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rajendra tela
Attended St'Anselms School ,Ajmer
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rajendra tela

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umda
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rajendra tela

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aatam per jab chd jat hai aham ka kohara
tab koi aas pass bhi kaha nazer  aata hai
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rajendra tela

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Kamleshkumawat 8758124754's profile photoAradhana Rai's profile photo
 
Ram ram
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Story
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Dentist,Poet,writer,philanthropist,sports administrator ,love gardening,reading,photography, games & sports,nature and current affairs
Introduction
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर""   पेशे से दन्त चिकत्सक ,चेयरमैन राजस्थान टेबल टेनिस असोसी एशन,कॉमन कॉज सोसाइटी,अजमेर का संस्थापक अध्यक्ष(राजस्थान में पोलीथीन पर प्रतिबंध लगवाने एवम अजमेर के आनासागर झील के सरंक्षण के लिए प्रसिद्द ),राजस्थान राज्य डेंटल काऊंसिल का सदस्य ,ऑल इंडिया किचिन गार्डन असोसिएशन,अजमेर का संस्थापक अध्यक्ष.एवम कई अन्य संस्थाओं से जुडा हुआ हूँ समाज और व्यक्तियों में व्याप्त दोहरेपन ने हमेशा से कचोटा है,अपने विचारों, अनुभवों और जीवन को करीब से देखने से उत्पन्न मिश्रण को कलम द्वारा कागज़ पर उकेरने का प्रयास कर रहा हूँ, अगस्त २०१० से लिखना प्रारम्भ किया ,भावनाओं और अभिव्यक्ती की  यात्रा में अब तक 7000 रचनाएँ हिंदी,उर्दू मिश्रित हिंदी एवं अंग्रेज़ी भाषा में लिख चुका हूँ  Dr.Rajendra Tela,"Nirantar  A Dental Surgeon by profession,IWritten more than 7000 poems ,articles,stories in Hindi,English and Urdu languages.Involved various activities like,social work,writing,games,photography and gardening..rajtela1@gmail.com
Education
  • St'Anselms School ,Ajmer
Basic Information
Gender
Male
Other names
Nirantar
rajendra tela's +1's are the things they like, agree with, or want to recommend.
संसार एक रंग मंच न्यारा
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मन की खिड़की
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मन की खिड़की बंद खिड़की से ना उजाला आता ना हवा आती अध खुली खिड़की से हवा भी कम आती उजाला भी कम आता कमरे में घुटन और अँधेरा हो जाता खुली खिड़की स

तेरी ज़िंदगी में मेरा कोई ज़िक्र नहीं है
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अहम का कोहरा
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कहने को बातें बहुत हैं
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शब्दों का खेल
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शब्दों का खेल ना किसी कविता में दर्द होता है ना कोई गीत दुःख से भरा होता है ना प्यार मोहब्बत किसी ग़ज़ल में होता है ना ही किसी नज़्म में जुद

"मैं "बस गया हृदय में
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"मैं "बस गया हृदय में दूसरों में अवगुण ढूंढना स्वयं के अवगुण छुपाना मानवता की बात करना अमानवीय काम करना धर्म हो गया इंसान का धन संचय अहम स्व

सूरज तुम चमकना छोड़ दो गुलाब तुम महकना छोड़ दो
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सूरज तुम चमकना छोड़ दो गुलाब तुम महकना छोड़ दो इतना स्वार्थी हो गया इंसान मन ही मन कहता है सूरज तुम चमकना छोड़ दो गुलाब तुम महकना छोड़ दो किसी क

सुकून से जीने दो
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बहता पानी हूँ
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बहता पानी हूँ बहता पानी हूँ रोका तो अपने में सदा के लिए रुक जाऊंगा रिश्ते नाते दोस्त सब भूल जाऊंगा संसार से दूर होता चला जाऊंगा एक दिन बुझ ज

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माँ,तुम हो देवी अवतार
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अजीबो गरीब है ये इंसानों की दुनिया
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अजीबो गरीब है ये इंसानों की दुनिया अजीबो गरीब है ये इंसानों की दुनिया चंद लोगों को ही मिलती है धन दौलत सर छुपाने को कोठियां बीत जाती है झोंप

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खरा सिक्का सच को झूठ झूठ को सच कहना अब आम हो गया है होड़ के दौड़ में येन केन प्रकारेण जीतना ध्येय हो गया है जो जीत गया उस के सर पर ताज है जो ह

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(नेपाल में भूकम्प त्रासदी पर) त्रासदी प्रकृति के रौद्र पर मानव संहार पर हृदय व्यथित मन बेचैन सोच जड़ कलम चुप है नम आँखों से मृत आत्माओं को शत

बड़े बूढ़ों की छत्र छाया में
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किसे याद रहती हैं सिसकी गरीब की किसे याद रहती हैं सिसकी गरीब की किसने समझी है ज़िन्दगी गरीब की किसने खाई है रोटी गरीब की किसने पौछी है अश्रुध

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