Profile cover photo
Profile photo
Divya vaani
4 followers -
Best Astrologer in Delhi NCR And Gurgaon
Best Astrologer in Delhi NCR And Gurgaon

4 followers
About
Posts

Post has attachment
कुंडली के इन दोषों के कारण होती है शादी में देर

Shadi Mein Deri Ke Karan| Vivah Mein Deri Ke Karan | कुछ लोग सुयोग्य होते हैं और वे शादी करने के लिए प्रयास भी करते हैं, लेकिन सही समय पर उनकी शादी नहीं हो पाती है। इस संबंध में ज्योतिष की मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में कुछ खास दोष होते हैं, उनकी शादी में बाधाएं आती हैंVi। आइए जानते है ये दोष कौन-कौन से हैं…


शादी में देरी की कारण -

1. कुंडली के सप्तम भाव में बुध और शुक्र दोनों हो तो विवाह के लिए बातें चलती रहती हैं, लेकिन विवाह देरी से होता है।

2. कुंडली का चौथे भाव या लग्न भाव में मंगल हो, सप्तम भाव में शनि हो तो महिला की रुचि शादी में नहीं होती है।

3. जिन लोगों की कुंडली के सप्तम भाव में शनि और गुरु होते हैं, उनकी शादी देर से होती है।

4. कुंडली में चंद्र से सप्तम भाव में गुरु हो तो शादी देर से होती है। यही बात चंद्र की राशि कर्क से भी मानी जाती है।

5. कुंडली के सप्तम भाव में कोई शुभ ग्रह योग न हो तो विवाह में देरी होती है।

6. सूर्य, मंगल और बुध लग्न भाव में हो और गुरु बारहवें भाव में हो तो व्यक्ति आध्यात्मिक होता है और इस वजह से उसके विवाह में देरी होती है।

7. लग्न भाव में, सप्तम में और बारहवें भाव में गुरु या कोई शुभ ग्रह योग न हो और चंद्र कमजोर हो तो विवाह देर से होता है।

8. महिला की कुंडली में सप्तम भाव का स्वामी या सप्तम भाव शनि से पीड़ित हो तो विवाह देर से होता है।

9. राहु की दशा में शादी हो,या राहु सप्तम को पीडित कर रहा हो,तो शादी होकर टूट जाती है,यह सब दिमागी भ्रम के कारण होता है।
www.divyavaani.com
Acharya M.K.MISHRA
Ph.0124 2303769 Mb. 9999282754
Photo
Add a comment...

Post has attachment
जानिए श्रीगणेश की किस मूर्ति को घर में स्थापित करने से होते है क्या फायदे

Lord Ganesha Idol Benefits : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, श्रीगणेश के अनेक रूपों की आराधना भी विशेष कार्य सिद्धियों के लिए की जाती है। श्रीगणेश के इन रूपों का अगर विधि-विधान से पूजन कर पूजा घर में स्थापित किया जाए तो हर समस्या का निदान संभव है और जीवन का हर सुख प्राप्त होता है। आज हम आपको बता रहे है कि यदि श्रीगणेश की विभिन्न मूर्तियों में से कोई एक अपने घर पर स्थापित करें, तो इससे आपको क्या लाभ होंगे।

चांदी के गणेश

जो लोग धन की इच्छा रखते हैं, उन्हें चांदी से निर्मित गणेश प्रतिमा की स्थापना व पूजा करनी चाहिए। इन्हें अपने घर के पूजा घर में स्थापित कर दूर्वा चढाने से धन-सम्पति में वृद्धि होती है।

मूंगा के गणेश

मूंगा लाल रंग का एक रत्न होता है। इससे निर्मित श्रीगणेश की प्रतिमा को पूजा स्थान पर स्थापित करने व रोज़ पूजा करने से शत्रुओं का भय समाप्त हो जाता है।

पन्ना के गणेश

पन्ना हरे रंग का एक रत्न होता है। इससे निर्मित श्रीगणेश की प्रतिमा को घर में स्थापित कर पूजा करने पर बुद्धि व यश प्राप्त होता हैं। विद्यार्थियों के लिए पन्ने के गणेशजी की पूजा करना श्रेष्ठ होता है।

चंदन के गणेश

चन्दन की लकड़ी से निर्मित श्रीगणेश की प्रतिमा घर में कहीं भी स्थापित कर सकते हैं। इससे घर में किसी प्रकार की विपदा नहीं आती है। साथ ही परिवार के सदस्यों में सामंजस्य बना रहता है।

बांसुरी बजाते गणेश

यदि आपके घर में रोज़ क्लेश या विवाद होता है तो आपको बांसुरी बजाते हुए श्रीगणेश की तस्वीर या मूर्ति घर में स्थापित करनी चाहिए। बांसुरी बजाते हुए श्रीगणेश की पूजा करने से घर में सुख-शांति का वातावरण रहता है।

हाथी पर बैठे गणेश

यदि आप धन की इच्छा रखते है तो आपको हाथी पर बैठे श्रीगणेश की पूजा करनी चाहिए। हाथी पर विराजित श्रीगणेश की पूजा करने से पैसा, इज्जत व शौहरत मिलती है। हाथी पर विराजित श्रीगणेश की पूजा करने से पैसा, इज़्ज़त व शौहरत मिलती है।

