Profile cover photo
Profile photo
Priyadarshini Tiwari
123 followers -
क्या हार में क्या जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं, संघर्ष पथ पर जो मिले, यह भी सही वह भी सही
क्या हार में क्या जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं, संघर्ष पथ पर जो मिले, यह भी सही वह भी सही

123 followers
About
Priyadarshini Tiwari's interests
View all
Priyadarshini Tiwari's posts

Post has attachment
माना , कि माँ को परिभाषित करना संभव नहीं , माँ तो ईश्वर से बढ़कर है , जो जीवन भर सिर्फ देती ही है , कुछ लेती नहीं। .. ,.. ऐसी अनेकों विशेषतायेँ इस ' माँ ' शब्द के भीतर छिपी हुई हैं ., जिसे एक विशेष दिन उसके नाम कर नहीं बताया जा सकता, .. इस प्रकार की तमाम बड़ी-बड़ी बातें हमारे पास कहने के लिए हैं।

सच इसके विपरीत होता है , कुछ गिने-चुने लोगों को छोड़ दिया जाये , तो ज्यादातर लोग ऐसे ही मिलेंगे जिनके पास अपनी माँ के हालचाल पूछने के लिए भी समय नहीं होता। .. उसकी देखभाल , ज़रूरतें पूरी करना तो दूर की बात है। ... हम सब को बहुत ख़ुशी होती है जब हमारे बारे में कोई कुछ सोचता है , करता है , भले ही वो कोई खास दिन ही क्यों न हो। ... और ये काम जब हमारे अपने करते हैं तो ख़ुशी दोगुनी-चौगुनी हो जाती है। ... ... तो बहुत ज्यादा सोचिये विचारिये मत , .. एक -एक पल कीमती है। .. आज के दिन का कुछ समय अपनी माँ के लिए रखिये , कुछ ऐसा कीजिये की वो खुश हो , उसे भी खास होने का अहसास हो। ... माँ को भगवान मत बनाइये , इंसान ही रहने दीजिये , और उसकी खुशियों , इच्छाओं -अनिच्छाओं को सम्मान दीजिये। ..बुजुर्ग होती माँ के उम्रदराज बच्चों को इस बात का ख्याल ज़रूर रखना चाहिए।

आज का दिन हम सबको मुबारक।


अम्मा ... हैप्पी मदर्स डे .....

Post has attachment
अम्मा ... हैप्पी मदर्स डे .....
    माना , कि  माँ को परिभाषित करना संभव नहीं , माँ तो ईश्वर से  बढ़कर है , जो जीवन भर सिर्फ देती ही है , कुछ लेती नहीं। .. ,.. ऐसी अनेकों  विशेषतायेँ इस ' माँ ' शब्द  के भीतर छिपी हुई हैं ., जिसे एक विशेष दिन उसके नाम कर नहीं बताया  जा सकता, .. इस प्रकार की...

Post has attachment
कोशिश कीजिये , सबको अपने हिस्से की खुशियां मिलें , . हम किसी की खुशियों में , सफलताओं में रोड़ा न बने। .और क्युं बनें ? .... हम अपने बच्चों की ज़िन्दगी में भी तो यही सब देखना चाहते हैं न !

Post has attachment
मेरा पसंदीदा चैनल -

Post has attachment

The woman who helped set up the first school for girls in India


Post has attachment
एक नए दिन की शुरुआत ....मुबारक़ हो
                     सबसे पहले तो आप , हमसब को नए साल की देरों  शुभकामनायें। .. इस साल सब लोग खूब अच्छा-अच्छा सोचें , अच्छा-अच्छा करें , किसी को भी पलभर के लिए दुःख का सामना न करना पड़े , ईश्वर से यही प्रार्थना है। .. सुनने  में यह बात बड़ी अजीब सी लग सकती है...

Post has attachment
बहुत बहुत शुक्रिया , आज की चर्चा में मेरे ब्लॉग लिंक को शामिल करने के लिए , आभारी हूँ .

Post has attachment
क्या हुआ जो लोग अक्सर आपसे पूछते है की'' आप क्या करतीं है ? ''.... और आपका जवाब होता है , ''कुछ नहीं '' . घर पर ही हूँ। और यह कहते हुए आप सबके बीच अपने आप को छोटा , हीन समझने लगतीं है , शर्मिंदगी महसूस करने लगतीं है। आपको अपनी ढेर सारी डिग्रियां पल भर में बेकार लगने लगती है। .. हम में से ज्यादातर महिलाओं के साथ ऐसा ही होता है। .. हमें मन ही गुस्सा आने लगता है उन लोगों पर जो ऐसा सवाल पूछते है , और खुद पर भी।

कभी-कभी दिल-दिमाग में इतनी उलझने होतीं है की समझ में नही आता , क्या करें ! क्या न करें ! कहाँ से शुरू करें और कहाँ पर ख़त्म !...बहुत से काम एकसाथ करने के बाद भी बहुत कुछ छूटता जाता है , ..और वह क्या है जो हमसे छूट रहा है ..हमें खुद भी पता नही होता ..बस .इतना पता है की कुछ है जो छूट रहा है ..
और सालों में , .कभी-कभी ऐसा भी होता है की सब कुछ वैसा ही चल रहा होता है , जैसा चल रहा था ,...पर दिल-दिमाग़ में एक अजीब सा , ख़ुशनुमा सन्नाटा पसरा रहता है ..और तब हमें लगता है की वो सभी काम , इच्छाएं हम पूरी कर लें जिनके लिए हमारे पास कभी वक़्त ही नहीं होता !..पता नही किस हड़बड़ी में हम दिन पर दिन बर्बाद कर रहे है !.....पर ऐसे मिले ' शांत दिन ' को कभी -कभी यूँ ही बिता देना चाहिए ...बिना कुछ सोचे , बिना कुछ किये ...' शून्य ' सी स्थिति में ...यह लंबे समय से चली आ रही उलझनों पर ' विराम ' सा काम करते हैं 

Post has attachment
एक बात जो पसंद आई -Self-balancing: no chance of tilting over....
Wait while more posts are being loaded