Profile cover photo
Profile photo
DrMohadArshad Khan
18 followers -
साहित्यिक परिचय 1. व्यक्तिगत विवरण नाम -- डॉ0 मोहम्मद अरशद ख़ान जन्मतिथि -- 17 सितंबर, सन् 1977 ई0 पिता -- श्री मोहम्मद यूसुफ ख़ान माता -- श्रीमती शमीमा बानो जन्म-स्थान -- उधौली ,(बाराबंकी) पता (कार्यालय) -- असिस्टेंट प्रोफ़ेसर, हिंदी विभाग, जी0 एफ0 कॉलेज शाहजहांपुर, फोन नं0 05842222383 (सम्बद्ध - म0 ज्यो0 फु0 रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली, उ0प्र0) स्थाई निवास -- 11/37,मोहल्ला: सालार, पोस्ट: रूदौली, ज़िला: फ़ैजा़बाद-225411 (उ0प्र0) मोबाइल: 09807006288 2. शैक्षिक योग्यता -- एम0ए0 ( हिन्दी-साहित्य), पी0एच0 डी0 3. फेलोशिप -- U.G.C. द्वारा ‘J.R.F.-2000 4. प्रकाशित पुस्तकें 1.’रेल के डिब्बे में’ (काव्य-संग्रह): एन0डब्ल्यू0ए0 पब्लिकेशन, फ़ैज़ाबाद, 2001 2.’किसी को बताना मत’ (कथा-संग्रह): यश पब्लिकेशन, नई दिल्ली 2008 3.’बरसा ख़ूब झमाझम पानी’ (शिशु काव्य): ISBN-978.81.909375.3.5 युगांतर प्रकाशन, बिहार: 2011 4.’नीम की बेटी’ (कहानी): ISBN-978.81.237.6509.9 नेशनल बुक टस्ट्र, नई दिल्ली, 2012 5.‘मोहम्मद अरशद ख़ान की श्रेष्ठ बाल कथाएँ’ (सं0-जाकिर अली ‘रजनीश’) ISBN978.81.88213.74.8 लहर प्रकाशन, इलाहाबाद, 2012 6.‘जंगल से होकर’ (कहानी-संग्रह) ISBN-978.93.81997.08.6 अनन्य प्रकाशन, नई दिल्ली, 2012 7.‘सच होते-होते’ (कहानी-संग्रह) ISBN- 978.81.923243.7.1 अद्वैत प्रकाशन, नई दिल्ली, 2012 5. लेखन विधाएँ -- उपन्यास, कहानी, कविता, एकांकी, संस्मरण, समीक्षा, आलेख आदि 6. प्रथम प्रकाशित रचना -- ’गर्मी’ (बाल कविता), स्वतंत्र्र भारत (दैनिक), 08 अप्रैल 1990 7. विशेष उपलब्धियाँ 1.’भोला का बैल’ कहानी नवलय, भाग-3 लखनऊ के पाठ्यक्रम में सम्मिलित 2.’कहीं ऐसा न हो’ कहानी नवलय भाग-7, लखनऊ के पाठ्यक्रम में सम्मिलित 3. डेढ़ दर्जन से अधिक संग्रह-ग्रंथों में रचनाएँ संकलित 4. विभिन्न शोध-प्रबंधों, शोधालेखों और संदर्भ ग्रंथों में रचनाकर्म का ससम्मान उदाहरण (घ) संपादन 1. ’चरखा’ (पत्रिका): फ़ज़लुर्रहमान ख़ाँ अध्ययन संस्थान, शाहजहाँपुर के सम्पादक मंडल के सदस्य 2. ‘अभिनव चेतना’ (अनियत कालीन): जी0 एफ0 प्रकाशन, शाहजहाँपुर का संपादन 3. 