नाचते हुए गणेश

नाचते हुए गणेश की पूजा करने से मन को शांति का अनुभव होता है। यदि आप किसी तनाव में हैं तो आपको प्रतिदिन नाचते हुए श्रीगणेश की पूजा करनी चाहिए।

कमल पर बैठे गणेश

कमल पर बैठे गणेशजी धन-सम्पति प्रदान करने वाले हैं। जिन लोगों को धन-सम्पति की इच्छा हो उन्हें कमल पर बैठे गणेशजी की पूजा करनी चाहिए। निर्धन व्यक्ति रोज़ गणेशजी के इस स्वरुप की पूजा करे तो धन संबंधी उनकी हर मनोकामना पूरी हो सकती है।

सफ़ेद रंग के गणेश

जीवन में शांति चाहिए तो सफ़ेद रंग की गणेश प्रतिमा का पूजन करना चाहिए। सफ़ेद रंग की गणेश प्रतिमा की पूजा करने से जीवन के हर क्षेत्र में शांति का अनुभव होता है।

बाल गणेश

यदि आप संतान चाहते है तो इसके लिए भगवान श्रीगणेश के बाल स्वरूप का पूजन करना चाहिए। रोज़ बालगणेश की प्रतिमा का पूजन कर लड्डुओं का भोग लगाएं व उत्तम संतान के लिए प्रार्थना करें।

सफ़ेद आंकड़े के गणेश

ज्योतिष उपायों में सफ़ेद आंकड़ा (एक प्रकार का पौधा) की जड़ से निर्मित श्रीगणेश का विशेष महत्व है। इसे श्वेतार्क गणपति भी कहते हैं। श्वेतार्क गणपति को घर में स्थापित कर पूजा करने पर ऊपरी बाधा का असर नहीं होता।
www.divyavaani.com
Acharya M.K.MISHRA
Ph.0124 2303769 Mb. 9999282754

Photo
Add a comment...

Post has attachment
यदि आपको हो रही है लगातार धन हानि तो करें ये उपाय

ज्योतिष शास्त्र में कुछ ऐसे उपाय बताएं गए है जिनको करने से लगातार हो रही धन हानि से छुटकारा पाया जा सकता है। आइए जानते है

पहला उपाय
रात को सोते समय सर के पास एक लोटे में दूध भरकर रखें। सुबह ये दूध बबूल की जड़ में चढ़ा दें। इससे बुरी नज़र की वजह से हो रही धन हानि रूकती है, धन लाभ होता हैं।

दूसरा उपाय
रोज़ गणेशजी की पूजा करते समय दूर्वा जरूर चढ़ाएं। साथ ही, श्री गणेशाय नमः का जप कम से कम 108 बार करें। इस उपाय से हानि रूकती है और सुख-समृद्धि बढ़ती है।

तीसरा उपाय
गुरुवार को शिवलिंग पर हल्दी की गांठ चढ़ाएं। इस उपाय से भाग्य की बाधाएं दूर होती है और धन लाभ होता है।

चौथा उपाय
शुक्रवार को महालक्ष्मी की पूजा करें और उनकी फोटो या मूर्ति के सामने बैठकर ॐ श्रीं नमः मंत्र का जप 108 बार करें। इस उपाय से महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और पैसों की तंगी दूर होती है।

पांचवा उपाय
सोमवार को शिवलिंग पर कच्चा दूध चढ़ाएं और इस उपाय से कुंडली के दोष दूर होंगे और धन की हानि रूकती है।
www.divyavaani.com
www.astrodivya.com
AcharyaM.K.MISHRA
Ph.0124 2303769 Mb.9999282754

Photo
Add a comment...

Post has attachment
कुंडली के ये योग बताते है की आपको होगा धन

ज्योतिष के अनुसार कुंडली से किसी भी व्यक्ति के जीवन से जुड़ी सभी बातें मालूम हो सकती हैं।यहां जानते हैं कुंडली के कुछ ऐसे योग, जिनकी वजह से व्यक्ति को धन लाभ हो सकता है। ये हैं कुंडली के धन से जुड़े योग…

1.लग्न भाव का स्वामी द्वितीय भाव में हो और द्वितीय भाव का स्वामी ग्याहरवें भाव में हो तो अचानक धन लाभ हो सकता है।

2. कुंडली में चंद्रमा से तीसरे, छठे, दसवें या ग्यारहवें भाव में शुभ ग्रह होंगे तो ये शुभ योग होता है।

3. कुंडली के पंचम भाव में चंद्र एवं मंगल दोनों हों और पंचम भाव पर शुक्र की दृष्टि हो तो ये धनदायक योग है।

4. चंद्र और मंगल एक साथ हों, धन भाव (दूसरा भाव) और लाभ भाव (ग्याहरवां भाव) के कारक ग्रह एक साथ चतुर्थ भाव में हों तथा चतुर्थ भाव का स्वामी शुभ हो तो धन लाभ होता है।

5. कुंडली के द्वितीय भाव में मंगल तथा गुरु की युति हो तो शुभ योग है।

6. धन भाव (दूसरा भाव) का स्वामी अष्टम भाव में तथा अष्टम भाव का स्वामी धन भाव में हो तो धन लाभ होता है।

