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Vishwanath Chaturvedi
Attended LUCKNOW UNIVERSITY KKC COLLEGE
Lives in NEW DELHI
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Vishwanath Chaturvedi

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मुलायम परिवार के आय से अधिक सम्पत्ति मामले में सांसद द्वारा पास किए गये क़ानून की धज्जियाँ उड़ाते हुएसुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार विरोधी क़ानून (१९८८) को ही बदल डाला,यह करिश्मा २०११ में लखनऊ में मुलायम के वक़ील रहे व समाजवादी पार्टी सांसद रहे स्व: बीरेन्द्र भाटिया की बरखी में मुलायम ओर अखिलेश के साथ मंच शेएर करने वाले तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रहे अल्तमश कबीर ने किया।जबकि नैतिकता के आधार पर यदि मुलायम परिवार के साथ इतने नज़दीकी सम्बंध थे तो उन्हें इस मुक़दमे से अपने आप को अलग कर लेना चाहिए था।

श्री मती डिम्पल यादव जिनको यह कहकर की वह कोई पब्लिक पोस्ट नही होल्ड कर रही थी जाँच के दायरे से बाहर रखने का ग़ैर क़ानूनी आदेश दे डाला तो वही इसी याचिका में पब्लिक पोस्ट ना होल्ड करने वाले प्रतीक यादव के ख़िलाफ़ जाँच जारी रखने का तुग़लकी फ़रमान सुना डाला।
अल्तमश कबीर के दिए गये फ़ैसले ओर संसद द्वारा पास किए गये भ्रष्टाचार विरोधी क़ानून की प्रति सल्लग्न कर रहा हूँ।
सोचिए कैसे- कैसे ग़ैर क़ानूनी फ़ैसले दिए जा रहे है????

जारी ........
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Vishwanath Chaturvedi

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Vishwanath Chaturvedi

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आठ मंत्रियो की मंत्रिपरिषद में तीन दलित मंत्री:-

महाभारत के शान्ति पर्ब में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को राष्ट्र धर्म का उपदेश देते हुए एक आदर्श राजा के लिए अपेक्छित गुणों का वर्णन किया है। इस पर युधिष्टर ने प्रश्न किया-'पितामह!इतने सारे गुणों का एक व्यक्ति में मिलना दुष्कर होगा,अतः आदर्श राजा को उस स्थिति में क्या करना चाहिये?''

भीष्म पितामह ने कहा-हे बुद्धिमान युधिष्ठिर !यह सच है इतने गुणों से युक्त एक व्यक्ति का मिलना दुर्लभ है-इसलिए संछेप में उन मंत्रियो की नियुक्ति के बारे में बताऊँगा-

राजा को चाहिये कि आठ मंत्रियो की मंत्रिपरिषद में चार वेद विज्ञ,निर्भीक,पूत चरित्र स्नातक ब्राह्मण तीन पवित्र आचार-विचार-युक्त और विनीत शुद्र तथा एक पौराणिक आठ गुणों के युक्त से सूत को रखे तथा इन आठो से मंत्रणा कर शासन चलाये ।
इस प्रकार राज कर्म में तीन शुद्र मंत्रियो को लिया जाता है तो राजकार्य में प्रतिनिधित्व 37.5 प्रतिशत हो जाएगा।

इस प्रकार भीष्म पितामह ने युधिष्ठर को राजधर्म समाज के दलित वर्गों का पूरा ध्यान रखने का उपदेश समझाने के क्रम में किया है। भीष्म का राजधर्म विषयक उपदेश अत्यंत विषद है।

विश्वनाथ चतुर्वेदी
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Vishwanath Chaturvedi

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भारत रत्न बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर की प्रसिद्धि पुस्तक-शुद्र थे कौन और वो आर्य समाज में चतुर्थ वर्ण में पहुँचे कैसे?

दलित कौन?

आधुनिक भारतीय साहित्य के सन्दर्भ में:-

■ दलित वह जिसका दारुण दलन, दोहन एवम् शोषण होता रहा है तथा समाज जो वंचित,उपेछित एवं प्रताड़ित रहा है।

■ शोक जिसका आहार,अश्रु जिसका उदगार और अभिशाप जिसका उपहार रहा है,वह दलित है।

■बहिष्कार जिसका सत्कार,बेगार जिसका नित्य त्यौहार और दुत्कार,फटकार एवम् तिरस्कार जिसका पुरस्कार रहा है,वह दलित है।

■ दुर्भाग्य जिसका पर्याय,दास्य जिसका व्यवसाय और दारिद्र्य जिसका अमिट अध्याय रहा,वह दलित है।

■अभाव जिसका भाग्य,अन्याय जिसका साक्छ्य और विलाप जिसका काब्य रहा,वह दलित है।

■ अपमान जिसका प्रतिमान,पुरुषार्थ जिसका धनुष बाण और अंगूठा जिसका अनूठा दान रहा,वह दलित है।

