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Subodh Ranawat
I am dashing,friendly,man of taste,romantic and positive frame of mind.A beauty is enjoy for ever.
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Subodh Ranawat's posts

Ismail Bhai loved his wife so much. To demonstrate his love for her, he buys a 🚚 Tempo and paints her name on it innocently.

Wife reads it, slaps him and filed for a divorce.

The painting read as follows:

Fatima Begum
FOR HIRE
FULL DAY Rs. 2000/-
NIGHT CHARGES EXTRA.
😝😂

तिरंगे ने मायूस होकर सियासत को पूछा कि ये क्या हाल हो रहा है ?

मेरा लहराने में कम और कफन में ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है !!


सरफ़रोश फिल्म का एक Dialogue याद आ गया ...!!!

10 नहीं 10 हज़ार 'सलीम' मिलेंगे साहब अगर भरोसा करोगे...!!!
अब फिर किसी 'सलीम' या मुसलमान से ना कहना कि ये मुल्क तुम्हारा नहीं...!!!🤔

एक अकेला 'सलीम' 53 श्रद्धालुओं को बचा लाया...
पूरी ट्रेन के यात्री मिल कर भी एक 'जुनैद' को न बचा सके??🥀👌🏼🍀💯✔

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जागती आन्खे बन्द कर सपने देखने का मै आदी नहीं
चाहो तो कह सकते हो मै तुम सा आशावादी नहीं
जब तक शीशा देखा ही नहीं क्या पता कि सूरत कैसी है
कागज पे उतारो तो जाने मन मे बसी मूरत कैसी है
ऐसा वैसा जैसा भी है सच तुम्हे मानना ही होगा
आज नहीं तो कल इस नगें सच का सामना भी होगा
यथार्थ को तुम निराशा कहो ये बात समझ मे आती नही
बन्द आँख कर लेने पर बिल्ली क्या कबूतर खाती नही
बेहतर है कबूतर उड जाये और उड कर जान बचा डाले
या फिर चोन्चे मार मार बिल्ली को घायल कर डाले
सच देख के आन्खे बन्द ना कर सच सच है ये सच मान ले तूँ
हो सके तो सच को लड़ के जीत क्यों उसको नियति मान ले तूँ
जीवन है अगर संग्राम तो फिर तुम मरोगे या तो मारोगे
और जीवन है संघर्ष तो फिर तुम जीतोगे या हारोगे
इस जंग से बच सकते ही नहीं या झुकना है या झुकाना है
हारे तो समर्पण करना है जीते तो फिर करवाना है
हार को समझौते का नाम देकर इस जीत का रंग ना दो
हार गये तो हार गये इस हार से क्या घबराना है
हार भी सच है जीत भी सच है झूठ सिर्फ समझौता है
आँखे बन्द कर ख्वाब देखना आशावाद कब होता है
आशावाद तो लडना है जब तक जीत नहीं होती.
समझौता घुटने टेकना है बाद इसके जीत कहाँ होती

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मेरी नजरो से खुद को देखो खुद को जानो तुम
तुम सा सुंदर कोई नहीं ये बात मेरी सच मानो तुम
होंठ गुलाबी नयन शराबी रेशमी जुल्फें काले बाल
बिना पीये ही झूम उठे देखे जो तेरी लहराती चाल

सुडोल बदन नयन नख्श तीखे चहरे पे गज़ब का नूर
ऐसा लगता है धरती पे उतर आयी जन्नत की हूर
चाल चले तो ऎसी जैसे मंद मंद चलती है हवा
मुस्काती है ऐसे जैसे फूल कमल का खिलता हुआ

बदन तेरा गदराया जो भी छू ले वो ही तर जाए
इसके बाद क्या उसको फिक्र वो ज़िंदा रहे या मर जाए
एक नजर जो देख ले तुझ को होके रह जाए तेरा
मै भी हुआ दीवाना खुद तो क्या कसूर है तेरा

घर का तेरे पता है लेकिन मन का मुझे पता दे
कौनसा रस्ता सीधे तेरे मन तक जाए बता दे
काश तू कोई दुःख सुख अपना कभी तो मुझ से बांटे
और हटा पौऊ मै तेरी राह से दुःख के कांटे..