7. कुंडली के पंचम भाव में बुध हो तथा लाभ भाव (दूसरा भाव) में चंद्र-मंगल की युति हो।

8. गुरु नवम भाव का स्वामी होकर अष्टम भाव में हो तो शुभ रहता है।

9. वृश्चिक लग्न कुंडली में नवम भाव में चंद्र और बृहस्पति की युति हो तो धन लाभ होता है।

10. मीन लग्न कुंडली में पंचम भाव में गुरु-चंद्र की युति होती है तो अचानक धन लाभ हो सकता है।

11. कुंभ लग्न कुंडली में गुरु और राहु की युति लाभ भाव (दूसरा भाव) में होती है तो शुभ रहता है।

12. चंद्र, मंगल, शुक्र ये तीनों ग्रह दूसरे भाव में होंगे तो लाभ हो सकता है।

13. कन्या लग्न कुंडली के दूसरे भाव में शुक्र व केतु होते हैं तो लाभ के योग बनते हैं।

14. तुला लग्न कुंडली के लग्न भाव में सूर्य-चंद्र तथा नवम भाव में राहु हो तो श्रेष्ठ रहता है।

15. मीन लग्न कुंडली में ग्यारहवें भाव में मंगल हो तो लाभ होता है।
www.divyavaani.com
www.astrodivya.com
Acharya M.K.MISHRA
Ph.0124 2303769Mb.9999282754

Photo
Add a comment...

Post has attachment
जन्म कुंडली के ये योग बताते है आपके पास कब होगा अपना मकान



  

 

 

 

जो लोग किराए के मकान में रहते हैं, उनका सिर्फ एक ही सपना होता है कि उनका भी एक छोटा ही सही, लेकिन सुंदर सा मकान हो। जहां वह निश्चिंत होकर अपने परिवार के साथ रह सकें। न मकान मालिक की टेंशन हो और न ही दूसरे किराएदारों की झिकझिक।



ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, किसी भी व्यक्ति की जन्म कुंडली देखकर यह बताया जा सकता है कि उस व्यक्ति का कभी अपना मकान भी होगा या नहीं, और यदि होगा तो यह स्थिति कब बनेगी? आज हम आपको कुंडली के उन योगों के बारे में बता रहे हैं, जो किसी भी व्यक्ति के स्वयं के मकान के बारे में बताते हैं-

1. भूमि का कारक ग्रह मंगल है। जन्मपत्री के चौथे भाव से भूमि व भवन सुख का विचार किया जाता है। वैसे तो चौथे भाव के स्वामी (चतुर्थेश) का केंद्र ( कुंडली का लग्न, चौथा, सातवां व दसवां घर) या त्रिकोण ( कुंडली का लग्न, पांचवां व नौवां घर) में होना उत्तम भवन प्राप्ति का योग बनाता है। मंगल के साथ चौथे भाव का स्वामी, पहले भाव का स्वामी व नौवे भाव का स्वामी अच्छी स्थिति में हो व शुभ ग्रहों के साथ हो तो भवन प्राप्ति का अच्छा संकेत है।

2. जन्म कुण्डली के चौथे भाव का स्वामी किसी शुभ ग्रह के साथ 1, 4, 5, 7, 9 व 10 वें भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति को अपनी मेहनत से निर्मित उत्तम सुख-सुविधाओं ये युक्त भवन प्राप्त होता है।

3. जन्मकुण्डली के चौथे भाव का स्वामी (चतुर्थेश) पहले (लग्न) भाव में हो और पहले (लग्न) भाव का स्वामी (लग्नेश) चौथे भाव में हो तो भी ऐसा व्यक्ति अपनी मेहनत से मकान बनाता है।

4. जन्मकुण्डली के चौथे भाव का स्वामी (चतुर्थेश) एवं दसवें भाव का स्वामी (दशमेश) चंद्रमा और शनि के साथ हो तो ऐसे व्यक्ति का भवन दूसरों से अलग, सुंदर व आकर्षक होता है।

5. जन्मकुण्डली के चौथे भाव में चंद्र और शुक्र एक साथ हो या चौथे भाव में कोई उच्च राशिगत (उच्च राशि में स्थित ग्रह) हो, चौथे भाव का स्वामी केंद्र-त्रिकोण (1, 4, 5, 7, 9, 10 वें) भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति के पास अपना बंगला या महलनुमा भवन होता है, जिसमें कलात्मक बगीचा या जलाशय होता है।

6. जन्मकुण्डली के चौथे भाव का स्वामी (चतुर्थेश) एवं लग्न का स्वामी(लग्नेश) चौथे भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति को अचानक भवन की प्राप्ति होती है।
www.divyavaani.com
www.astrodivya.com
Acharya M.K.MISHRA
Ph.0124 2303769 Mb.9999282754

Photo
Add a comment...

