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Haroon Khan
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विकास का स्तर:- बांदा जनपद यूपी का वह भू-भाग है जो हर तरह में पिछड़ा हुआ है। यहां के किसानों को पानी की भयंकर समास्या का सामना करना पड़ रहा है। इस एरिया में विकास के नाम पर बुंदेलखंड पैकेज के करोड़ों रुपए का बजट सफेद पोश नेता, अधिकारी व मंत्री खा रहे हैं। देश की आजादी से लेकर आज तक एक भी नेता सांसद, विधायक, मंत्री ने इस क्षेत्र में सरकारी उद्योग या प्राइवेट उद्योग लगवाने क़ा प्रयास नहीं किया। मुख्यमंत्री से लेकर सांसद, विधायकों और नेताओं सभी ने इस क्षेत्र की जनता के साथ खिलवाड़ किया है। इस समय उत्तर प्रदेश सरकार नाम की गरीबों की रहनुमा बनी है पर यहां की स्थित में कोई सुधार नहीं हुआ है। हकीकत में कोई भी जनप्रतिनिधि सुधार और न्याय पाने की बात नहीं करता। यहां के किसान लगातार आत्महत्त्या कर रहे हैं फिर भी जिला प्रशासन का कहना है जिन लोगों ने आत्महत्या की वह किसान नहीं है। उनके घर में खाने के लिए पर्याप्त भोजन अनाज और चावल था। व्यवसाय:- इस जनपद का मुख्य व्यवसाय खेती है लेकिन पानी की कमी के चलते यहां के किसान भुखमरी, बैंक कर्ज के चलते मौत के आगोश में समा रहे हैं। यहां एक कताई मिल थी वो भी अब बंद हो गई है। बांदा का शजर उद्योग अब निर्जीव होकर अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। ये कुछ माफिया के हाथों में सिमट कर रह गया है। शिक्षा का स्तर:- बांदा जनपद में शिक्षा का स्तर बहुत ही नीचे है। सरकारी स्कूलों के विकास के नाम पर मिले अरबों रुपए उत्तर प्रदेश के मंत्री, अधिकारी, ठेकेदारों ने मिलकर हजम कर लिए। साथ ही यहां पर शिक्षा की कमान शिक्षा माफियों के हाथ है। यहां बिना मानक क्षमता पूरे किए हुए लगभग दो दर्जन से ज्यादा ऐसे स्कूल चल रहे है जिनकी अभी तक मान्यता नहीं है लेकिन धड़ल्ले से हजारों बच्चों के भाविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। वहीं सरकारी स्कूलों में प्रधान और प्रधानाध्यापक मिलकर मिड डे मील का भोजन गायब कर देते हैं। बच्चों को खाने के नाम पर महीने में एक बार चावल की खिचड़ी बनवा दी जाती है।
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विकास का स्तर:- बांदा जनपद यूपी का वह भू-भाग है जो हर तरह में पिछड़ा हुआ है। यहां के किसानों को पानी की भयंकर समास्या का सामना करना पड़ रहा है। इस एरिया में विकास के नाम पर बुंदेलखंड पैकेज के करोड़ों रुपए का बजट सफेद पोश नेता, अधिकारी व मंत्री खा रहे हैं। देश की आजादी से लेकर आज तक एक भी नेता सांसद, विधायक, मंत्री ने इस क्षेत्र में सरकारी उद्योग या प्राइवेट उद्योग लगवाने क़ा प्रयास नहीं किया। मुख्यमंत्री से लेकर सांसद, विधायकों और नेताओं सभी ने इस क्षेत्र की जनता के साथ खिलवाड़ किया है। इस समय उत्तर प्रदेश सरकार नाम की गरीबों की रहनुमा बनी है पर यहां की स्थित में कोई सुधार नहीं हुआ है। हकीकत में कोई भी जनप्रतिनिधि सुधार और न्याय पाने की बात नहीं करता। यहां के किसान लगातार आत्महत्त्या कर रहे हैं