क्या भारत के प्रधानमंत्री से सादगी की उम्मीद छोड़ देनी चाहिए?
एक राजनेता अपनी कामयाबी के शिखर दिनों के दौरान किस तरह की संस्कृति गढ़ता है, उसे उस समाज के लिए तो सोचना ही चाहिए जहां से वो आता है। राजकोट से दिल्ली आ गए प्रधानमंत्री को एक बार सोचना चाहिए कि नौ किमी के उनके रोड शो के बहाने यात्रा मार्ग को सजाने में जो ख़र्च किया गया है, क्या वो इस साधारण मुल्क के लिए वाजिब था? क्या प्रधानमंत्री की यात्रा की तैयारी को लेकर पारदर्शिता नहीं होनी चाहिए? क्या जनता को नहीं बताना चाहिए कि कौन कौन सी एजेंसियों ने पैसे खर्च किये, जिन लोगों ने अपने स्तर पर ख़र्च किये उनका हिसाब क्या है ताकि नौ किमी सड़क की सजवाट का वास्तविक ख़र्च हम जान सकें और अनुमान लगाने से बचें कि 20 से 70 करोड़ रूपये ख़र्च हुए हैं। 9 किमी की सड़क की सुरक्षा भी कम चुनौती नहीं होगी। प्रधानमंत्री की सभा है, ज़ाहिर है तैयारियां भी उसी स्तर की होती होंगी। एक रैली की सभा के लिए कितने सुरक्षा कर्मी लगेंगे और 9 किमी के रोड शो के लिए कितने। इसका ख़र्चा न तो कोई जानता है और न जान पायेगा।

क्या सादगी और शुचिता की बात करने वाले प्रधानमंत्री को इतने महंगे और भव्य कार्यक्रमों में हिस्सा लेना चाहिए? वे योग के बहाने जीवन शैली बदलने की बात कर रहे हैं, क्या वे राजकोट के रोड शो के बहाने राजनीतिक शैली बदलने की बात करना चाहेंगे? वे अपनी तमाम आलोचनाओं को लाभ में बदल देने में माहिर रहे हैं, फिर भी क्या भारत के प्रधानमंत्री से यह उम्मीद करना इतना जोखिम भरा और बेकार है कि 70 करोड़ के ख़र्च से 9 किमी सड़क की सजावट क्या उचित थी? अभी अभी तक मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने पर देश भर में जश्न मना है। विज्ञापनों से लेकर भाषणों पर करोड़ों खर्च हुए हैं। टीवी चैनल उनके रोड शो को और भव्य बना देंगे, लेकिन क्या अब हम यह मान लें कि भारत की राजनीति में सादगी की उम्मीद करना या शाहख़र्ची को लेकर सवाल करने की परंपरा की मृत्यु हो चुकी है.

