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डॉ. अपर्णा त्रिपाठी
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डॉ. अपर्णा's posts

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पढा लिखा – अनपढ समाज
ममी
रोजी ने देखो आज फिर मेरी फेवरेट डॉल तोड दी कहते हुये रीना ने किचन में अपनी गोद में
रोजी को लेते हुये आयी। रीना की बातों में शिकायत कम प्यार ज्यादा था। तभी बाहर से
कुछ टूटने की आवाज आयी- रीना रोजी के साथ बाहर कमरे की तरफ आयी, जहाँ घर की नौकरानी
की तीन वर...

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वसुधैव कुटुम्बकम्- स्वप्र बनता सच
यू एस. ए. से प्रकाशित होने वाले साप्ताहिक पत्र हमहिन्दुस्तानीयूएसए मे ११ मई को प्रकाशित लेख को आप सबके साथ साझा करते हुये हार्दिक प्रसन्नता का अनुभव कर रही हूँ। मेरी इस रचना को प्रकाशित करने के लिये प्रकाशन के संपादक श्री जय सिंह का हार्दिक धन्यवाद। हम हिन्...

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अतिथि देवो भवः
पिछले तीन महीने से दो चीजों की मार झेल रहा था -   बीमारी , और पैसा , एक और भी चीज है गर्मी मगर शायद उसको गिनाना उचित नही लग रहा , वरना आप लोग समझेगें की नाहक ही अपनी परेशानियां बढा चढा कर लिख रहा हूँ । मौसम की सबसे ज्यादा मार गरीब
पर ही पडती है और इसे एक गर...

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छोटी नौकरी
उसे ना बहुत गोरी ही कहा जा सकता था ना ही सांवली।
हाँ कद काठी ऐसी थी कि एक बार मुड कर देखे बिना रुका ना सके, और सबसे बडा उसका आकर्षण
थे उसके नागिन से लम्बे सुर्ख काले बाल, जो लडकों के तो क्या लड्कियों तक के मुंह से
उफ्फ निकलवा देते। पिछले दिनों ही मेरे पडोस ...

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