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Narendra Singh Tomar NST
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क्या अपने बारे में कहें जनाब, खुद ही नहीं जान पाये कि हम बला क्या हैं M.Sc.(PHYSICS), B.E.(ELECTRICAL ENGG.), L.L.B. (ADVOCATE IN PRACTICE), Throughout First Class Educational Background. Topper of Sanskrit, Mathematics, Physics, Electrical Enggineering.PRINCIPAL EDITOR & C.E.O. GWALIOR TIMES (www.gwaliortimes.com) , Director- National Noble Youth Academy, Managing Director- DEVPUTRA PVT. LTD. Group of Companies. ADVOCATE, Expert Web Designer and Specialist of Cyber Laws. Very popular Name and Fame in field of Social work, Astrology, Tantra Mantra Yantra, Legal Practices, Advocacy and Criminal Investigations. Completed many research and Written various Books on Various Topics. well known writer/ Author Published many Books and Articles ( More than 1500 ) Poems, Got many Awards in personal and institutionally. Specially invented Cheap moisture free Cooler/ cooling Technology Based on Rajput Forts. completed research on Rajput Dynasties and clans based on original Vanshavalis of Rajputas. Also prepared complete unemploymency removal programme throughout India. Successor of Tomar Dynasty , Last Hindu Rulers , Last Hindu Rajvansh of India who fought and won Mahabharat war, The main Forefathers of Tomar Dynasty was Prince Arjun and Princess Subhadra ( Sister of Shri Krishna) their Son was Abhimanyu and His wife Uttaras Son was Maharaja Parikshat, Maharaja Parikshat's Son was Maharaja Janmenjay Singh Tomar who organised and held Very famous and popular Sarp Yagya. Last Ruler at Delhi of this Dynasty was Maharaja Anang Pal Singh Tomar, who Established his New State at Chambal Valley and made his capital AISAH Garhi, his grand Son's son Maharaja Dev Varam Singh Tomar Who also known as Veeram Dev Singh Tomar Established Gwalior State and its capital was Gwalior, Tomar Dynasty Basically has its Root Singhaasan At Karnataka of Maharaja Tungpal Singh Tomar in South India. Aadi Khera of this Dynasty is Hastina Pur, This Dynasty was Established DELHI and Ruled on this , Indra Prastha is famous for established by Tomars, which was a Basic reason due to heart touching satire said by Dropadi to Duryodhan.
क्या अपने बारे में कहें जनाब, खुद ही नहीं जान पाये कि हम बला क्या हैं M.Sc.(PHYSICS), B.E.(ELECTRICAL ENGG.), L.L.B. (ADVOCATE IN PRACTICE), Throughout First Class Educational Background. Topper of Sanskrit, Mathematics, Physics, Electrical Enggineering.PRINCIPAL EDITOR & C.E.O. GWALIOR TIMES (www.gwaliortimes.com) , Director- National Noble Youth Academy, Managing Director- DEVPUTRA PVT. LTD. Group of Companies. ADVOCATE, Expert Web Designer and Specialist of Cyber Laws. Very popular Name and Fame in field of Social work, Astrology, Tantra Mantra Yantra, Legal Practices, Advocacy and Criminal Investigations. Completed many research and Written various Books on Various Topics. well known writer/ Author Published many Books and Articles ( More than 1500 ) Poems, Got many Awards in personal and institutionally. Specially invented Cheap moisture free Cooler/ cooling Technology Based on Rajput Forts. completed research on Rajput Dynasties and clans based on original Vanshavalis of Rajputas. Also prepared complete unemploymency removal programme throughout India. Successor of Tomar Dynasty , Last Hindu Rulers , Last Hindu Rajvansh of India who fought and won Mahabharat war, The main Forefathers of Tomar Dynasty was Prince Arjun and Princess Subhadra ( Sister of Shri Krishna) their Son was Abhimanyu and His wife Uttaras Son was Maharaja Parikshat, Maharaja Parikshat's Son was Maharaja Janmenjay Singh Tomar who organised and held Very famous and popular Sarp Yagya. Last Ruler at Delhi of this Dynasty was Maharaja Anang Pal Singh Tomar, who Established his New State at Chambal Valley and made his capital AISAH Garhi, his grand Son's son Maharaja Dev Varam Singh Tomar Who also known as Veeram Dev Singh Tomar Established Gwalior State and its capital was Gwalior, Tomar Dynasty Basically has its Root Singhaasan At Karnataka of Maharaja Tungpal Singh Tomar in South India. Aadi Khera of this Dynasty is Hastina Pur, This Dynasty was Established DELHI and Ruled on this , Indra Prastha is famous for established by Tomars, which was a Basic reason due to heart touching satire said by Dropadi to Duryodhan.

