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nikhil anand Giri
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'बेस्टसेलर' हिंदी अपनी भाषा में आते-आते 'बिकाऊ' हो जाती है
हिंदी के नाम पर होने वाले ‘ दिवस ’ पहले ‘ सप्ताह ’ बने, अब ‘ पखवाड़ा ’ होने लगे हैं। आप मेट्रो में सफर कर रहे 50 लोगों से पखवाड़े का मतलब पूछ लीजिए, कम से कम 40 लोग इसे ‘ पिछवाड़ा ’ ही समझेंगे। सरकारी हिंदी ने हमारा हाल ही ऐसा कर दिया है। आप किसी भी संस्थान...
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मेरा देश बदल रहा है
'मेरा देश बदल रहा है मेरा देश बदल रहा है.. देश का नक्शा मुंह दाबे, बन्दर अदरक को चाभे छम छम उछल रहा है मेरा देश बदल रहा है। बेदम बचपन बेचारा जिसने मिलजुलकर मारा दिल्ली टहल रहा है मेरा देश बदल रहा है। कवियों को चालाकी दो, डुबकी दो, तैराकी दो बच के निकल रहा ह...
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बीमार होती दुनिया को सिर्फ पोएट्री नहीं, ‘पोएट्री क्लीनिक’ की ज़रूरत है
हिमानी दीवान ने कुछ महीने पहले मेरी आवाज़ में
रिकॉर्ड करने के लिए कुछ कविताएं भेजी थीं। मैंने कारण पूछा तो बताया कि आपकी
आवाज़ की गोलियां बनाकर ‘ मरीज़ों ’ का इलाज करेंगी। मैंने कविताएं देखीं तो वो कुछ ख़ास तरह की कविताएं थीं। ‘ हीलिंग टच ’ वाली। फिर एकाध
र...
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इस देश का हर दर्शक ‘ट्यूबलाइट’ है, जिसे सलमान खान पसंद है
जिस तरह गांधीगिरी पर संजय दत्त का कॉपीराइट है, परफेक्शन वाली भूमिकाओं पर
आमिर खान का, हाथों के विस्तार पर शाहरूख ख़ान का, उसी तरह बेसिरपैर की फिल्मों का
कॉपीराइट सिर्फ और सिर्फ सलमान खान पर है। आप दबंग देख लें, दबंग-2 देख लें या कोई
भी सलमान की फिल्म, बंदे ...
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ज़िंदगी को दोबारा जीने का मौका मिलता तो भी मैं शायद इसी तरह जीता। इतनी ही बेतरतीब, इतनी ही उलझन भरी। जीने का शायद यही एक अंदाज़ मुझे पता है। जिसमें तुम हो, मुझे बार-बार ठुकराती हुई। मैं हूं, खुशी-खुशी ख़ारिज होता हुआ। और कुछ जीना भी होता है क्या। मैंने चिट्...
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'सपने में पिया पानी' - एक भले इंसान की समर्थ कविताएं
कवि-मित्र समर्थ वशिष्ठ
का कविता-संग्रह ‘ सपने में पिया पानी ’ सामने है। किताब के साथ समर्थ
के हाथ से लिखी सात फरवरी 2017 की एक चिट्ठी है जो रफ पेपर पर लिखी गई है – ‘ प्रिय निखिल,
किताब की तुम्हारी कॉपी भेज रहा हूं। इस पर आलोचनात्मक कुछ लिखने का मन बना सको त...
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देश के लिए ही सही, 'अनारकली ऑफ आरा' ज़रूर देखिए
‘ आरा एक आदर्श शहर है। खाँटी लोग अगर इस धरती पर
जहाँ कहीं भी बचे हुए हैं तो उनमें से एक आरा भी है। यहाँ के लोगों के स्वभाव में
अदम्य साहस और दुस्साहस का मणिकांचन योग मिलता है। आरा के लोगों को इस बात का
श्रेय दिया जाना चाहिए कि उन्होंने बदलाव को बहुत धीरे-धी...
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पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन : देश घंटा बदल रहा है
पुरानी दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर 7 मार्च की रात जिस तरह का मानसिक टॉर्चर मैंने झेला, वो किसी न किसी भले आदमी को रेल मंत्रालय तक ज़रूर पहुंचाना चाहिए। ये छोटी-सी आपबीती उसी की कोशिश भर है।   जयनगर से चली शहीद एक्सप्रेस में समस्तीपुर से मेरे कुछ घरेलू सामान की ...
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विशाल भारद्वाज को ‘रंगून’ हो जाए तो बचना मुश्किल है
‘ रंगून ’ मैंने गुजरात के वापी शहर में देखी। मुंबई
यहां से बहुत नज़दीक है, मगर सिनेमा हॉल अब भी दो-चार ही। विशाल भारद्वाज का
सिनेमा देखने वाले उससे भी कम। देश की इंडस्ट्रीज़ से फैलने वाले केमिकल प्रदूषण
में वापी का बहुत बड़ा योगदान है। यहां जितने गुजराती है...
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एक छोटी-सी ऑड-इवेन लव स्टोरी
ये बता पाना मुश्किल है कि
प्यार पहले लड़की को हुआ या लड़के को, मगर हुआ। एक ऑड नंबर की कार से चलने वाली
लड़की और इवेन नंबर से चलने वाले लड़के को आपस में प्यार हो गया। ऐसे वक्त में हुआ
कि मिलने की मुश्किलें और बढ़ गईं। पहले सिर्फ घर से निकलने की दिक्कत थी, अब...
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