Profile

Cover photo
Sundaram SaSh
Lived in Indore, India
62 followers|24,577 views
AboutPostsPhotosVideosReviews

Stream

Sundaram SaSh

Shared publicly  - 
1
Add a comment...

Sundaram SaSh

Shared publicly  - 
1
Add a comment...

Sundaram SaSh

Shared publicly  - 
 
Great caption for a timed shot
 
हा हा हा ..... कभी डायन की भी हाय लगती हैं
 ·  Translate
7 comments on original post
1
Add a comment...

Sundaram SaSh

Shared publicly  - 
 
 
एक 12-13 साल के लड़के को बहुत क्रोध आता था। - उसके पिता ने उसे ढेर सारी कीलें दीं और कहा कि जब भी उसे क्रोध आए
वो घर के सामने लगे पेड़ में वह कीलें ठोंक दे। पहले दिन लड़के ने पेड़ में
30 कीलें ठोंकी। अगले कुछ हफ्तों में उसे अपने क्रोध पर धीरे-धीरे नियंत्रण
करना आ गया। अब वह पेड़ में प्रतिदिन इक्का-दुक्का कीलें ही ठोंकता था।
उसे यह समझ में आ गया था कि पेड़ में कीलें ठोंकने के बजाय क्रोध पर
नियंत्रण करना आसान था। एक दिन ऐसा भी आया जब उसने पेड़ में एक
भी कील नहीं ठोंकी। जब उसने अपने पिता को यह बताया तो पिता ने उससे
कहा कि वह सारी कीलों को पेड़ से निकाल दे। लड़के ने बड़ी मेहनत करके
जैसे-तैसे पेड़ से सारी कीलें खींचकर निकाल दीं। जब उसने अपने पिता को काम
पूरा हो जाने के बारे में बताया तो पिता बेटे का हाथ थामकर उसे पेड़ के पास
लेकर गया। पिता ने पेड़ को देखते हुए बेटे से कहा – “तुमने बहुत अच्छा काम
किया, मेरे बेटे, लेकिन पेड़ के तने पर बने सैकडों कीलों के इन निशानों को देखो।
अब यह पेड़ इतना खूबसूरत नहीं रहा। हर बार जब तुम क्रोध किया करते थे तब
इसी तरह के निशान दूसरों के मन पर बन जाते थे। अगर तुम किसी के पेट में
छुरा घोंपकर बाद में हजारों बार माफी मांग भी लो तब भी घाव का निशान वहां
हमेशा बना रहेगा। अपने मन-वचन-कर्म से कभी भी ऐसा कृत्य न करो
जिसके लिए तुम्हें सदैव पछताना पड़े…!!

जीवन क्या है

😊यदि जीवन प्रश्न है तो हल करो
😊यदि जीवन ईश्वर तो पूजा करो
😊यदि जीवन स्वप्न है तो साकार करो,
😊यदि जीवन चुनौती है तो स्वीकार करो
😊यदि जीवन अवसर है तो लाभ उठाओ
😊यदि जीवन नाव है तो पार लगाओ
😊यदि जीवन गुत्थी है तो उसे सुलझाओ
😊यदि जीवन खेल है तो उसे जमकर खेलो
😊यदि जीवन कष्ट है तो साहस से झेलो
😊यदि जीवन दुःख-सुख का मेल है तो हँसकर सह लो
😊यदि जीवन गीत है तो उसे प्रेम से गाओ
😊यदि जीवन पुस्तक है तो पढो मनोयोग से
😊यदि जीवन विषय है तो अमृत करो शोध से
😊यदि जीवन सन्देश है तो उसे फैलाओ वेग से
😊😊😊😊😊😊😊

इस संसार में सबसे बड़ी सम्पत्ति
"बुद्धि "
सबसे अच्छा हथियार
"धेर्य"
सबसे अच्छी सुरक्षा
"विश्वास"
सबसे बढ़िया दवा
"हँसी"
और आश्चर्य की बात कि
"ये सब निशुल्क हैं 💐💎 जीवन मंत्र 💎💐
१) धीरे बोलिये 👉 शांति मिलेगी
२) अहम छोडिये 👉 बड़े बनेंगे
३) भक्ति कीजिए 👉 मुक्ति मिलेगी
४) विचार कीजिए 👉 ज्ञान मिलेगा
५) सेवा कीजिए 👉 शक्ति मिलेगी
६) सहन कीजिए 👉 देवत्व मिलेगा
७) संतोषी बनिए 👉 सुख मिलेगा. 👦"इतना छोटा कद रखिए कि सभी आपके साथ बैठ सकें और इतना बडा मन रखिए कि जब आप खडे हो जाऐं तो कोई बैठा न रह सके"
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
 ·  Translate
34 comments on original post
1
Add a comment...

