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Deepak Dua, Film Critic
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Film Critic & Journalist
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रिव्यू-फीकी जलेबी ‘विश्वरूप 2’
- दीपक दुआ ... डियर कमल हासन , 2013 में जब आप ‘ विश्वरूप ’ लेकर आए थे तो अपन ने उसे साढ़े तीन स्टार से नवाज़ा भी था। यह रहा उस फिल्म की समीक्षा का लिंक -   'विश्वरूप' (पार्ट-1) का रिव्यू पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें उस फिल्म के अंत में जब आप ( मेजर विसाम अहमद ...
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रिव्यू-मसाले और गहराई ‘विश्वरूप’ (पार्ट-1) में
- दीपक दुआ ... सब से पहले तो यही बात साफ हो जाए कि इस फिल्म में ऐसा एक भी सीन या संवाद नहीं है जिस पर कोई भी समझदार आदमी एतराज कर सके। अब आप चाहें तो यह सवाल उठा सकते हैं कि जो लोग ऐसी फिल्मों पर एतराज करते हैं , वे होते ही कितने समझदार हैं ? चलिए , बात आगे...
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रिव्यू-हसीन पलों का ‘कारवां’
- दीपक दुआ ... अपने पिता , अपनी नौकरी और अपने - आप से नाखुश बेटे को पता चला कि उसके पिता की एक हादसे में मौत हो गई है। लेकिन पिता की जगह आ गई किसी औरत की बॉडी और पिता की बॉडी पहुंच गई उस औरत की बेटी के पास। अब बेटा निकला है अपने दोस्त के साथ उस औरत के शहर क...
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रिव्यू-सपनों के पन्ने पलटता ‘फन्ने खां’
- दीपक दुआ... फन्ने खां खुद तो बड़ा
गायक बन नहीं पाया लेकिन अपनी बेटी लता को बड़ी गायिका बनाने के लिए वह कुछ भी करने
को तैयार है। एक दिन उसकी टैक्सी में नामी सिंगर बेबी सिंह बैठती है और वो उसे
किडनैप कर लेता है। फिरौती में वह चाहता है कि उसकी बेटी को गाने का ...
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रिव्यू-इस ‘मुल्क’ में इतनी भी गर्म हवा नहीं
- दीपक दुआ ... एक ऐसा परिवार जिसने 1947 के बंटवारे के वक्त मज़हब और मुल्क में से मुल्क को चुना , उसकी देशभक्ति पर आप कैसे उंगली उठा सकते हैं ... ? यह कैसा तर्क हुआ ? इसका मतलब सन् 47 में पाकिस्तान न जाने वाले सारे मुसलमान ज़बर्दस्त देशभक्त हैं तो फिर पाकिस्ता...
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