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Rajesh kumar Rai
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ज़िंदगी माँगकर खुद़ा से, क्या किया तुमने ! ग़मे-हयात तुम्हे फिर से मार डालेगा । ---------राजेश कुमार राय।--------
ज़िंदगी माँगकर खुद़ा से, क्या किया तुमने ! ग़मे-हयात तुम्हे फिर से मार डालेगा । ---------राजेश कुमार राय।--------

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खूबसूरत चित्रों के साथ लाजवाब प्रस्तुतिकरण। शमा बाँध देते है आप ! घर बैठे बैठे सुंदर दर्शन। बहुत खूब आदरणीय योगी जी।

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जीवन घट रिसता जाए है
क्या बात है ! बहुत सुंदर रचना।

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वाह ! कितने सुंदर फोटो है! प्रथम भाग की तरह दूसरा भाग भी आकर्षक एवं रोचक ! बहुत सुंदर योगी जी ! बहुत सुंदर।

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अतीत के मंज़र को खोजती आँखे ! बहुत सुंदर प्रस्तुति।

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हाँ ! मैने ऐसे ही रिश्तों को टूटते-बिखरते देखा है ।
क्या बात है ! रिश्तों के कई पहलुओं को उकेरती खूबसूरत रचना । बहुत खूब।

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वाह ! क्या बात है ! बहुत ही सुंदर गीत। बहुत खूब राकेश जी।

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बहुत ही सुंदर लिंक संयोजन।
मेरी रचना को स्थान देने के लिए हार्दिक आभार।

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अपने समय के चर्चित कहानीकार । बेबाक मिजाज। एकदम बोल्ड। इसीलिए अदालत के भी चक्कर काटने पड़े।

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वाह ! बहुत सुंदर प्रस्तुति। बहुत खूब आदरणीय।

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कायनात की सजीव रचना को
शब्दों के सिमित अर्थ में बांधना
ईश्वर की सुंदरतम कल्पना को
कविता के छंदों में उतारना
प्रकृति के स्वछंद ग़ज़ल को
बहर के बंधन में समेटना
काश मै होता भागीरथी
साध लेता उफनती गंगा
मेरी रचना का दायरा तो
सिमट जाता है मात्र तीन शब्दों तक
तुम तो जानती हो जाना ------
क्या लिखना जरूरी है ?
सर्वप्रथम मैं जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।
आदरणीय दिगंबर सर इस खास मौके पर शब्दों की सीमा में ही खूबसूरत रचना की प्रस्तुति कर के आप ने अपनी भावनाओं का इज़हार कर दिया। भागीरथी की गंगा की तरह आप के शब्द पवित्र है! रचना का दायरा तो तीन शब्दों तक --------- शब्द तो तीन है लेकिन उसका विस्तार असिमित जान पड़ता ! हाँ हाँ अगले जनम तक--- सात जनम तक--- जनम-जनम तक --------------
आदरणीय दिगंबर सर जन्मदिन के खूबसूरत मौके पर बहुत ही खूबसूरत रचना की प्रस्तुति।
पुन: जन्मदिन की ढ़ेरों शुभकामनाएँ।

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