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अंतत: बसपा कांग्रेस का मध्यप्रदेश में गठबंधन तय हो ही गया, दोनों ओर से ग्रीन सिग्नल हो चुके हैं, मतलब रेल गाड़ी थ्रू है. ग्वालियर चम्बल में बसपा ज्यादा सीटें लड़ेगी यह भी संकेत हैं , दिमनी, अम्बाह,जौरा,सुमावली , सबलगढ़ विधानसभा सीटें खास अहमियत वाली सीटें हैं, देखते हैं इन सीटों पर किसके पहलवान खम ठोकेंगें . बस अभी तो केवल इतना कहना हैं कि यह गठबंधन सत्तासीन भाजपा को बहुत भारी नुकसान हीं नहीं पहुंचायेगा बल्कि भाजपा का चंबल संभाग या कहिये मुरैना , भिण्ड व श्योपुर जिला से सूपड़ा साफ कर सकने की ताकत व तासीर रखता है, वरना तो भाजपा की दो सौ पार होंगीं ही , मगर गठबंधन की सूरत में भाजपा को चम्बल में दो पार कर पाना बड़ी टेढ़ी खीर होगी . -- नरेन्द्र सिंह तोमर "आनन्द"
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ग्वालियर चंबल में कुछ या कई विधानसभा सीटों पर , लोकसभा सीटों पर.कांग्रेस के महागठबंधन की तैयारी की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, दूसरी ओर दैनिक भास्कर में मधुसूदन मिस्त्री के हवाले से छपी खबर के मुतल्लिक , दिमनी विधानसभा और मेहगांव विधानसभा सहित अन्य विधानसभाओं में अपने टिकिट के लिये कांग्रेस में हवा बना रहे नेताओं की हवा निकाली, कांग्रेस हाईकमान ने . बकौल दैनिक भास्कर , दो बार हारे प्रत्याशी आउट हुये, जिन जिलाध्यक्षों के कार्यकाल में कांग्रेस हारी, अब उन्हें या उनके परिजन या रिश्तेदार को.अब टिकट नहीं मिलेगा। जिन बड़े नेताओं ने सिफारिश कर सन 2013 के चुनाव में टिकट दिलाये, अब उनकी सिफारिश पर टिकट नहीं मिलेगा. सन 2013 के चुनाव में जिन जीतने योग्य व पात्र लोगों के बायोडाटा कूड़े में फेंक दिये थे, अब उसी सन 2013 की सूची को ही कंसीडर किया जा रहा है, और उसी के अनुसार ही काग्रेस.बिना सिफारिश वाले दमदार जिताऊ प्रतयाशी चुनेगी . यानि अपनी गलती खुद सुधारेगी . लिहाजा इलाकेबाजी और खेमेबाजी का काग्रेस प्रत्याशी चयन में कोई भूमिका नहीं होगी . . . . .
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हर ब्राह्मण सुदामा नहीं होता, हर राजपूत श्रीकृष्ण नहीं होता, सुदामा की मैली कुचली गंदी बेहाल हुई हालत देख द्वारपाल ठठा कर हंसे, और उपहास उड़ा दुत्कार दिया । मगर श्रीकृष्ण उससे मिलने सिंहासन छोड़ नंगे पांव दौड़े आये , बस इतना ही फर्क है आदमी का आदमी से ... वह द्वारपाल थे, वह त्रिलोकेश्वर जगत्पति थे, वह उनकी तासीर थी और वह उनकी तासीर थी . हीरे गुदड़ी में भी हों तो भी वे अनमोल ही रहेंगे, कांच मखमल में भी हो तो लाख बार चमकाने पर भी हीरे का मुकाबला कभी नहीं कर सकता .
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जानिए करता है सायबर क्राइम और आजीवन कारावास तक की हो सकती है इसमें सजा I.T. Act 2000
अध्याय ११
अपराध

६५. कंप्यूटर साधन कोड से छेड़छाड़ - जो कोई, कंप्यूटर, कंप्यूटर कार्यक्रम, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क के लिए उपयोग किए जाने वाले किसी कंप्यूटर साधन कोड को, जब कंप्यूटर साधन कोड का रखा जाना या अनुरक्षित किया जाना तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा अपेक्षित हो, जानबूझकर या साशय छिपाता है, नष्ट करता है या परिवर्तित करता है अथवा साशय या जानबूझकर किसी अन्य से छिपवाता है, नष्ट करता है या परिवर्तित करता है तो वह कारावास से, जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से, जो दो लाख रूपये तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडनीय होगा|
स्पष्टीकरण: इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "कंप्यूटर साधन कोड" से कार्यक्रमों, कंप्यूटर समादेशों, डिज़ाइन और विन्यास का सूचीबद्ध करना तथा कंप्यूटर साधन का किसी भी रूप में कार्यक्रम विश्लेषण अभिप्रेत है|

६६. कंप्यूटर से संबंधित अपराध - यदि कोई व्यक्ति, धारा ४३ में निर्दिष्ट कोई कार्य बेईमानी से या कपटपूर्वक करता है, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पांच लाख रूपये तक का हो सकेगा या दोनों से, दंडनीय होगा|
स्पष्टीकरण: इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
(क) "बेईमानी से" शब्दों का वही अर्थ है जो भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) की धारा २४ में है|
(ख) "कपटपूर्वक" शब्द का वही अर्थ है जो भारतीय दंड संहिता (१८६० का ४५) की धारा २५ में है|

६६-क. संसूचना सेवा आदि द्वारा आक्रामक संदेश भेजने के लिए दंड - कोई व्यक्ति, जो किसी कंप्यूटर संसाधन या किसी संसूचना के माध्यम से,-
(क) ऐसे किसी सूचना को, जो अत्यधिक आक्रामक या धमकाने वाली प्रकृति की है; या
(ख) ऐसी किसी सूचना को, जिसका वह मिथ्या होना जानता है, किंतु क्षोभ, असुविधा, खतरा, रुकावट, अपमान, क्षति या आपराधिक अभित्रास, शत्रुता, घृणा या वैमनस्य फैलाने के प्रयोजन के लिए, लगातार ऐसे कंप्यूटर संसाधन या किसी संसूचना युक्ति का उपयोग करके;
(ग) ऐसी किसी इलैक्ट्रानिक डाक या इलैक्ट्रानिक डाक संदेश को, ऐसे संदेशों के उद्गम के बारे में प्रेषिती या पाने वाले क्षोभ या असुविधा कारित करने या प्रवंचित या भ्रमित के प्रयोजन के लिए,
भेजता है, तो वह ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, दंडनीय होगा|
स्पष्टीकरण: इस धारा के प्रयोजनों के लिए "इलैक्ट्रानिक डाक" ओर इलैक्ट्रानिक डाक संदेश" पदों से किसी कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली, कंप्यूटर संसाधन या संचार युक्ति में सृजित या पारेषित या प्राप्त किया गया कोई संदेश या सूचना अभिप्रेत है, जिसके अंतर्गत पाठ, आकृति ऑडियो, वीडियो और किसी अन्य इलैक्ट्रानिक अभिलेख के ऐसे संलग्नक भी है, जो संदेश के साथ भेजे जाएं|

