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साजिद की क़लम sajid
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साजिद की क़लम's posts

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तौबा...
जब हम से कोई गलती हो जाय
और हम उस गलती को मानने के लिए तैयार ना हो बल्कि अपनी गलती को सही साबित करने की
कोशिशि में लग जाय और अपने साथियो की हिमायत से खुद उन लोगों से लड़ने लगे जो हमें
हमारी गलती से आगाह कर रहे है जब हम अपनी गलती पर इस तरह अकड़ते है और जो लोग ...

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ज़िन्दगीबख्श ख़ुसूसियात
मौजूदा दुनिया में जो
हालात है महज़ इम्तिहान के लिए है इम्तिहान की मुर्रर मुद्दत ख़त्म होने के बाद ये
हालात बाक़ी नहीं रहेंगे इसके बाद ज़मीन की सारी ज़िन्दगीबख्श ख़ुसूसियात ख़त्म कर दी
जायंगी ज़मीन ऐसी खाली जगह हो
जायगी जहा ना किसी के लिए अकड़ने का सामान होगा और ना फ़...

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सहुलियतें
अल्लाह का एहसान है कि
उसने इंसान / हमें वजूद अता किया और फिर यु ही नहीं छोड़ दिया, हमें रहने को ऐसी ज़मीन दी जो
इंसान के लिए बेहद उम्दा / अनुकूल है, बात सिर्फ इतनी नहीं बल्कि इससे बहुत आगे की
है, इंसान / हम हर वक़्त ऐसी नाज़ुक हालत में रहते है के कभी भी मौत आ ज...

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बदतरीन मुजरिम
दुनिया में किसी को कुछ
भी मिलता है तो वो अल्लाह की तरफ़ से है इसलिए किसी को अच्छे हाल
में देख कर जलना और उसके नुक्सान की कोशिश करना ऐसे है जैसे अल्लाह के मंसूबे को
बातिल करने की कोशिश करना, क्योके दुनिया दारुलअसबाब है इसलिए एक हद तक तो इंसान
को अमल करने का म...

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माल-ए-ग़ैर
दुनिया में जो कुछ है वह
सब हमारे लिए माल-ए-ग़ैर है, क्योके सब कुछ अल्लाह का है उसे अपने लिए जाईज़ करने की
वाहिद सूरत है के अल्लाह के बाताए तरीक़े से हासिल किया जाए और उसे अल्लाह के बताए
तरीक़े से इस्तेमाल किया जाए |

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नमाज़
नमाज़ इंसान को बुराईयों
से पाक करती है, जब हम नमाज़ का इरादा करते है तो पहले पानी से वुज़ू करते है पानी बहुत बड़ी नेमत है जो
इंसान के लिए हर किस्म की गन्दगी को धोने का बेहतरीन जरिया है इसी तरह नमाज़ भी एक
रब्बानी चश्मा है जिसमे नहाकर इंसान अपने आपको बुरे जज़्बात ...

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माबूद ..
इंसान अपनी फ़ितरत और अपने हालात के लिहाज़ से एक इसी मख्लूक है जो हमेशा
अपने लिए एक सहारा चाहता है, एक एसी हस्ती जो उसकी कमियों की तलाफ़ी करे, और
उसके लिए एतमाद और यकीन की बुनियाद हो, किसी को इस हैसियत से अपनी ज़िन्दगी
में शामिल करना अपना माबूद बनाना है | इस ...

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बाग़
आदमी जवानी की उम्र में बाग़ लगाता है ताकी बुढ़ापे की उम्र में उसका फल खाए,
फिर वह शख्स कैसा बदनसीब है जिसका हरा-भरा बाग़ उसकी आख़िरी उम्र में ऐन उस
वक़्त बर्बाद हो जाए | जबकि वह सबसे ज़्यादा उसका मोहताज हो और उसके लिए
वह वक़्त भी ख़त्म हो चूका हो जबकि वह ना बाग़ ...

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निज़ाम
ज़मीन के ऊपर शुक्र, सब्र, तवाज़ो और कनाअत के साथ रहना ज़मीन की इस्लाह है इसके विपरीत नाशुक्री, बेसब्री, घमंड और हिर्स के साथ ज़मीन में रहना फसाद बरपा करना है क्योके इससे खुदा का कायम किया हुवा फ़ितरी निज़ाम टूटता है यह हद से निकल जाना है । जबके अल्लाह चाहता है हर...
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