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Pradeep Pushpa
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किछु एखनो किछु बादोमे. अहाँ मोन पड़ै छी भादोमे. पाँती जे लिखि फेंकने रही. जा दूर खसल छल कादोमे. प्रदीप पुष्प
किछु एखनो किछु बादोमे. अहाँ मोन पड़ै छी भादोमे. पाँती जे लिखि फेंकने रही. जा दूर खसल छल कादोमे. प्रदीप पुष्प

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बहुतो दिनक बाद फेर एत' एलहुँ
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एहि बर्षक प्रथम पुष्प...

गजल

जहिया अहाँ आन हेबै
परिबा बला चान हेबै

बनतै हमर प्रीत खखरी
अनकर अहाँ धान हेबै

जौं आन सेनूर देलक
यै हम त'निष्प्राण हेबै

हेतै लिखल भोगबै हम
थानाक जजमान हेबै

प्रेम त' अमर करबे करत
हम 'पुष्प' बलिदान हेबै

(2212 2122 सब पाँतिमे)

-प्रदीप पुष्प,मधुबनी
8521925604
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बहुतो दिनक बाद एकटा गजल कहय चाहब...

गजल

बीतलाहा बाटमे हेरा रहल छी
कल्हुका छी चाह हम सेरा रहल छी

पेरलक दैबा भ' तेना ने कसैया
मेहमे ब'रदे जकाँ पेरा रहल छी

देह भेलै आब अनमन टाँट सनठी
आगि लागल ऊक सन फेरा रहल छी

मीत मुसकी बीच कननी हैत अलगे
नोर सुख दुखकेर हम बेरा रहल छी

मोन भेलै भोज करितौं गाम भरिकें
'पुष्प' जातिक बान्हमे घेरा रहल छी

2122 2122 2122 सब पाँतिमे
- प्रदीप पुष्प
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यै अहाँ,
यै अहाँ,
भोर छी, इजोर छी,
मोनक चूल्हीमे तलमलाइत पजोर छी,
बास छी,चास छी,
सोन्हगर हुलास छी,
अहाँ माघक कुहेसमे स्नेहिल इनहोर छी,
यै अहाँ,
सुरूज छी,चान छी,
कामनाक वितान छी,
मेंहदीक सिंगारमे,यौवनक पथारमे,
बियौहतीक मुसकी संग कयल मटकोर छी,
यै अहाँ,
धार छी,वार छी,
खंजर छी,औजार छी,
कनडेरिए ताकैत काजरक कोर छी,
यै अहाँ,
हास छी,परिहास छी,
चाननक सुवास छी,
निष्ठाक पीरीपर बिराजैत विश्वास छी,
बिनु रंगने ठोर अहाँ रक्तिम पलास छी,
मोनकें भुतियाबैवला कामनाक हिलकोर छी,
यै अहाँ,
दिन छी,राति छी,
अगता छी,पछाति छी,
रूपक पूर्णिमा आ पिरीतक संक्रांति छी,
गोल मोल भाव संग सिनेहक डोर छी,
यै अहाँ,
अक्षत छी,धूप छी,
अद्भूत छी,अनूप छी,
आत्माक अर्घ्य लेल बेसाहल सूप छी,
स्पर्शक तूरसँ बूनल दुरगमनिआ पटोर छी,
यै अहाँ,
यै अहाँ,
चान छी,इजोर छी...
प्रदीप पुष्प
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बहुतो दिनक बाद एकटा गजल कहय चाहब...

