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Shalini Rastogi
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कोयला है, जितना पौंछो, काला ही नज़र आएगा।
आइना थोड़े ही है जो पौंछ कर चमक जाएगा। कोयला है, जितना पौंछो, काला ही नज़र आएगा। है बसी रग-रग में हरकत, फितरती है उसका मिजाज़। तुमने क्या सोचा कि समझाने से वो बदल जाएगा। बाँध तूफां को अपने पालों में चलता है जो। वो सफ़ीना आँधियों के रुख से क्या दहल जाएगा। गर्दिश...

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हसरत नई हर रोज़ ही मचलती तो है
इस मोड़ से इक राह भी गुजरती तो है दिल से तेरे हम तक जो पहुँचती तो है . किस्मत तो किस्मत है, यकीं न इस पे करना किस्मत हरेक की नए रंग बदलती तो है सिर लाख कुचलो दिल में उठती हसरतों का पर हसरत नई हर रोज़ ही मचलती तो है कूँचा ए मैकदे से गुज़ारना संभल के तुम गुजरो इ...

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विद्रोही स्वर
विद्रोही
स्वर मन
की खामोशियों को तोड़ विद्रोही
हो उठते हैं स्वर| रगों
में लहू के साथ दौड़ती
चुप्पी के विरुद्ध आवाज़
उठाना चाहते, हर
बंधन को काट मुक्त
हो विद्रोह
करना चाहते स्वर| चेतना
के अदृश्य बंधन
से मुक्त हो करना
चाहते अनर्गल प्रलाप | मिथ्या
संभ्रांतता के ज...

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मज़ाक अच्छा है
जो कहूँ मैं वो गलत, तेरा बयान अच्छा है। जाने कैसे तुम लगाते हो, हिसाब अच्छा है। रक्स, महफ़िल, मय, हँसी के दरमियाँ सुना है , याद हम तुमको बहुत आए मज़ाक अच्छा है। महफिलों में चर्चा तर्के ताल्लुक का है अपने, आजकल मेरे रक़ीबों का मिज़ाज अच्छा है। ~~~~~~~~~~~~ शालिन...

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स्वप्न और आँख
कुछ सपनों की आंखों से नहीं बनती, स्वप्न पूरा होने से पहले ही आंखें खोल देती हैं पलकें क्योंकि आंखें हक़ीक़ी दुनिया की हैं और सपने तिलिस्म दिखाते हैं...

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सवैया गायन (video)
(आज  सूरजभान डी. ए. वी. पब्लिक स्कूल , वसंतकुंज, दिल्ली में तीन दिन की शिक्षण संवर्धन कार्यशाला  में  शिक्षण संवर्धन कार्यशाला के दौरान कुछ हल्के फुल्के पल  )  रस प्रीत सखी सब सूख गया, मरुभूमि बनी मन भू सगरी| दिन-रैन झरे अँखियाँ जलधार, रहा मन शुष्क, कहाँ रस...

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पुर्ज़े कागज़ के नहीं, अर्ज़ियाँ हैं|
फैंक दीं तुमने जो बेकार समझ के पुर्ज़े कागज़ के नहीं, अर्ज़ियाँ हैं| ये जो तुम अहसां दिखा के कर रहे हो, प्यार तो नहीं तुम्हारी खुद्गार्ज़ियाँ हैं| कारनामें जो कल किए थे तुमने, आज अखबारों की वो सुर्खियाँ हैं| ज़िम्मेदारी से अभी नावाकिफ़ हो ज़िन्दगी में अभी बेफिक्रि...

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रंगों की पत्रकारिता
आप रंगों की पत्रकारिता करते रहिए। प्रत्येक रंग पर  किसी राजनैतिक दल का ठप्पा लगाइए और फिर रंग से जोड़कर  घटनाओं को मनचाहा जामा पहनाइए। रंगों के धर्म बताइए एक रंग को दूसरे का विरोधी बताकर आपस में और रंगों से लड़ने के लिए उन्हें उकसाइए। फिर वो एक रंग जो जमीन पर...

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हत्या या आत्महत्या ........?
पेड़ पर लटकी रस्सी या सल्फास की गोली नहीं थी कारण उसकी मृत्यु का....  कुछ मौसमों ने साज़िश की कुछ बाज़ार ने घेराबंदी की कुछ वादों का जहर उसे पिलाया गया कुछ कर्ज़ों के पत्थरों से कुचला गया तब कहीं जाकर किश्तों में हत्या हुई थी उस किसान की और नाम दिया गया आत्महत्...

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यूँ अचानक आज इक मिसरा हुआ|
इश्क पर ज्यों ज्यों कड़ा पहरा हुआ| रंग इसका और भी गहरा हुआ| कह रहे थे तुम कि गुनती जाती मैं| यूँ अचानक आज इक मिसरा हुआ| मुस्कुराते तुम कि झड़ते जाते गुल| चुन रही थी मैं अजी गजरा हुआ| यूँ  रुका आँसू पलक
की कोर पर , फूल पर शबनम का कण ठहरा हुआ| चाह कर भी कह न पा...
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