फिर भी जिला प्रशासन का कहना है जिन लोगों ने आत्महत्या की वह किसान नहीं है। उनके घर में खाने के लिए पर्याप्त भोजन अनाज और चावल था। व्यवसाय:- इस जनपद का मुख्य व्यवसाय खेती है लेकिन पानी की कमी के चलते यहां के किसान भुखमरी, बैंक कर्ज के चलते मौत के आगोश में समा रहे हैं। यहां एक कताई मिल थी वो भी अब बंद हो गई है। बांदा का शजर उद्योग अब निर्जीव होकर अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। ये कुछ माफिया के हाथों में सिमट कर रह गया है। शिक्षा का स्तर:- बांदा जनपद में शिक्षा का स्तर बहुत ही नीचे है। सरकारी स्कूलों के विकास के नाम पर मिले अरबों रुपए उत्तर प्रदेश के मंत्री, अधिकारी, ठेकेदारों ने मिलकर हजम कर लिए। साथ ही यहां पर शिक्षा की कमान शिक्षा माफियों के हाथ है। यहां बिना मानक क्षमता पूरे किए हुए लगभग दो दर्जन से ज्यादा ऐसे स्कूल चल रहे है जिनकी अभी तक मान्यता नहीं है लेकिन धड़ल्ले से हजारों बच्चों के भाविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। वहीं सरकारी स्कूलों में प्रधान और प्रधानाध्यापक मिलकर मिड डे मील का भोजन गायब कर देते हैं। बच्चों को खाने के नाम पर महीने में एक बार चावल की खिचड़ी बनवा दी जाती है।
 
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बांदा। बुंदेलखंड में लगातार कुहरे और सर्द हवाएं चलने से भारी ठंड पड़ रही है। इंसान अपने घरों में दुबक कर और आग के सहारे किसी तरह ठंड से बचाव कर रहा है पर ठंड की चपेट में आकर वन्यजीव अपनी जान गवां रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड के सभी सात जनपदों बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर में पिछले कई दिनों से कुहरा और सर्द हवाएं चलने का दौर चल रहा है, बमुश्किल दोपहर बाद मामूली धूप निकल रही है।
इंसान आग की लपट या अपने घरों में दुबक कर इस ठंड से तो बचाव कर लेता है, पर पेड़ों में बसेरा कर रहे कबूतर, कौआ, गिलहरी, गलारी, बगुला जैसे कई प्रजातियों के पक्षी और जंगली जानवर सियार, खरगोश, नेवला व लोखरी ठंड से ठिठुर कर अपनी जान गवां रहे हैं।
मध्य प्रदेश की सरहद से लगते बांदा वन प्रभाग के फतेहगंज इलाके में तैनात वन दरोगा मिठाईलाल ने बताया कि पिछले कई दिनों से जारी कोहरा और सर्द हवाओं की वजह से जहां जंगल क्षेत्र में बसेरा कर रहे कई पक्षी पेड़ों से गिरकर दम तोड़ चुके हैं, वहीं कुछ जानवर भी मृत पाए गए हैं।
चंदौर, पनगरा, चौसड़ गांव के ग्रामीणों ने बताया कि तड़के से ही भयंकर कोहरा गिरने लगता है, जो दोपहर बाद तक जारी रहता है। ठंड की वजह से अब तक कई पक्षियों की मौत हो चुकी है।
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बुंदेलखंड की समस्याओं को लेकर सीएम से मिले विधायक