गजल

बीतलाहा बाटमे हेरा रहल छी
कल्हुका छी चाह हम सेरा रहल छी

पेरलक दैबा भ' तेना ने कसैया
मेहमे ब'रदे जकाँ पेरा रहल छी

देह भेलै आब अनमन टाँट सनठी
आगि लागल ऊक सन फेरा रहल छी

मीत मुसकी बीच कननी हैत अलगे
नोर सुख दुखकेर हम बेरा रहल छी

मोन भेलै भोज करितौं गाम भरिकें
'पुष्प' जातिक बान्हमे घेरा रहल छी

2122 2122 2122 सब पाँतिमे
- प्रदीप पुष्प
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यै अहाँ,
यै अहाँ,
भोर छी, इजोर छी,
मोनक चूल्हीमे तलमलाइत पजोर छी,
बास छी,चास छी,
सोन्हगर हुलास छी,
अहाँ माघक कुहेसमे स्नेहिल इनहोर छी,
यै अहाँ,
सुरूज छी,चान छी,
कामनाक वितान छी,
मेंहदीक सिंगारमे,यौवनक पथारमे,
बियौहतीक मुसकी संग कयल मटकोर छी,
यै अहाँ,
धार छी,वार छी,
खंजर छी,औजार छी,
कनडेरिए ताकैत काजरक कोर छी,
यै अहाँ,
हास छी,परिहास छी,
चाननक सुवास छी,
निष्ठाक पीरीपर बिराजैत विश्वास छी,
बिनु रंगने ठोर अहाँ रक्तिम पलास छी,
मोनकें भुतियाबैवला कामनाक हिलकोर छी,
यै अहाँ,
दिन छी,राति छी,
अगता छी,पछाति छी,
रूपक पूर्णिमा आ पिरीतक संक्रांति छी,
गोल मोल भाव संग सिनेहक डोर छी,
यै अहाँ,
अक्षत छी,धूप छी,
अद्भूत छी,अनूप छी,
आत्माक अर्घ्य लेल बेसाहल सूप छी,
स्पर्शक तूरसँ बूनल दुरगमनिआ पटोर छी,
यै अहाँ,
यै अहाँ,
चान छी,इजोर छी...
प्रदीप पुष्प
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बहुतो दिनक बाद एकटा गजल कहय चाहब...

गजल

बीतलाहा बाटमे हेरा रहल छी
कल्हुका छी चाह हम सेरा रहल छी

पेरलक दैबा भ' तेना ने कसैया
मेहमे ब'रदे जकाँ पेरा रहल छी

देह भेलै आब अनमन टाँट सनठी
आगि लागल ऊक सन फेरा रहल छी

मीत मुसकी बीच कननी हैत अलगे
नोर सुख दुखकेर हम बेरा रहल छी

मोन भेलै भोज करितौं गाम भरिकें
'पुष्प' जातिक बान्हमे घेरा रहल छी

2122 2122 2122 सब पाँतिमे
- प्रदीप पुष्प
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गजल

रातिकें सपना बनल छें चान तों नव
तालमे लय बनि सजल छें गान तों नव

भैरवी मल्हारकें समवेत गायन
मालकोशक गजलमे छें तान तों नव

पूर अंकक छें कि तों अधपूर अंकक
दस दशमलवमे लिखल छें मान तों नव

मौध मिसरी माँछकें जयबार भेलें
सोमरसकें प्रिय तरल छें पान तों नव

छें पराती आरती आ नामधुन तों
गामकें गहबर बनल छें थान तों नव

नव उमेरक भार छौ 'पुष्प'क नजरिमे
ओसमे कतकी फसिल छें धान तों नव

2122 तीनबेर सब पाँतिमे
बहरे रमल
प्रदीप पुष्प
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गजल

पढल पंडित मुदा रोटीक मारल छी
बजै छी सत्य हम थोंथीक हारल छी

बुझू कोना सबसँ काते रहै छी हम
उचितवक्ता बनै छी तें त' टारल छी

दियादेकें घरक घटना मुदा धनि सन
कटेबै केश कोना हम जँ बारल छी

मधुर बनबाक छल भेलौं जँ अधखिज्जू
त' हम नोनगर लाड़ैनें सँ लाड़ल छी

लगै छल नीक नाथूरामकें पोथी
मुदा गाँधीक साड़ा संग गाड़ल छी

किओ ने पूजि रहलै कोन गलती यौ
बिना सेनूर अरिपन 'पुष्प' पाड़ल छी
1222 तीन बेरि सब पाँतिमे
बहरे हजज
-प्रदीप पुष्प
गजलक गजल

दर्दक दबाइमे भाव उपचार भेल
प्रेमक पीड़तें गजल भ' बहार भेल

जतै दीर्ध लघुकेर गाड़ी रूकल ओतै
रूक्णक चौक आ बहरक बजार भेल

अंत नीक स'ब नीक नीक ई आदर्श तें
मतलाक अंतमे रदीफक संस्कार भेल

रूचिगर सुआद होइ शेरक भोजमे
छंदक सँचारमे काफिया अँचार भेल

पन्नाक भीड़मे के कतय हेरा जायत
तें मोन पाड़ैले मकता अवतार भेल

अदब आँगनमे नव घ'र ठाढ होऊ
गजलक गजल तें 'पुष्प' विचार भेल

सरल वार्णिक बहर, 15 वर्ण
प्रदीप पुष्प
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गजलक गजल

दर्दक दबाइमे भाव उपचार भेल
प्रेमक पीड़तें गजल भ' बहार भेल

जतै दीर्ध लघुकेर गाड़ी रूकल ओतै
रूक्णक चौक आ बहरक बजार भेल

अंत नीक स'ब नीक नीक ई आदर्श तें
मतलाक अंतमे रदीफक संस्कार भेल

रूचिगर सुआद होइ शेरक भोजमे
छंदक सँचारमे काफिया अँचार भेल

पन्नाक भीड़मे के कतय हेरा जायत
तें मोन पाड़ैले मकता अवतार भेल

अदब आँगनमे नव घ'र ठाढ होऊ
गजलक गजल तें 'पुष्प' विचार भेल

सरल वार्णिक बहर, 15 वर्ण
प्रदीप पुष्प
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