Sundaram SaSh

Shared publicly  - 
 
 
Majestic Beauty white peacock
DESCRIPTION
Peacock is a very beautiful bird. It has a very enchanting and attractive look. Due to its beauty this bird look heavenly and different from all others. of beautiful peacocks including white Peacock
#birds #bird #Parrots #peacock #pheasant 
27 comments on original post
1
Add a comment...

Sundaram SaSh

Shared publicly  - 
 
 
How to read bar codes..

Most Common Genetically Modified foods to avoid eating : http://bit.ly/1zIC7fX
21 comments on original post
1
Add a comment...
Have him in circles
62 people
ashraf shishir's profile photo
Chandan Kumar's profile photo
Sundaram Sh's profile photo
Fountainhead The Global School's profile photo
Dheeraj Srivastava's profile photo
Aparajita Tripathi's profile photo
Varun Giridhara's profile photo
Godwin Karkada's profile photo
cec natrajan's profile photo

Sundaram SaSh

Shared publicly  - 
 
http://m.economictimes.com/magazines/corporate-dossier/simple-decisions-have-huge-repercussions-when-you-are-at-the-top/articleshow/48466987.cms

There is a powerful message in this writing for every decision maker at the top to assess.
Every small decision has a butterfly effect yet many don't consider it.
1
Add a comment...

Sundaram SaSh

Shared publicly  - 
 
 
Secretary Bird

Secretary bird is classed as Vulnerable on the ICUN Red List
 
Quoting from Wikipedia:
Secretary Birds are endemic to Sub-Saharan Africa and are non-migratory, though they may follow food sources. Their range extends from Senegal to Somalia and south to the Cape of Good Hope. These birds are also found at a variety of elevations, from the coastal plains to the highlands. Secretary Birds prefer open grasslands and savannas rather than forests and dense shrubbery which may impede their cursorial existence. While the birds roost on the local Acacia trees at night, they spend much of the day on the ground, returning to roosting sites just before dark.
 
The Secretary Bird is largely terrestrial, hunting its prey on foot, and other than the caracara (such as Caracara plancus), is the only bird of prey to do so habitually. Adults hunt in pairs and sometimes as loose familial flocks, stalking through the habitat with long strides. Prey may consist of insects, mammals ranging in size from mice to hares and mongoose, crabs, lizards, snakes, tortoises, young birds, bird eggs, and sometimes dead animals killed in grass or bush fires. The importance of snakes in the diet has been exaggerated in the past, although they can be locally important and venomous species such as adders and cobras are regularly among the types of snake predated.


#birds   #wildlifephotography  
12 comments on original post
1
Add a comment...

Sundaram SaSh

Shared publicly  - 
1
Sundaram SaSh's profile photo
 
Important link to remember
Add a comment...

