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Neelima sharma
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Mujhe gumaan tha ke main misra hun tumhaare khyalaat ka / tumne gazal kahkar mujhe mukammaaal kar diye ...written by Neelima
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Neelima's posts

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मेरा शहर आवाज़े लगा रहा
मुझे सुनाईदेती हैंआवाज़े पहाड़ के उस पार की घाटी में गूंजती सी मखमली ऊन से हवा फंदा-दर फंदा साँस देती हुयी आवाहन करती हैं जीने की जदोजहद से निकलने का . सपने देखतीहूँ मैंअक्सर आजकल हरी वादियों के घंटाघर कीबंद घडियो में अचानक होते स्पंदन के बाल मिठाई के बंदटिक्...

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जब मिलती हैं आहट किसी के आने की
खुशिया बिखर जाती हैं गुलाबी गालो पर  जब मिलती हैं  आहट  किसी के आने की  उसका ( शायद )  अपना हो जाने की  सपने जो देखे थे  अंतर,मन में  स्पंदन जो हुए थे तन में आ जाती हैं बेला शर,माने की अपने अपनों को छोड़ देना नए रिश्तो को जोड़ लेना प्रीत अपनी लगने लगती हैं अन...

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लड़की होना आसान नही होता
कैसे घूरता हैं वोह नुक्कड़ पर खड़ा लड़का घर से स्कूल जाती नव्योवना को नीली चुन्नी को देह पर लपेटे छिपाने की कोशिश में अपने अंग-प्रत्यंग को अक्सर मिल जाती हैं उसकी नजर उन घूरती नजरो से और टूट जाता हैं उसके साहस का पहाड़ और उसकी देह लगा देती है दौड़ पञ्च मीटर की स...

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मोहताज
धुंधला रहे हैं किताबो में लिखे हर्फ  कांप रहे हाथ कटोरी को थामते हुए  लकीरे बना चुकी हैं अपना साम्राज्य  पेशानी और आँखों के इर्द गिर्द  यह उम्र दराज़ होना भी  कितना दर्द देता हैं  कभी कहा जाता हैं तुम आराम करो  दुनिया दारी बहुत कर ली  कभी कहा जाता हैं बहुत  ...

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मढ़ीयो के जलते दिवे
उम्र  कब की  बरस कर खामोश  हो गयी   आँखे भी मुस्कुराती  आखिर कब तलक     मन था जो भीग कर  मिटटी    गीली सा   नफासत से जीती  रही  लाल ओढ़नी  तब तलक     सफ़ेद  रंग था  सिरहाने बिछा हुआ सा   आसमा स्याह  भी नीला रहता कब तलक    उसकी चूड़ियाँ भी  खनकती  कैसे  अब    स...

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मुश्किल रास्ता
कैसे घूरता हैं वोह नुक्कड़ पर खड़ा लड़का  घर से स्कूल जाती नव्योवना को  नीली चुन्नी को देह पर लपेटे  छिपाने की कोशिश में  अपने अंग-प्रत्यंग को  अक्सर मिल जाती हैं उसकी नजर उन घूरती नजरो से और टूट जाता हैं उसके साहस का पहाड़ और उसकी देह लगा देती है दौड़ पञ्च मीटर...

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शादीशुदा प्रेम
तुम शादीशुदा मर्द भी कितने अजीब होते हो  प्रेम अगर  हो जाए पत्नी से  तो जमीन आसमान इक करते हो  एकाधिकार तुम्हारा हैं इस दिल पर  जानते हुए भी  बार बार झांकते हो  हर दरीचे की  हलकी सी भी दरारों से और नही छोड़ते जरा भी गुंजाईश ताका झांकी की किसी और की खाना कितन...

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सिसकिया
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