६६ख. चुराए गए कंप्यूटर संसाधन या संचार युक्ति को बेईमानी से प्राप्त करने की लिए दंड - जो कोई ऐसे किसी चुराए गए कंप्यूटर संसाधन या संचार युक्ति को, जिसके बारे में वह यह जानता है या उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि वह चुराया गया कंप्यूटर संसाधन या संचार युक्ति है, बेईमानी से प्राप्त करेगा या प्रतिधारण करेगा, तो वह दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से जो एक लाख रूपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दंडित किया जाएगा|

६६ग. पहचान चोरी के लिए दंड - जो कोई कपटपूर्वक या बेईमानी से किसी अन्य व्यक्ति के इलैक्ट्रानिक चिन्ह्क, पासवर्ड या किसी अन्य विशिष्ट पहचान चिन्ह का प्रयोग करेगा, तो वह दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने के लिए भी, जो एक लाख रूपये तक का हो सकेगा, दायी होगा|

६६घ. कंप्यूटर संसाधन का उपयोग करके प्रतिरूपण द्वारा छल करने की लिए दंड - जो कोई, किसी संचार युक्ति या कंप्यूटर संसाधन के माध्यम से प्रतिरूपण द्वारा छल करेगा, तो वह दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने के लिए भी, जो एक लाख रूपये तक का हो सकेगा, दायी होगा |

६६ङ. एकांतता के अतिक्रमण के लिए दंड - जो कोई, साशय या जानबूझकर किसी व्यक्ति के गुप्तांग के चित्र उसकी सहमति के बिना उस व्यक्ति की एकांतता का अतिक्रमण करने वाली परिस्थितियों में खींचेगा, प्रकाशित या पारेषित करेगा, वह ऐसे कारावास से, जो तीन वर्ष तक का हो सकेगा या जुमार्ने से, जो दो लाख रुपए से अधिक का नहीं हो सकेगा या दोनों से, दंडित किया जाएगा।
स्पष्टीकरण: इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
(क) “पारेषण” से किसी दृश्यमान चित्र को इस आशय से इलैक्ट्रानिक रूप में भेजना अभिप्रेत है कि उसे किसी व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा देखा जाए;
(ख) किसी चित्र के संबंध में "चित्र खींचना" से वीडियो टेप, फोटोग्राफ, फिल्म तैयार करना या किसी साधन द्वारा अभिलेख बनाना अभिप्रेत है;
(ग) "गुप्तांग" से नग्न या अंत: वस्त्र सज्जित जननांग, जघन अंग, नितंब या स्त्री स्तन अभिप्रेत हैं;
(घ) "प्रकाशित करने”से मुद्रित या इलैक्ट्रानिक रूप में पुन: निर्माण करना और उसे जनसाधारण के लिए उपलब्ध कराना अभिप्रेत है;
(ङ) “एकांतता का अतिक्रमण करने वाली परिस्थितियों के अधीन”से ऐसी परिस्थितियां अभिप्रेत है, जिनमें किसी व्यक्ति को यह युक्तियुक्त प्रत्याशा हो सकती है कि,—
(ई) वह इस बात की चिंता किए बिना कि उसके गुप्तांग का चित्र खींचा जा रहा है; एकांतता में अपने वस्त्र उतार सकता या उतार सकती है, या
(ईई) इस बात पर ध्यान दिए बिना कि वह व्यक्ति किसी सार्वजनिक स्थान या निजी स्थान में है उसके गुप्तांग का कोई भाग जनसाधारण को दृश्यमान नहीं होगा ।

६६च. साइबर आतंकवाद के लिए दंड—(१) जो कोई,—
(अ) भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा या प्रभुता को खतरे में डालने या जनता या जनता के किसी वर्ग में,—
(ई) कंप्यूटर संसाधन तक पहुंच के लिए प्राधिकृत किसी व्यक्ति को पहुंचे से इंकार करके या इंकार कराके; या
(ईई) प्राधिकार के बिना या प्राधिकृत पहुंच से अधिक किसी कंप्यूटर संसाधन में प्रवेश या उस तक पहुंच करने का प्रयास करके; या
(ईयी) किसी कंप्यूटर संदूषक को सन्निविष्ट करके या सन्निविष्ट कराके,
आतंक फैलाने के आशय से और ऐसा करके ऐसा कार्य करता है जिससे व्यक्तियों की मृत्यु या उन्हें क्षति होती है या संपत्ति का नाशा या विनाश होता है या होने की संभावना है या यह जानते हुए कि इससे समुदाय के जीवन के लिए आवश्यक आपूर्ति या सेवाओं को नुकसान या उसका विनाश होने की संभावना है या धारा ७० के अधीन विनिर्दिष्ट संवेदनशील सूचना अवसंरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है; या
(आ) जानबूझकर या साशय किसी कंप्यूटर संसाधन में प्राधिकार के बिना या प्राधिकृत पहुंच से अधिक प्रवेश या पहुंच करता है और ऐसे कार्य द्वारा ऐसी सूचना, डाटा या कंप्यूटर डाटा आधारसामग्री तक, जो राष्ट्रीय सुरक्षा या विदेशी संबंधों के कारण निर्बंधित है या कोई निर्बंधित सूचना डाटा या कंप्यूटर आधारसामग्री तक यह विश्वास करते हुए पहुंच प्राप्त करता है कि इस प्रकार अभिप्राप्त ऐसी सूचना, डाटा या कंप्यूटर डाटा आधारसामग्री का उपयोग भारत की प्रभुता और अखण्डता, राज्य की सुरक्षा, विदेशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों, लोक व्यवस्था, शिष्टता या नैतिकता के हितों को या न्यायालय की अवमानना के संबंध मे, मानहानि या किसी अपराध के उत्प्रेरण के संबंध में किसी विदेशी राष्ट्र, व्यष्टि, समूह के फायदे को क्षति पहुंचाने के लिए या अन्यथा किया जा सकता है या किए जाने की संभावना है,
तो वह साइबर आतंकवाद का अपराध करेगा ।
(२) जो कोई साइबर आतंकवाद कारित या करने की कूटरचना करेगा, तो वह कारावास से जो आजीवन कारावास तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा ।