Post has attachment
Palmistry Little Finger -छोटी उंगली भी बता देती है आपके स्वभाव की ये खास बातें

आमतौर पर हमारी हथेली की सबसे छोटी उंगली से अधिक भारी और बड़े काम नहीं किए जा सकते हैं। यह उंगली अन्य उंगलियों के साथ मिलकर ही भारी काम करने में मदद कर पाती है, लेकिन हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार छोटी उंगली भी कई बड़ी बातें बता देती है। कनिष्ठा उंगली की लंबाई और मोटाई के साथ ही इस पर स्थित अलग-अलग निशान और रेखाओं का अध्ययन किया जाता है। इन छोटे-छोटे संकेतों के आधार पर व्यक्ति के स्वभाव और भविष्य की बातें मालूम हो जाती हैं।

हथेली, अंगूठा, उंगलियों की बनावट और रेखाओं के साथ ही अलग-अलग निशानों के आधार पर व्यक्ति के भविष्य और स्वभाव की बातें बताने वाली विद्या है,

1. यदि हथेली में छोटी उंगली सामान्य लंबाई से बहुत छोटी है तो ऐसा व्यक्ति जल्दबाजी में काम करने वाला होता है। ऐसे लोग नासमझ हो सकते हैं और ये व्यवहार कुशल भी नहीं होते हैं।

2. जिन लोगों की यह उंगली आगे से नुकीली होती है, वे बुद्धिमान होते हैं। ऐसे लोगों का दिमाग बहुत तेज चलता है।

3. छोटी उंगली अधिक लंबी होने पर व्यक्ति बहुत चालक हो सकता है। ऐसे लोग अपनी चतुराई से कार्यों में सफलता प्राप्त कर लेते हैं।

4. जिन लोगों की हथेली में छोटी उंगली सामान्य लंबाई वाली रहती है, वे लोग घर-परिवार और समाज में उचित मान-सम्मान प्राप्त करते हैं। अपनी योग्यता के बल पर कार्यों में सफलता प्राप्त करते हैं।

5. यदि छोटी उंगली का अंतिम भाग चौकोर दिखाई देता है तो व्यक्ति दूरदर्शी होता है। ऐसे लोग विलक्षण प्रतिभा के धनी होते हैं।

6. जिन लोगों की छोटी उंगली टेढ़ी होती है, वे जीवन में कई बार अयोग्य साबित हो सकते हैं। ये लोग ठीक से कार्य नहीं कर पाते हैं।

7. जिन लोगों की छोटी उंगली सुंदर दिखाई देती है, वे लोग सर्वगुण संपन्न होते हैं।

8. यदि किसी व्यक्ति के हाथ में छोटी उंगली (लिटिल फिंगर) और अनामिका उंगली (रिंग फिंगर), दोनों बराबर हैं तो व्यक्ति राजनीति में प्रभावी होता है। ऐसे लोग अच्छे राजनीतिज्ञ हो सकते हैं।

9. यदि छोटी उंगली, अनामिका उंगली की ओर झुकी हुई दिखाई देती है तो व्यक्ति अच्छा व्यापारी होता है।

10. जिन लोगों की छोटी उंगली, अनामिका उंगली से दूर होती है, वे लोग अपने कार्य को पूरी आजादी से करना पसंद करते हैं।

11. यदि सबसे छोटी उंगली अच्छी स्थिति में हो, सुंदर हो, भरी हुई हो, लंबी हो तो व्यक्ति दूसरों को बहुत जल्दी प्रभावित करने वाला होता है।

12. यदि किसी व्यक्ति की छोटी उंगली का पहला भाग (ऊपर वाला हिस्सा) अधिक लंबा होगा तो वह बातचीत का शौकीन होता है। इन लोगों को दूसरों को संबोधित करने की विशेष क्षमता होती है।

13. इस उंगली का दूसरा भाग (बीच वाला हिस्सा) अधिक लंबा हो तो व्यक्ति बहुत चतुर होता है। इनका व्यवहारिक पहलू मजबूत होता है।

14. यदि छोटी उंगली का अंतिम भाग (नीचे वाला हिस्सा) अधिक लंबा हो तो व्यक्ति खरीदारी के मामले में चतुर होता है।

15. यदि लिटिल फिंगर और इंडेक्स फिंगर की लंबाई बराबर हो तो वह व्यक्ति कुशल राजनीतिज्ञ होता है। ऐसे लोग अपनी योजनाओं से कार्य पूर्ण कर लेते हैं।

16. हथेली की सबसे लंबी उंगली (मध्यमा उंगली) और सबसे छोटी उंगली की लंबाई बराबर हो तो व्यक्ति विज्ञान के क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल करता है।

17. यदि छोटी उंगली, अनामिका उंगली के नाखून तक पहुंचती है तो व्यक्ति लेखक, कलाकार और रचनात्मक कार्य करने वाला होता है।

18. यदि छोटी उंगली के पहले भाग (ऊपर वाला हिस्सा) पर खड़ी रेखाएं होती हैं तो व्यक्ति अच्छा वक्ता होता है। इस स्थिति के साथ ही हथेली अन्य बातें भी सामान्य होनी चाहिए।

19. छोटी उंगली के पहले भाग पर आड़ी रेखाएं हों तो व्यक्ति बहुत बातूनी होता है। ऐसे लोग झूठ भी बोलते हैं।

