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डॉ.विमलेश त्रिपाठी
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प्यार लिखना चाहता हूं...
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सुशील मानव की कविताएँ
सुशील मानव सुशील मानव की कविताएँ बहुत धीमे और चुपचाप कथा कहती
हुई-सी लगती हैं   और एक समय अपने गिरफ्त
में ले लेती हैं। इस कवि से अनहद कोलकाता का पहला परिचय हो रहा है लेकिन कहना
चाहिए कि यह कवि बार-बार अनहद पर पढ़ा और सराहा जाएगा। बहुत संक्षेप में कहने वाली
...
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कविता संवाद - 2
कविता जीवन-विवेक है  -  अच्युतानंद मिश्र (1)
नई सदी में युवाओं की कविता को आप किस दृष्टि से देखते हैं ? कविता
के लिहाज़ से नई सदी किसे कहेंगे? क्या वह ठीक 2000 से शुरू मानी जाये? अगर हम थोडा
गौर करें तो 2005 के आसपास से कविता में नये और पुराने के बीच एक लकीर...
कविता संवाद - 2
कविता संवाद - 2
anhadkolkata.blogspot.com
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अंकिता रासुरी की लंबी कविता
  अंकिता रासुरी उन कुछ युवतर कवियों में हैं जो अनुभव और स्मृतियों को
उम्दा कविता में ढालती हैं। इस प्रक्रिया में वे जाहिर तौर पर अपने अध्ययन और चिंतन
का भी इस्तेमाल करती हैं - इसी कारण यह नोट किया जाना चाहिए कि इनकी कविताओं में जरूरी
इमानदारी बची रहती है। य...
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नई सदी की युवा कविता - कुछ प्रश्नों के उत्तर
किसी समाज में कविता का बचा होना मनुष्यता के बचे
होने का प्रमाण है विमलेश त्रिपाठी नई सदी की युवा कविता पर कुछ भी कहने से पहले मैं यह स्वीकार करना जरूरी
समझता हूँ कि जब मैंने लिखना शुरू किया तब यह सदी लगभग अपने अंतिम चरण में थी –
बतौर तथ्य अगर कहूँ तो कह सकत...
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पंकज मित्र की ‘अजबलाल एम. डी. एम.’ कहानी पर युवा आलोचक मृत्युंजय पाण्डेय
किस्सा-ए-मिड डे मील बजरिए ‘ अजबलाल एम. डी. एम. ’                             मृत्युंजय पाण्डेय हम प्रयोगकाल के दौर से गुजर रहे हैं । वर्तमान समय
में सरकारें नित नए प्रयोग कर रही हैं । कभी आदिवासियों को लेकर प्रयोग हो
रहे हैं , तो कभी , किसानों को लेकर , तो ...
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क्यों देखनी चाहिए पंचलैट - स्मिता गोयल एवं यतीश कुमार
पंचलैट -   साहित्य को सिनेमा
को करीब लाने का एक साहसिक प्रयास स्मिता गोयल यतीश कुमार आंचलिक
भाषा और हिंदी साहित्य के अमर कथा शिल्पी फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी पंचलाइट पर बनी
फिल्म ' पंचलैट ' १७ नवम्बर २०१७ को भारतीय सिनमा के पटल पर
अपनी एक नई छाप छोड़ने आ गयी...
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रामलीला पर विमलेन्दु का जरूरी लेख
          पथरीले
समय में ऐसे आता था त्रेतायुग ! विमलेन्दु             ------------------------------- यह उन दिनों की बात थी जब देश में दूरदर्शन नहीं था और सिनेमा की पहुँच भी
केवल महानगरों तक ही थी. हमारी कलात्मक अभिरुचियाँ फाग, नाच और लीला जैसे कलारूपों
में...
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मनोज कुमार पांडेय की नई कहानी "जेबकतरे का बयान"
मनोज कुमार पांडेय मेरे लिए वे कथाकार बाद में हैं – दोस्त पहले हैं।
2004 में दोस्ती तब शुरू हुई थी जब मेरी कहानी पढ़कर फोन किया। तब से कई मुलाकाते
हैं और कई बाते हैं। लेकिन गौरतलब बात यह है कि इस बीच बंदे ने खूब उम्दा कहानियाँ
लिखीं और चर्चित भी हुए। मुझसे ए...
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युवतर कथाकर शहादत की नई कहानी
आशिक़-ए-रसूल शहादत Add caption           “ ये
लोग जो एक छोटी सी बात का बतंगड़ बनाकर अपनी धार्मिक भावनाओं के आहत होने की
शिकायत कर रहे है ना, सच पूछो तो इन्हें धर्म का रत्ती भर भी मतलब पता नहीं है, ” यह मेरे अब्बू ने कहा था। उन दिनों इलाके की एक मस्जिद में ए...
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प्रेमचंद की परम्परा पर विमलेन्दु का महत्वपूर्ण आलेख
क्या
प्रेमचंद की कोई परंपरा नहीं है ? विमलेन्दु प्रेमचंद हिन्दी साहित्य के तोरण-द्वार हैं. कोई भी पाठक जब हिन्दी साहित्य के प्रति प्रेमोन्मुख होता है
तो वह प्रेमचंदोन्मुख ही होता है. प्रेमचंद ने हिन्दी कथा साहित्य को जो
लोकप्रियता , पठनीयता और सम्प्रेषणीयता...
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