६७. अशलील सामग्री का इलैक्ट्रानिक रूप में प्रकाशन या पारेषण करने के लिए दंड — जो कोई, इलैक्ट्रानिक रूप में, ऐसी सामग्री को प्रकाशित या पारेषित करता है अथवा प्रकाशित या पारेषित कराता है, जो कामोत्तेजक है या जो कामुकता की अपील करती है या यदि इसका प्रभाव ऐसा है जो व्यक्तियों को कलुषित या भ्रष्ट करने का आशय रखती है जिसमें सभी सुसंगत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उसमें अंतर्विष्ट या उसमें आरुढ़ सामग्री को पढ़ने, देखने या सुनने की संभावना है, पहली दोषसिध्दि पर, दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो पांच लाख रुपए तक का हो सकेगा, और दूसरी या पश्चात्वर्ती दोषसिध्दि की दशा में, दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा।

६७क. कामुकता व्यक्त करने वाले कार्य आदि वाली सामग्री के इलैक्ट्रानिक रूप में प्रकाशन के लिए दंड - जो कोई, किसी ऐसी सामग्री को इलैक्ट्रानिक रूप में प्रकाशित करता है या पारेषित करता है या प्रकाशित या पारेषित कराता है, जिसमें कामुकता व्यक्त करने का कार्य या आचरण अंतर्वर्लित है, पहली दोषसिध्दि पर, दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा और दूसरी या पश्चात्वर्ती दोषसिध्दि की दशा में, दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी, जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा ।

६७ख. कामुकता व्यक्त करने वाले कार्य आदि में बालकों को चित्रित करने वाली सामग्री को इलैक्ट्रानिक रूप में प्रकाशित या पारेषित करने के लिए दंड - जो कोई,— (क) किसी इलैक्ट्रानिक रूप में ऐसी कोई सामग्री प्रकाशित या पारेषित करेगा या प्रकाशित या पारेषित कराएगा, जिसमें कामुकता व्यक्त करने वाले कार्य या आचरण में लगाए गए बालकों को चित्रित किया जाता है; या
(ख) अशलील या अभद्र या कामुकता व्यक्त करने वाली रीति में बालकों का चित्रण करने वाली सामग्री का पाठ या अंकीय चित्र किसी इलैक्ट्रानिक रूप में तैयार करेगा, संगृहीत करेगा, प्राप्त करेगा, पढ़ेगा, डाउनलोड करेगा, उसे बढ़ावा देगा, आदान-प्रदान या वितरित करेगा; या
(ग) कामुकता व्यक्त करने वाले कार्य के लिए और उसके संबंध में या ऐसी रीति में बालकों को एक या अधिक बालकों के साथ ऑन-लाइन संबंध के लिए लगाएगा, फुसलाएगा या उत्प्रेरित करेगा, जो कंप्यूटर संसाधन पर किसी युक्तियुक्त वयस्क को बुरी लग सकती है; या
(घ) ऑन-लाइन बालकों का दुरुपयोग किए जाने को सुकर बनाएगा; या
(ङ) बालकों के साथ कामुकता व्यक्त करने वाले कार्य के संबंध में अपने दुर्व्यवहार को किसी इलैक्ट्रानिक रूप में अभिलिखित करेगा, तो वह प्रथम दोषसिध्दि पर, दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से, जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा, और दूसरी या पश्चात्वर्ती दोषसिध्दि पर, दोनों में से किसी भी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी और जुमार्ने से भी, जो दस लाख रुपए तक का हो सकेगा, दंडित किया जाएगा :
परतु धारा ६७, धारा ६७क और इस धारा के उपबंधो का विस्तार निम्नलिखित किसी पुस्तक, पर्चे, पत्र, लेख, रेखाचित्र, पेंटिंग, प्रदर्शन या इलैक्ट्रानिक रूप में आकृति पर नहीं है :—
(ई) जिसका प्रकाशन इस आधार पर जनकल्याण के रूप में न्यायोचित साबित किया गया हो कि ऐसी पुस्तक, पर्चे, पत्र, लेख, रेखाचित्र, पेंटिंग, प्रदर्शन या आकृति, विज्ञान, साहित्य या शिक्षण या सामान्य महत्व के अन्य उद्देश्यों के हित में है; या
(ईई) जो सभ्दाविक परंपरा या धार्मिक प्रायोजनों के लिए रखी या प्रयुक्त की गई है ।
स्पष्टीकरण: इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “बालक” से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जिसने अठारह वर्ष की आयु पूरी नहीं की है ।

६७ग. मध्यवर्तियों द्वारा सूचना का परिरक्षण और प्रतिधारण-
(१) मध्यवर्ती ऐसी सूचना का, जो विनिर्दिष्ट की जाए, परिरक्षण और प्रतिधारण ऐसी अवधि के लिए और ऐसी रीति तथा रूप में करेगा जो केन्द्रीय सरकार विहित करे ।
(२) ऐसा कोई मध्यवर्ती, जो साशय या जानबूझकर उपधारा (१) के उपबंधों का उल्लंघन करता है, कारावास, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।]

