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rajendra tela
Attended St'Anselms School ,Ajmer
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rajendra tela

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GathaEditor Onlinegatha's profile photo
 
Of course there are the blamers, whiners and complainers who come up with the same tired excuses to berate the erotica genre and the extreme type of critics describe the writing of erotica is one plot with blanks. There are others who claim copy paste from 3 books and create the fourth.
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Story
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Dentist,Poet,writer,philanthropist,sports administrator ,love gardening,reading,photography, games & sports,nature and current affairs
Introduction
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर""   पेशे से दन्त चिकत्सक ,चेयरमैन राजस्थान टेबल टेनिस असोसी एशन,कॉमन कॉज सोसाइटी,अजमेर का संस्थापक अध्यक्ष(राजस्थान में पोलीथीन पर प्रतिबंध लगवाने एवम अजमेर के आनासागर झील के सरंक्षण के लिए प्रसिद्द ),राजस्थान राज्य डेंटल काऊंसिल का सदस्य ,ऑल इंडिया किचिन गार्डन असोसिएशन,अजमेर का संस्थापक अध्यक्ष.एवम कई अन्य संस्थाओं से जुडा हुआ हूँ समाज और व्यक्तियों में व्याप्त दोहरेपन ने हमेशा से कचोटा है,अपने विचारों, अनुभवों और जीवन को करीब से देखने से उत्पन्न मिश्रण को कलम द्वारा कागज़ पर उकेरने का प्रयास कर रहा हूँ, अगस्त २०१० से लिखना प्रारम्भ किया ,भावनाओं और अभिव्यक्ती की  यात्रा में अब तक 7000 रचनाएँ हिंदी,उर्दू मिश्रित हिंदी एवं अंग्रेज़ी भाषा में लिख चुका हूँ  Dr.Rajendra Tela,"Nirantar  A Dental Surgeon by profession,IWritten more than 7000 poems ,articles,stories in Hindi,English and Urdu languages.Involved various activities like,social work,writing,games,photography and gardening..rajtela1@gmail.com
Education
  • St'Anselms School ,Ajmer
Basic Information
Gender
Male
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Nirantar
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I haven’t forgotten her
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I haven’t forgotten her Though She betrayed me I haven’t forgotten her I know she too hasn’t Forgotten me Her soul keeps on Pricking her Ask

One to one
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One to one One to one is the way I like Thinking of someone else But face towards me Is what I dislike Involving heart with heart Mingling m

संसार एक रंग मंच न्यारा
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मन की खिड़की बंद खिड़की से ना उजाला आता ना हवा आती अध खुली खिड़की से हवा भी कम आती उजाला भी कम आता कमरे में घुटन और अँधेरा हो जाता खुली खिड़की स

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तेरी ज़िंदगी में मेरा कोई ज़िक्र नहीं है तेरी ज़िंदगी में मेरा कोई ज़िक्र नहीं है मगर मेरी ज़िंदगी के हर पन्ने की हर इबारत तेरे ज़िक्र से भरी हुई

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अहम का कोहरा कुछ लोग अपने आप से घिरे हैं अहम के कोहरे से ढके हैं मोहब्बत से परे हैं भ्रम में जी रहे हैं आइना देखने की फुर्सत नहीं आइना दिखान

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कहने को बातें बहुत हैं कहने को बातें बहुत हैं कहूँ जितना ही कम हैं मौसम से प्रारम्भ होगी देश विदेश,राजनीति टीवी सिनेमा से होते हुए घर परिवार

शब्दों का खेल
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शब्दों का खेल ना किसी कविता में दर्द होता है ना कोई गीत दुःख से भरा होता है ना प्यार मोहब्बत किसी ग़ज़ल में होता है ना ही किसी नज़्म में जुद

"मैं "बस गया हृदय में
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"मैं "बस गया हृदय में दूसरों में अवगुण ढूंढना स्वयं के अवगुण छुपाना मानवता की बात करना अमानवीय काम करना धर्म हो गया इंसान का धन संचय अहम स्व

सूरज तुम चमकना छोड़ दो गुलाब तुम महकना छोड़ दो
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बहता पानी हूँ
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बहता पानी हूँ बहता पानी हूँ रोका तो अपने में सदा के लिए रुक जाऊंगा रिश्ते नाते दोस्त सब भूल जाऊंगा संसार से दूर होता चला जाऊंगा एक दिन बुझ ज

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माँ,तुम हो देवी अवतार माँ कहाँ से लायीं तुम ये प्रेम स्नेह ममत्व धैर्य कर्तव्य की अथाह धन सम्पदा किसने दिया तुम्हें सहनशीलता सहृदयता संवेदनश

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बड़े बूढ़ों की छत्र छाया में
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