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Annapurna Bajpai
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पथ पर निरंतर अग्रणी रहने की कामना
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भारतीय नारी के सपने कितने आजाद ??
“ भारतीय
नारी कभी भी कृपा की पात्र नहीं थी , वह सदैव से समानता की अधिकारी रही हैं। ” - भारत कोकिला सरोजिनी नायडू । अल्टेकर के अनुसार प्राचीन भारत में वैदिक काल
में स्त्रियों की स्थिति समाज और परिवार में उच्च थी , परन्तु
पश्चातवर्ती काल में कई कारणों से उसकी...

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भारतीय नारी के सपने कितने आजाद ??
“ भारतीय
नारी कभी भी कृपा की पात्र नहीं थी , वह सदैव से समानता की अधिकारी रही हैं। ” - भारत कोकिला सरोजिनी नायडू । अल्टेकर के अनुसार प्राचीन भारत में वैदिक काल
में स्त्रियों की स्थिति समाज और परिवार में उच्च थी , परन्तु
पश्चातवर्ती काल में कई कारणों से उसकी...

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भारतीय नारी के सपने कितने आजाद ??
“ भारतीय
नारी कभी भी कृपा की पात्र नहीं थी , वह सदैव से समानता की अधिकारी रही हैं। ” - भारत कोकिला सरोजिनी नायडू । अल्टेकर के अनुसार प्राचीन भारत में वैदिक काल
में स्त्रियों की स्थिति समाज और परिवार में उच्च थी , परन्तु
पश्चातवर्ती काल में कई कारणों से उसकी...

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मैंने आज पहली बार इस को पढ़ा है , बहुत ही अच्छी लगी । हरमिंदर सिंह चाहल.जी को हार्दिक शुभकामनायें , 

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विगत 10 नवम्बर का दिन मेरे लिए बहुत ही यादगार रहा । उस दिन मुझे इलाहाबाद मे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल महामहिम श्री केशरी नाथ त्रिपाठी जी के 82 वें जन्मदिवस के अवसर पर उनके कर कमलों एवं पंजाब हरियाणा के राज्यपाल महामहिम श्री कैप्टन सिंह सोलंकी के कर कमलों द्व...

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सुंदर भाव पूर्णा कविता , सरिता भाटिया जी , बधाई 

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सुंदर संयोजन और मुझे शामिल करने के लिए आपका हार्दिक आभार 

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सावन और साहित्य
ग्रीष्म के अवसान पर काले-काले
कजरारे मेघों को आकाश मे घुमड़ता देख पावस ऋतु के प्रारम्भ मे पपीहे की पुकार और वर्षा
की फुहार से आभ्यंतर आप्लावित एवं आनंदित होकर जीव जन्तु सभी इस मास को पर्व की तरह
मनाने लगता है। मनुष्य तो सावन के मतवाले मौसम में झूम उठता है , ...

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गरजत बरसत आयो आषाढ़ ------------------------------------- आषाढ़ माह का पहला दिन धरती और अंबर का मिलन
दिवस माना जाता है। सच कहें तो फागुन के बाद और सावन से पहले लड़कपन और यौवन का
कुछ-कुछ अंश लिए आषाढ़ ही जीवन की उन वास्तविकताओं को उकेरता है , जिसमें
तपकर मनुष्य ...

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मेरी पुस्तक ''जीवन संध्या मे एकाकी - क्यों??'' एवं सहोदरी सोपान साझा काव्य संकलन  का लोकार्पण 
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