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Delhi Government Vs LG
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निरपेक्ष मतदाता जो “दिल्ली” मे सब देख रहा है।
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अर्थ द्वंद और वर्ग संघर्ष दो भिन्न चीजे हैं : सभ्यता के विकास के साथ ही अर्थ द्वंद का भी जन्म हुआ
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देशीय अर्थ व्यवस्था और चालू खाते का घाटा
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अँग्रेजी के 26 अक्षर
 
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मलाला सत्यार्थी के बहाने :
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श्रम क्रांति का वैश्विक आदर्श है गिरमिटियों का मॉरीशस
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वर्ग संघर्ष नहीं वर्ग संतुलन साम्यवादी अर्थशास्त्र का मूल है
 
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वैश्विक सीमावों के तोड़ से ही वैश्विक संसाधनो का बेहतर इस्तेमाल हो सकता है

शाश्वत अर्थशास्त्र पूरे ब्रह्मांड यहाँ तक की पूरे अन्तरिक्ष को एक मानते हुए इसे ज्ञात एवं अज्ञात संसाधनो मे वर्गीकृत करता है। इस लिहाज से पृथ्वी पे विद्यमान विश्व भी शाश्वत अर्थशास्त्र के लिए एक ही है। शाश्वत अर्थशास्त्र संसाधनो के अनुकूलतम दोहन की बात करता है लेकिन ये संसाधनों का वर्गीकरण वह मानव निर्मित सीमावों के कृत्रिम लकीरों के पार करना चाहता है। शाश्वत अर्थशास्त्र पूरे विश्व को एक मानते हुए संसाधनो को स्थैतिकता से गतिमान बनाए जाने के लिए पारगमन नियमों को लचीला बनाए जाने की हद तक वकालत करता है। इसलिए देश सीमा जैसे बंधन कृत्रिम है यदि हम अर्थव्यवस्था और अर्थव्यवस्था से बढ़ कर जैविक अजैविक संसाधनों के विकास की बात करते हैं।
इसी व्यवस्था की वकालत करते हुए शाश्वत अर्थशास्त्र युद्ध और रक्षा खर्चों को बेमानी गैर जरूरी अनुत्पादक और कृत्रिम मानता है। आज प्रत्येक देश का अमूमन 20% बजट रक्षा खर्च है जो की बिलकुल कृत्रिम है। यदि सभी देश परस्पर सौहाद्र और भाईचारे पे परिवार की तरह रहें तो इसकी जरूरत ही नहीं है। कइयों का यह तर्क हो सकता है की भिन्न भिन्न भाषा संस्कृति देहयष्टि जलवायु के देश कैसे एक परिवार के रूप मे परिभाषित हो सकते हैं? मेरा मानना है की हो सकते हैं। भारत इसका आदर्श हो सकता है जिसके भिन्न भिन्न प्रदेश भिन्न भिन्न भाषा संस्कृति देहयष्टि जलवायु के हैं लेकिन इनके आपस के पारगमन या सीमाओं की रक्षा का कोई भी खर्च नहीं है, मुझे लगता है यह मोडेल विश्व परिवार पे लागू किया जा सकता है।

पृथ्वी मे संसाधनो का सर्वोत्तम अनुकूलतम दोहन “वसुधैव कुटुंबकम” मे छुपा है।

मेरा ऐसा मानना है की पृथ्वी मे संसाधनो का सर्वोत्तम अनुकूलतम दोहन “वसुधैव कुटुंबकम” मे छुपा है। और ऐसा विश्व को एक परिवार मान के किया जा सकता है। उदाहरण के तौर मे आप नेपाल को ही लेले इसके पास विश्व को देने के लिए अपार संसाधन है लेकिन उसके पास खुद का बाज़ार नहीं है। पूरे विश्व मे असंगठित रूप मे नेपाल के लोग होटल व्यवसाव मे लगे है अगर इसे संगठित रूप दे के वैश्विक स्तर के होटल प्रबंधन संस्थान नेपाल मे खोले जाएँ तो तो जो नेपाली बिना शिक्षा के ही बेहतरीन होटल सेवाएँ दे रहे हैं पेशेवर शिक्षा के बाद तो इनके सेवाओं मे मूल्य संवर्धन हो जाएगा जिससे इन्हे उचित और आकर्षक आय प्राप्त होगी, सब कुछ तो मौजूद है जरूरत है एक दृष्टि की। यहाँ सिर्फ होटल प्रबंधन संस्थान ही नहीं विश्व के पर्यटकों के लिए पर्यटन स्थल है अतः होटल उद्यम भी यहाँ सफल हो सकता है, जल की प्रचुरता है प्राकृतिक बिजली का बहुत बड़ा श्रोत हो सकता है ऐसे ऐसे अनेक विश्व मे उदाहरण हैं जहां दृष्टि डालने की जरूरत है। वैश्विक स्थैतिक संसाधनों को गति देकर ही हम विश्व के 700 करोड़ लोगों के हाथ मे काम खुशहाली समृद्धता और शांति ल सकते है। आगे आने वाला युग आर्थिक गतिविधियों द्वारा ही विश्व शांति लाने का है और इसके द्वारा ही हम आतंकवाद को भी खत्म कर सकते हैं। जब सबको काम सबको खुशी रहेगी तो आतंकवाद अपने आप खत्म हो जाएगा।
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Who is Hindu
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नदी मे बालू
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अनुकूल शिक्षा, स्वास्थय, महिला सशक्तिकरण, बाल विकास एवं दलित विकास से राज्यों की अर्थव्यवस्था को गति दी जा सकती है.
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