६८. नियंत्रक की निदेश देने की शक्ति - (१) नियंत्रक, आदेश द्वारा, प्रमणकर्ता प्राधिकारी या ऐसे प्राधिकारी के किसी कमर्चारी को आदेश में विनिर्दिष्ट उपाय करने या ऐसे क्रियाकलापों को बंद कर देने का निदेश दे सकेगा यदि वे इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों या किन्हीं विनियमों के किन्हीं उपबंधों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं ।
(२) कोई व्यक्ति, जो उपधारा (१) के अधीन किसी आदेश का अनुपालन करने में साशय या जानबूझकर असफल रहता है, अपराध का दोषी होगा और दोषसिध्दि पर कारावास का, जिसकी अवधि दो वर्ष से अधिक की नहीं होगी या एक लाख रुपए से अनधिक के जुर्माने का या दोनों का दायी होगा ।

६९. किसी कंप्यूटर संसाधन के माध्यम से किसी सूचना के अन्तररोधन या मानिटारिंग या विगूढ़न के लिए निदेश जारी करने की शक्ति - (१) जहां केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार या यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से प्राधिकृत उसके किसी अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि भारत की प्रभुता या अखण्डता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों या लोक व्यवस्था के हित में अथवा उपरोक्त से संबंधित किसी संज्ञेय अपराध के किए जाने में उद्दीपन के निवारण या किसी अपराध के अन्वेषण के लिए ऐसा करना आवश्यक और समीचीन है, वहां वह उपधारा (२) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, लेखबध्द किए जाने वाले कारणों से आदेश द्वारा समुचित सरकार के किसी अभिकरण को, किसी कंप्यूटर संसाधन में जनित, पारेषित, प्राप्त या भंडारित किसी सूचना को अंतरुध्द या मानीटर करने अथवा विगूढ़न करने अथवा अंतरुध्द या मानीटर कराने या विगूढ़न कराने का निदेश दे सकेगी ।
(२) प्रक्रिया और रक्षोपाय, जिनके अधीन ऐसा अंतररोधन या मानीटरिंग या विगूढ़न किया जा सकेगा, वे होंगें, जो विहित किए जाएं ।
(३) उपयोगकर्ता या मध्यवर्ती या कंप्यूटर संसाधन का भारसाधक कोई व्यक्ति, उपधारा (१) में निर्दिष्ट किसी अभिकरण द्वारा मांगे जाने पर, निम्नलिखित के लिए सभी सुविधाएं और तकनीकी सहायता प्रदान करेगा—
(क) ऐसी सूचना जनित करने, पारेषित करने, प्राप्त करने या भंडार करने वाले कंप्यूटर संसाधन तक पहुंच उपलब्ध कराना या पहुंच सुनिश्चित करना; या
(ख) यथास्थिति, सूचना को अंतरुध्द, मानीटर या विगूढ़न करना; या
(ग) कंप्यूटर संसाधन में भंडारित सूचना उपलब्ध कराना ।
(४) ऐसा उपयोगकर्ता या मध्यवर्ती या कोई व्यक्ति जो उपधारा (३) में विनिर्दिष्ट अभिकरण की सहायता करने में असफल रहता है, कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।

६९क. किसी कंप्यूटर संसाधन के माध्यम से किसी सूचना की सार्वजनिक पहुंच के अवरोध के लिए निदेश जारी करने की शक्ति - (१) जहां केन्द्रीय सरकार या इस निमित्त उसके द्वारा विशेष रूप से प्राधिकृत उसके किसी अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि भारत की प्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों या लोक व्यवस्था के हित में या उपरोक्त से संबंधित किसी संज्ञेय अपराध के किए जाने में उद्दीपन को रोकने के लिए ऐसा करना आवश्यक और समीचीन है, वहां वह उपधारा (२) के उपबंधों के अधीन रहते हुए उन कारणों से जो लेखबध्द किए जाएंगे, आदेश द्वारा सरकार के किसी अभिकरण या मध्यवर्ती को किसी कंप्यूटर संसाधन में जनित, पारेषित, प्राप्त, भंडारित या पारेषित किसी सूचना को जनता की पहुंच के लिए अवरुध्द करने का निदेश दे सकेगा या उसका अवरोध कराएगा ।
(२) वह प्रक्रिया और रक्षोपाय, जिनके अधीन जनता की पहुंच के लिए ऐसा अवरोध किया जा सकेगा, वे होंगे, जो विहित किए जाएं ।
(३) वह मध्यवर्ती जो उपधारा (१) के अधीन जारी निर्देश का पालन करने में असफल रहता है, कारावास से जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।

६९ख. साइबर सुरक्षा के लिए किसी कंप्यूटर संसाधन के माध्यम से ट्रैफ़िक आंकड़ा या सूचना मानीटर करने और एकत्र करने के लिए प्राधिकृत करने की शक्ति - (१) केन्द्रीय सरकार, देश में साइबर सुरक्षा बढ़ाने और कंप्यूटर संदूषक की पहचान, विश्लेषण और अनाधिकार प्रवेश या फैलाव को रोकने के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी कंप्यूटर संसाधन में जनित, पारेषित, प्राप्त या भंडारित ट्रैफ़िक आंकड़ा या सूचना, मानीटर और एकत्र करने के लिए सरकार के किसी अभिकरण को प्राधिकृत कर सकेगी ।
(२) मध्यवर्ती या कंप्यूटर संसाधन का भारसाधक कोई व्यक्ति, जब ऐसे अभिकरण द्वारा मांग की जाती है, जिसे उपधारा (१) के अधीन प्राधिकृत किया गया है, तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा और ऑन-लाइन पहुंच को समर्थ बनाने के लिए ऐसे अभिकरण को सभी सुविधाएं देगा या ऐसे ट्रैफ़िक आंकड़े या सूचना जनित, पारेषित, प्राप्त या भंडारित करने वाले कंप्यूटर संसाधन को ऑन-लाइन पहुंच सुरिक्षत कराएगा और उपलब्ध कराएगा ।
(३) ट्रैफ़िक आंकड़ा या सूचना को मानीटर और एकत्र करने के लिए प्रक्रिया और रक्षोपाय वे होंगे, जो विहित किए जाएं।
(४) ऐसा कोई मध्यवर्ती जो साशय या जानबूझकर उपधारा (२) के उपबंधों का उल्लंघन करता है कारावास, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा।
स्पष्टीकरण: इस धारा के प्रयोजनों के लिए -
(ई) "कंप्यूटर संदूषण” का वही अर्थ होगा जो धारा ४३ में है;
(ईई) "ट्रैफ़िक आंकड़ा” से ऐसे किसी व्यक्ति, कंप्यूटर प्रणाली या कंप्यूटर नेटवर्क या अवस्थिति की पहचान करने वाला या पहचान करने के लिए तात्पर्यित कोई डाटा अभिप्रेत है जिसको या जिससे संसूचना पारेषित की गई या पारेषित की जाए और इसके अंतर्गत संसूचना उदम, गंतव्य मार्ग, समय, तारीख, आकार, की गई सेवा की अवधि या प्रकार और कोई अन्य सूचना भी है ।