12 वीं ‘राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस’ (अवधांचल) 2004 की शोध-स्मारिका का सह-संपादन (ङ) अनुवाद 1. मराठी पत्रिका ‘कथामाळा’ (ठाणे, महाराष्ट्र) द्वारा बाल कहानियों का मराठी अनुवाद 8. पुरस्कार/सम्मान 1. चिल्ड्रेंस बुक ट्रस्ट द्वारा ‘अखिल भारतीय हिंदी बाल साहित्य लेखक प्रतियोगिता’-VII में पुरस्कृत 2. चिल्ड्रेंस बुक ट्रस्ट द्वारा ‘अखिल भारतीय हिंदी बाल साहित्य लेखक प्रतियोगिता’-VIII में पुरस्कृत 3. ’नागरी बाल साहित्य संस्थान’ बलिया द्वारा 17वें बाल-साहित्यकार सम्मान समारोह में सम्मानित: 24 नवंबर 2002 4. ’बाल प्रहरी’ (उत्तरांचल) द्वारा आयोजित ’राष्ट्रीय बाल साहित्य सम्मान समारोह-2006’ में सम्मानित, जून 2006 5. बाल कथा कृति ‘किसी को बताना मत’ पर ‘पं0 हर प्रसाद पाठक स्मृति पुरस्कार, मथुरा’, वर्ष 2008 6. ‘मोहम्मद अरशद ख़ान की श्रेष्ठ बाल कथाएँ’ पुस्तक ‘बाल साहित्य संस्थान अल्मोड़ा’ द्वारा पुरस्कृत-7, 8 व 9 जून 2013 7. प्रताप नारायण मिश्र स्मृति युवा बाल साहित्यकार सम्मान-2013, भाऊराव देवरस सेवा न्यास द्वारा, 9 सितंबर 2013 8. श्रमजीवी पत्रकार यूनियन, शाहजहाँपुर द्वारा ‘हिंदी सेवा सम्मान’ 14 सितंबर 2013 9. ‘मोहम्मद अरशद ख़ान की श्रेष्ठ बाल कथाएँ’ पर ‘बालवाटिका’(भीलवाड़ा) का वर्ष 2013 का बाल कथा-सम्मान, 1-2 अक्तू 2013
साहित्यिक परिचय 1. व्यक्तिगत विवरण नाम -- डॉ0 मोहम्मद अरशद ख़ान जन्मतिथि -- 17 सितंबर, सन् 1977 ई0 पिता -- श्री मोहम्मद यूसुफ ख़ान माता -- श्रीमती शमीमा बानो जन्म-स्थान -- उधौली ,(बाराबंकी) पता (कार्यालय) -- असिस्टेंट प्रोफ़ेसर, हिंदी विभाग, जी0 एफ0 कॉलेज शाहजहांपुर, फोन नं0 05842222383 (सम्बद्ध - म0 ज्यो0 फु0 रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली, उ0प्र0) स्थाई निवास -- 11/37,मोहल्ला: सालार, पोस्ट: रूदौली, ज़िला: फ़ैजा़बाद-225411 (उ0प्र0) मोबाइल: 09807006288 2. शैक्षिक योग्यता -- एम0ए0 ( हिन्दी-साहित्य), पी0एच0 डी0 3. फेलोशिप -- U.G.C. द्वारा ‘J.R.F.-2000 4. प्रकाशित पुस्तकें 1.’रेल के डिब्बे में’ (काव्य-संग्रह): एन0डब्ल्यू0ए0 पब्लिकेशन, फ़ैज़ाबाद, 2001 2.’किसी को बताना मत’ (कथा-संग्रह): यश पब्लिकेशन, नई दिल्ली 2008 3.’बरसा ख़ूब झमाझम पानी’ (शिशु काव्य): ISBN-978.81.909375.3.5 युगांतर प्रकाशन, बिहार: 2011 4.’नीम की बेटी’ (कहानी): ISBN-978.81.237.6509.9 नेशनल बुक टस्ट्र, नई दिल्ली, 2012 5.