20. यदि उंगली के पहले भाग पर त्रिभुज का निशान बना है तो व्यक्ति धर्म और आध्यात्म में रुचि रखने वाला होता है।

21. छोटी उंगली के पहले भाग पर जाली का निशान हो तो व्यक्ति चोरी करने वाला या गलत आदतों का शिकार होता है।

22. यदि किसी व्यक्ति की छोटी उंगली के दूसरे भाग पर अस्पष्ट रेखाएं होती हैं तो व्यक्ति अनैतिक कार्य करने वाला हो सकता है।

23. इस उंगली के दूसरे भाग पर आड़ी रेखाएं होती हैं तो व्यक्ति भावुक होता है।

24. छोटी उंगली के दूसरे भाग पर क्रॉस का निशान होने पर व्यक्ति का जीवन सुखी नहीं होता है।

25. यदि छोटी उंगली पर खड़ी रेखाएं होती हैं तो व्यक्ति की रुचि मनोविज्ञान के क्षेत्र में होती है।

26. यदि छोटी उंगली के तीसरे भाग यानी नीचे वाले हिस्से पर यदि खड़ी रेखाएं अस्पस्ट और टेढ़ी हों तो व्यक्ति गलत आदतों का शिकार हो सकता है।

27. इस उंगली के तीसरे भाग पर त्रिभुज का निशान हो तो व्यक्ति जीवन में कोई प्रतिष्ठित पद प्राप्त करने वाला होता है।

28. छोटी उंगली के अंतिम भाग पर वृत्त का निशान बना हो तो व्यक्ति बेईमान हो सकता है। ऐसे लोग ईमानदारी दिखावा करने वाले होते हैं।
www.divyavaani.com
www.astrodivya.com
Acharya M.K.MISHRA
Ph.0124 2303769 Mb.9999282754


Photo
Add a comment...

Post has attachment
हस्तरेखा शास्त्र और राजयोग

   राजयोग यानी सभी सुख-सुविधाएं, मान-सम्मान और ऐश्वर्य देने वाला योग। ये योग जिन लोगों की किस्मत में होता है, वे किसी राजा के समान जीवन व्यतीत करते हैं। इन योगों की जानकारी हस्तरेखा और सामुद्रिक शास्त्र से मिल सकती है। यहां जानिए किसी व्यक्ति के भाग्य में राजयोग है या नहीं, उसके संकेत…

1. जिस व्यक्ति की हथेली के मध्य भाग में घोड़ा, घड़ा, पेड़ या स्तम्भ का चिह्न हो, वह राजसुख करता है। ऐसे लोग किसी नगरसेठ के समान धनी होते हैं।

2. जिस व्यक्ति का ललाट (माथा) चौड़ा और विशाल हो, नेत्र सुन्दर, मस्तक गोल और भुजाएं लंबी होती हैं, वह व्यक्ति भी राजसुख प्राप्त करता है।

3. जिस व्यक्ति के हाथ में धनुष, चक्र, माला, कमल, ध्वजा, रथ, आसन अथवा चतुष्कोण हो, उसे महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

4. यदि अंगूठे में यव का चिह्न हो, साथ ही मछली, छाता, अंकुश, वीणा, सरोवर या हाथी समान चिह्न हो तो वह व्यक्ति यश्स्वी और अपार धन का स्वामी होता है।

5. जिस व्यक्ति के हाथ में तलवार, पहाड़ या हल का चिह्न हो, उसके पास धन की कमी नहीं होती है।

6. जिन लोगों के हाथ की सूर्य रेखा, मस्तक रेखा से मिली हुई हो और मस्तक रेखा स्पष्ट सीधी होकर गुरु की ओर झुकने से चतुष्कोण का निर्माण होता हो, वह मंत्री समान सुख प्राप्त करता है।

7. जिसके हाथ में गुरु, सूर्य पर्वत उच्च हो, शनि और बुध रेखा पुष्ट एवं स्पष्ट और सीधी हो, वह शासन में उच्च पद प्राप्त कर सकता है।

8. यदि व्यक्ति के हाथ में शनि पर्वत पर त्रिशूल का चिह्न हो, चन्द्र रेखा का भाग्य रेखा से संबंध हो या भाग्य रेखा हथेली के मध्य से प्रारंभ हो और उसकी एक शाखा गुरु पर्वत पर और एक सूर्य पर्वत पर जाए तो व्यक्ति राज्याधिकारी होता है।

9. जिन लोगों के हाथ में गुरु और मंगल पर्वत उच्च हो, मस्तिष्क रेखा द्विजिव्ही यानी दो शाखाओं वाली हो या बुध की उंगली नुकीली हो और लम्बी हो,साथ ही नाखून चमकदार हो तो व्यक्ति राजदूत होता है।

10. जिस व्यक्ति के बाएं हाथ की तर्जनी (इंडेक्स फिंगर) एवं कनिष्ठिका उंगली (लिटिल फिंगर) की अपेक्षा दाहिने हाथ की तर्जनी एवं कनिष्ठि का मोटी और बड़ी हो, मंगल पर्वत अधिक ऊंचा हो और सूर्य रेखा प्रबल हो तो व्यक्ति कलेक्टर या कमीश्नर बन सकता है।
www.divyavaani.com
www.astrodivya.com
Acharya M.K.MISHRA
Ph.0124 2303769 Mb.9999282754

Photo
Add a comment...

