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अंकित कुमार पाण्डेय
भूभाग नहीं शत शत मानव के हृदय जीतने का निश्चय
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बदलते दौर का भटकता हुआ परवाना हूँ,
चुनावों में रामभक्त और बाद में पैगम्बर का दिवाना हूँ!!

#बताओ कौन ??
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कृपया ध्यान पूर्वक पढ़े।
दैनिक भास्कर द्वारा षड्यंत्र चलाया जा रहा है कि गणेश विसर्जन घरो में ही किसी पात्र में करके उस पर तुलसी का पौधा लगावे।
तो कृपया पढ़े-लिखे(?) प्रबुद्धजन निम्न शास्त्रोक्ति पर जरूर पूर्ण गम्भीर्यता से विचार करें:-
"नार्चयेदक्षतेर्विष्णु, न तुलस्यागनाधिपम।
न दुर्व्ययजेद्देवी, बिल्वपत्रें न भास्करं।
अर्थात, विष्णु को अक्षत, गणपति को तुलसी, देवी को दूर्वा और सूर्य देव को बिल्वपत्र वर्जित है।
दूसरा, खंडित प्रतिमा को घर में नहीं रखना भी वर्जित है।
उपरोक्त शास्तेयोक्ति के संधर्भ में
यदि आप घर में गणपति विसर्जन करते हो और उसमे तुलसी दल का पौधा लगाते हो तो आप निम्न घोर अनुचित कार्य कर रहे है।
पहला, घर में विसर्जित अर्थात गणपति की पूर्णतया खंड-2 मूर्ति को गमले में एकत्र करके घर में रख रहे है और उस पर वर्जित तुलसी दल भी अर्पित कर रहे हो क्योकि, तुलसी का
पौधा लगाने के लिए पूर्ण खंड मूर्ति पर तुलसी तो डालना ही पढ़ेगी।
अतः निवेदन है कि, भास्करके इस षड्यंत्र को ज्यादा महत्त्व ना देकर गणपति जी का विसर्जन नदी आदि में ही करे।
क्योंकि जब लाखो बकरो का खून नदी में मिलने से नदीया दूषित नहीं होती तो मिटटी की प्रतिमाओ से कुछ नहीं बिगड़ेगा।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
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मोदी बोला रात है
संघी बोले रात है
भक्त बोले रात है
यह सुबह सुबह की बात है
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बिना राम के भाजपा की औकात 2 सीट की थी अब रामद्रोह के बाद 2 भी नही आएंगी मोदीभक्तों
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अगर नमाज़ पढ़ते वक्त नमाज़ी के सामने कुत्ता , गधा और #महिला निकल जाए तो नमाज़ कबूल नहीं होती है , यानी नमाज़ व्यर्थ चली जाती है,

सहीह बुखारी , हदीस 490

कुत्ते , गधे के साथ औरत को रख दिया इसे कहते है महिलाओं का अस्ली मुक़ाम😜
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संतन्ह के लच्छन सुनु भ्राता, अगनित श्रुति पुरान बिख्याता।

संत असंतन्हि कै असि करनी, जिमी कुठार चंदन आचरनी।

काटइ परसु मलय सुनु भाई, निज गुन देइ सुगंध बसाई।..

बिषय अलंपट सील गुनाकर, पर दुख दुख सुख सुख देखे पर।

सम अभूतरिपु बिमद बिरागी, लोभामरष हरष भय त्यागी।..

कोमलचित दीनन्ह पर दाया, मन बच क्रम मम भगति अमाया।

सबहि मानप्रद आपु अमानी, भरत प्रान सम मम ते प्रानी।..

बिगत काम मम नाम परायन, सांति बिरति बिनती मुदितायन।

सीतलता सरलता मयत्री, द्विज पद प्रीति धर्म जनयत्री।..

ए सब लच्छन बसहिं जासु उर, जानेहु तात संत संतत फुर।

सम दम नियम नीति डोलहिं, परुष बचन कबहूँ नहिं बोलहिं।..

