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Vishwanath Chaturvedi
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प्रशांत किशोर को मुलायम की सियासत का एबीसीडी पता नही!!

1999में विदेशी मूल का बता श्रीमती सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनने से रोकने वाले मुलायम ने 2007 से सीबीआई के शिकंजे में आने बाद न्यूक्लियर डील के मौके पर बाम दलों को धोखा देकर कांग्रेस के साथ मोहब्बत से नही बल्कि सीबीआई के भय से साथ खड़े हुए थे।उस वक्त मुलायम और मनमोहन के बीच हुई सोदेवाजी में मुलायम के ख़िलाफ़ पेंडिंग सारे मुक़दमे खत्म करने का सौदा हुआ,लेकिन केंद्र सरकार जब मुकदमा वापिस लेने कोर्ट गयी तो मेरे विरोध के कारण मामला फस गया,उस वक्त2009 के लोकसभा चुनाव में गठवन्धन की कवायद दिग्विजय सिंह के हाथ में थी,और रोज बैठकों का दौर चल रहा था।वही कोर्ट में मुलायम के आय से अधिक मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी,सुनवाई के दौरान मुलायम को लगा कि मुझे कोर्ट से राहत नही मिलेगी तो वह गठवन्धन से भागने लगे।आखिर 10 फरवरी 2009 को मुलायम केश में फैसला रिजर्व हो गया।मुलायम को कोर्ट में मेरे विरोध के बाद यह यकीन हो गया कि मेरे साथ धोखा हुआ,मुलायम ने गठवन्धन की कवायद अमर पर छोड़ अपनी तैयारी शुरू कर दी।17 सीटो मांग रही कांग्रेस को ठेंगा दिखाते हुए 30 मार्च 2009 को अमर ने एक सीडी जारी कर मुझे श्री मती सोनिया गांघी का प्यादा बताते हुए एकतरफा गठवन्धन तोड़ने का एलान कर दिया। तब तक कांग्रेस द्वारा तय किये गए मानकों के मुताबिक कांग्रेस में जीते हुए व् रनर रहे लोगो की तादाद 17 थी।गठवन्धन में चुनाव लड़ने को व्याकुल दिख रहे बिलबिलाए काग्रेसियों के पसीने छूट गए और चुनाव लड़ने से भागने की जुगत में लग गए। बहुत से चुनावी उमीदवारों से मेरी कहा-सुनी भी हुई,उन लोगों को लगा कि मैंने विरोध न किया होता तो गठवन्धन हो जाता।वो अमर मुलायम के जूते साफ़ करने वाले नेतावो के लिए शत्रु no 1 हो चुके थे।

आखिरकार चुनावो में रोते हुए गये 54उम्मीदवारों में 21 को जीत मिली लेकिन मीडिया द्वारा किया गया विश्लेषण पूर्ण रूप से झूठा था।उस वक्त कर्ज माफी,मनरेगा,अरबी मदरसों के आधनिकीकरण के लिए केंद्र द्वारा दिए गए 300 करोड़ के पॅकेज,कल्याण सिंह की सपा में ज्वाइनिंग,आजम की नाराजगी,सत्तारूढ़ बसपा के ख़िलाफ़ आम आदमी का आकोर्स,भाजपा की न्यूक्लियर डील पर हार के बाद की हताशा मुख्य कारण बनी,लेकिन जीत के कारणों का विश्लेषण भाड़ बंदना में तब्दील हो गया।
2009 में केंद्र में पुनः कांग्रेस की सरकार बनी तो सीबीआई की लगाम फिर से कांग्रेस के पास थी,मुलायम फिर से बिन माँगे समर्थन देने लगे,09 से 14 तक कोर्ट में सीबीआई ने आधा दर्जन बार अपना स्टैंड बदला,काट मोशन जे पी सी फ़ूड गारंटी बिल राष्ट्रपति चुनावो में ममता के साथ प्रेस वार्ता के अचानक प्रणव के पाले में आने के पीछे सीबीआई ही थी।

प्रशांत किशोर जैसे लौंडो को मुलायम के धोबी पाट का अंदाजा नही है।यह वही मुलायम है जो 1990 में स्व:राजीव गांघी सायं दिल्ली में मिलने के बाद यह आश्वासन देकर गये थे कि सरकार नही भंग करूँगा, और सुबह 5 बजे राज्यलाल को चिट्ठी सौप विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर दी।

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भीङ में भी तन्हा था मैं
खुद से ही कुछ खफा था मैं
जिन्दगी से नाराज था मैं
उङने को आसमानों में बेताब था मैं
कैसे लगते पंख उङानो को
जब किस्मत से भी हताश था मैं
हर तरफ इम्तिहान की बारिश
खुद को साबित करने की ख्वाहिश
जिन्दगी में कुछ अधूरापन है
उसको समझने की है एक कोशिश
हर लम्हे में है खुद की आजमाइश
शायद खुद की तलाश है जिन्दगी
ख्वाब जो देखे उनसे मिलना है जिन्दगी
खुद की खुशी औरो में ढूँढना है जिन्दगी
जो भी है रब की इनायत है जिन्दगी।।

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कबीर, मांस मांस सब एक है, मुरगी हिरनी गाय

संत कबीरदास मांसाहार को पूरी तरह से अनुचित मानते थे और उनके लिखे दोहे इसका प्रमाण हैं.....

