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Rajesh kumar Rai
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ज़िंदगी माँगकर खुद़ा से, क्या किया तुमने ! ग़मे-हयात तुम्हे फिर से मार डालेगा । ---------राजेश कुमार राय।--------
ज़िंदगी माँगकर खुद़ा से, क्या किया तुमने ! ग़मे-हयात तुम्हे फिर से मार डालेगा । ---------राजेश कुमार राय।--------

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होठ दांतों में दबाना तो नहीं
यूँ ही कुछ कहना सुनना तो नहीं --------- वाह ! वाह ! क्या बात है ! क्या बेहतरीन मतला हुआ है ! किसी संकेत को ग़ज़ल के शेर तक खींच लाने का हुनर कोई आप से सीखे ! बहुत खूब सर !

आप जो मसरूफ दिखते हो मुझे
ग़म छुपाने का बहाना तो नहीं ------------- लाजवाब शेर ! क्या कहने हैं ! सचमुच ग़म छुपाने के लिए मसरूफीयत का भी सहारा लेना पड़ता है ! खूबसूरत शेर ।

एक टक देखा हँसे फिर चल दिए
सच कहो ये दिल लगाना तो नहीं ------- वाह ! ग़ज़ल का एक और बेहतरीन शेर आदरणीय ! इजहारे मुहब्बत का शेर ! बहुत खूब ।

पास आना फिर सिमट जाना तेरा
प्रेम ही है ना, सताना तो नहीं ---------- जय हो ! जय हो ! एक के बाद एक लाजवाब शेर ! महबूबा का पास आना, सिमट जाना और फिर रूठ जाना !
सच्चे प्यार में सब कुछ समा जाता है ! बहुत खूब आदरणीय ।

कप से मेरे चाय जो पीती हो तुम
कुछ इशारों में बताना तो नहीं- -------- वाह ! सुभानअल्लाह आदरणीय ! सुभानअल्लाह ! कितनी बारीकी से सोचकर आपने ग़ज़ल लिखी है ! खूबसूरत शेर ।

सच में क्या इग्नोर करती हो मुझे
ख्वामखा ईगो दिखाना तो नहीं ---------- वाह ! कमाल का शेर ! प्यार में अनुकूल प्रतिक्रिया न मिलने पर मन की घबराहट को रेखांकित करता शेर ! बेहतरीन शेर ! बहुत खूब !

इक तरफ झुकना झटकना बाल को
उफ्फ,अदा ये कातिलाना तो नहीं -----------वाह ! ज़िंदाबाद आदरणीय ! ज़िंदाबाद ! महबूब की ज़ुल्फों नें मुशायरों में भी खूब कहर बरपाया हैं ! लाजवाब शेर ! बहुत खूब ।

रात भर "चैटिंग"सुबह की ब्लैंक काल
प्रेम ही था "मैथ" पढ़ाना तो नहीं --------- क्या बात है ! क्या बात है ! अंग्रेजी शब्दों का प्रभावशाली ढंग से प्रयोग ! आधुनिकता का पुट लिए ! बहुत खूब आदरणीय ।

कुछ तो था अकसर करा करतीं थीं तुम
बाल में ऊँगली फिराना तो नहीं ------- एक और बेहतरीन शेर ! हर अदा में प्यार ! कुछ ऐसा जो मन को भा जाय ! बहुत खूब आदरणीय ।
आदरणीय दिगम्बर सर बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल हुई है ! मुहब्बत की ग़ज़ल ! जिसमें इशारे, संकेत और अदायें, बहुत कुछ कह जाते हैं ! भाषा से परे ! मौन का मनोविज्ञान ! बिना बोले सब कुछ कह जाना । हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ ।

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रहेगी ये खुमारी-
मिटेगी हर दुश्वारी-
भले ना जुड़ सके हम
जुड़ेंगी रूहें हमारी
और फिर मिलेंगे
जीवन के पार हम !!!!!!
वाह ! क्या बात है ! बेहतरीन रचना ! खूबसूरत प्रस्तुति ! बहुत खूब आदरणीया ।
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दिन पुराने ढूंढ लाओ साब जी
लौट के इस शहर आओ साब जी ------ वाह ! वाह ! क्या बात है ! बेहतरीन मतला ! अतीत के खूबसूरत पलों की जब याद आती है तो दिल से इसी तरह की पुकार निकलती है ! मगर गुजरे हुए दिन कहाँ वापस आते हैं सर !

