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Ashutosh Vajpeyee
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I am an astrologer, writer of books on Astrology as well as a poet
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न यों बेशर्म था।
जो किया था राम ने वो कर्म था। या मनुष्यों हेतु कोई धर्म था। कौन है जाना भला उद्देश्य को, भूलता क्यों है उसे जो मर्म था। क्र्रूरता तो देख ले तू चित्त की, पूर्व में कोई न यों बेशर्म था। चोट ठण्डा लौह ही दे लौह पे, लौह काटा वो गया जो गर्म था। 'आशु' क्या होगा न...
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राज्य राजा न कोई यहाँ रंक हो।
राज्य राजा न कोई यहाँ रंक हो। विश्व में प्रेम हो नष्ट आतंक हो। सौख्यदा निर्मला मृत्तिका हो सके, यो लगे माँ लिए सर्वदा अंक हो। सत्य का, धर्म का जो पथी हो बना, वो नहीं वेश को त्याग के कंक हो। पंकजों सी खिले जीव की चेतना, नित्य आधार चाहे बना पंक हो। 'आशु' दे ह...
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कैसे तू प्रधान है
निश्चित ही अन्नदाता तुम हो परन्तु प्रभु इसका निमित्त बनता सदा किसान है वृष्टि असमय हो गयी है तो उपज नष्ट इन्द्रकोप से वो हुआ आज हलाकान है भूमिपुत्र शासक प्रदेश का बना है किन्तु उसको भी भूमिपुत्रों का न रञ्च ध्यान है मृत्यु का वरण करने चले वो धिक् धिक् अखिले...
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कल्याणकारक शास्त्र की उपेक्षा का कारण 
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मयंक उठो
मयंक उठो
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मयंक उठो
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माँ के श्रीचरणो में एक प्रार्थना----
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माँ के श्रीचरणो में एक प्रार्थना--
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माँ लगाए 
माँ लगाए
माँ लगाए
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माँ लगाए
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