Sundaram SaSh

Shared publicly  - 
 
उत्कृष्ट
 ·  Translate
 
स्वाथ्य और भोजन ::
~~~~~~~~~~~~~
भोजन करने के भी नियम होते हैं। यह नहीं कि पेट भरना है तो चाहे जब खा लिया और चाहे जब भूखे रह लिये।भोजन से केवल भूख ही शांत नहीं होती बल्कि इसका प्रभाव तन, मन एवं मस्तिष्क पर पड़ता है। अनीति (पाप) से कमाए पैसे के भोजन से मन दूषित होता है (जैसा खाओ अन्न वैसा बने मन) वहीं तले हुए, मसालेदार, बासी, रुक्ष एवं गरिष्ठ भोजन से मस्तिष्क में काम, क्रोध, तनाव जैसी वृत्तियाँ जन्म लेती हैं। भूख से अधिक या कम मात्रा में भोजन करने से तन रोगग्रस्त बनता है। 

-जिन पदार्थों से चिकनाई निकाली गयी हो उनका सेवन करना ठीक नहीं है। दिन में कई बार पेट भरकर, बहुत सवेरे अथवा बहुत शाम हो जाने पर भोजन नहीं करना चाहिए। प्रातःकाल अगर भरपेट भोजन कर लिया तो फिर शाम को नहीं करना चाहिए।

---जिस कार्य को करने से कोई लाभ न हो उसे करना व्यर्थ है। अंजलि से पानी नहीं पीना चाहिए और गोद में रखकर भोजन नहीं करना चाहिए।

--हमें सुबह 10 से 11 बजे के बीच भोजन कर लेना चाहिए ताकि दिनभर कार्य करने के लिए ऊर्जा मिल सके। कुछ लोग सुबह चाय-नाश्ता करके रात्रि में भोजन करते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होता। 

--दिन का भोजन शारीरिक श्रम के अनुसार एवं रात का भोजन हल्का व सुपाच्य होना चाहिए। रात्रि का भोजन सोने से दो या तीन घंटे पूर्व करना चाहिए। तीव्र भूख लगने पर ही भोजन करना चाहिए। 

- इंगला, जिसको हम सूर्यस्वर या सूर्यनाडी के नाम से भी पहचानते है जब चल रही हो अर्थात नाक के दायें नथुने से श्वास चल रही हो तभी भोजन करना चाहिए |
-- टीवी देखते या अखबार पढ़ते हुए खाना नहीं खाना चाहिए।

-- नियमित अपनी माँ, बहिन, पत्नी और बेटी के हाथ से पकाए गए घर के भोजन को ग्रहण करने वाला जल्दी से बीमार नहीं होता वह चिरायु होता है। 

-- खुले स्थान या सार्वजनिक स्थल पर भोजन नहीं करना चाहिए क्योकि किसी अतृप्त व्यक्ति की नजर आपके भोजन के आध्यात्मिक प्रभाव को क्षीण कर सकती है भोजन, भजन और शयन परदे में ही होने चाहिए ।

--. अपने बड़े बुजुर्गों के साथ भोजन करने से आतंरिक प्रसन्नता बढ़ती है तथा उनका स्नेह अपने आप हम पर बरसने लगता है। 

-- प्रेम से व दिल से लाये गए भोजन का कभी भी तिरस्कार न करें भले ही उसमे से एक कण ले खाए जरूर ऐसा न करने वाले अन्न का अनादर करते है ।
--भोजन के तुरंत बाद पानी या चाय नहीं पीना चाहिए। भोजन के पश्चात घुड़सवारी, दौड़ना, बैठना, शौच आदि नहीं करना चाहिए। 

--रात्रि को दही, मुली ,सत्तू, तिल एवं गरिष्ठ भोजन नहीं करना चाहिए। दूध के साथ नमक, दही, खट्टे पदार्थ, मछली, कटहल का सेवन नहीं करना चाहिए। शहद व घी का समान मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए। दूध-खीर के साथ खिचड़ी नहीं खाना चाहिए।

--भोजन के पश्चात क्या करें 
भोजन के पश्चात दिन में टहलना एवं रात में सौ कदम टहलकर बाईं करवट लेटने अथवा वज्रासन में बैठने से भोजन का पाचन अच्छा होता है। 
--रात के समय सोने से तीन घंटे पहले भोजन करना चाहिए।

--दुबारा भोजन करने के बीच में कम से कम 5 से 6 घंटे का फासला होना चाहिए।
सोने के बाद उठकर तुरंत ही खाना नहीं खाना चाहिए।
--भोजन में मिर्च-मसाले जैसे तेज पदार्थों का उपयोग नहीं करना चाहिए।
--गले में जलन और गंदी वायु बनने पर भोजन न करें।
--जहां तक संभव हो सके अधपका भोजन ही करना चाहिए (फल और सलाद अंकुरित आदि)।

--बासी भोजन करने से कई तरह के रोग हो जाते हैं।
--भोजन करते समय बीच-बीच में पानी न पिये या तो भोजन से 30 मिनट पहले पानी पिये या भोजन के 40 से 60 मिनट बाद पानी पिये।

--मैदा, सफेद, चीनी, पॉलिश किया हुआ चावल आदि पदार्थों के सेवन से बचें।
--भोजन में नमक, मिठाइयां, मसाला, घी आदि की मात्रा घटायें।
--चाय, कॉफी, तली हुई चीज धूम्रपान, शराब, और खाने के तंबाकू आदि के सेवन से बचें।
--सप्ताह में एक दिन रस और पानी पीकर रहना चाहिए।
--चोकर मिलाकर आटे की रोटी खायें।

--खाना खाते समय बातें नहीं करनी चाहिए।
--भोजन करते हुए चलचित्र या टेलीविजन नहीं देखना चाहिए।
--भोजन करने के बाद मूत्र त्यागने की आदत डालनी चाहिए।
--दूध हमेशा सुबह नाश्ते के समय पीना चाहिए।
--बहुत ज्यादा गर्म व बहुत ज्यादा ठंड़ी वस्तुएं खाने से हमारी पाचनक्रिया पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है।

