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kamlesh kumar diwan
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बसंत बजट और हम
कमलेश कुमार दीवान
मै जानता हूँ बसंत,
तुम जरूर आओगे
हर बार की तरह
लगभग हर तरफ बिछ जाती है
पीली पड़कर गिरती उड़ती पत्तियाँ
लगभग हर तरफ उठता है धुँआ
और बाड़ो से छनकर फैलती है एक गंध
जो नथुनो मै समाती हुईदहका जाती है
अंदर तक पल रहे बीहड़ उजाड़ वनों को ।

ओह! बसंत
तुम फिर फिर सुलगाओगे ,
हर बार जलाओगे
लगभग हर ओर से बुझते हुये मन को ,
अपनी आभाएँ बिखेरते
दहकते ,अकेले खड़े रहते पलाश
जंगल मे होते हुये भी हमारे दिल मे है
जो प्राकृतिक बजट के साथ
फूलते फलते ,झरते ..खिरते जाते हैं
बसंत आने से उधर वन सहमते है
बजट आने से इधर मन थरथराते हैं
समझ नही आता कि आखिर क्यों दोनो
साथ साथ आते है ।

मैं जानता हूं बसंत
तुम जरूर आओगे
हर बार की तरह
तुम, फिर फिर सुलगाओगे
हर बार जलाओगे
क्योकि तुम्हे आना है उन सपनो को रौंधने
जो उसनींदे युवाओं के अन्दर महक रहे है
ये महुये के फूल, तेदूये पत्ते आँवले अचार
और वनो की बहार
सब कि सब बजट हो गई है
जो कटौतियाँ लाती है
निर्जीव मेजे पिटवाती है ,
किसी बच्चे की पीठ ठोकने के अवसर
जाने कबके हिरा गये है
ये *नासमिटे बजट और *धुआँलिये बसंत फिर फिर आ जाते

*नासमिटे और धुआलिये ग्रामीण क्षैत्रौ मे माँ द्वारा दी जाने वाली मीठी झिड़कियाँ है।

कमलेश कुमार दीवान
15/38 मित्र विहार कालोनी
सिविल लाइंस मालाखेड़ी रोड होशंगाबाद (म.प्र) 

चुनाव सुधार पर हिन्दुस्तान दिल्ली दिनाँक २१ जनवरी १९९६ मे प्रकाशित मेरा लेख "थकी शिराओं मे अवरूद्ध लोकतँत्र " देखें।चुनाव सुधारो की दिशा लोकत्रातिक हो।



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विजयादशमी शुभ हो "लोकतंत्र मे एक बूराई वोट" तनाव का विसर्जन करे

भारतीय लोकतँत्र मे वोट की खातिर राजनीति से समूचे समाज मे कटुता और वैमनस्यता की दीवारे खड़ी हो गयी हैं । आक्रामक बयानो से माहौल और अधिक दूषित हुआ है ।राजनैतिक दलो के आपसी अंर्तविरोध से गाँठे उभर रही हैं जिनकी सर्जरी समठय के साथ बेहद आवश्यक है । निवेदन है कि महामहिम राष्ट्रपति जी संज्ञान लेकर समझाईस देते तो बेहतर होता ।
आज के समय मे लोकतँत्र के लिये सबसे बेहतर नीति "सबका साथ सबका विकास " ही है जिसे माननीय प्रधान मंत्री जी ने अपनाया और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसकी प्रसंशा भी हूई है ।मै समझता हूँ यही नीति राजनैतिक "गाँठो" की सबसे बेहतर दवाई है जिससे बड़ी हो रही राजनैतिक गाँठौ को गलाया जा सकता है अन्यथा वे और बड़ी होंगी, कैंसर बनेंगी फिर सर्जरी से तकलीफ हो सकती है ।
अतएव जनता को धैर्य के साथ मौन धारण कर सब कूछ सहन करते हुये देश के लोकतंत्र को सुखद और बेहतर बनाना है तब राजनीति मे आक्रामक तेवर का विर्सजन करना ही होगा यही सबसे बड़ी बुराई है ।दशहरा बुराईयों के दहन को आमंत्रित कर रहा है ।
सभी देशवासियों को दशहरा के पावन पर्व पर शूभकामनायें हैं ।

कमलेश कुमार दीवान
10/10/2016
kamleshkumardiwan.youtube.com
kamleshkumardiwan.blogspot.com



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