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rajendra tela
Attended St'Anselms School ,Ajmer
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rajendra tela

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जिसने गरीबी का एहसास किया हो मुझे ऐसा नहीं लगता कि मोदी को अपने गरीबी के दिन याद हैं
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Story
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Dentist,Poet,writer,philanthropist,sports administrator ,love gardening,reading,photography, games & sports,nature and current affairs
Introduction
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर""   पेशे से दन्त चिकत्सक ,चेयरमैन राजस्थान टेबल टेनिस असोसी एशन,कॉमन कॉज सोसाइटी,अजमेर का संस्थापक अध्यक्ष(राजस्थान में पोलीथीन पर प्रतिबंध लगवाने एवम अजमेर के आनासागर झील के सरंक्षण के लिए प्रसिद्द ),राजस्थान राज्य डेंटल काऊंसिल का सदस्य ,ऑल इंडिया किचिन गार्डन असोसिएशन,अजमेर का संस्थापक अध्यक्ष.एवम कई अन्य संस्थाओं से जुडा हुआ हूँ समाज और व्यक्तियों में व्याप्त दोहरेपन ने हमेशा से कचोटा है,अपने विचारों, अनुभवों और जीवन को करीब से देखने से उत्पन्न मिश्रण को कलम द्वारा कागज़ पर उकेरने का प्रयास कर रहा हूँ, अगस्त २०१० से लिखना प्रारम्भ किया ,भावनाओं और अभिव्यक्ती की  यात्रा में अब तक 7000 रचनाएँ हिंदी,उर्दू मिश्रित हिंदी एवं अंग्रेज़ी भाषा में लिख चुका हूँ  Dr.Rajendra Tela,"Nirantar  A Dental Surgeon by profession,IWritten more than 7000 poems ,articles,stories in Hindi,English and Urdu languages.Involved various activities like,social work,writing,games,photography and gardening..rajtela1@gmail.com
Education
  • St'Anselms School ,Ajmer
Basic Information
Gender
Male
Other names
Nirantar
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सुकून से जीने दो
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सुकून से जीने दो दिन का उजाला तुम रख लो मुझे शाम का सांवलापन ही दे दो सारी ख्वाहिशें तुम पूरी कर लो मुझ पर खुदा का रहम ही रहने दो बड़ी इमारत

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बड़े बूढ़ों की छत्र छाया में
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किसे याद रहती हैं सिसकी गरीब की किसे याद रहती हैं सिसकी गरीब की किसने समझी है ज़िन्दगी गरीब की किसने खाई है रोटी गरीब की किसने पौछी है अश्रुध

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रूठना मनाना
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सब कुछ है फिर भी कुछ नहीं हैं घोड़े हैं तो मैदान नहीं मैदान है तो घोड़े नहीं घोड़े भी हैं मैदान भी है मगर मन नहीं तो कुछ नहीं सब कुछ है फिर भी

What to say? What not to say?
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अवरोधों की आँधियों के बीच
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अवरोधों की आँधियों के बीच वृक्ष के पत्ते सा फड़फड़ाया हूँ निराशा की गर्मी में झुलसा हूँ असफलता के आसूओं की वर्षा में भीगा हूँ अतिवृष्टि से त्र

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मन का शैतान झाँका जो मन के अंदर सुन्दर चेहरे वाला शैतान नज़र आया कब से बैठे हो चुप क्यों हो बाहर आकर दुनिया को अपना सुन्दर चेहरा क्यों नहीं द

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जीवन एक कहानी हर कहानी में कुछ पात्र होते हैं कुछ अच्छे कुछ बुरे कुछ गौण रहते हैं हर कहानी का अंत सुखद दुखद या सम रहता है जीवन ऐसा ही होता ह

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