--भोजन के बाद मट्ठा पीना बहुत ही लाभदायक होता है।
--भोजन करने के बाद 3 घंटे तक संभोग नहीं करना चाहिए।
--तेज गर्मी से चलकर आने के बाद पानी पीते हुए एक हाथ से दोनों नाक के नथुने बन्द कर लेने चाहिए।

__ भोजन को इतना चबाये की वो पानी बन जाये जिस से खाना जल्दी पच जायेगा |
 ·  Translate
13 comments on original post
1
1
Ranganath Vavilakolanu's profile photo
Add a comment...

Sundaram SaSh

Shared publicly  - 
 
 
भारत में जातियां तो थीं पर छुआ- छूत नहीं : स्वयं अंग्रेजों के द्वारा दिए आंकड़े इसके प्रमाण हैं |

भारत को कमज़ोर बनाने की अनेक चालें चलने वाले अंग्रेजों ने आंकड़े जुटाने और हमारी कमजोरी व विशेषताओं को जानने के लिए सर्वे करवाए थे | उन सर्वेक्षणों के तथ्यों और आज के झूठे इतिहास के कथनों में ज़मीन आस्मान का अंतर है |

सन 1820 में एडम स्मिथ नामक अँगरेज़ ने एक सर्वेक्षण किया | एक सर्वेक्षण टी. बी. मैकाले ने 1835 करवाया था | इन सर्वेक्षणों से ज्ञात और अनेक तथ्यों के इलावा ये पता चलता है कि तबतक भारत में अस्पृश्यता नाम की बीमारी नहीं थी | यह सर्वे बतलाता है कि :-

1. तब भारत के विद्यालयों में औसतन 26% ऊंची जातियों के विद्यार्थी पढ़ते थे तथा 64% छोटी जातियों के छात्र थे |

2. 1000 शिक्षकों में 200 द्विज/ब्राह्मण और शेष डोम जाती तक के शिक्षक थे | स्वर्ण कहलाने वाली जातियों के छात्र भी उनसे बिना किसी भेद-भाव के पढ़ते थे |

3. मद्रास प्रेजीडेन्सी में तब 1500 (ये भी अविश्वसनीय है न) मेडिकल कालेज थे जिनमें एम्.एस. डिग्री के बराबर शिक्षा दी जाती थी | ( आज सारे भारत में इतने मेडिकल कालेज नहीं होंगे)

4. दक्षिण भारत में 2200 (कमाल है) इंजीनियरिंग कालेज थे जिनमें एम्.ई. स्तर की शीशा दी जाती थी |

5. मेडिकल कालेजों के अधिकांश सर्जन नाई जाती के थे और इंजीनियरिंग कालेज के अधिकाँश आचार्य पेरियार जाती के थे | स्मरणीय है कि आज छोटी जाती के समझे जाने वाले इन पेरियार वास्तुकारों ने ही मदुरई आदि दक्षिण भारत के अद्भुत वास्तु वाले मंदिर बनाए हैं |

तब के मद्रास के जिला कलेक्टर ए.ओ.ह्युम (जी हाँ, वही कांग्रेस संस्थापक) ने लिखित आदेश निकालकर पेरियार वास्तुकारों पर रोक लगा दी थी कि वे मंदिर निर्माण नहीं कर सकते | इस आदेश को कानून बना दिया था |

ये नाई सर्जन या वैद्य कितने योग्य थे इसका अनुमान एक घटना से हो जाता है | सन 1781 में कर्नल कूट ने हैदर अली पर आक्रमण किया और उससे हार गया | हैदर अली ने कर्नल कूट को मारने के बजाय उसकी नाक काट कर उसे भगा दिया | भागते भटकते कूट बेलगाँव नामक स्थान पर पहुंचा तो एक नाई सर्जन को उस पर दया आ गई | उसने कूट की नई नाक कुछ ही दिनों में बना दी | हैरान हुआ कर्नल कूट ब्रिटिश पार्लियामेंट में गया और उसने सबने अपनी नाक दिखा कर बताया कि मेरी कटी नाक किस प्रकार एक भारतीय सर्जन ने बनाई है | नाक कटने का कोई निशान तक नहीं बचा था | उस समय तक दुनिया को प्लास्टिक सर्जरी की कोई जानकारी नहीं थी | तब इंग्लॅण्ड के चकित्सक उसी भारतीय सर्जन के पास आये और उससे शल्य चिकित्सा, प्लास्टिक सर्जरी सीखी | उसके बाद उन अंग्रेजों के द्वारा यूरोप में यह प्लास्टिक सर्जरी पहुंची |

अब ज़रा सोचें कि भारत में आज से लगभग 195 वर्ष पहले तक तो कोई जातिवाद याने छुआ-छूत नहीं था | कार्य विभाजन, कला-कौशल की वृद्धी, समृद्धी के लिए जातियां तो ज़रूर थीं पर जातियों के नाम पर ये घृणा, विद्वेष, अमानवीय व्यवहार नहीं था | फिर ये कुरीति कब और किसके द्वारा और क्यों प्रचलित कीगई ? हज़ारों वर्ष में जो नहीं था वह कैसे हो गया ? अपने देश-समाज की रक्षा व सम्मान के लिए इस पर खोज, शोध करने की आवश्यकता है | यह अमानवीय व्यवहार बंद होना ही चाहिए और इसे प्रचलित करने वालों के चेहरों से नकाब हमें हटनी चाहिए | साथ ही बंद होना चाहिए ये भारत को चुन-चुन कर लांछित करने के, हीनता बोध जगाने के सुनियोजित प्रयास | हमें अपनी कमियों के साथ-साथ गुणों का भी तो स्मरण करते रहना चाहिए जिससे समाज हीन ग्रंथी का शिकार न बन जाये | यही तो करना चाह रहे हैं हमारे चहने वाले, हमें कजोर बनाने वाले | उनकी चाल सफ़ल करने में‚ सहयोग करना है या उन्हें विफ़ल बनाना है ? ये ध्यान रहे. . .
 ·  Translate
21 comments on original post
1
Add a comment...
People
Have him in circles
62 people
ashraf shishir's profile photo