‘मोहम्मद अरशद ख़ान की श्रेष्ठ बाल कथाएँ’ (सं0-जाकिर अली ‘रजनीश’) ISBN978.81.88213.74.8 लहर प्रकाशन, इलाहाबाद, 2012 6.‘जंगल से होकर’ (कहानी-संग्रह) ISBN-978.93.81997.08.6 अनन्य प्रकाशन, नई दिल्ली, 2012 7.‘सच होते-होते’ (कहानी-संग्रह) ISBN- 978.81.923243.7.1 अद्वैत प्रकाशन, नई दिल्ली, 2012 5. लेखन विधाएँ -- उपन्यास, कहानी, कविता, एकांकी, संस्मरण, समीक्षा, आलेख आदि 6. प्रथम प्रकाशित रचना -- ’गर्मी’ (बाल कविता), स्वतंत्र्र भारत (दैनिक), 08 अप्रैल 1990 7. विशेष उपलब्धियाँ 1.’भोला का बैल’ कहानी नवलय, भाग-3 लखनऊ के पाठ्यक्रम में सम्मिलित 2.’कहीं ऐसा न हो’ कहानी नवलय भाग-7, लखनऊ के पाठ्यक्रम में सम्मिलित 3. डेढ़ दर्जन से अधिक संग्रह-ग्रंथों में रचनाएँ संकलित 4. विभिन्न शोध-प्रबंधों, शोधालेखों और संदर्भ ग्रंथों में रचनाकर्म का ससम्मान उदाहरण (घ) संपादन 1. ’चरखा’ (पत्रिका): फ़ज़लुर्रहमान ख़ाँ अध्ययन संस्थान, शाहजहाँपुर के सम्पादक मंडल के सदस्य 2. ‘अभिनव चेतना’ (अनियत कालीन): जी0 एफ0 प्रकाशन, शाहजहाँपुर का संपादन 3. 12 वीं ‘राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस’ (अवधांचल) 2004 की शोध-स्मारिका का सह-संपादन (ङ) अनुवाद 1. मराठी पत्रिका ‘कथामाळा’ (ठाणे, महाराष्ट्र) द्वारा बाल कहानियों का मराठी अनुवाद 8. पुरस्कार/सम्मान 1. चिल्ड्रेंस बुक ट्रस्ट द्वारा ‘अखिल भारतीय हिंदी बाल साहित्य लेखक प्रतियोगिता’-VII में पुरस्कृत 2. चिल्ड्रेंस बुक ट्रस्ट द्वारा ‘अखिल भारतीय हिंदी बाल साहित्य लेखक प्रतियोगिता’-VIII में पुरस्कृत 3. ’नागरी बाल साहित्य संस्थान’ बलिया द्वारा 17वें बाल-साहित्यकार सम्मान समारोह में सम्मानित: 24 नवंबर 2002 4. ’बाल प्रहरी’ (उत्तरांचल) द्वारा आयोजित ’राष्ट्रीय बाल साहित्य सम्मान समारोह-2006’ में सम्मानित, जून 2006 5. बाल कथा कृति ‘किसी को बताना मत’ पर ‘पं0 हर प्रसाद पाठक स्मृति पुरस्कार, मथुरा’, वर्ष 2008 6. ‘मोहम्मद अरशद ख़ान की श्रेष्ठ बाल कथाएँ’ पुस्तक ‘बाल साहित्य संस्थान अल्मोड़ा’ द्वारा पुरस्कृत-7, 8 व 9 जून 2013 7. प्रताप नारायण मिश्र स्मृति युवा बाल साहित्यकार सम्मान-2013, भाऊराव देवरस सेवा न्यास द्वारा, 9 सितंबर 2013 8. श्रमजीवी पत्रकार यूनियन, शाहजहाँपुर द्वारा ‘हिंदी सेवा सम्मान’ 14 सितंबर 2013 9. ‘मोहम्मद अरशद ख़ान की श्रेष्ठ बाल कथाएँ’ पर ‘बालवाटिका’(भीलवाड़ा) का वर्ष 2013 का बाल कथा-सम्मान, 1-2 अक्तू 2013