७०. संरिक्षत प्रणाली - (१) समुचित सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, किसी ऐसे कंप्यूटर संसाधन को, जो प्रत्यक्षत्: या अप्रत्यक्षत: नाजुक सूचना अवसंरचना की सुविधा को प्रभावित करता है, संरक्षित प्रणाली घोषित कर सकेगी ।
स्पष्टीकरण: इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “नाजुक सूचना अवसंरचना” से ऐसा कंप्यूटर संसाधन अभिप्रेत है, जिसके अक्षमीकरण या नाश से राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, लोक स्वास्थ या सुरक्षा कमजोर होगी ।
(२) समुचित सरकार, लिखित आदेश द्वारा, ऐसे व्यक्ति को प्राधिकृत कर सकेगी जो उपधारा (१) के अधीन अधिसूचित संरिक्षत प्रणाली तक पहुंचने के लिए प्राधिकृत है ।
(३) कोई व्यक्ति, जो इस धारा के उपबंधों के उल्लंघन में किसी संरिक्षत प्रणाली तक पहुंच प्राप्त कर लेता है या पहुंच प्राप्त करने का प्रयत्न करता है, दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(४) केन्द्रीय सरकार, ऐसी संरिक्षत प्रणाली के लिए सूचना सुरक्षा पध्दतियां और प्रक्रियाएं विहित करेगी ।

७०क. राष्ट्रीय नोडल अभिकरण - (१) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा, सरकार के किसी संगठन को नाजुक सूचना अवसंरचना संरक्षण की बाबत राष्ट्रीय नोडल अभिकरण अभिहित कर सकेगी।
(२) उपधारा (१) के अधीन अभिहित राष्ट्रीय नोडल अभिकरण सभी उपायों के लिए उत्तरदायी होगा जिनके अंतगर्त नाजुक सूचना अवसंरचना के संरक्षण से संबंधित अनुसंधान और विकास भी है ।
(३) उपधारा (१) में निर्दिष्ट अभिकरण के कृत्यों और कर्तव्यों के पालन की रीति वह होगी, जो विहित की जाए ।

७०ख. दुर्घटना मोचन के लिए भारतीय कंप्यूटर आपात मोचन दल का राष्ट्रीय आपात अभिकरण के रूप में सेवा करना — (१) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, सरकार के किसी अभिकरण को नियुक्त करेगा जिसे भारतीय कंप्यूटर आपात मोचन दल कहा जाएगा।
(२) केन्द्रीय सरकार, उपधारा (१) में निर्दिष्ट अभिकरण में एक महानिदेशक और ऐसे अन्य अधिकारी तथा कमर्चारी उपलब्ध कराएगी, जो विहित किए जाएं ।
(३) महनिदेशक और अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों का वेतन और भत्ते तथा उनकी सेवा के निबंधन और शर्ते वे होंगी, जो विहित की जाएं ।
(४) भारतीय कंप्यूटर आपात मोचन दल साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में निम्नलिखित कृत्यों का पालन करने वाले राष्ट्रीय अभिकरण के रूप में कार्य करेगा,—
(क) साइबर घटना संबंधी सूचना का संग्रहण, विश्लेषण और प्रसार;
(ख) साइबर सुरक्षा घटनाओं का पूर्वानुमान और चेतावनियां;
(ग) साइबर सुरक्षा घटनाओं से निपटाने के लिए आपात अध्युपाय;
(घ) साइबर घटना मोचन क्रियाकलापों का समन्वय;
(ङ) साइबर घटनाओं की सूचना सुरक्षा पध्दतियों, प्रक्रियाओं, निवारण, मोचन और रिपोर्ट करने के संबंध में मागर्दशर्क, सिद्धांत सलाह, अति संवेदनशील टिप्पण और श्वेतपत्र जारी करना;
(च) साइबर सुरक्षा से संबंधित ऐसे अन्य कृत्य, जो विहित किए जाएं ।
(५) उपधारा (१) में निर्दिष्ट अभिकरण के कृत्यों और कर्तव्यों का पालन करने की रीति वह होगी, जो विहित की जाए ।
(६) उपधारा (४) के उपबंधों को कार्यान्वित करने के लिए, उपधारा (१) में निर्दिष्ट अभिकरण सेवा प्रदाताओं, मध्यवर्तियों, डाटा केंद्रों, निगमित निकायों और किसी अन्य व्यक्ति से सूचना मांग सकेगा और उसे निदेश दे सकेगा।
(७) ऐसा कोई सेवा प्रदाता, मध्यवर्ती डाटा केंद्र, निगमित निकाय और अन्य व्यक्ति, जो उपधारा (६) के अधीन मांगी गई सूचना देने में या निदेश का अनुपालन करने में असफल रहता है, कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा या दोनों से, दंडनीय होगा ।
(८) कोई न्यायालय, इस धारा के अधीन किसी अपराध का संज्ञान, उपधारा (१) में निर्दिष्ट अभिकरण द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अधिकारी द्वारा दिए गए किसी परिवाद पर के सिवाय नहीं करेगा ।

