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Nihal gupta
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सरस्वती पूजा
याद है वो बचपन, इन्ही नन्हें हाथो से हमने वो फूल की एक-एक लड़ियाँ लगाते थे| वो मंडप सजाना,पंडाल लगवाना, वो हर एक तैयारी करना, बात बात पे झगड़ा करना- भैया आप एक भी काम ढंग से नहीं करते ! और करते भी क्यों न आखिरकार साल भर में एक ही तो मौका मिलता था खुद के स्कूल...

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आज ज़रा फुरसत पायी थी, आज उसे फिर याद किया बंद गली के आखिरी घर को खोल के फिर आबाद किया  - निदा फ़ाज़ली #RIP

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वो हमारी आँखे भी मांगते तो हम दे देते पर वो तो इन आँखों के ख्वाब मांगते रहे

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कभी कभी वो परमेश्वर भी अपने होने का एहसास दिलाता है और बतलाता है कि वो हमसे कितना प्यार करता है,कितनी फ़िक्र करता है हमारी इसी बात पे वसीम बरेलवी साहब का शेर याद आता है.... खुली छतों के दीये कब के बुझ गए होते पर कोई तो है जो आँधियों के पर कतरता हैं -वसीम बरेलवी

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मजहब की किताबों का हवाला मत दे ऐ हैवान
जिहाद शब्द तो उसमें कहीं पढ़ाया ही नहीं जाता #Paris_Attacks

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गर जो तू दोस्त है,तो दोस्ती क्यों नहीं निभाता है गर फ़िक्र होती  है तुझे मेरी,तो क्यों नहीं जताता है गर वादा करता है मुझसे,तो निभाने से क्यों डरता है गर तू मीत है मेरा,मेरी हर बात क्यों ठुकराता है गर विश्वास है मुझपे,तो भी बतलाने से क्यों कतराता है गर ये बस ...

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आज़ादी
मैं कोई शायर या कवि नहीं हाँ बस अभी डिस्चार्ज मोबाइल और लम्बे रस्ते ने और कोई रास्ता ही न छोड़ा | इन सब ने मजबूर नहीं किया लिखने को वो तो बस इस सफर में एक हसीन छाप छोड़ने का जी चाह रहा है हाँ इसमें को भी कोई दो मत नहीं शायद ये एक सयोंग है जहाँ ये सब मेरी इच्छ...

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ज़िंदगी
कुछ इस कदर ज़िन्दगी के दिन ढलते रहे, हम गिरते सम्भलते बस चलते रहे  अपनी मंजिल की खोज में हम भटकते रहे ,बस वक़्त से कदम मिलाकर हम चलते रहे   जब मिली मंजिल तो रास्ते ढूंढते रहे, लेकिन कैसे जाते जब राह से ही टलते रहे   सपनो के पंखो से सदा उड़ान भरते रहे, और वास्त...

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