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Priti Surana
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परिभाषा नारी की, त्याग लिख दीजिये,..
बात हो अधिकार की, या नारी के सम्मान की, भेद सारे भूलकर, भाग लिख दीजिये। शक्ति का हो रूप जब, धरे चंडी रूप तब, बुराई की विनाशिका, आग लिख दीजिये। सोलह श्रृंगार करे, जब रति रूप धरे, साज छेड़ प्रीत भरा, राग लिख दीजिये। प्रेम और ममता की, प्रतिमूर्ति समता की, परिभा...

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सुन रे पीपल ! तेरे पत्ते शोर मचाते है,जब वो आते हैं,.. पहला पहला प्यार हमारा हम डर जाते हैं,.. सूने पनघट पर देख रहे हैं  रस्ता अपने साजन का, ये तनहाई उसपर मन में  उनकी ही यादों का डेरा, जिद पर उनकी इक तो उनसे मिलने आते है,.. पहला पहला प्यार हमारा हम डर जाते...

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आज एक बिरवा रोंपा है,..
आज एक बिरवा रोंपा है मैंने मन के आंगन में। सोचा है फिर रंग भरुंगी सूने से इस जीवन में। दूर दूर तक देखा जाकर हरियाली का नाम नहीं है, खिली खिली सी रंगत वाली कोई सुनहरी शाम नहीं है, सोचा है फिर से पहनूंगी सातो रंग मैं कंगन में। आज एक बिरवा रोंपा है मैंने मन के...

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आया सावन झूम के
कुण्‍डलिया( मात्रिक विषम छन्‍द) आया सावन झूम के,तेज हुई बरसात, काटे भी कटती नही,तुम बिन अब ये रात, तुम बिन अब ये रात,कटे कैसे बतलाओ, बिना किये कुछ बात,नही मुझको तड़पाओ, सुनो कहे कविराय,जिया मेरा घबराया, आ जाओ मनमीत,पिया अब सावन आया,...प्रीति सुराना

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