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kamlesh kumar diwan
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मेरे विचार से आधुनिक लोकतंत्र मे देश के प्रति #समर्पण ,कर्त्तव्यनिष्ठा और ईमानदारी आज के युग मे अनिवार्य अभिषाप है लोग इसे भुगतने को मजबूर किये जाते है ।
कमलेश कुमार दीवान
11/8/18
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मेरे विचार से लोकतांत्रिक व्यवस्था मे नेतृत्व की सादगी,विनम्रता और अभिमान रहित जीवन ही सफलता की कुंजी है इनके बगैर सत्ता और शासन करने की इच्छा पूर्ण नहीं हो सकती है।
कमलेश कुमार दीवान
27/7/17
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#अपनी दिशा ....एक विचार
मेरे विचार से "जब हम सही नहीं होते हैं तब ईश्वर भी हमारी मदद नहीं करते हैं ।प्रगति मे बाधाएँ, कार्य मे रूकावट, अपनो से मनमुटाव बिगाड़ यह सब उसी स्थिति का ध्योतक है हमें अपनी दिशा सही रखना चाहिए ,समीक्षा और मूल्यांकन आवश्यक हैं"।
कमलेश कुमार दीवान
5/5/18
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“भारतवर्ष मे होली का पर्व त्यौहार “


होली भारतवर्ष का पवित्र त्यौहार है।यह हमारे देश मे फागुन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है  तदुपरांत दूसरे दिन रंगोत्सव ।फागुन माह प्रकृति और जीवन के आह्लाद से परिपूर्ण होता है ।रंगोत्सव तो प्रतीक है हम सब भेदभाव से रहित यह पर्व मनाते हैं।परम्पराओं मे आज भी अनेक वर्जनाओं के साथ अति पवित्रता से मनाया जाने वाला यह उत्सव प्रकृति की पूर्णता का एक चक्र भी है जिसमें सब कुछ बदल जाता है।सेमल पलाश खिलते हैं ।महुओं के फूल गिरने लगते हैं।फसलों के आगमन का समय है तब नई उमंगों के जन्मने का विहान भी है। होली और रंगोत्सव तो प्रतीक हैं ,दिखाई देने वाले नजारे हैं वस्तुतः मानव  के अंतर्मन के द्वंद और उमंग का निरंतर चलते रहते हैं जिनका प्रस्फुटन फागुन मे होता है।अर्थात् समूचा फागुन माह शुभ है ।होली के पावन पर्व और रंगोत्सव पर बहुत बहुत शुभकामनाएँ ।मेरा यह गीत “ऐसे फागुन आएँ”प्रस्तुत है ……

कमलेश कुमार दीवान

होशंगाबाद

1/3/18

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“भारतवर्ष मे होली का पर्व त्यौहार “


होली भारतवर्ष का पवित्र त्यौहार है।यह हमारे देश मे फागुन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है  तदुपरांत दूसरे दिन रंगोत्सव ।फागुन माह प्रकृति और जीवन के आह्लाद से परिपूर्ण होता है ।रंगोत्सव तो प्रतीक है हम सब भेदभाव से रहित यह पर्व मनाते हैं।परम्पराओं मे आज भी अनेक वर्जनाओं के साथ अति पवित्रता से मनाया जाने वाला यह उत्सव प्रकृति की पूर्णता का एक चक्र भी है जिसमें सब कुछ बदल जाता है।सेमल पलाश खिलते हैं ।महुओं के फूल गिरने लगते हैं।फसलों के आगमन का समय है तब नई उमंगों के जन्मने का विहान भी है। होली और रंगोत्सव तो प्रतीक हैं ,दिखाई देने वाले नजारे हैं वस्तुतः मानव  के अंतर्मन के द्वंद और उमंग का निरंतर चलते रहते हैं जिनका प्रस्फुटन फागुन मे होता है।अर्थात् समूचा फागुन माह शुभ है ।होली के पावन पर्व और रंगोत्सव पर बहुत बहुत शुभकामनाएँ ।मेरा यह गीत “ऐसे फागुन आएँ”प्रस्तुत है ……

कमलेश कुमार दीवान

होशंगाबाद

1/3/18

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होली शुभ हो फागुन माह पर मेरा यह गीत "ऐसे फागुन आएँ" आपको सादर समर्पित हैं सुनिएगा।धन्यवाद
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