Chandan Kumar's profile photo
Sundaram Sh's profile photo
Fountainhead The Global School's profile photo
Dheeraj Srivastava's profile photo
Aparajita Tripathi's profile photo
Varun Giridhara's profile photo
Godwin Karkada's profile photo
cec natrajan's profile photo
Basic Information
Gender
Male
Places
Map of the places this user has livedMap of the places this user has livedMap of the places this user has lived
Previously
Indore, India - Toyosu, Tokyo - Tin Hau HongKong Island - Jersey City, NJ - Englewood, CO - Mumbai, India - Eagan, MN - Doha, QATAR - Toronto, CAN
Links
Contributor to
Please note if this review is being read by the company officials, they need to tighten their service team - at least in Mumbai. I am the most unfortunate of their product users. My complaints for service of their product which was faultily repaired by their own inexperienced technician is being ignored. I had a SymphonySauna 3l instant water heater bought more than 2 yrs back In the first 2 yrs, their product needed service as their wiring was faulty. But the service people never were open enough to accept this problem. In 2010 when the problem came up first, their service manager Mr. Jani in Mumbai arranged to get the service person Mr Vijay to come and check the product. Getting this person Vijay to visit your place is like inviting the PM to visit your place, he acts so pricey. He turned up almost a month after constant follow with him. When he came, he rearranged some wiring and said the product was ready to use. This seemed ok, as the product was fine for almost a year. Then again, around the same time of the year 2011, the wiring seem to have shorted. This time Mr. Vijay was not directly contactable but still he made me wait for more than a month to come and visit and check the product. It seemed this time, there was a wire heating up causing the product to short which he fixed again. In 2012, again the same issue repeated around Jul mid. This time the same technician was not available and I was routed to a new IVR system to file a complaint. Complaint collection mechanism had improved, but complaint attending system was worse than before. I had to now follow up with their service center in Sion several times, and their phone attendants kept passing the wrong message to the service people. I again went through hell trying to get someone to come to my place. I wrote a complaint to their quality manager in Ahmedabad and then called him up. He was unruly enough to tell me that I am not scheduling my time around their technicians' timing. Finally I got a new young trainee technician Mr Patil to visit the product who in his enthusiasm said that this company's product was worse and that I should go for Jaguar water heaters This is enough to say what the company is like and what their service commitment is. After this technician did some rewiring, within a month the product this time burst in flames. After that I again filed another complaint and got a complaint number VIJ-29J12002 on 29Oct 12 at 1139am. This complaint is still pending servicing. He came once after a followup and told me the thermostat switch is blown. He said he would return to me after Diwali. Followed up Mr. Vijay but he has not returned my calls. I am sitting on a dead product and my money and time has gone down the drain, while the company is happily fleecing other consumers. If Rs. 2600/ has no value today for which I bought the product, it shows how the value of money and service quality has fallen. I am filing a complaint under the consumer grievance forum regd. this issue.
• • •
Public - 2 years ago
reviewed 2 years ago
1 review
Map
Map
Map