७१. दुर्व्यपदेशन के लिए शास्ति - जो कोई, नियंत्रक या प्रमणकर्ता प्राधिकारी के समक्ष, यथास्थिति, कोई अनुज्ञप्ति या इलैक्ट्रानिक चिन्ह्क प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए कोई दुर्व्यपदेशन करता है या किसी तात्विक तथ्य को छिपाता है तो वह ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या ऐसे जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

७२. गोपनीयता और एकांतता भंग के लिए शास्ति - इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में जैसा अन्यथा उपबंधित है उसके सिवाय, यदि किसी व्यक्ति ने, इस अधिनियम, इसके अधीन बनाए गए नियमों या विनियमों के अधीन प्रदत्त किन्हीं शक्तियों के अनुसरण में किसी इलैक्ट्रानिक अभिलेख, पुस्तक, रिजिस्टर, पत्राचार, सूचना, दस्तावेज या अन्य सामग्री से सम्बध्द व्यक्ति की सहमति के बिना पहुंच प्राप्त कर ली है, और वह किसी व्यक्ति को उस इलैक्ट्रानिक अभिलेख, पुस्तक, रजिस्टर, पत्राचार, सूचना, दस्तावेज या अन्य सामग्री को प्रकट करता है तो वह ऐसे कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक हो सकेगी, या ऐसे जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

७२क. विधिपूर्ण संविदा का भंग करते हुए सूचना के प्रकटन के लिए दंड - इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में यथा उपबंधित के सिवाय, कोई व्यक्ति, जिसके अंतर्गत मध्यवर्ती भी है, जिसने, विधिपूर्ण संविदा के निबंधनों के अधीन सेवाएं उपलब्ध कराते समय, ऐसी किसी सामग्री तक, जिसमें किसी अन्य व्यक्ति के बारें में व्यक्तिगत सूचना अंतर्विष्ट है, पहुंच प्राप्त कर ली है, सदोष हानि या सदोष अभिलाभ कारित करने के आशय से या यह जानते हुए कि उसे सदोष हानि या सदोष अभिलाभ कारित होने की संभावना है, संबंधित व्यक्ति की सम्मति के बिना या किसी विधिपूर्ण संविदा का भंग करते हुए किसी अन्य व्यक्ति को ऐसी सामग्री प्रकट करता है, तो वह कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या ज़ुर्माने से, जो पांच लाख रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

७३. इलैक्ट्रानिक चिन्ह्क प्रमाणपत्र की कतिपय विशिष्टियों को मिथ्या प्रकाशित करने के लिए शास्ति - (१) कोई व्यक्ति, इलैक्ट्रानिक चिन्ह्क प्रमाणपत्र को तब तक प्रकाशित नहीं करेगा या किसी अन्य व्यक्ति को अन्यथा उपलब्ध नहीं कराएगा, यदि उसे यह जानकारी है कि -
(क) प्रमाणपत्र में सूची बध्द प्रमणकर्ता प्राधिकारी ने उसे जारी नही किया है; या
(ख) प्रमाणपत्र में सूचीबध्द हस्ताक्षरकर्ता ने उसे स्वीकार नहीं किया है; या
(ग) वह प्रमाणपत्र प्रतिसंहृत या निलम्बित कर दीया गया है,
जब तक कि ऐसा प्रकाशन, ऐसे निलम्बन या प्रतिसंहरण से पूर्व सृजित इलेक्ट्रॉनीक चिन्ह्क के सत्यापन के प्रायोजनार्थ न हो ।
(२) ऐसा कोई व्यक्ति, जो उपधारा (१) के उपबंधों का उल्लंघन करता है, ऐसे कारावास से जिसकी अवधि दो वर्ष तक हो सकेगी, या ऐसे जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, अथवा दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

७४. कपटपूर्ण प्रयोजन के लिए प्रकाशन - जो कोई, किसी कपटपूर्ण या विधिविरुध्द प्रयोजन के लिए कोई इलैक्ट्रानिक चिन्ह्क प्रमाणपत्र जानबूझकर सृजित करता है, प्रकाशित करता है या अन्यथा उपलब्ध कराता है, वह कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक लाख रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

७५. अधिनियम का भारत से बाहर किए गए अपराधों और उल्लंघनों को लागू होना — (१) उपधारा (२) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम के उपबंध, किसी व्यक्ति द्वारा भारत से बाहर किए गए किसी अपराध या उल्लंघन को भी, उसकी राष्ट्रिकता को विचार में लाए बिना, लागू होंगें।
(२) उपधारा (१) के प्रयोजनों के लिए, यह अधिनियम किसी व्यक्ति द्वारा भारत से बाहर किए गए किसी अपराध या उल्लंघन को लागू होगा, यदि उस कार्य या आचरण में, जिससे यह अपराध या उल्लंघन होता है, भारत में अवस्थित कोई कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली, या कंप्यूटर नेटवर्क अंतर्वर्लित हो ।

७६. अधिहरण - कोई ऐसा कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली, फ्लापी, क़ॉम्पैकट डिस्क, टेप चालन या उससे संबंधित कोई ऐसे अन्य उपसाधन, जिनकी बाबत इस अधिनियम, इसके अधीन बनाए गए नियमों, किए गए आदेशों या बनाए गए विनियमों के किसी उपबंध का उल्लंघन किया गया हो या किया जा रहा है, अधिहरणीय होंगे:
परन्तु जहां अधिहरण का अधिनिर्णय देने वाले न्यायालय के समाधानप्रद रूप में यह सिध्द हो जाता है कि वह व्यक्ति , जिसके कब्ज़े, शक्ति या नियंत्रण में कोई ऐसा कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली, फ्लापी, क़ॉम्पैकट डिस्क, टेप चालन या उससे संबंधित कोई अन्य उपसाधन पाया जाता है, इस अधिनियम, इसके अधीन बनाए गए नियमों, किए गए आदेशों या बनाए गए विनियमों के उपबंधों के उल्लंघन के लिए उत्तरदायी नहीं है वहां न्यायालय, ऐसे कंप्यूटर, कंप्यूटर प्रणाली, फ्लापी, क़ॉम्पैकट डिस्क, टेप चालन या उससे संबंधित किसी अन्य य उपसाधन के अधिग्रहण का आदेश करने के बजाय इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों, किए गए आदेशों या बनाए गए विनियमों के उपबंधों का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति के विरुध्द इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत ऐसा अन्य आदेश कर सकेगा, जो वह ठीक समझे ।

