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एन डी देहाती
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.एगो कविता देखल जा, केतना सधत बा आजकल की चुनाव पर- लाज न बा तनिको उनका, मेहरारू कù सीट आ मरद मरेंले।  आंखि पसारि के देखीं तनी, चारो ही ओर अनेति करेंले।। सरकार इ काहे आरक्षन देति, नाम बा मादा के नर ही दिखेंले।  सेनुर, बिंदी आ चूड़ीबिहीन, साड़ी की आड़ में मरद...
एन. डी. देहाती
एन. डी. देहाती
nddehatiji.blogspot.com
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ए सर्दी ! बंद करो अपनी बेदर्दी !
मेरी यह कविता 4यू टाइम्स मे सचित्र छपी है । संपादक आनंद सिंह जी को बधाई । उहोने इस भोजपुरी कविता को अपनी पत्रिका मे जगह दी  जिस्म कांपे, हाड़ कांपे, रुह में भी कपकपी। सौ-सवा सौ रोज मरते, केकर-केकर नाम जपीं।। भीड़ से अचिका सा हटिके, इहो तमाशा देखिं लीं। बंट ...
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राजनीति के धुआं-धुक्कुन धइले बा बहरबांसू..
मनबोध मास्टर का बहुत कोफ्त बा। लहर पर कहर बन के कलह गिरल बा। कलह के भी
कारण होला। जब एगो अनार रही आ सौ जने बीमार रहिहन त इहे होई। कबो-कबो त लहर
उठेला। सत्तहत्तर में उठल रहे। सैंतीस साल बाद फिर उठल बा। लहर त बा लेकिन
चुनाव पहिले ही कलह भी कम नेइखे। सत्तहत...
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बांटत टिकट, विकट विरोधा..
मनबोध मास्टर के सियासी फगुआ लगता बुढ़वा मंगल की बाद ले चली। नेतन के टिकट कटले पर अइसे बुझात बा जेइसे नटई कटा गइल। सेवा की मेवा से वंचित नेता टिकट कटते किटकिटा के दांत पीसत अपने पार्टी की अध्यक्ष के कच्चे चबा जाये वाला नजरिया से खूब पुतलादाह करावत हवें। हाल ...
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अंग-अंग फड़कन लगे..
मनबोध मास्टर मगन हवें। दिन बहुर गइल। वोटर के दिन, सपोर्टर के दिन। सोलहवीं लोक सभा के महासमर के घोषणा हो गइल। जइसे नौ माह में बच्चा पैदा होलन वइसे नौ चक्र की मतदान की बाद नवकी सरकार पैदा होई। वोटर के बुझौवल बुझावल जाता। तुरुप के पत्ता केकरा लगे बा? भइया वोट ...
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केहु चाय पियावत बा केहु दूध पियावत बा
मनबोध मास्टर घर से निकल के ज्योंही चौराहा पर अइलें,कुछ उज्जर कुरता वाला
लोग भेटइलें। घेर के हथजोड़ी कइलें, एक गिलास दूध हाथ में धइलें। बोललें-पी
लीं, पी लीं। स्वास्थ्य बनल रही। मास्टर बोललें- भइया! हम जतरा पर निकरल
हई, दूध पी के जतरा कइले खतरा होला। ‘ दू...
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खूब लगाये रेस, भैंस को खोज 
अब इ कविता- यूपी में चर्चित भइल, भला भैंस के केस। पुलिस महकमा जुट गइल, खूब लगवले रेस। नाक आ नौकरी की चलते, भैंस के खोज निकारे। तबहुं तीन पुलिसकर्मी, नप गये बेचारे।।
https://www.facebook.com/deoriaup52 
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