कबीर, मांस अहारी मानई, प्रत्यक्ष राक्षस जानि।
ताकी संगति मति करै, होइ भक्ति में हानि।।
कबीर, मांस मछलिया खात हैं, सुरापान से हेत।
ते नर नरकै जाहिंगे, माता पिता समेत।।
कबीर, मांस मांस सब एक है, मुरगी हिरनी गाय।।
जो कोई यह खात है, ते नर नरकहिं जाय।।
कबीर, जीव हनै हिंसा करै, प्रगट पाप सिर होय।
निगम पुनि ऐसे पाप तें, भिस्त गया नहिंकोय।।
कबीर, तिलभर मछली खायके, कोटि गऊ दै दान।
काशी करौत ले मरै, तौ भी नरक निदान।।
कबीर, बकरी पाती खात है, ताकी काढी खाल।
जो बकरीको खात है, तिनका कौन हवाल।।
कबीर, अंडा किन बिसमिल किया, घुन किन किया हलाल।
मछली किन जबह करी, सब खानेका ख्याल।।
कबीर, मुला तुझै करीम का, कब आया फरमान।
घट फोरा घर घर दिया, साहब का नीसान।।
कबीर, काजी का बेटा मुआ, उरमैं सालै पीर।
वह साहब सबका पिता, भला न मानै बीर।।
कबीर, पीर सबनको एकसी, मूरख जानैं नाहिं।
अपना गला कटायकै, भिश्त बसै क्यों नाहिं।।
कबीर, जोरी करि जबह करै, मुखसों कहै हलाल।
साहब लेखा मांगसी, तब होसी कौन हवाल।।
कबीर, जोर कीयां जुलूम है, मागै ज्वाब खुदाय।
खालिक दर खूनी खडा, मार मुही मुँह खाय।।
कबीर, गला काटि कलमा भरै, कीया कहै हलाल।
साहब लेखा मांगसी, तब होसी कौन हवाल।।
कबीर, गला गुसाकों काटिये, मियां कहरकौ मार।
जो पांचू बिस्मिल करै, तब पावै दीदार।।
कबीर, कबिरा सोई पीर हैं, जो जानै पर पीर।
जो पर पीर न जानि है, सो काफिर बेपीर।।
कबीर, कहता हूं कहि जात हूं, कहा जो मान हमार।
जाका गला तुम काटि हो, सो फिर काटै तुम्हार।।
कबीर, हिन्दू के दाया नहीं, मिहर तुरकके नाहिं।
कहै कबीर दोनूं गया, लख चैरासी मांहि।।
कबीर, मुसलमान मारै करद सों, हिंदू मारे तरवार।
कह कबीर दोनूं मिलि, जावैं यमके द्वार।।
कबीर, पानी पथ्वी के हते, धूंआं सुनि के जीव। ृ
हुक्के में हिंसा घनी, क्योंकर पावै पीव।।
कबीर, छाजन भोजन हक्क है, और दोजख देइ।
आपन दोजख जात है, और दोजख देइ।।






सीबीआई के इशारे पर नाचने वाले धोखेबाज मुलायम का नया पैतरा!!

महागठबंधन बनाकर चुनाव चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे मुलायम पर कौन करेगा भरोसा,बिहार चुनाव में पहले सीबीआई के डर से गठबंधन तोड़ चुके है,सीबीआई तो अब भी मोदी जी के पास ही है,क्या मुलायम जेल जाने को तैयार है?यदि नही तो मोदी जी के इशारे पर नाचना मुलायम की मजबूरी है।
अभी हाल में देश ने मुलायम द्वारा पढ़ा गया अमर नामा आपने सुना है,"यदि अमर ने कोर्ट न मैनेज की होती तो 7साल की जेल होती'" बिगत एक दसक से न्यूक्लियर डील के बाद से सीबीआई के इशारे पर नाचना मुलायम की मज़बूरी हो चुकी है।आय से अधिक मामले में मीडिया द्वारा पैसे खाकर तीन बार क्लींन चिट दे चुकी है।और अभी हाल में मीडिया द्वारा एक और फर्जी ख़बर चलायी गई,कि सीबीआई जांच की मांग की याचिका ख़ारिज, मीडिया के अथक प्रयासों के बावजूद अब तक केश सीबीआई के के पास पेंडिग है।और सीबीआई मोदी जी की जेब में,अब बताओ मुलायम गठबंधन बनायेगे या जेल जायेगे??
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