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डॉ. कौशलेन्द्रम
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कहने को कुछ ख़ास नहीं -----------अभी तक विद्यार्थी हूँ ------- आँखें खुली हैं इसलिए थोड़ा बेचैन रहता हूँ . अलग पगडंडी पर चलना अच्छा लगता है. शेष धीरे-धीरे आपको पता चल ही जाएगा --------न भी पता चले तो क्या फर्क पड़ता है ? बस, आइना साफ़ रहे --------यही प्रयास रहेगा . जय हिन्दी ..जय भारत ...जय आर्यावर्त...
कहने को कुछ ख़ास नहीं -----------अभी तक विद्यार्थी हूँ ------- आँखें खुली हैं इसलिए थोड़ा बेचैन रहता हूँ . अलग पगडंडी पर चलना अच्छा लगता है. शेष धीरे-धीरे आपको पता चल ही जाएगा --------न भी पता चले तो क्या फर्क पड़ता है ? बस, आइना साफ़ रहे --------यही प्रयास रहेगा . जय हिन्दी ..जय भारत ...जय आर्यावर्त...

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‘मी टू’ के बाद अब ‘मी टू पार्ट टू’ की बारी
एफ़.टी. की दुनिया में चल रही ग़र्म हवा पहली बार
नहीं चली है । पहले भी तेज हवाओं से अचानक खुल गई खिड़की से लोगों ने कॉस्ट काउचिंग
को देखा है । राजनीतिक गलियारों में इस तरह की हवा को “प्रायोजित” और “षड्यंत्र” कह
कर तर्कों के साथ कुछ प्रश्न भी उठाए जा रहे हैं । क...
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एक वैज्ञानिक की प्रताड़ना कथा
रामायण में उल्लेख मिलता है कि त्रेतायुग में राक्षसों ने ऋषियों-मुनियों
का जीना मुश्किल कर रखा था । किंतु वे तो तपस्वी थे और ज्ञान की साधना में लीन रहते
थे फिर ऐसा क्या था कि राक्षस उनकी साधना में आये दिन विघ्न ही नहीं उत्पन्न करते बल्कि
उन्हें प्रताड़ित भी क...
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भारतीय दण्ड संहिता की धारा 497 का विस्फोटक अंत
कानून हो गया ग़ैरकानूनी ...  सवाल , दर-असल सिर्फ़ इतना सा था कि दो व्यक्तियों के विवाहेतर सम्बंधों में दोषी केवल
पुरुष ही क्यों , महिला भी क्यों नहीं ? विद्वानों ने मंथन किया और निर्णय दिया कि धारा 497 स्वयं ही लैङ्गिक असमानता
की शिकार है । यौन सम्बंध यदि पार...
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पत्रकारिता का महानायक - सुरेंद्र प्रताप सिंह संचयन से ...
शासकीय सेवाओं
में सम्मान की तलाश... सुप्र यानी सुरेंद्र प्रपात सिंह का विश्वास है कि जातिगत
आधार पर शासकीय सेवाओं में दिये जाने वाले आरक्षण से उनके सम्मान की तलाश पूरी होती
है । हम इसका अर्थ यह भी निकाल सकते हैं कि उनके लिये शासकीय सेवा का उद्देश्य लोकहित
म...
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मंथन
कौन करे किसका अभिनंदन कुल गर्दभ के करते मंथन । बस ! यही तेरा एक इष्ट ! शेष केवल अनिष्ट , केवल अनिष्ट
! चिंतनशून्य हुए जब-जब तुम तर्कशून्य हुए तब-तब तुम     रीति उपेक्षित सागर मंथन की   नहीं वासुकी नहीं मंदराचल चहुँ ओर व्याप्त तुमुल कोलाहल हो रहा क्रंदन ही क...
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पहचान
यहूदी
देश... इस्लामिक देश... ईसाई देश... कहाँ है हिंदू देश ? इज़्रेल अत्याधुनिक वैज्ञानिक संसाधनों और उपलब्धियों वाला देश है
किंतु यह भी पर्याप्त नहीं लगा उसे । आख़िर अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों की पहचान के अतिरिक्त
उसे एक और पहचान... धार्मिक पहचान की ज़रूरत क्य...
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पर्यटन और पर्यावरण
प से पर्यटन , प से पर्यावरण । एक से मोहब्बत , दूसरे से बेहद नफ़रत । हम भारतीय इसका पूरा पालन करते हैं... कैसे ? देखिये एक शब्द चित्र ... स्थान - मुंशियारी का खलिया टॉप , समय अपरान्ह
चार बजे के आसपास । पर्यटन के बुरी तरह दीवाने भारतीयों के छोटे-बड़े कई समूह खल...
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सत्ता दर्पण
1-   सिकंदर
महान मोहम्मद
बिन क़ासिम महान   अकबर महान
का बाप बाबर महान ....... ईस्ट इण्डिया
कम्पनी के शातिर व्यापारी महान ......................... तड़प रहे
थे भारत की
जनता के कल्याण के लिये अपने वतन
से दूर डालकर
अपनी जान ज़ोख़िम में ? ताकत की
चाटुकारिता करती रह...
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शांति के लिए यह भी सही...
1- हनुमान हैं शक्ति के प्रतीक नफ़रत से जिन पर थूकने और जिन्हें जूते लगाने का
दुस्साहस है जिनमें वे ख़ुद को दलित कहते
हैं ... इससे बड़ा गुस्ताख़ झूठ और क्या हो सकता है
भला ! 2- हे भीमपुत्रो ! थूकने और जूते लगाने से मिलता है यदि न्याय और होता है प्रवाहित
प्रेम तो...
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जे.एन.यू. के नाम एक चिट्ठी
    सुनो विद्वानो
!   बस्तर
में आज फिर... मार
दिये गये कुछ जवान जैसे कि
मार दिये जाते हैं आये दिन
। बस्तर
में आज   फिर... हवा में
उछल गये मांस के लोथड़े जैसे कि
उछलते रहते हैं आये दिन घात
लगाकर किये गये विस्फोटों में । तुम
कहते हो कि
सैनिक तो होते ही हैं मरन...
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