■बंधन जिसका कंगन,उत्पीड़न जिसका ईंधन और अधिकार-अपहरण जिसका आलिंगन रहा,वह दलित है।

■ विपत्ति जिसकी नियति,सम्पत्ति जिसकी स्वपनिल स्मृति और क्रांति जिसकी प्रसुप्त प्रविर्ति रही,वह दलित है।

■ दीनता जिसकी गृहणी, दास्ता जिसकी भगिनी और अस्पर्शयता जिसकी संगिनी रही,
वह दलित है।

■ मौन जिसकी वाणी,क्रंदन जिसकी कहानी और वेदना जिसकी रानी रही, वह दलित है।

■ श्रम को साध्य और कर्म को आराध्य मानकर भी दैन्य-दंश झेलने के लिए जो सदैव बाध्य रहा,वह दलित है।

विश्वनाथ चतुर्वेदी
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Vishwanath Chaturvedi

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मीडिया ने भुलाया कलंक दिवस,सी बी आई के सहारे बची थी मनमोहन सरकार,शर्मसार हुई संसद!!

भारतीय राजनीति का कलंक दिवस???आज के ही दिन 2008 में न्यूक्लियर डील के ईसू पर वामपंथियो द्वारा 62 सांसदों के साथ समर्थन वापसी के बाद सी बी आई के भरोसे बची थी मनमोहन की सरकार और खुलेआम संसद के फ्लोर पर लहराई गई थी नोटों की गड्डियां आजाद भारत के इतिहास में लोकतंत्र के मंदिर में घटित यह पहली घटना थी।

अपने आप की अनोखी घटना के गुनहगार उसी संसद के सदस्य है,और सौदेवाजी कर 39 सांसदों के साथ सरकार बचाने वाले मुलायम कुनबे पर 10 फरवरी 2009 से सर्वोच्च न्यायालय में फैसला सुरछित है।

कैसा घिनोना मज़ाक बनकर रह गया है हमारा लोकतंत्र???
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Vishwanath Chaturvedi

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■ इशरो ने 26 मिनिट में 20 रॉकेट छोड़ बनाया रिकार्ड >

■ बात-बात पर नेहरू को कोसने वाले भक्तो अब बताओ इसरो का निर्माण भी मोदी ने ही चाय बेचने के दौरान ही किया था?नही तो आधुनिक भारत के निर्माता इशरो,भामा एटामिक केन्द्रो सहित देश को दुनिया में सबसे आगे होंगे हिन्दुस्तानी के संकल्प के साथ देश में मौजूद सीमित संसाधनों के बावजूद दुनिया में भारत को अलग पहचान दी।आज अमेरिका,जर्मनी कनाडा सहित दुनिया के तमाम मुल्क़ श्री हरिकोटा आकर अपने सेटलाइट सफलता पूर्वक स्थापित कराने को लालायित नज़र आते है।

शायद नेहरू का यह योगदान भक्तो को दिखाई न दे रहा हो,लेकिन देश के लिए नेहरू के किये योगदान सादिया याद रखेगी।आज भारत के प्रत्येक नागरिक का सर गर्व से ऊँचा हुआ है।और 10 करोड़ डॉलर की आय भी हुई है।

भक्तो कोसने के बजाय देश की बुनियादी समस्याओं को दूर करो,नेहरू को इतिहास संघ/भाजपा कभी नही मिटा पायेगे।

विश्वनाथ चतुर्वेदी
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राष्ट्र पिता महात्मा गांधी ने दलितों के लिए "हरिजन"शब्द का प्रयोग किन परिस्थतियो में में किया,1933 में उन्होंने "हरिजन" पत्रिका में प्रकाश डालते हुए लिखा है:-

काठियावाड़ के अछूत भाई ने मुझे लिखा अछूत शब्द से मुझे दुःख होता है। उसी भाई ने मुझे बताया कि एक भजन में भक्त कबि नरसी मेहता ने अछूत भाइयो का उल्लेख "हरिजन " नाम से किया था।हरिजन का अर्थ ईश्वर का भक्त ईश्वर का प्यारा।ईश्वर की प्रतिज्ञा है,दुखियो का वह बेली है,दया का सागर है,अशक्तों को शक्ति देने वाला है,निर्बल का बल है,पंगू का पैर है,अंधो की आँख है,इसलिये दलित उसके प्यारे होने ही चाहिये। इस दृष्टि से अछूत भाइयो के लिए" हरिजन" शब्द सर्वथा उपयुक्त है,ऐसा मेरा विश्वास है।

संसार भर के धर्म ईश्वर को अनाथो का मित्र् ,बेसहारो का सहारा,निर्बलों का रच्छक कहकर बताते है। गाँघी ने लिखा है ईश्वर ने मुझे जेल भोगते हुए भी उनकी सेवा का अवसर दिया।

संत कबीर की कालजयी रचना साखी के प्रथम दोहे में ही:-

हरि समान को हितू है,हरिजन सैम को जाति लिखा हुआ है।

विश्वनाथ चतुर्वेदी
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Vishwanath Chaturvedi

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ख्वाजा गरीब नवाज के दरबार में
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Vishwanath Chaturvedi

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छबिराम से शुरू होकर मुख्तार तक की मुलायम यात्रा!

