Kanpuri
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An idiot who thinks wisely........
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झूठ का अब बोलबाला हो गया है और सच का मुँह काला हो गया है चापलूस सर पे जाकर बैठ गए हैं सच्चे का देश निकाला हो गया है ये सियासी भूख क्या क्या खाएगी इंसा तक इसका निवाला हो गया है ये साज़िशों की कैसी रौशनी लाए हैं देखिए ज़रा ग़ायब उजाला हो गया है इक गधे के हाथ ...
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एक हमीं हैं जो बगावत कर रहे हैं
बिना उस्तरे के हज़ामत कर रहे हैं  वो शहादत पर सियासत कर रहे हैं  सच बोल कर कोई जेल जा रहा है  झूठ वाले देखो वकालत कर रहे हैं  जिन्हे गरीबों ने साहब बना दिया   वो अमीरों की हिफाज़त कर रहे हैं  सब गधे वतनपरस्त हुए जा रहे हैं   एक हमीं हैं जो बगावत कर रहे हैं 
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जख़्मों के तार यूँ ही छिड़ गये आज फ़िर से
किसी ने उसके नाम का अफ़साना सुना दिया
KK
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कैसी चले रहे हो तुम चाल साहब
कैसी चले रहे हो तुम चाल साहब  कर रहे हो इंसां को हलाल साहब  चूस कर के खून इन गरीबों का  हो रहे हो और मालामाल साहब  ये सियासत कलम से अच्छी नहीं  शायरी कर ना दे कोई बवाल साहब  तुम फरेबी हो दगाबाज हो झूठे हो  दिल में रखने का है मलाल साहब  "राज" शायर है, फ़कीर ह...
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फिर से मौसम को कुछ और अच्छा बनाया जाय
फिर से मौसम को कुछ और अच्छा बनाया जाय  आओ मोहब्बत का नया सिलसिला बनाया जाय  जिससे मिलने को हर घड़ी ही बेताब रहे ये दिल किसी आवारा बादल से चलो रिश्ता बनाया जाय   ना तुझको हासिल है कुछ, ना मुझको हासिल है  तो नफरतों को क्यों अपना हिस्सा बनाया जाय  क्यों हो बेका...
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गरीबी उदास बैठी है, पैसा है तो दीवाली है 
उसका तो फाका है, जिसकी जेब खाली है.
KK
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भारत में  फलता-फूलता खूब साधू संतो का व्यापार भारत में  क्यों कि फैला है अन्धविश्वास अपरम्पार भारत में  कहीं मिलता कोई आसा तो कोई देता है बस झांसा ऐसे करते हैं सभी अपना अपना कारोबार भारत में   यूँ कहने को तो करोड़ों पैदा हो चुके हैं इस जमीन पे   आड़े वक़्त मगर...
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चलकर हज़ार चालें ये सियासत चलती है  गरीबों का खून चूस कर हुकूमत चलती है  साथ ना कोई दौलत, ना शोहरत चलती है  चलती है साथ तो बस मोहब्बत चलती है  सुबह लड़ते हैं, शाम को साथ ही खेलते हैं  बच्चों में जरा देर को ही अदावत चलती है  वो तो किसी की आँख की हैवानियत ही है...
" मेरे जज्बात "
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merejajbaat.blogspot.com
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बन गयी फिर इक कहानी खूबसूरत  आँखों ने बहाया जब पानी खूबसूरत गर पत्थर भी मारिये तो वो हँस देगा  बहते हुए दरिया की रवानी खूबसूरत इक शेर में जिक्र जो माँ का कर दिया  हुयी फिर ग़ज़ल की बयानी खूबसूरत गठीले जिस्म की नुमाइश भला क्या  मुल्क पे निसार जो जवानी खूबसूरत ...
" मेरे जज्बात "
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