18 followers
About
DrMohadArshad's posts

Post has attachment
ऐसा रंग चढ़े
होली का दिन नज़दीक आता जा रहा था। मुहल्ले के बच्चों में काफी उत्साह था। नीरज, सलीम, मंजीत और डेविड सभी रोज़ शाम को नीरज के दादा जी के पास जा पहुँचते और होली के बारे में ढेर सारी बातें करते। दादा जी भी रस ले-लेकर उनकी बातें सुनते। नीरज और मंजीत ने पहले से ही र...

Post has attachment
बुद्धू काका और मनफेर ताऊ
हमारे गाँव में बहुत से लोग थे। एक थे रहमत अली। नाम के बिल्कुल उल्टे। चेहरे
पर ऐसा ताव जैसे हर वक़्त लड़ने को तैयार बैठे हों , और एक थे संतोषी काका , सपने में भी निन्यानबे के फेर में पड़े रहते थे। बहादुर कक्का ऐसे कि चूहे से भी डर जाएँ और बलवीर चाचा के लिए लाठ...

Post has attachment
वीर रत्नावती
( जैसलमेर के
राजा महारावल रत्नसिंह का दरबार। राजकुमारी रत्नावती मंत्री के साथ बैठी विचार-विमर्श कर रही
हैं।) रत्नावती      ःमंत्री जी , राज्य में सब कुशल तो है ? मंत्री        ःजी , राजकुमारी , आप की कृपा से सब कुशल है। सब प्रसन्न हैं। प्रजा के असंतोष को दे...

Post has attachment
पिता कहाँ गए ?
महर्षि
उद्दालक अपनी कुटी के सामने स्वच्छ चबूतरे पर बैठे हुए थे। बालक अष्टावक्र उनकी
गोद में विराजमान था। अष्टावक्र के अंग जन्म से टेढ़े-मेढ़े थे। दैनिक जीवन-चर्या
में उसे बहुत कठिनाई होती थी। आश्रम के अन्य बालकों के समान वह खेल-कूद नहीं सकता
था। उसकी इस विकलत...

Post has attachment
ऐसे मनाई गई रामलीला
जब हर कहीं रामलीला समाप्त हो
जाती है , तब बच्चों की असली रामलीला शुरू होती है। पतली कमची को
मोड़कर दोनों सिरे धागे से बाँध लिए , धनुष तैयार हो गया। पतली-पतली सिरकियाँ ले लीं , बाण बन गए। बस , सेना लेकर निकल पड़े लंका-विजय के लिए। यही हाल काशीपुर का था। इधर
गा...

Post has attachment
DrMohadArshad Khan commented on a post on Blogger.
बढ़िया कहानी है , पढ़कर मज़ा आया 

Post has attachment
रावण और हनुमान
एक थे संकटा प्रसाद जी। गांव की रामलीला में वह
हमेशा रावण का रोल करते थे। लंबा-चौड़ा शरीर , बड़ी-बड़ी आँखें , भरी-भरी मूँछें। जब उन्हें सजा-बनाकर खड़ा किया जाता तो वह
सचमुच रावण से कम न लगते।    संकटा प्रसाद जी थोड़े
मंदबुद्धि के थे। बातों को थोड़ा देर से समझते थे...

Post has attachment
यह कहानी नहीं है
‘‘ एक
राक्षस था। ...लाल-लाल आँखें...बड़े-बड़े दाँत...बिखरे हुए बाल। सूरत ऐसी भयानक कि
देखते ही आदमी का ख़ून सफेद हो जाए। एक दिन वह राक्षस नगर में घुस आया। चारों तरफ
हाहाकार मच गया। लोग डर के मारे चिल्लाते हुए इधर-उधर भागने लगे। राक्षस सीधा राजमहल
में जा घुसा औ...

Post has attachment
जब मैं कहानी पढ़कर रोया था ('अपना बचपन'-भोपाल में प्रकाशित)
जब मैं कहानी पढ़कर रोया था 28 फरवरी 1976 की
एक भोर। रात का अँधेरा अभी पूरी तरह से छटा न था। लेकिन दूर पूरब में , जहाँ धरती और आकाश मिल रहे थे , उजाले की हल्की-सी रेखा खिंचने लगी थी। अँधेरे के जमे हुए
धब्बों जैसे लग रहे पेड़ों में हलचल होने लगी थी और चिड़ियों क...

Post has attachment
पानी-पानी रे !
कृष्णा कालोनी की दस मंजिला इमारत सूरज की पहली किरण के साथ जाग उठती थी। लोगों
को ऑफिस जाने की जल्दी , बच्चों को स्कूल भागने की हड़बड़ी , दूधवाले और अखबार वाले की आवाजें--एक हलचल-सी पैदा कर देतीं जाती। लेकिन दस बजते-बजते
कॉलोनी फिर सूनी हो जाती। सब अपने-अपने का...
Wait while more posts are being loaded