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Ankesh Kumar Shrivastava
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बचपन, तू बहुत याद आता है|
न ऊँचाइयों का डर था, न पानी से खतरा न चिंता थी ज़माने की, न किसी बात का बुरा लगना वो भागते हुए दादी की गोदी में छुप जाना वो बिना किसी को दिखाए मिट्टी खाना जब भी याद आते हैं वो दिन, दिल भर सा जाता है ऐ बचपन, तू बहुत याद आता है पापा की मार से बचने के लिए इधर उ...
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अधूरा सपना
फिर मांझी का साथ, मझधार में छूटा है फिर एक तारा आसमान से टूटा है यूँ तो कई सपने होते हैं दिल बहलाने को पर फ़िर एक बार सबसे प्यारा सपना टूटा है आदतें हैं इस दिल की जो छूटती ही नहीं कैसे जी पाउँगा उसके बिना, वो कभी पूछती ही नही शाम की तलाश करता रहा ज़िंदगी भर...
अधूरा सपना
अधूरा सपना
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अनोखी
कुछ जानी सी, कुछ अंजानी सी कभी अपनी सी, कभी बेगानी सी खुद की ही बातों को सुनते रहती कुछ नये कुछ पुराने सपने बुनते रहती Add caption हज़ारों दिलों पर राज है करती फिर भी कभी नाज़ न करती सबसे दूर अपनी दुनिया में रहती कभी मुस्कुराती और कभी खुद में ही गुम रहती कभ...
अनोखी
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पता नही
किस ओर जा रही थी ज़िंदगी किस ओर चलने लगी एक साँस थी जैसे ठहरी हुई तेरे आते ही वो चलने लगी यूँ तो कई मोड़ आए ज़िंदगी में पर तूने ही लिखा सबसे हसीन लम्हा तूने ही दिए सबसे खूबसूरत पल तेरी नाराज़गी में भी एक सादगी है रूठ कर बोलना तेरा "पता नही" फिर अगले ही पल म...
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You are the One...!!
You are the one The one who makes me laugh The one who makes me cry You are the one for whom I can die You pulled me through my bad times You made me break all the lines If I sit and laugh, it's cause of you If I get up and dance, it's cause of you You made...
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मजबूरियाँ
ये क्या है जो मुझे हो रहा क्यूँ मेरी नींद मेरा चैन सब खो रहा तेरे आने से मिली एक नयी ज़िंदगी अब तो रोज़ करता हूँ तेरी बंदगी क्यूँ तू इतने पास हो कर भी इतनी दूर है क्यूँ हमारी ज़िंदगी इतनी मजबूर है तेरी एक एक मुस्कुराहट को संजो कर रखता हूँ जब भी तेरे साथ होत...
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तेरी आँखें
कुछ सुर्ख सी कुछ ख़ामोश सी सब कुछ कह जाने को बेताब सी कभी इधर कभी उधर कुछ तलाशती ये आँखें तेरी बिन कहे सब कुछ कह जाती कभी इठलाती कभी इतराती कभी खुद में ही शर्मा जाती कभी शैतान सी कभी नादान सी ये आँखें तेरी बिन कहे सब कुछ कह जाती पलकों के पीछे से निहारती सित...
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एक शख्स...
एक शख्स था अंधेरो में जलता हुआ खुद से डरा हुआ, ज़माने से लड़ा हुआ थका सा, कुछ घबराया सा अपने ही ख्वाबों में उलझा सा किनारों की तलाश में भटकता हुआ टूटे सपनों से कड़िया जोड़ता हुआ चल रहा था भीड़ में भी तन्हा सा वक़्त की लौ में तपता हुआ देख गैरों की परछाईयाँ ठ...
एक शख्स...
एक शख्स...
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क्यूँ ख़ुद से ख़फा है तू
क्यूँ ख़ुद से लड़ रहा तू क्यूँ ख़ुद से डर रहा तू क्यूँ ख़ुद से ना कुछ कह सका क्यूँ ख़ुद से रहता है तू ख़फा क्या है वो बात जो तुझे है खा रही किस चीज़ की है याद तुझे सता रही क्यूँ बैठा है आज ऐसे मायूस तू क्यूँ ना कुछ है बोलता क्या राज़ है जिसको है तू समेटे हु...
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