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अजय कुमार झा
Worked at District and Sessions Judge Office , Delhi
Attended Central School Danapur Cantt
Lived in Krishna Nagar , Delhi
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ले लोट्टा अब हो गया कंपटीशन तगडा , आज ही बालिका वधू वाले जगदीशिया ने भी चुनाव लडने का ठान लिया है .....अफ़ैडेविट में इनका अब तक का टोटल बियाह और सब कनिया का नाम भराया जाए पहिले ;) ;) ;) ;) इनका चुनाव चिन्ह का होना चाहिए ;) ;)
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सुनो इत्ते रिजिड न हो जाओ आने वाला बखत बहुत डिफ़िकल्ट निकलेगा
अभी तो एग्ज़ाम चल ही रहे हैं , सोचो जब घनघोर सा रिज़ल्ट निकलेगा ,

वो ठीक हैं और आगे भी रहेंगे , जिनके लिए न प्राइज़ निकलेगा न इंसल्ट निकलेगा
;) ;) ;) ;) ....बजाते रहो
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ashoke mehta's profile photo
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दिल थाम के बैठना सामने चुनाव है
हम जानते हैं तुम जिस देस के वासी हो , उस देश को अर्से से इस खेल का चाव है , दिल थाम के बैठना सामने चुनाव है ॥ बडे भोले हो ओ बाउजी , फ़न्ने बने फ़िरते हो , वो पपलू बनाए जा रहे हैं ,पप्पू सा स्वभाव है , दिल थाम के बैठना सामने चुनाव है साला मुर्गा टंगा है उलटा अ...
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हम जानते हैं तुम जिस देस के वासी हो , उस देश को अर्से से इस खेल का चाव है , दिल थाम के बैठना सामने चुनाव है ॥ बडे भोले हो ओ बाउजी , फ़न्ने बने फ़िरते हो , वो पपलू बनाए जा रहे हैं ,पप्पू सा स्वभाव है , दिल थाम के बैठना सामने चुना...
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#खडीखबड :बनारस में अरविंद केजरीवाल को झेलना पड रहा है भारी विरोध
लगता है "उंगली" करने से ज्यादा "चमाट" मारने वाले समर्थक तैयार हो गए हैं जी
;) ;) ;) ;)
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आग लगे इस मुईं सियासत को ,पोलटिस में ,बातें होने लगी हैं पाकिस्तान की,
छोडो बे ,तीर पे बारूद और तोप लगा के ,सबके पास है सो,चल रही जंग है जबान की

;) ;) ;) ;) अच्छा है ...परीच्छा है , वर्ना तो सब कुछ उधेड डालने की इच्छा है , .........कहीं हैं ........मगर यहीं हैं
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dhiru singh's profile photo
 
स्व्तंत्रता के बाद भारतीय संविधान द्वारा राज्य का एक आवश्यक दायित्व बताया गया कि वह जनकल्याण को बढावा देने के लिए एक जैसी सामाजिक व्यवस्था की स्थापना करे जिसमें सभी व्यक्तियों को आर्थिक, सामाजिक व राजनैतिक न्याय मिल सके । पुन: 39वें अनुच्छेद के अनुसार राज्य को अपनी नीति इस प्रकार से कार्यान्वित करने का निर्देश दिया गया कि सभी नागरिकों को जीविकोपार्जन , आवश्यक वस्तुओं का उत्पआदन व वितरण जनहित में हो , धन-संपत्ति का केन्द्रीयकरण न हो , श्रम का समान वेतन मिले । इसी संदर्भ में भारतीय न्यायपालिका ने भी सामाजिक "कल्याणकारी राज्य" के आदर्श को ध्यान में रखकर निर्णय पारित किए .............प्रशासनिक विधि पढते हुए सोच रहा हूं कि निर्णय तो पिछले साठ सालों से लगातार दिए जा रहे हैं , कहीं ऐसा तो नहीं कि बस दिए जा रहे हैं ....अच्छा विषय है , आगे बांचते हैं ...
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हम जानते हैं तुम जिस देस के वासी हो ,
उस देश को अर्से से इस खेल का चाव है ,

दिल थाम के बैठना सामने चुनाव है ॥

बडे भोले हो ओ बाउजी , फ़न्ने बने फ़िरते हो ,
वो पपलू बनाए जा रहे हैं ,पप्पू सा स्वभाव है ,

दिल थाम के बैठना सामने चुनाव है

साला मुर्गा टंगा है उलटा अस्सी रुपए में,
एक किलो टमाटर  होता सौ का भाव है ॥

दिल थाम के बैठना  सामने चुनाव है॥

न साले घोषणा बंद करते हैं न बोलना ही ,
गरीब के मेनिफ़ेस्टो में अब भी वडा पाव है,

दिल थाम के बैठना  सामने चुनाव है॥


बडे जिगरे वाले बनते हो लकतेजिगर बे ,ऐसा क्या ,
उत्ता तो कलेजा ही बडा नहीं,जित्ता बडा कलेजे पे घाव है ॥

दिल थाम के बैठना  सामने चुनाव है ॥

कभी कूका करते थे मोर पपीहे बागों में, अबे होंगे ,
आजकल हर बाग में उल्लू कौवों की कांव कांव है,

दिल थाम के बैठना सामने चुनाव है ॥

इहां पब्लिक का लुटिया गोल है खटते पिटते,
मुदा हाकिम के थर्मामीटर में ,ताप का बढाव है ,