बांदा, 25 मार्च । बुंदेलखंड की समस्याओं को लेकर कांग्रेस के तिंदवारी विधायक मुख्यमंत्री से मिले और लोगों की खुशहाली के लिए नदियों में बांध बनाकर बारिश का पानी रोकने व विद्युत उत्पादन की छोटी-छोटी इकाइयां स्थापित किए जाने की मांग की। विधायक दलजीत सिंह ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात कर बुंदेलखंड को खुशहाल बनाने के लिए मांगों को रखा। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के सात जनपदों में नदियां व पहाड़ी क्षेत्र हैं। यदि लगभग 15 किमी. में बांध बनाकर बारिश का पानी रोका जाए तो नहरों को आसानी से पानी मिलेगा। विद्युत उत्पादन की छोटी-छोटी इकाइयां स्थापित करने से बिजली संकट दूर होगा और लोग खुशहाल होंगे। विधायक ने अपने विधानसभा क्षेत्र से डार्क जोन खत्म किए जाने की मांग की। पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए विधायक ने आरोप लगाया कि पुलिस के पास ट्रैक्टरों व ट्रकों से वसूली के अलावा कोई काम नहीं बचा। थानों व चौकियों में गु्रप बनाकर वसूली की जा रही है। उन्होंने बांदा के सराफा व्यवसायी के यहां हुई 27 लाख की चोरी, खुरहंड में व्यापारी के बेटे का अपहरण का मामला भी उठाया।
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बांदा। बुंदेलखंड में लगातार कुहरे और सर्द हवाएं चलने से भारी ठंड पड़ रही है। इंसान अपने घरों में दुबक कर और आग के सहारे किसी तरह ठंड से बचाव कर रहा है पर ठंड की चपेट में आकर वन्यजीव अपनी जान गवां रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड के सभी सात जनपदों बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर में पिछले कई दिनों से कुहरा और सर्द हवाएं चलने का दौर चल रहा है, बमुश्किल दोपहर बाद मामूली धूप निकल रही है।
इंसान आग की लपट या अपने घरों में दुबक कर इस ठंड से तो बचाव कर लेता है, पर पेड़ों में बसेरा कर रहे कबूतर, कौआ, गिलहरी, गलारी, बगुला जैसे कई प्रजातियों के पक्षी और जंगली जानवर सियार, खरगोश, नेवला व लोखरी ठंड से ठिठुर कर अपनी जान गवां रहे हैं।
मध्य प्रदेश की सरहद से लगते बांदा वन प्रभाग के फतेहगंज इलाके में तैनात वन दरोगा मिठाईलाल ने बताया कि पिछले कई दिनों से जारी कोहरा और सर्द हवाओं की वजह से जहां जंगल क्षेत्र में बसेरा कर रहे कई पक्षी पेड़ों से गिरकर दम तोड़ चुके हैं, वहीं कुछ जानवर भी मृत पाए गए हैं।
चंदौर, पनगरा, चौसड़ गांव के ग्रामीणों ने बताया कि तड़के से ही भयंकर कोहरा गिरने लगता है, जो दोपहर बाद तक जारी रहता है। ठंड की वजह से अब तक कई पक्षियों की मौत हो चुकी है।
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विकास का स्तर:- बांदा जनपद यूपी का वह भू-भाग है जो हर तरह में पिछड़ा हुआ है। यहां के किसानों को पानी की भयंकर समास्या का सामना करना पड़ रहा है। इस एरिया में विकास के नाम पर बुंदेलखंड पैकेज के करोड़ों रुपए का बजट सफेद पोश नेता, अधिकारी व मंत्री खा रहे हैं। देश की आजादी से लेकर आज तक एक भी नेता सांसद, विधायक, मंत्री ने इस क्षेत्र में सरकारी उद्योग या प्राइवेट उद्योग लगवाने क़ा प्रयास नहीं किया। मुख्यमंत्री से लेकर सांसद, विधायकों और नेताओं सभी ने इस क्षेत्र की जनता के साथ खिलवाड़ किया है। इस समय उत्तर प्रदेश सरकार नाम की गरीबों की रहनुमा बनी है पर यहां की स्थित में कोई सुधार नहीं हुआ है। हकीकत में कोई भी जनप्रतिनिधि सुधार और न्याय पाने की बात नहीं करता। यहां के किसान लगातार आत्महत्त्या