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Roushan Mishra (रौशन)
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झूठ का स्वर्णकाल
1949  में लिखी गयी  जॉर्ज ऑरवेल की किताब नाइन्टीन  एटी  फोर  सुव्यवस्थित तरीके से झूठ के प्रचार के तौर तरीकों के बारे में विस्तार से पूर्वाभास करती है।   ऑरवेल ने एक दुनिया की कल्पना  की थी   जहां दुनिया तीन बड़े राष्ट्रों में बँट  चुकी है , तीनों महा-राष्ट्...
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आजादी
सीखना है चुप रहना  या जारी रखनी है आवाज उठाने की आजादी  सीखना है सर झुका के रखना  या जारी रखनी है सर उठा के जीने की आजादी  सीखना है रेंगना  या जारी रखनी है कुलांचे भरने  की आजादी  सीखना है दिमाग बंद रखना  या जारी रखनी है सोचने  की आजादी भविष्य का फैसला है आ...
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सुषमा स्वराज महा श्वेता देवी की किसी किताब का नाम न भी जाने तो क्या हुआ
माननीय मंत्री महोदया , महाश्वेता देवी निश्चित रूप से हमारे समय की महान हस्तियों में से थीं। उनको श्रद्धांजलि देने के लिए सिर्फ भावना की जरूरत थी अगर आपके कानों तक वे आवाजें पहुँचती हैं जिनका दर्द वे उठाती रहती थीं , अगर आपके हृदय उसे महसूस कर सकता है तो कोई...
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वे जो होते हैं
वे जो होते हैं खेतों में, सड़कों पर, खदानों में,  कभी घर से दूर दो रोटी के बंदोबस्त में रिक्शा चलाते या मशीनों काम करते हुए, कभी किसी अनजानी सी धरती को अपना देश कहकर शहीद होते हुए किसी इलाके की दिनरात निगहबानी करते कहीं दुनियाभर की योजनाओं को अमल में लाते। व...
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कस्मै देवाय हविषा विधेम
हिरण्यगर्भः
समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत्   स दाधार पृथिवीं
द्यामुतेमां कस्मै देवाय हविषा विधेम । य आत्मदा बलदा यस्य
विश्व उपासते प्रशिषं यस्य देवाः   यस्य छायामृतम् यस्य
मृत्युः कस्मै देवाय हविषा विधेम ।   यः प्राणतो निमिषतो
महित्वै क इद्राजा जगतो ...
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कस्मै देवाय हविषा विधेम
हिरण्यगर्भः
समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेक आसीत्   स दाधार पृथिवीं
द्यामुतेमां कस्मै देवाय हविषा विधेम । य आत्मदा बलदा यस्य
विश्व उपासते प्रशिषं यस्य देवाः   यस्य छायामृतम् यस्य
मृत्युः कस्मै देवाय हविषा विधेम ।   यः प्राणतो निमिषतो
महित्वै क इद्राजा जगतो ...
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आया सावन बरसा पानी
दिन रात व्योम में उड़-उड़ कर फिर मोह में शायद थोडा पड़ कर बेचैन हुए काले बादल अम्बर तजकर भागे पागल उनसे फिर छलका पानी। आया सावन बरसा पानी।। धरती की थी आँखे उदास प्यासी थी उसकी साँस-साँस नभ उसके दुःख से दुखित हुआ बादल सा काजल द्रवित हुआ आँसू बनकर बहका पानी। आया...
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