७७. प्रतिकार शास्ति या अधिहरण का अन्य दंड में हस्तक्षेप न करना - इस अधिनियम के अधीन अधिनिर्णीत प्रतिकर, अधिरोपित शास्ति या किया गया अधिहरण, त्त्स्मय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन किसी प्रतिकर के अधिनिर्णय या किसी अन्य शास्ति या दंड के अधिरोपण को निवारित नहीं करेगा ।

७७क. अपराधों का शमन — (१) सक्षम अधिकारिता वाला न्यायालय, उन अपराधों से भिन्न अपराधों का शमन कर सकेगा, जिनके लिए इस अधिनियम के अधीन आजीवन या तीन वर्ष से अधिक के कारावास के दंड का उपबंध किया गया है:
परंतु न्यायालय, ऐसे अपराध का वहां शमन नही करेगा, जहां अपराधी, उसकी पूर्व दोषसिध्दि के कारण या तो वर्धित दंड का या भिन्न प्रकार के किसी दंड के लिए दायी है:
परंतु यह और कि न्यायालय ऐसे किसी अपराध का शमन नहीं करेगा, जहां ऐसा अपराध देश की सामाजिक - आर्थिक स्थिति पर प्रभाव डालता है या अठारह वर्ष की आयु से कम आयु के किसी बालक या किसी स्त्री के संबंध में किया गया है ।
(२) इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का अभियुक्त व्यक्ति उस न्यायालय में जिसमें अपराध विचारण के लिए दंडित है, शमन के लिए आवेदन फाइल कर सकेगा और दंड प्रक्रिया संहिता, १९७३ (१९७४ का २) की धारा २६५ख और धारा २६५ग के उपबंध लागू होंगें ।

७७ख. तीन वर्ष के कारावास वाले अपराधों का जमानतीय होना — दंड प्रक्रिया संहिता, १९७३ (१९७४ का २) में किसी बात के होते हुए भी, तीन वर्ष और उससे अधिक के कारावास से दंडनीय अपराध संज्ञेय होंगे और तीन वर्ष तक के कारावास से दंडनीय अपराध जमानतीय होंगे।

७८. अपराधों का अन्वेषण करने की शक्ति - दंड प्रक्रिया संहिता, १९७३ (१९७४ का २) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते भी, कोई ऐसा पुलिस अधिकारी, जो निरीक्षक की पंक्ति से नीचे का न हो, इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध का अन्वेषण करेगा ।
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अब म.प्र. शासन की पूरे मध्‍यप्रदेश की पॉंच लोकहितकारी सेवायें भी भारत सरकार के डिजिटल इंडिया को म.प्र. शासन द्वारा साौंपी गईं , ये सेवायें भाारत सरकार के न्‍याय विभाग , विधि एवंन्‍याय मंत्रालय के के तहत प्रोबो एडवोकेट के कार्यालय पर ई लोक सेवा केन्‍द्रों…
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प्रोबोनो एडवोकेट नरेन्द्र सिंह तोमर ने भारत सरकार की ओर से म. प्र. पुलिस के डी. जी. पी. के सायबर सेल में दर्ज कराई एफ. आई. आर. और एडिशनल इत्तलायें दीं. मामला सायबर क्राइम , आई. टी. एक्ट, आई. पी. सी. एवं लीगल एड सर्विसेज अथॉरिटीज एक्ट 1987. से संबंधित.
मामला ग्‍वालियर पुलिस जोन के सायबर सेल के पुलिस अधीक्षक के हवाले किया गया , विवेचना व अनुसंधान जारी है
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प्रोबोनो एडवोकेट नरेन्द्र सिंह तोमर ने भारत सरकार की ओर से म. प्र. पुलिस के डी. जी. पी. के सायबर सेल में दर्ज कराई एफ. आई. आर. और एडिशनल इत्तलायें दीं. मामला सायबर क्राइम , आई. टी. एक्ट, आई. पी. सी. एवं लीगल एड सर्विसेज अथॉरिटीज एक्ट 1987. से संबंधित.
मामला ग्‍वालियर पुलिस जोन के सायबर सेल के पुलिस अधीक्षक के हवाले किया गया , विवेचना व अनुसंधान जारी है
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प्रोबोनो एडवोकेट नरेन्द्र सिंह तोमर ने भारत सरकार की ओर से म. प्र. पुलिस के डी. जी. पी. के सायबर सेल में दर्ज कराई एफ. आई. आर. और एडिशनल इत्तलायें दीं. मामला सायबर क्राइम , आई. टी. एक्ट, आई. पी. सी. एवं लीगल एड सर्विसेज अथॉरिटीज एक्ट 1987. से संबंधित.
मामला ग्‍वालियर पुलिस जोन के सायबर सेल के पुलिस अधीक्षक के हवाले किया गया , विवेचना व अनुसंधान जारी है
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प्रोबोनो एडवोकेट नरेन्द्र सिंह तोमर ने भारत सरकार की ओर से म. प्र. पुलिस के डी. जी. पी. के सायबर सेल में दर्ज कराई एफ. आई. आर. और एडिशनल इत्तलायें दीं. मामला सायबर क्राइम , आई. टी. एक्ट, आई. पी. सी. एवं लीगल एड सर्विसेज अथॉरिटीज एक्ट 1987. से संबंधित.
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