अपराधीकरण की राजनीति के पुरोधा है मुलायम!!

खत्म हुआ पारिवारिक ड्रामा,कुनबे में बर्चस्व को लेकर मचा है घमासान,अपराधी,भृष्टाचारी कुनबे की पहली पसन्द!!

उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री रहे स्व: विश्वनाथ प्रताप सिंह द्वारा शुरू किये डकैत उन्मूलन अभियान के दौरान विधान सभा में पूछे गए एक सवाल का जबाब देते हुए बिधान सभा में चम्बल के खूंखार डकैत छबिराम गिरोह के सदस्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि मुलायम सिंह यादव गिरोह के संरक्षण का कार्य कर रहे है। और इस गिरोह से मुलायम के क़रीबी रिश्ते है।इसलिये गिरोह पर कार्यवाही करने में दिक्कत आ रही है। शायद उत्तर प्रदेश में ख़बरे दिखाने वालो को मुलायम के अपराधी प्रेम का एहसास नही है।

राज्य में 90 के दशक में अपराधियो के साथ खुलेआम मंच शेयर करने की किसी राजनेता की हैसियत नही थी।उस दौरान भाजपा के समर्थन से पहली बार मुख्यमंत्री बने मुलायम सिंह की सरकार को बड़ा झटका तब लगा,जब आडवाणी जी की रथ यात्रा शुरू हुयी, और रथ को बिहार में रोके जाने के बाद भाजपा द्वारा केंद्र सरकार से समर्थन वापसी के बाद केंद्र में तत्कालीन प्रधानमंत्री बी पी सिंह की सरकार अल्पमत में आ गयी। देश में धार्मिक उन्माद चरम पर था। अयोध्या में कार सेवको पर पुलिश की गोली से आधा दर्जन उपद्रियो की मौत हुयी । आंदोलन को काउंटर करने के लिए वर्षो से धूल खा रही मंडल कमीशन की रिपोर्ट पिटारे से निकाल बी पी सिंह की सरकार ने धार्मिक उन्माद को जातीय उन्माद से काटने का असफल प्रयाश किया।उसी रिपोर्ट ने रातोरात मुलायम जैसे खूंखार अपराधियो को भी "नेता जी" बना दिया।केंद्र में शुरू हुआ उठापटक का दौर इसी दौरान काग्रेस के समर्थन से केंद्र में स्व: चन्द्रशेखर की सरकार बनी तो राज्य में अल्पमत मुलायम सिंह को समर्थन देकर काग्रेस ने राज्य की सरकार बचा ली।

बाहर से समर्थन दे रही काग्रेस को मंत्री मंडल में हिस्सेदारी की दरकार नही थी।मुलायम ने उस दौरान पश्चिम उत्तर प्रदेश के कुख्यात अपराधी डी पी यादव को पहली बार अपने मंत्री मंडल में स्थान देकर सूबे में अपराधियो के लिए सियासत में परदे के पीछे रहने वाले तस्कर ,माफिया डकैत,फिरौती के धंधे में लगे अपराधियो के लिए सत्ता के द्वार खोल दिए,इसके बाद तो सारे राजनैतिक दलो में अपराधी भरने की होड़ लग गयी।कोई राजनैतिक दल अब यह कहने की हैसियत में नही है,कि हम भरष्टाचार,अपराधमुक्त राज्य दूँगा।

देश को आधा दर्जन से ज्यादा प्रधानमंत्री देने वाला राज्य आज अपनी बदक़िस्मती पर आंसू बहा रहा है।देश के आज़ादी के आंदोलन में देश का नेतृत्व करने वाले राज्य की कमान 2007 से C B I के वाण्टेड अपराधी मुलायम कुनबे के हाथ में है।
कुनबे की 2007 से जनता की आँखो में धूल झोककर केंद्रीय सत्ता के तलवे चाट कर जेल जाने से बचने की क़वायद में कभी धर्मनिरपेक्ष होकर मनमोहन सिंह की सरकार के क़सीदे पढ़ते नज़र आते है,तो सत्ता परिवर्तन होते ही गुजरात के विकास मॉडल को आदर्श बता मोदी के क़सीदे पढ़ने में सारी सीमाये लांघ जाते है।

