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Himanshu Rajput
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Mature enough to face Problem. Crazy Enough to laugh on that.
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वहम
बहुत सर्द थी कल की रात...  ख़्यालात भी रजाई में जैसे सिकुड़ से रहें थे... कोई दस्तक सी सुनाई दी थी ज़हन के दरवाजे पर.. क्या वो तुम थी... शायद नहीं  वहम  होगा ...हाँ वही होगा...  फिर आया होगा ठहरने एक रात मेरे छोटे से घर में... दोस्त है मेरा , पुराना दोस्त... म...

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अन्नदाता के लिए कुछ अक्षर
काली बदरियों को सूँझी फिर से शरारत छप्पर गरीब का रात भर आँसू बहाता रहा रोता रहा उसका छोटा बच्चा भी शायद भूखा होगा हाँ शायद भूखा ही होगा आखिर उसका पिता एक अन्नदाता जो है, वो अन्नदाता जिसके जयकारे लगते हैं सभाओ में सब नेताओ की वो अन्नदाता जिसकी चिंता हर सरकार...

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अब वो बेफिक्र सुबहें नहीं होती, अब वो रंगीन शामें नहीं होतीं...
मार्बल बिछ गया है अब घर के चबूतरे पर बारिश पड़ भी जाए तो मिटटी की ख्श्बू नहीं आती... शाम होते ही बंद हो जाते हैं दरवाजे घर के शुरू हो जाती हैं रंगा-रंग कहानियाँ टीवी पर, अब वो बाहरी दलानो में हुक्के गुड़गुड़ाते बुजुर्गों की बैठकें नहीं होती.. नीम भी अब कुछ तन्...

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दो पल मुझे सुकूँ के मिले...
रात की गुमशुम सी खामोशियों में पलकों की दहलीज़ पे बैठे कुछ झूठे ख्वाब नींद की राह तकते हैं... मावस की रात के गहन तिमिर में अंतर्मन के बिछोने पे लेटी कुछ हसरतें चैन के लम्हों का इन्तजार करती हैं... खिड़की से दूर कहीं जलती हुई कोई इच्छाओ की चिता दिखाई देती है.....

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तुम जा रही थी
शाम को कमरे के रोशनदान से झाँक के देखा  शायद तुम मेरी गली से गुजर रही थी  चन्दन सा महक रहा था सारा मुहल्ला,  तुम सावन में कोकिला सी चहक रही थी  अंधियारे के कैनवास पे तुम्हारे ख्यालों के रंगों से  मैंने तुम्हारा एक चित्र उकेर दिया  देखता हूँ चुपके से एक टक त...

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ट्विटर के गलियारे से.…
इस पोस्ट के द्वारा ट्विटर पे लिखे गए अपने कुछ सूक्ष्म-काव्य आप लोगो के साथ साँझा कर रहा हूँ। बहुत सारे मित्रों ने, जो कि ट्विटर पर सक्रिय नहीं हैं, मुझसे आग्रह किया था कि मैं अपने कुछ ट्वीट उनके साथ साँझा करूँ। अपने मित्रों की फरमाइश को ध्यान में रखते हुए य...

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मेरे अरमानों की बरसात अभी बाकि है
कुछ हसरतें पूरी हुई
हैं मेरी , मेरे अरमानों की बरसात अभी बाकि है अभी से महफ़िल ख़त्म मान
ली तुमने , मेरी बात  अभी   बाकि है छोड़कर चल दिए अभी से
तुम मेरा साथ अभी तो मेरे हमसफ़र सारी
रात बाकी है मेरे अरमानों की बरसात
अभी बाकि है ये चंद हसी लम्हें जो
गुजारें हैं ...

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ये बाबरी सी बारिशें और तेरी यादों का सैलाब
ये बाबरी सी बारिशें और
तेरी यादों का सैलाब ज़िन्दगी मेरी जैसे इन्हीं
लम्हों का नाम है ख्याल तेरी चाहतो के, तेरा
मेरे साथ होने का एहसास ज़िन्दगी मेरी जैसे इन्हीं
लम्हों का नाम है मेरे लम्हें, मेरे पल; मेरे
आज, मेरे कल मेरे किस्से,मेरी बातें;
मेरे दिन, मेरी रात...

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Himanshu Rajput commented on a post on Blogger.
Really nice poetry...keep it up..:)
कमी न थी
कमी न थी
lexengineglobe.blogspot.com

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ये तुम हो या तुम्हारे होने का अहसास
हवाओं  ने छेड़े हैं आज फिर से मधुर गान चाँदनी से भरा है  सारा आसमान ये जो मौसम  ने बदली है करवट आज ये तुम हो या तुम्हारे होने का अहसास।।।। करने लगा है दिल मेरा खुद से खुद ही बात मिली  है जैसे बिन माँगे खुशियों कि सौगात बदला है समां ये , हुई जैसे सावन की पहल...
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