Post has attachment
ये हैं कुंडली में 10 प्रमुख राजयोग, दिलाते है धन, ऐश्वर्य और मान-सम्मान



  

 

 

 

Raj Yoga Reading In Kundali : क्या होता है राजयोग (What is Raj Yoga?)- राजयोग का अर्थ होता है कुंडली में ग्रहों का इस प्रकार से मौजूद होना की सफलताएं, सुख, पैसा, मान-सम्मान आसानी से प्राप्त हो। जिन लोगों की कुंडली में राजयोग होते हैं, उन्हें सभी सुख-सुविधाएं मिलती हैं और वे शाही जीवन व्यतीत करते हैं। यहां जानिए कुंडली के 10 प्रमुख राजयोग (Raj Yoga)…


लक्ष्मी योग- कुंडली के किसी भी भाव में चंद्र-मंगल का योग बन रहा है तो जीवन में धन की कमी नहीं होती है। मान-सम्मान मिलता है। सामजिक प्रतिष्ठा बढ़ती है।

रूचक योग- मंगल केंद्र भाव में होकर अपने मूल त्रिकोण (पहला, पांचवा और नवा भाव), स्वग्रही (मेष या वृशिचक भाव में हो तो) अथवा उच्च राशि (मकर राशि) का हो तो रूचक योग बनता है। रूचक योग होने पर व्यक्ति बलवान, साहसी, तेजस्वी, उच्च स्तरीय वाहन रखने वाला होता है। इस योग में जन्मा व्यक्ति विशेष पद प्राप्त करता है।

भद्र योग- बुध केंद्र में मूल त्रिकोण स्वगृही (मिथुन या कन्या राशि में हो)अथवा उच्च राशि (कन्या) का हो तो भद्र योग बनता है। इस योग से व्यक्ति उच्च व्यवसायी होता है। व्यक्ति अपने प्रबंधन, कौशल, बुद्धि-विवेक का उपयोग करते हुए धन कमाता है। यह योग सप्तम भाव में होता है तो व्यक्ति देश का जाना माना उधोगपति बन जाता है।

हंस योग- बृहस्पति केंद्र भाव में होकर मूल त्रिकोण स्वगृही (धनु या मीन राशि में हो) अथवा उच्च राशि (कर्क राशि) का हो तब हंस योग होता है। यह योग व्यक्ति को सुन्दर, हंसमुख, मिलनसार, विनम्र और धन-सम्पति वाला बनाता है। व्यक्ति पुण्य कर्मों में रूचि रखने वाला, दयालु, शास्त्र का ज्ञान रखने वाला होता है।

मालव्य योग- कुंडली के केंद्र भावों में स्तिथ शुक्र मूल त्रिकोण अथवा स्वगृही (वृष या तुला राशि में हो) या उच्च (मीन राशि) का हो तो मालव्य योग बनता है। इस योग से व्यक्ति सुन्दर, गुणी, तेजस्वी, धैर्यवान, धनी तथा सुख-सुविधाएं प्राप्त करता है।

शश योग- यदि कुंडली में शनि की खुद की राशि मकर या कुम्भ में हो या उच्च राशि (तुला राशि) का हो या मूल त्रिकोण में हो तो शश योग बनता है। यह योग सप्तम भाव या दशम भाव में हो तो व्यक्ति अपार धन-सम्पति का स्वामी होता है। व्यवसाय और नौकरी के क्षेत्र में ख्याति और उच्च पद को प्राप्त करता है।

गजकेसरी योग- जिसकी कुंडली में शुभ गजकेसरी योग होता है, वह बुद्धिमान होने के साथ ही प्रतिभाशाली भी होता है। इनका व्यक्तित्व गंभीर व प्रभावशाली भी होता है। समाज में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त करते है। शुभ योग के लिए आवश्यक है कि गुरु व चंद्र दोनों ही नीच के नहीं होने चाहिए। साथ ही, शनि या राहु जैसे पाप ग्रहों से प्रभावित नहीं होना चाहिए।

सिंघासन योग- अगर सभी ग्रह दूसरे, तीसरे, छठे, आठवे और बारहवे घर में बैठ जाए तो कुंडली में सिंघासन योग बनता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति शासन अधिकारी बनता है और नाम प्राप्त करता है।

चतुःसार योग- अगर कुंडली में ग्रह मेष, कर्क तुला उर मकर राशि में स्तिथ हो तो ये योग बनता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति इच्छित सफलता जीवन में प्राप्त करता है और किसी भी समस्या से आसानी से बाहर आ जाता है।

श्रीनाथ योग- अगर लग्न का स्वामी, सातवे भाव का स्वामी दसवे घर में मौजूद हो और दसवे घर का स्वामी नवे घर के स्वामी के साथ मौजूद हो तो श्रीनाथ योग का निर्माण होता है। इसके प्रभाव से जातक को धन, नाम, ताश, वैभव की प्राप्ति होती है।

विशेष- कुंडली में राजयोग का अध्ययन करते वक़्त अन्य शुभ और अशुभ ग्रहो के फलों का भी अध्ययन जरुरी है। इनके कारण राजयोग का प्रभाव कम या ज्यादा हो सकता है।

कैसे राजयोग को मजबूत किया जा सकता है?
अगर कुंडली में राजयोग हो और वो कमजोर हो तो नव रत्नों की सहायता से, मंत्र जप आदि करके भी जीवन को सफल बनाया जा सकता है। साथ ही यह बात भी ध्यान रखनी चाहिए की राज योग नहीं होने पर भी व्यक्ति बहुत सफल हो सकते है अगर कुंडली में ग्रह शुभ और शक्तिशाली हो।
www.divyavaani.com
www.astrodivya.com
Acharya M.K.MISHRA
Ph.0124 2303769 Mb.9999282754

Photo
Add a comment...

