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Ashutosh Dubey
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Ashutosh Dubey

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मैं रुका नहीं था कभी बस चलना चाहता था, मैं गिरा नहीं था कभी बस सम्भलना चाहता था, मेरी हार देख तुमने मिज़ाज बदल लिए, यूं तो सबकी नजरों में हमारी बहुत कद्र थी, बस बदलते हालात में तुम्हारे आँखों की फरेब़ित को टटोलना चाहता था ।।
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Ashutosh Dubey

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रात 9 बजे प्रमोद घर आया. जब राजेश से मुलाकात हुई तो पता लगा कि वह तो खाना खाकर आ गया है ताकि आराम कर सके. राजेश ने फोन पर पापाजी से बात कराया और कुसुम से बात करते समय खाना खाने के लिए बाहर चला गया.
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Ashutosh Dubey

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चुटकी भर सिंदूर पड़ते ही बदल जाती है पूरी दुनिया पांव तले से खींच दी जाती है जमीन जिसे आधार मानकर आज तक खड़े थे हम, परंपरा की बलिवेदी पर शहीद होने के लिए अपने ही जड़ों से उखाड़कर फेंक दिये जाते हैं हम
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Ashutosh Dubey

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क्या मिलेगा तुझको खुद पर परिताप करके जो हो चुका उसे याद कर, खुद पर उपहास करके माना गलत नहीं थे उलझनें राहें जिंदगी के सफर में मैं भी कम नहीं थी आपकी बर्बादी के कसर में क्या खत्म हो जाऐंगें सवाल खुद का विनाश करके या और बढ़ जाऐंगी उलझनें इनसे तर्कार्थ करके।।
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Ashutosh Dubey

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विश्व पुस्तक मेले में राजकमल प्रकाशन द्वारा वर्षा दास के तीन नाटक -खिड़की खोल दो ,चहकता चौराहा और प्रेम और पत्थर,कुसुम खेमानी की किताब 'जड़िया बाई' गीत चतुर्वेदी की 'न्यूनतम मैं', दिनेश कुशवाह की 'इतिहास में अभागे' ,आर. चेतनक्रांति की 'वीरता पर विचलित' ,प्रेम रंजन अनिमेष की 'बिना मुंडेर की छत' ,राकेश रंजन की 'दिव्य कैदखाने में' ,विवेक निराला की 'धुव्र तारा जल में',सविता भार्गव की 'अपने आकाश में' ,समर्थ वशिष्ठ की 'सपने मे पिया पानी' ,मोनिका सिंह ...
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Ashutosh Dubey

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आदतन सोनू को सच बताना पड़ा. कि मौसी आप गलत विचार मन से निकाल दें. ऐसी वैसी कोई बात नहीं है. स्वाति नहीं चाहती कि हम उसकी शादी से बिछुड़ें. आपको पता है हमारे आपसी वात्सल्य का. इसीलिए वह चाहती थी कि उसका वर मात्र आपका ही नहीं, मेरे पसंद का भी हो और वह मुझसे जानना चाहती थी कि लड़का उसके लिए सही रहेगा या नहीं. मौसी का सोनू पर बहुत विश्वास और लगाव था. सोनू की बातों से उनकी आँखें भर आईं।
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Ashutosh Dubey

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मैं समझ नहीं पाता, क्यूं चुनाव आते ही नेता को हिन्दू मुस्लिम याद आता! नेतागण इंसान तो इंसान है न कोई उसकी पहचान, फिर हिन्दू हो चाहे मुसलमान! ये नेता हमको मूर्ख बनाते हैं, हिन्दू मुस्लिम पर लोगों को बटवातें है!
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Ashutosh Dubey

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'गंदी बात' राधाकृष्ण प्रकाशन के 'फंडा' उपक्रम से प्रकाशित है। । इसमें पहला उपन्यास 'नॉन रेजिडेंट बिहारी' 2016 में छपा था जो अब तक पांच हजार पाठकों के हाथों में है। फंडा आम पाठकों के लिए मनोरंजन प्रधान, स्तरीय कथा साहित्य का प्रकाशन करता आया है।
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