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रविश 'रवि'
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चाँद से गुफ्तगू !!!
बहुत हो चुकी तेरी चांदनी से बातें, आज तुझ से गुफ्तगू का इरादा है रात है आई हिज्र का संदेशा लेकर, तेरी कश्ती में सफर का इरादा है. © रविश 'रवि' raviishravi.blogspot.com www.facebook.com/raviish.ravi
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ये जरुरी तो नहीं कि बार - बार मिलने से केवल इश्क़ ही हो जाये , मिलते रहा करिये जनाब , गलतफ़हमियों की दीवारें भी गिर जाती हैं . © रविश ' रवि ' raviishravi.blogspot.com www.facebook.com/raviish.ravi
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उजालों की गिरह
दिन कट गया   उजालों की गिरह   खोलने में , आज की रात अंधेरों की जुल्फों को संवारने का   इरादा है . © रविश ' रवि ' raviishravi.blogspot.com www.facebook.com/raviish.ravi
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वही तो है मौसम....
वही तो है मौसम आज भी और रुत भी वही छाई है, गए बरस में हुआ था यूँ ही तेरी पलकों तले शाम हुई थी... है मेरे सीने पर आज भी वो पानी की नन्ही-नन्ही बूंदें जो तेरे लबों को छू कर लजा के शर्मसार हुई थीं.... आज फिर बरसें है बादल भीगा है मौसम इस तरह मानों कल ही तेरे श...
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तेरी यादों का मौसम
मौसम ने मिजाज़ बदल कर ली अंगडाई है तेरी यादों के मौसम की फिर याद आई है , तेरे जिस्म की खुशबु का पैगाम कुछ यूँ आया बारिश की बूंदों ने दरवाजे पर दस्तक लगाई है .    © रविश ' रवि ' raviishravi.blogspot.com www.facebook.com/raviish.ravi
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फलक पर चाँद
कल   फलक   पर   था   चाँद   पूरा   का   पूरा , और   मै   था जमीं   पर कुछ   अधुरा-अधुरा , गुजार   दी   शब महकती चांदनी के साए   में , करता रहा इकट्ठा तारों को   उसके इंतज़ार में , ना   हिज्र का मौसम था ,  ना वस्ल की   ही बात थी , ये तो बस   आँखों ही   आँखों...
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उजालों की रहनुमाई
उजालों की रहनुमाई न कर...मेरे मौला इस कद्र बेइंतहाई न कर...मेरे मौला चाँद - सितारों की रोशनी के आगे मोतों की यूँ जगहंसाई न कर...मेरे मौला. © रविश ' रवि ' raviishravi.blogspot.com www.facebook.com/raviish.ravi
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05.05.2015
चलो फिर से उसी मोड़ पर लोट चलें जहाँ मिले थे   कुछ अजनबी ख्यालात कुछ अजनबी राहें, चलो फिर से शुरू करें एक नया सफ़र ढूंढें नये रास्ते मंजिलों की तलाश में, चलो फिर से बुने नये ख़्वाब, ढूंढें नया आसमान चलो आज फिर से उसी मोड़ पर लोट चलें. © रविश ' रवि ' raviishravi...
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