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नीरज द्विवेदी Neeraj Dwivedi
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लाख कमियाँ दिखें ज़माने को हम में, जिद्दी हैं खुद को अब तक बदला नहीं है।
लाख कमियाँ दिखें ज़माने को हम में, जिद्दी हैं खुद को अब तक बदला नहीं है।

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नीरज द्विवेदी Neeraj Dwivedi's posts

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दियों की दिवाली - २०१६ Diyon ki Diwali 2016
जो दिये के  तल अँधेरा  रह गया था उस दिवाली इस दिवाली  उस तमस को  भी नया दिनमान देना कुछ अँधेरे झोपड़ों पर  याद रखना इक नजऱ देखना अबकी चमकती  हर हवेली के परे संगमरमर की सतह पर  रेंगने के मायने देखना तब आँख से तुम  बूँद जब कोई झरे रोक लेना  दौड़कर  गिरते फलक के...

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सैनिक Sainik - 3
वो सैनिक है आसमान सी छाती लेकर फिरता है, धरती के हक़ में सुभाष की थाती लेकर फिरता है। वो धागा कितना दृढ़ होगा, जिसे कभी न मिली कलाई, कैसी होगी बहन वो जिसने, सौंप दिया इकलौता भाई, वो माँ भी कैसी माँ होगी, जो माँ का दर्द समझती है, घर में बूढी माँ भूखी रहकर भी, ...

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सैनिक Sainik - 2
वो सैनिक है आसमान सी छाती लेकर फिरता है, धरती के हक़ में सुभाष की थाती लेकर फिरता है। रातों के अधियारों में भी, उसकी नींद जगी रहती है, अंधड़ रेत सहारों में भी, उसकी आँख खुली रहती है, स्वप्नों के गलियारों में, उसकी बन्दूक तनी रहती है, दर्रों मैदान पहाड़ों में, ...

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सैनिक Sainik
वो सैनिक है आसमान सी छाती लेकर फिरता है, धरती के हक़ में सुभाष की थाती लेकर फिरता है। हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर, जिद्दी स्वांसों की हलचल है, जमा हुआ है रक्त, धौंकनी चलती है, कैसा ये बल है, अग्निपरीक्षा पल पल देता, सीने में भरकर हुँकार, खौल उठता है शोणित सुन...

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नवगीत - तू दंड दे मेरी खता है
नवगीत - तू दंड दे मेरी खता है ऐ मनुज तू काट मुझको दंड दे मेरी खता है, खोदकर अपनी जडें ही मृत्यु से क्यों तोलता है? धार दे चाकू छुरी में, और पैनी कर
कुल्हाड़ी, घोंप दे मेरे हृदय में, होश खो पी
खूब ताड़ी, जान ले मेरी हिचक मत बेवजह क्यों डोलता है? रुक गया क्यों,...
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