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लॉटरी घोटाले में CAG ने ZEE News मालिक सुभाष चंद्रा को घेरा.
पूर्वोत्तर के राज्य मिजोरम में 11, 808 करोड़ रुपए के लॉटरी घोटाले में राज्यसभा सांसद सुभाष चंद्रा के एस्सेल समूह से जुड़ी कंपनियां जांच के घेरे में हैं। CAG ने सुभाष चंद्रा को अंडर इन्वेस्टीगेशन ले लिया है। दिसंबर 2016 को मिजोरम विधानसभा में पेश सीएजी (Comptroller and Auditor General of India) की रिपोर्ट के अनुसार साल 2012 से 2015 के बीच राज्य सरकार के लॉटरी संचालन में बड़ी लापरवाही और गड़बड़ियां
देखी गईं, रिपोर्ट के मुताबिक सुभाष चंद्रा के एस्सेल सूमह से जुड़ी कंपनियों ने वित्तीय गड़बड़ियां कर राज्य सरकार को 11,000 करोड़ से ज्यादा के राजस्व का चूना लगाया।एस्सेल समूह का लॉटरी बिजनेस
साल 2016 में बीजेपी के सपोर्ट से राज्यसभा सांसद बनने वाले सुभाष चंद्रा के एस्सेल समूह का ऑनलाइन लॉटरी से पुराना नाता है। 90 के दशक के अंत और 20वीं सदी के शुरुआती वर्षों में भारत में लॉटरी बिजनेस ने अपने पैर फैलाना शुरु किए, चंद्रा ने ऑनलाइन लॉटरी बिजनेस की शुरुआत प्लेविन ब्रॉंड के बैनर तले शुरु की और सिक्किम में सबसे पहले ऑनलाइन लॉटरी वितरण का टेंडर हासिल किया। चंद्रा के ज़ी समूह के चैनलो ने ‘खेलो इंडिया खेलो’ की टैगलाइन के साथ प्लेविन और ऑनलाइन लॉटरी का टीवी पर खूब प्रचार किया।
सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार ने लॉटरी वितरक कंपनियों के साथ मिलकर ऐसा रेवन्यू शेयर मॉडल लागू किया जिससे लॉटरी वितरक कंपनियों को अप्रत्याशित लाभ मिला और राज्य सरकार को 11,000 करोड़ से ज्यादा का घाटा हुआ जो उसके एक साल के बजट से भी कहीं ज्यादा है।
इस ख़बर को पढ़ने के बाद आप ये सोच रहे होंगे कि आखिर देश के पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में 11,808 करोड़ का लॉटरी घोटाला हुआ कैसे? सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक सेंट्रल विजलेंस कमीशन की गाइडलाइन्स को दरकिनार करते हुए राज्य सरकार ने ऑनलाइन और पेपर लॉटरी बिजनेस करने वाली 4 कंपनियों को टेंडर बांट दिए, ये कंपनियां थीं M/S तीस्ता डिस्ट्रीब्यूटर्स, ई-कूल गेमिंग सॉल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड, M/S एनवी इंटरनेशनल और समिट ऑनलाइन ट्रे़ड सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड।
रिपोर्ट के मुताबिक टेंडर लेने वाली एक कंपनी M/S एनवी इंटरनेशनल के पास ऑनलाइन लॉटरी संचालित करने का इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था तब भी उसे टेंडर दिया गया बाद में इस कंपनी ने टेंडर को सबलेट कर दिया और लॉटरी ड्रॉ के राइट्स ई-कूल गेमिंग सॉल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड और समिट ऑनलाइन कंपनी को दे दिए जो कि राज्य सरकार से किए गए कॉन्ट्रेक्ट का सीधा सीधा उल्लंघन है।
सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक ई-कूल गेमिंग सॉल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड राज्य सभा सांसद और जी समूह के पूर्व चेयरमेन सुभाष चंद्रा से जुड़ी हुई कंपनी है जिसके बड़े शेयरधारक सुभाष चंद्रा के बेटे अमित गोयनका और भाई अशोक गोयल हैं।
रिपोर्ट में ई-कूल गेमिंग सॉल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड और पैन इंडिया नेटवर्क लिमिटेड कंपनी के बीच करीबी रिश्ता बताया गया है, बता दें पैन इंडिया नेटवर्क लिमिटेड सुभाष चंद्रा से जुड़े एस्सेल समूह की प्रमुख कंपनियों में से एक है। सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक मिजोरम में लॉटरी वितरण टेंडर लेने के बाद ई-कूल गेमिंग सॉल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड ने ड्रॉ निकालने के अधिकार और ठेका पैन इंडिया नेटवर्क लिमिटेड को सबलेट कर दिया।

सीएजी की रिपोर्ट से ये तथ्य भी बाहर आया कि पैन इंडिया नेटवर्क लिमिटेड लॉटरी बेचने से हो रही आय का हिस्सा महाराष्ट्र और सिक्किम सरकार को दे रही थी। सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक चारो कंपनियों ने लॉटरी आय से हुई कमाई 11,834.22 करोड़ मेें से महज़ 25.45 करोड़ रुपए राज्य सरकार को जमा कराए जबकि 11,808 करोड़ रुपए का कोई हिसाब नहीं दिया गया जो कि लॉटरी रेग्यूलेशन एक्ट और नियमों का सीधा उल्लंघन था।

By india - June 29, 2017
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