वैसे भी मुलायम का संघ परिवार से पुराना और मज़बूत रिश्ता है।चूँकि संघ के लिए वोटो की उपजाऊ भूमि देने में मुलायम मुफ़ीद नज़र आते है।उन्होंने ही भाजपा को91 में पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार सौपी थी।और मुलायम कुनबे की सरकार के रहते ही मोदी को राज्य से बिन मांगे 73 सीटो की सौगात मिली।अब विधान सभा चुनावो तक राज्य में मथुरा,कैराना जैसे
मुद्दों पर जबाबी कव्वाली चलेगी,आप भी चुनावो तक कव्वाली का मज़ा लीजिये।

विश्वनाथ चतुर्वेदी
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Vishwanath Chaturvedi

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** फोन टेपिंग पर मचा कोहराम-बेपर्दा हुआ काॅरपोरेट घरानों का देशद्रोही चेहरा **

=> काॅरपोरेट घरानों के फोन टेपिंग मामले को लेकर पिछले कई दिनों से देशभर में हंगामा मचा हुआ है। फोन टेपिंग के चलते जहां एक तरफ काॅरपोरेट घरानों का देशद्रोही चेहरा बेनक़ाब हो गया है वहीं काॅरपोरेट घरानों की दलाली करने को लेकर हमारी सरकार और सिस्टम एक बार फिर सवालों के कठघरे में हैं।

ये कोई पहली बार नहीं है जब फोन टेपिंग से कोई बड़ा खुलासा हुआ हो लेकिन सवाल ये है कि क्या अब इस मामले में कोई सख़्त कार्रवाई होगी क्योंकि फोन टेपिंग को लेकर हमारे देश में कोई कारगर कानून नही है। सरकार ने अपनी खाल बचाने के लिए जांच के आदेश तो दे दिए लेकिन बड़ा सवाल वही है कि कौन करेगा जांच???
ED, CVC, CBI जैसी एजेंसियां???
पिंजरे में क़ैद तोतों पर देशवासियों का भरोसा ख़त्म हो चुका है।
देश के प्रत्येक नागरिक को मालूम है कि काॅरपोरेट घरानों का देशद्रोही चेहरा बेनक़ाब होने के बावजूद इन दलालों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
उदारीकरण के बाद बजट से लेकर पाॅलिसी बनाने का काम पूंजीपतियों के हवाले हो गया है और राजनैतिक दलों के प्यादे सिर्फ संसद में हाथ उठाते हैं।
सवाल ये है कि हमारे देश के सबसे बड़े काॅरपोरेट दलालों के तौर पर बदनाम अमर सिंह और नीरा राडिया जैसे चेहरों के फोन टेपिंग पर आख़िरकार आजतक क्यों नहीं हुई कार्रवाई???
हमारे देश में किसी बड़ी घटना को लेकर बड़े लोगों के नाम आते ही एक-दूसरे को बचाने की क़वायद शुरू हो जाती है।
सरकार की तरफ से कोर्ट में लिझलिझी दलीलें दी जाती हैं तो अदालत में नहीं ठहर पाते ऐसे मुक़दमे।
कोर्ट में वादी-प्रतिवादी के बीच होती है फिक्सिंग। दोनों पक्षों की लचर दलीलें सुनकर कोर्ट भी रह जाती है हैरान।
इतना ही नहीं, पूंजीपतियों का नाम आते ही सरकारों सहित तथाकथित रूप से चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया को भी सांप सूंघ जाता है और फिर अर्थव्यवस्था के ख़राब होने का हवाला, रोज़गार के अवसर, विदेशी निवेश ठहर जाने इत्यादि बहानों के साथ नतीजा वही ढाक के तीन पात।

तो क्या इस मौजूदा शोर के बाद क्या अब किसी पर कोई कार्रवाई होगी या नहीं, इसका जवाब तो अब सिर्फ वक़्त ही देगा..।।

विश्वनाथ चतुर्वेदी,

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Collections Vishwanath is following
Work
Occupation
SOCIAL WORKER , POLITICIAN , LAWYER
Employment
  • SOCIAL WORKER, 1983 - present
    anti-corruption movement, da case against mulayam singh yadav, food grain scam(fertilizer scam,land scam lda)
  • LAWYER, present
  • VISHWANATH CHATURVEDI
    POLITICIAN, 1985 - 2005
    ex-geneal secretary (kkc) student union lucknow university, ex-secretary Indian national trade union congress, ex-member of upcc
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NEW DELHI
Previously
LUCKNOW - SHIVGARH, RAIBARELY
Story
Tagline
सामाजिक कार्यकर्ता/ अघिवक्ता
Education
  • LUCKNOW UNIVERSITY KKC COLLEGE
    B.A LLB, 1984 - 1990
    B.A L.L.B
  • S.B.V.P INTER COLLEGE
    12th
Basic Information
Gender
Male
Other names
MOHAN