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Neelima Sharma
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Trying to satisfy my inner soul
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निरुत्तर
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doonitesblog.blogspot.com
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 "खबरदार जो सवेरे  व्रत रखा "
"
किसी की तो जून सुधरे  इस घर आकर  !!.......................
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 एक पहाड़ी शहर में छूट हुई पत्नी या प्रेमिका अपने प्रेमी की मनःस्थिति का सही सही अंदाज़ा लगा लेती है। वह क्या और कितनी शिद्दत से महसूस कर रहा है , उसे भी महसूस कर लेती है। अद्भुत प्रेम की यह अनोखी तन्मयता अद्भुत है। ऐसे ही किसी प्रेम में डूब जाने का मन करने लगता है
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निशब्द  करते शब्दों से सजी कविता | कभी सोचा ही नही इस तरह से इन लडकियों/स्त्रीयों के लिए | निर्वासन हमेशा संत्रास देता हैं और इन लडकियों को तो अपने निर्वासन की अवधि भी नही मालूम  होती ......अनिल जी आपकी कविताएं हमेशा ही संवेदना के उस स्तर को छु जाती हैं जहाँ तक आम इंसान की पहुँच भी नही होती | नमन आपकी लेखनी को 
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लघु कथा 
बगुला भग बगुला त
'प्रभा! ओ प्रभा ! “आज बेटी बचाओ अभियान में भाषण देना हैं ।तुम जानती हो न! मेरी हिंदी कितनी कमजोर हैं ।मेरे आने तक जरा एक प्रभाव शाली स्पीच लिख कर रख देना। " कहते हुए चौधरी ज़बर सिंह ने मूंछो को ताव दिया और बोलेरो की चाबी उठा बाहर चल दिए ।चौधरी साहब को शहर के बेटी बचाओ अभियान का सर्वेसर्वा बना दिया गया था । सो मूंछे खुन्डिया करना तो बनता था उनका ।सारे काम निबटा कर, कागज उठाकर, प्रभा ने स्पीच लिखनी शुरू की। थोड़ी देर में ,चारो तरफ मुचड़े कागज के ढेर लगने लगे । हर लफ्ज़ से सिसकिया सुनाई दे रही थी उसकी तीन एबॉर्शन में कत्ल करायी गयी बेटियों की |
नीलिमा शर्मा निविया
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