कर रहे हैं फिर भी जिला प्रशासन का कहना है जिन लोगों ने आत्महत्या की वह किसान नहीं है। उनके घर में खाने के लिए पर्याप्त भोजन अनाज और चावल था। व्यवसाय:- इस जनपद का मुख्य व्यवसाय खेती है लेकिन पानी की कमी के चलते यहां के किसान भुखमरी, बैंक कर्ज के चलते मौत के आगोश में समा रहे हैं। यहां एक कताई मिल थी वो भी अब बंद हो गई है। बांदा का शजर उद्योग अब निर्जीव होकर अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। ये कुछ माफिया के हाथों में सिमट कर रह गया है। शिक्षा का स्तर:- बांदा जनपद में शिक्षा का स्तर बहुत ही नीचे है। सरकारी स्कूलों के विकास के नाम पर मिले अरबों रुपए उत्तर प्रदेश के मंत्री, अधिकारी, ठेकेदारों ने मिलकर हजम कर लिए। साथ ही यहां पर शिक्षा की कमान शिक्षा माफियों के हाथ है। यहां बिना मानक क्षमता पूरे किए हुए लगभग दो दर्जन से ज्यादा ऐसे स्कूल चल रहे है जिनकी अभी तक मान्यता नहीं है लेकिन धड़ल्ले से हजारों बच्चों के भाविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। वहीं सरकारी स्कूलों में प्रधान और प्रधानाध्यापक मिलकर मिड डे मील का भोजन गायब कर देते हैं। बच्चों को खाने के नाम पर महीने में एक बार चावल की खिचड़ी बनवा दी जाती है।
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ऐ पाकिस्तान तू अपनी हद में रह । कश्मीर हिन्दुस्तान का था है और हमेशा रहेगा । तू अपनी निगाह हिन्दुस्तान पर डालना छोड़ दे । तू अपने दिमाग का इलाज अगर जरुरत हो तो करवा ले । और शान्ती के पुजारी हिन्दुस्तान को उकसा मत । तुमको शायद पता नही कि हर हिन्दुस्तानी को लाहौर कराची और पूरा पाकिस्तान दिखता है । और इतिहास गवाह है तुमको सबक सीखाने के लिये हिन्दुस्तान हर पल तैयार है । इतिहास से सीख ले और मानवता का दुश्मन मत बन । तुम्हारे यहाँ से ज्यादा इस्लाम हिन्दुस्तान में है उसकी कदर कर ? क्यों मानवता से दुश्मनी मोल ले रहा है ? क्यों पाकिस्तान को समाप्त करने पर तुला है ? सोच कि अगर विश्व के नक्शे पर पाकिस्तान ना हो ? तू एक अच्छा देश बन और मानवता के खिलाफ अपने काम को बन्द कर । और जो आग तू बार बार हिन्दुस्तान को दिखा रहा है और हिन्दुस्तान देख रहा है कही ऐसा ना हो कि वही आग तुम्हारे घर मे भी लग जाय और जलाकर खाक कर दे । संम्भल जा और आग लगाना बन्द कर । जय हिन्द ।
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बांदा। बेहद गरीबी और मुफलिसी का दंश झेल रहे बुंदेलखंड में बांदा जिले के फतेहगंज और कोल्हुआ जंगल में बसे दो दर्जन गांवों के वनवासीय वन सम्पदा पर निर्भर हैं। यहां के ज्यादातर वनवासी भूमिहीन की श्रेणी में आते हैं। वन की सूखी लकड़ी और वन भिंडी, वन करैला व पड़ोरा जैसी जंगली सब्जियों के उगने से वनवासियों में दो वक्त की रोटी की आस जगी हुई है।