Post has attachment
किचन के वास्तु दोष और उपाय: Vastu Dosh and Tips For Kitchen


  

 

 

 

Vastu Dosh and Tips For Kitchen in Hindi: रसोई घर (किचन), घर के सबसे जरुरी हिस्सों में से एक होता है इसलिए वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन से जुडी कुछ बातों को ध्यान रखना बहुत ही जरुरी होता है। अगर किचन से जुडी इन छोटी-छोटी बातों को ध्यान रखा जाए तो घर से सारे अशुभ प्रभावों को खत्म किया जा सकता है। आइये जानते है वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन से जुड़े कुछ वास्तु दोष और उन्हें दूर करने के उपाय।



Vastu Dosh and Tips For Kitchen: किचन के वास्तु दोष और उपाय

वास्तु दोष 1 – घर के मेन गेट के ठीक सामने किचन नहीं बनाना चाहिए। मेन गेट के एकदम सामने का किचन घर के सदस्यों के लिए अशुभ रहता है।

वास्तु उपाय- मेन गेट और किचन के बीच पर्दा लगा दे।

वास्तु दोष 2 – जिस घर में किचन के अंदर ही मंदिर होता है, वहां रहने वाले लोग गरम दिमाग के होते हैं। परिवार के किसी सदस्य को रक्त संबंधी शिकायत भी हो सकती है।

वास्तु उपाय- मंदिर को किचन से हटा कही और स्थापित करें।

वास्तु दोष 3 – जिस घर में किचन मेन गेट से जुड़ा हो, वहां पति-पत्नी के बीच बिना कारण आपस में मतभेद पैदा होने लगते हैं।

वास्तु उपाय- किचन के दरवाज़े पर लाल रंग का क्रिस्टल लगा दें।

वास्तु दोष 4- जिस घर में किचन व बाथरूम एक सीध हो, वहां रहने वाले लोगों का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता। साथ ही जीवन अशांति रहती है।

वास्तु उपाय- बाथरूम में कटोरीभर नमक रखें, समय-समय पर बदलते रहे।

वास्तु दोष 5- जिस घर में किचन के अंदर ही स्टोर हो तो गृहस्वामी को अपनी नौकरी या व्यापार में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता हैं।

वास्तु उपाय- इनसे बचाव के लिए स्टोर रूम में चांदी का सिक्का रखें।

वास्तु दोष 6- किचन में अग्नि-पानी जैसी सुविधाएं वास्तु के अनुसार न हों तो घर के सदस्यों के स्वास्थ्य और व्यापार पर बुरा असर पड़ता है।

वास्तु उपाय- इससे बचने के लिए सबसे पहले भोजन का भोग भगवान को लगाएं।

वास्तु दोष 7- बिना स्नान किए किचन में प्रवेश करने से किचन में नेगेटिव एनर्जी आती है और घर के सदस्यों में चिड़चिड़ापन और आलस्य बढ़ता हैं।

वास्तु उपाय- बिना स्नान किए कभी किचन में न जाएं।

वास्तु दोष 8- यदि किचन पानी की टंकी या कुएं के साथ लगा हो तो भाइयों में मतभेद रहते हैं। घर के स्वामी को धन कमाने में बहुत परेशानियां आती हैं।

वास्तु उपाय- टंकी या कुएं पर क्रिस्टल लटका दें।
www.divyavaani.com
www.astrodivya.com
Acharya M.K.MISHRA
Ph.0124 2303769 Mb.9999282754

Photo
Add a comment...

Post has attachment
पाल्मिस्ट्री- इंडेक्स फिंगर देखकर पता चलती हैं ये 12 बातें

Palmistry index finger in Hindi :  हस्तरेखा ज्योतिष में बताया गया है कि रेखाओं के साथ ही हथेली और उंगलियों की बनावट का असर व्यक्ति के स्वभाव पर पड़ता है। यहां जानिए तर्जनी उंगली यानी इंडेक्स फिंगर को देखकर कैसे किसी व्यक्ति का स्वभाव मालूम किया जा i

हमारी हथेली में अंगूठे से पहली उंगली यानी इंडेक्स फिंगर को ही तर्जनी उंगली कहा जाता है। इस उंगली के नीचे गुरु पर्वत स्थित होता है, इसी वजह से इसे गुरु की उंगली भी कहते हैं। सामान्यत: इस उंगली के आधार पर व्यक्ति की नेतृत्व क्षमता यानी व्यक्ति किसी टीम का नेतृत्व कर सकता है या नहीं और व्यक्ति की महत्वाकांक्षा पर विचार किया जाता है।