कश पे कश छल्लों पे छल्ले उफ वो दिन
विल्स की सिगरेट पिलाओ साब जी ------- हा हा हा हा हा हा हा ---- क्या कहने हैं ! सिगरेट के कश ! और छल्ले ! बिल्कुल आधुनिक मौज मस्ती से लबरेज शेर ! बहुत खूब आदरणीय ।

मैस की पतली दाल रोटी, पेट फुल
पान कलकत्ति खिलाओ साब जी -------- वाह ! एक और बेहतरीन शेर ! होस्टल लाइफ की दुनियाँ ही कितनी निराली होती है ! चिंता मुक्त जीवन ! बहुत खूब आदरणीय ।

मेज मैं फिर से बजाता हूँ चलो
तुम रफी के गीत गाओ साब जी ----------- वाह ! जिंदाबाद आदरणीय ! ज़िंदाबाद !! छात्र जीवन का चक्र मेरी आंखों के सामने घूम गया ! मेरे एक मित्र गाते भी थे और मेज भी बजाते थे ! जब भी मेरे कमरे पर आते मैं तुरंत फरमाइश कर देता ! मै चाय बनाता और वो मेज बजाकर गाना शुरू कर देते !
"यूँ जा रहे हो ऐसे कैसे जिऊँगा मैं
आएगी तेरी याद तो रो रो मरूँगा मैं "
आज इस शेर नें मुझे अपने मित्र की याद दिला दी ! साथ छूटा तो दुबारा मुलाकात भी नहीं हुई ! खूबसूरत शेर आदरणीय ।

क्यों न मिल के छत पे बचपन ढूंढ लें
कुछ पतंगें तुम उड़ाओ साब जी ------- अहा ! क्या शेर हुआ है सर ! बचपन के किस्से ! सोचिए तो बस सोचते रहिए ! पतंगों का उड़ना, कटना और लूटना ! क्या दिन थे सर ! आज सोचना और आहिस्ता आहिस्ता मुस्कराना ! लाजवाब शेर आदरणीय !

लिख तो ली थी पर सुना न पाए थे
वो ग़ज़ल तो गुनगुओ साब जी ------------ वाह ! कमाल का शेर ! कुछ किस्से अधूरे रह जाते हैं सर ! जो वक्त आने पर पूरे होते हैं ! आप की ग़ज़ल हर जुबाँ गुनगुनाएगी ! बेहतरीन शेर आदरणीय ।

तब नहीं झिझके तो अब क्या हो गया
रेत से सीपी उठाओ साब जी -------- क्या बात है ! क्या बात है ! एक के बाद एक लाजवाब शेर आदरणीय ! बहुत खूब ! बचपन का अल्हड़पन प्रौढावस्था कहाँ कायम रह पाता है ! वक्त के साथ सब कुछ बदल जाता है !

याद है ठर्रे की बोतल, उल्टियां
फिर से वो किस्सा सुनाओ साब जी ------- ओ ! हो ! कुछ किस्से पूरी ज़िंदगी मजा देते हैं ! हमेशा सुनने की इच्छा होती है ! मनोरंजन की की तरह ! लाजवाब शेर आदरणीय !

सीप, रम्मी, तीन पत्ती रात भर
फिर से गंडोला खिलाओ साब जी -------- वाह ! सुभानअल्लाह आदरणीय ! सुभानअल्लाह ! रात भर ताश होगा तो तलब तो लगेगी ही ! आनंद का खेल ! मनोरंजन के साथ समय भी कटता है ! खूबसूरत शेर ! बहुत खूब !
आदरणीय दिगम्बर सर पूरी ग़ज़ल अतीत की सुनहरी यादों के लिए ! हर शेर लाजवाब !! बचपन की यादों को तरोताजा करतीं ! बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल की प्रस्तुति ! हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ ।
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