वैसे समूचा बुंदेलखंड कई सालों से दैवीय आपदा और सूखे की मार झेल रहा है, पर बांदा जनपद में मध्य प्रदेश की सरहद से लगे फतेहगंज और कोल्हुआ जंगल में बसे दो दर्जन से अधिक गांवों के वनवासियों की आर्थिक हालत आम लोगों से जुदा है। एक तरफ डकैतों का खौफ तो दूसरी तरफ पुलिस का उत्पीड़न इनकी जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं। सरकारी अधिकारियों के कारण महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) जैसी योजना इनके लिए दिवास्वप्न हैं। जंगली गांव गोबरी, गोड़रामपुर, गोंड़ी बाबा का पुरवा, मवान, मवासी डेरा, बघोलन, राजा डांडी, कारी डांडी, बोछा, जरैला पुरवा जैसे दो दर्जन गांवों में करीब एक हजार वनवासी पीढ़ियों से आबाद हैं।
गर्मी एवं जाड़े के दौरान ये वनवासी जंगल की सूखी लकड़ी बीनकर आसपास के गांवों में बेचकर अपना पेट भरते हैं तो बरसात के दौरान जंगल में स्वत: उगी सब्जियों के सहारे दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर जीवनयापन कर रहे हैं। इस समय फतेहगंज और कोल्हुआ के जंगलों में भरपूर वन भिंडी, वन करैला और पड़ोरा जैसी जंगली सब्जियों के पौधे उगे हैं।
मवान गांव के मुस्तरी मवासी ने बताया कि जंगल में अबकी बार पिछले साल से ज्यादा वन सब्जियां उगी हैं, वन भिंडी, वन करैला व पड़ोरा के पौधों में फूल और बतियां चढ़ने लगी हैं। इन वन सब्जियों को जंगली और पालतू जानवरों से बचाने के लिए वनवासी रखवाली में जुट गए हैं। वह बताते हैं कि गर्मी और ठंड में जंगल से सूखी लकड़ी बीन कर आसपास के गांवों में बेच कर आटा-दाल का जुगाड़ कर लेते हैं और अब कुछ दिन बाद जंगली सब्जी की भरमार से भूखे नहीं सोना पड़ेगा।
गोबरी गांव निवासी छत्रबली गोंड़ ने बताया कि वन सब्जियों को उजड़ने से बचाने के लिए वनवासी लोगों ने वनकर्मियों से इजाजत लेकर अपना-अपना इलाका बना लिया है। इसी गांव के चैतराम मवासी का कहना है कि वन सब्जियों की रखवाली वनवासी करते हैं, पर फल तोड़ने के समय वनकर्मियों को बतौर टैक्स कुछ पैसा या फिर सब्जी देना मजबूरी बन जाती है। अन्य वन सम्पदाओं जैसे खैर, गोंद, शहद, मकोय, आचार, आंवला, तेंदू फल और सीता फल आदि से हक छीने के कारण वनवासियों का आर्थिक ढांचा और चरमरा गया है।
बोदा गांव के वनवासी पंचू खैरगर बताते हैं कि पहले वन्य सम्पदा पर वनवासियों का अधिकार होता था, जिससे गोंद, आंवला, आचार, तेंदू फल, शहद, मकोय, झड़बेरी, सीताफल, कैथा व महुआ के फूल एवं गोही (बीज) बीन कर रोजी-रोटी का इंतजाम हो जाता था। अब इन वन सम्पदाओं से वनवासियों का अधिकार छिन जाने से रोटी के लाले पड़े हैं। पंचू ने बताया किबहुत चिरौरी करने पर वनकर्मी जंगल में घुसने दे रहे हैं, उस पर भी 'कुछ' देना पड़ता है। फतेहगंज वन रेंज के वन दरोगा मिठाईलाल का कहना है कि जंगली सब्जी के तोड़ने या बेचने पर वनवासियों को कोई रोक नहीं लगाई जाती, बशर्ते जंगल का नुकसान न करें।
इस इलाके में वनवासियों के हक और अधिकार को लेकर काम करने वाली सामाजिक संस्था 'प्रभात समिति' से जुड़े कार्यकर्ता राजाराम यादव कहते हैं कि यहां एक सौ दिन का काम देने वाली मनरेगा योजना बेमतलब साबित हो रही है, सरकारी कर्मी घर बैठे सारा विकास कार्य कागज पर दर्शा कर गड़बड़ी कर रहे हैं।' जंगलों में मामूली तौर पर मिल रही सम्पदा (सूखी लकड़ी और वन सब्जी) न मिले तो वनवासी भूख से तड़प कर दम तोड़ दें।
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