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गुर्रमकोंडा नीरजा
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प्राध्यापक [हिंदी] / सह संपादक [स्रवंति]
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गुर्रमकोंडा नीरजा's posts

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मुक्तिबोध जन्मशती पर प्रकाशित "अँधेरे में : पुनर्पाठ" का लोकार्पण 16 जुलाई को
'अँधेरे में'' : पुनर्पाठ/ (सं) ऋषभ देव शर्मा, गुर्रमकोंडा नीरजा परिलेख प्रकाशन, नजीबाबाद 2017, पृष्ठ 224, मूल्य : 250/-  ISBN : 978-93-84068-54-7 वितरक : srisahitiprakashan@yahoo.com हैदराबाद। 16 जुलाई, 2017 (रविवार) को हिंदी प्रचार सभा, नामपल्ली में आयोजित...

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(पुस्तक) 'अँधेरे में' : पुनर्पाठ @ मुक्तिबोध-शताब्दी-संदर्भ
'अँधेरे में'' : पुनर्पाठ/ (सं) ऋषभ देव शर्मा, गुर्रमकोंडा नीरजा परिलेख प्रकाशन, नजीबाबाद 2017, पृष्ठ 224, मूल्य : 250/-  ISBN : 978-93-84068-54-7 वितरक : srisahitiprakashan@yahoo.com आज अर्थात 4 जुलाई, 2017 को प्रो. ऋषभ देव शर्मा ऑफिशियली साठ वर्ष के अर्थात...

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आत्मकथा के बहाने छत्तीसगढ़ की अंचल कथा
मुझे कुछ कहना है – III (2017)/ डॉ. रामनिवास साहू/ गाजियाबाद : उद्योगनगर प्रकाशन/ पृष्ठ 136/ मूल्य : रु. 200/- हिंदी गद्य साहित्य में आत्मकथा लेखन की परंपरा अत्यंत समृद्ध है. महापुरुषों, साधु-महात्माओं, समाज सुधारकों, राजनेताओं और साहित्यकारों ने अपने बाहरी ...

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हिंदी साहित्य को सैयद गुलाम नबी ‘रसलीन’ का प्रदेय
[1] भारतीय संस्कृति की आत्मा इस देश की विविध भाषाओं के माध्यम से अभिव्यक्ति प्राप्त करती है। भारत की सभी भाषाएँ और उनकी साहित्यिक विरासत सबकी साझी संपदा है और उसे सभी देशवासियों ने समृद्ध किया है, चाहे वे हिंदू हों या मुसलमान या किसी अन्य धर्म-संप्रदाय के अ...

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उठाईवाद : समस्या और समाधान


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साधो, यह मुर्दों का गाँव !
महाभारत का एक बड़ा प्रसिद्ध प्रसंग है – यक्ष और युधिष्ठिर के प्रश्नोत्तर. यक्ष ने जो सीधे सवाल युधिष्ठिर से किए थे, उनमें एक यह भी था कि सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है. आप जानते ही हैं कि युधिष्ठिर ने बिना किसी प्रकार के द्वंद्व के यह जवाब दिया था कि - अनेकानेक प्...

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