दिल थाम के बैठना सामने चुनाव है
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हम जानते हैं तुम जिस देस के वासी हो , उस देश को अर्से से इस खेल का चाव है , दिल थाम के बैठना सामने चुनाव है ॥ बडे भोले हो ओ बाउजी , फ़न्ने बने फ़िरते हो , वो पपलू बनाए जा रहे हैं ,पप्पू सा स्वभाव है , दिल थाम के बैठना सामने चुना...
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#खडीखबड :दिल्ली का जीटीबी हॉस्पीटल बनेगा "मॉडल हॉस्पीटल"
मगर खुशी की बात ये है कि लगभग डेढ साल के बाद "मॉडल" शब्द का प्रयोग "गुजरात मॉडल" के अलावा कहीं और किया गया है ....;) ;) ;) ;)
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#खडीखबड :जितना जलील करेंगे उतना मजबूत होंगे हम : प्रियंका गांधी
हां , ये बात बिल्कुल ठीक है , दस सालों तक मैं खुद बहुत मज़बूत हुआ हूं : मनमोहन सिंह

;) ;) ;) ;)
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Surya Biradar's profile photoHemendra Thakur's profile photo
2 comments
 
Jitna jalil karonge utna desh ko lutenge hum priyankaji
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#खडीखबड :दिल्ली में बैठ कर मां बेटे दोनों मिलकर सरकार चला रहे हैं :मोदी
मैं तो उन्हें शुरू से ही "माता जी" मानता रहा हूं : प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ;) ;) ;) ;)
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heema batra's profile photoGaurav Sharma's profile photo
 
#bjp <http://ibnlive.in.com/general-elections-2014/newstopics/bjp.html>
#congress<http://ibnlive.in.com/general-elections-2014/newstopics/congress.html>
#2014
lok sabha elections<http://ibnlive.in.com/general-elections-2014/newstopics/2014-lok-sabha-elections.html>
#delhi
high court<http://ibnlive.in.com/general-elections-2014/newstopics/delhi-high-court.html>
#fcra <http://ibnlive.in.com/general-elections-2014/newstopics/fcra.html>
#foreign
contribution regulation
act<http://ibnlive.in.com/general-elections-2014/newstopics/foreign-contribution-regulation-act.html>
Delhi
HC finds BJP, Congress guilty of taking foreign funding
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सरकार की बजा रहे हैं , नौकरी
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Krishna Nagar , Delhi
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एक आम आदमी .........जिसकी कोशिश है कि इंसान बन सके
Introduction

यदि एक पंक्ति में कहूं तो , एक आम आदमी जिसकी कोशिश है कि इंसान बना जाए , शेष कुछ नहीं । पिताजी फ़ौज में थे और माता गृहणि , माता पिता की दूसरे नंबर की संतान , प्रारंभ से ही पिताजी के साथ उनके नियमित स्थानांतरण के कारण लगभग पूरे भारत में भ्रमण और केंद्रीय विद्यालयों में अध्य्यन । वक्त ने करवट लिया और शहरों की खाक छानते छानते , उस वक्त ग्राम्य जीवन की शुरूआत हुआ जब यकायक ही परिवार ने गांव की ओर प्रस्थान किया । यौवन और संघर्ष के दिन , कॉलेज और युनिवर्सटी के दिन , जो भी बीते वो ग्राम्य जीवन से ही जुडे रहे और मैं भी भीतर तक जुडा रहा कहीं गांव की मिट्टी , पोखर , पवन और सब कुछ से ।

ऐतिहासिल ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से अंग्रेजी विषय के साथ प्रतिष्ठा स्नातक की शिक्षा के बाद , मित्रों के समूह के साथ ही वर्ष 1996 में दिल्ली की ओर प्रस्थान । लक्ष्य था खुद को साबित और स्थापित करना । पत्रकारिता में डिप्लोमा लेने के दौरान ही ,वर्ष 1998 में  सरकारी सेवा में नियुक्ति हो गई । संप्रति , दिल्ली की अधीनस्थ जिला न्यायालय में बतौर वरिष्ठ न्यायिक सहायक पदस्थापित हूं और साथ साथ ही विधि की शिक्षा भी जारी है ।

पढने लिखने का शौक कब हुआ नहीं जानता ठीक ठीक । विद्यालय में कभी मेधावी छात्र नहीं रहा , मगर बचपन में कॉमिक्स , लडकपन में विजय विकास , कर्नल रंजीत , गुलशन नंदा जैसे उपन्यासों के बाद , जहां शैक्षणिक पाठ्यक्रम ने अंग्रेजी साहित्य के करीब किया तो बाद के दिनों में हिंदी साहित्य दिले के भीतर तक बस गया । संपादक के नाम हज़ारों पत्र , दोस्तों को सैकडों चिट्ठियां लिखने की आदत ने आगे जागर लेख , कहानियां , कविताएं , व्यंग्य , और जाने क्या क्या कितना लिखवा , पढना और लिखना आदत से अब एक जुनून सा बन गए हैं , लगता है कि जिंदगी कम है और किताबें ज्यादा तो जिंदगी खत्म होने से पहले जितना पढूं , जितना लिखूं कम है । समय बदला और कलम कागज की जगह ये टकटक कंप्यूटर ने ले लिया , यात्रा बदस्तूर जारी है , बिना थके , बिना रुके ……………

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