1. यदि किसी व्यक्ति के हाथों में इंडेक्स फिंगर (तर्जनी उंगली) मिडिल फिंगर (मध्यमा उंगली) के बराबर हो यानी सामान्य से थोड़ी लंबी हो तो वह व्यक्ति अन्य लोगों पर राज करने वाला होता है। ऐसे लोग अच्छे बॉस बनते हैं।

2. यदि ऐसी उंगली वाले हाथ के अन्य लक्षण भी अच्छे हो तो वह व्यक्ति हजारों लोगों पर राज करने वाला होता है। ये लोग थोड़े घमंडी स्वभाव के होते हैं।

3. यदि हथेली में इंडेक्स फिंगर मिडिल फिंगर से अधिक लंबी हो तो व्यक्ति अत्यधिक घमंड करने वाला होता है। ऐसे लोग खुद को अधिक श्रेष्ठ समझते हैं और इनका स्वभाव तानाशाही करने वाला होता है।

4. यदि किसी व्यक्ति के हाथों में तर्जनी उंगली की लंबाई सामान्य लंबाई से छोटी है तो इंसान महत्वाकांक्षी नहीं होता है। ऐसे लोगों में किसी कार्य को करने के लिए कोई उत्साह नहीं रहता।

5. यदि इंडेक्स फिंगर (तर्जनी उंगली) रिंग फिंगर (अनामिका उंगली) से बड़ी हो तो व्यक्ति अति महत्वाकांक्षी होता है। ऐसे लोग कभी-कभी अति उत्साह में कार्य बिगाड़ भी लेते हैं, जिससे इन्हें धन हानि का भी सामना करना पड़ता है।

6. यदि किसी व्यक्ति की हथेली में रिंग फिंगर और इंडेक्स फिंगर दोनों एक समान हैं तो व्यक्ति अधिक पैसा और मान-सम्मान प्राप्त करने की इच्छा रखता है। यदि इंडेक्स फिंगर रिंग फिंगर से थोड़ी छोटी हो तो व्यक्ति हर परिस्थिति में संतुष्ट रहने वाला होता है।

7. सामान्यत: हमारी उंगलियों पर तीन भाग होते हैं। इन तीनों भागों के आधार पर भी व्यक्ति के स्वभाव की बातें मालूम की जा सकती हैं। यदि तर्जनी उंगली का पहला भाग (नाखून के पीछे वाला हिस्सा) अन्य दो भागों से बड़ा हो तो व्यक्ति की नेतृत्व क्षमता काफी अच्छी होती है। ये लोग हर काम को कुशलता से करते हैं।

8. जिन लोगों की तर्जनी उंगली का पहला भाग अन्य दोनों भागों से छोटा होता है वे लोग स्वयं को दूसरों से कमजोर समझते हैं। इन लोगों में हीन भावना हो सकती है।

9. हथेली में तर्जनी उंगली का बीच वाला भाग अन्य दोनों भागों से अधिक बड़ा दिखाई देता है तो व्यक्ति अहंकारी होता है। ऐसे लोग किसी भी काम को पूरी दक्षता के साथ पूर्ण करते हैं। इन लोगों का घर-परिवार और समाज में विशेष स्थान होता है। इसके विपरीत यदि किसी व्यक्ति की हथेली में यह भाग अन्य दोनों भागों से छोटा होता है तो व्यक्ति किसी भी कार्य को कुशलता के साथ पूर्ण नहीं कर पाता है।

10. जिन लोगों की उंगली का तीसरा और अंतिम भाग अन्य दोनों भागों से अधिक बड़ा होता है, वे लोग शारीरिक रूप से अधिक बलशाली होता है। ऐसे लोग अपना बल दिखाने का मौका तलाशते रहते हैं। सामान्यत: ये लोग ऐसे काम करना अधिक पसंद करते हैं, जहां उन्हें शारीरिक बल दिखाने का अवसर प्राप्त होता है।

11. यदि किसी व्यक्ति की हथेली में मध्यमा और तर्जनी उंगली के बीच अधिक अंतर दिखाई देता है तो व्यक्ति के हाथ में गुरु ग्रह की प्रधानता हो जाती है। ऐसी हथेली वाले लोग अच्छी बौद्धिक क्षमता वाले और धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं। ये लोग अपने कार्यों पर विश्वास करते हैं और भाग्य को भी कर्मों के आधार पर बदलने की क्षमता रखते हैं।

12. जिन लोगों की हथेली में तर्जनी और मध्यमा उंगली के बीच अधिक अंतर हो और अनामिका एवं सबसे छोटी उंगली के बीच भी अंतर हो तो व्यक्ति व्यापार में लाभ कमाने वाला होता है। इस स्थिति में मध्यमा और अनामिका उंगली के बीच ज्यादा अंतर नहीं दिखाई देना चाहिए, अन्यथा यह फल बदल सकता है।
www.divyavaani.com
www.astrodivya.com
Acharya M.K.MISHRA
Ph.0124 2303769 Mb.9999282754

Photo
Add a comment...
Wait while more posts are being loaded