निंदा अस्तुति उभय सम ममता मम पद कंज।

ते सज्जन मम प्रानप्रिय गुन मंदिर सुख पुंज।।

श्री राम कहते हैं—हे भाई ! संतों के लक्षण अनगिनत वेद-पुराणों में वर्णित हैं।

उनका आचरण चंदन एवं कुल्हाड़ी के समान है। काटे जाने पर भी चंदन, उसे सुवासित कर देता है।

संत विषयों में लिप्त नहीं होते, शील एवं सद्गुणों की खान होते हैं।

वे सम-भाव रखते हैं, शत्रु-भाव नहीं।

वे लोभ, क्रोध, मद, हर्ष, भय से परे होते हैं।

उनका चित्त कोमल होता है।

वे दयालु होते हैं।

उन्हें कोई कामना नहीं होती।

शांति, वैराग्य, विनय एवं प्रसन्नता में मग्न रहते हैं।

वे किसी की निंदा नहीं करते और मीठे वचन बोलते हैं।

संत कहलाने के पात्र वे हैं, जिनमें उपर्युक्त गुण न्यूनाधिक अवश्य होते हैं।

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जब हम बोलते हैं धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो

तो भक्त पूछते हैं की किसकी हिम्मत है जो मोदी का नाश करे ?
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अखलाक मरा या पहलू खान मरा तो सारे मुस्लिम परस्त नेता पहुंच गए ; पिछले 10 दिनों में 5 स्थानों पर हिन्दू साधुओं की हत्या हुई कोई भाजपा नेता पहुंचा क्या ? 20 राज्य और केंद्र सरकार मिल कर क्या एक दो करोड़ रुपये नही दे सकते थे ?
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या नियत में ही खोट है
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रक्षा बंधन के पर्व की वैदिक विधि
-वैदिक रक्षा सूत्र बनाने की विधि :
इसके लिए ५ वस्तुओं की आवश्यकता होती है -
(१) दूर्वा (घास)
(२) अक्षत (चावल)
(३) केसर
(४) चन्दन
(५) सरसों के दाने ।
इन ५ वस्तुओं को रेशम के कपड़े में लेकर उसे बांध दें या सिलाई कर दें, फिर उसे कलावा में पिरो दें, इस प्रकार वैदिक राखी तैयार हो जाएगी ।
इन पांच वस्तुओं का महत्त्व -
(१) दूर्वा - जिस प्रकार दूर्वा का एक अंकुर बो देने पर तेज़ी से फैलता है और हज़ारों की संख्या में उग जाता है, उसी प्रकार मेरे भाई का वंश और उसमे सदगुणों का विकास तेज़ी से हो । सदाचार, मन की पवित्रता तीव्रता से बदता जाए । दूर्वा गणेश जी को प्रिय है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, उनके जीवन में विघ्नों का नाश हो जाए ।
(२) अक्षत - हमारी गुरुदेव केप्रति श्रद्धा कभी क्षत-विक्षत ना हो सदा अक्षत रहे ।
(३) केसर - केसर की प्रकृति तेज़ होती है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, वह तेजस्वी हो । उनके जीवन में आध्यात्मिकता का तेज, भक्ति का तेज कभी कम ना हो ।
(४) चन्दन - चन्दन की प्रकृति तेज होती है और यह सुगंध देता है । उसी प्रकार उनके जीवन में शीतलता बनी रहे, कभी मानसिक तनाव ना हो । साथ ही उनके जीवन में परोपकार, सदाचार और संयम की सुगंध फैलती रहे ।
(५) सरसों के दाने - सरसों की प्रकृति तीक्ष्ण होती है अर्थात इससे यह संकेत मिलता है कि समाज के दुर्गुणों को, कंटकों को समाप्त करने में हम तीक्ष्ण बनें ।
इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई एक राखी को सर्वप्रथम भगवान -चित्र पर अर्पित करें । फिर बहनें अपने भाई को, माता अपने बच्चों को, दादी अपने पोते को शुभ संकल्प करके बांधे ।
इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई वैदिक राखी को शास्त्रोक्त नियमानुसार बांधते हैं हम पुत्र-पौत्र एवं बंधुजनों सहित वर्ष भर सूखी रहते हैं ।
राखी बाँधते समय बहन यह मंत्र बोले –
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल: |
तेन त्वां अभिबन्धामि रक्षे मा चल मा चल ||
शिष्य गुरुको रक्षासूत्र बाँधते समय –
‘अभिबन्धामि ‘ के स्थान पर ‘रक्षबन्धामि’ कहे |
और चाकलेट ना खिलाकर भारतीय मिठाई या गुड से मुहं मीठा कराएँ।
अपना देश अपनी सभ्यता अपनी संस्कृति अपनी भाषा अपना गौरव
वन्दे मातरम्
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रक्षा बंधन के पर्व की वैदिक विधि
-वैदिक रक्षा सूत्र बनाने की विधि :
इसके लिए ५ वस्तुओं की आवश्यकता होती है -
(१) दूर्वा (घास)
(२) अक्षत (चावल)
(३) केसर
(४) चन्दन
(५) सरसों के दाने ।
इन ५ वस्तुओं को रेशम के कपड़े में लेकर उसे बांध दें या सिलाई कर दें, फिर उसे कलावा में पिरो दें, इस प्रकार वैदिक राखी तैयार हो जाएगी ।
इन पांच वस्तुओं का महत्त्व -
(१) दूर्वा - जिस प्रकार दूर्वा का एक अंकुर बो देने पर तेज़ी से फैलता है और हज़ारों की संख्या में उग जाता है, उसी प्रकार मेरे भाई का वंश और उसमे सदगुणों का विकास तेज़ी से हो । सदाचार, मन की पवित्रता तीव्रता से बदता जाए । दूर्वा गणेश जी को प्रिय है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, उनके जीवन में विघ्नों का नाश हो जाए ।
(२) अक्षत - हमारी गुरुदेव केप्रति श्रद्धा कभी क्षत-विक्षत ना हो सदा अक्षत रहे ।
(३) केसर - केसर की प्रकृति तेज़ होती है अर्थात हम जिसे राखी बाँध रहे हैं, वह तेजस्वी हो । उनके जीवन में आध्यात्मिकता का तेज, भक्ति का तेज कभी कम ना हो ।
(४) चन्दन - चन्दन की प्रकृति तेज होती है और यह सुगंध देता है । उसी प्रकार उनके जीवन में शीतलता बनी रहे, कभी मानसिक तनाव ना हो । साथ ही उनके जीवन में परोपकार, सदाचार और संयम की सुगंध फैलती रहे ।
(५) सरसों के दाने - सरसों की प्रकृति तीक्ष्ण होती है अर्थात इससे यह संकेत मिलता है कि समाज के दुर्गुणों को, कंटकों को समाप्त करने में हम तीक्ष्ण बनें ।
इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई एक राखी को सर्वप्रथम भगवान -चित्र पर अर्पित करें । फिर बहनें अपने भाई को, माता अपने बच्चों को, दादी अपने पोते को शुभ संकल्प करके बांधे ।
इस प्रकार इन पांच वस्तुओं से बनी हुई वैदिक राखी को शास्त्रोक्त नियमानुसार बांधते हैं हम पुत्र-पौत्र एवं बंधुजनों सहित वर्ष भर सूखी रहते हैं ।
राखी बाँधते समय बहन यह मंत्र बोले –
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल: |
तेन त्वां अभिबन्धामि रक्षे मा चल मा चल ||
शिष्य गुरुको रक्षासूत्र बाँधते समय –
‘अभिबन्धामि ‘ के स्थान पर ‘रक्षबन्धामि’ कहे |
और चाकलेट ना खिलाकर भारतीय मिठाई या गुड से मुहं मीठा कराएँ।
अपना देश अपनी सभ्यता अपनी संस्कृति अपनी भाषा अपना गौरव
वन्दे मातरम्
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