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कुमार लव
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फिर हरी होंगी
सदाबहार वृक्षों का एक वन उसका सीना मंगलगान गाते थे नन्हें कुछ पंछी घने वन में छुपते पत्तियों में कुछ हिरण गहरा घना वन बाढ़ भी सोख लेता. _____ हवा तेज़ थी टहनी से टहनी रगड़ उठी दावानल महान रण-प्रांगन लाल. _____ स्नेह से सींची उर्वर रणभूमि घास बिछाई कुछ पौधे...

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एक कविता नई
कागज़ पर उतारकर कोई कविता हर बार सोचता हूँ क्या नई है यह कविता? किसी पुरानी कविता किसी पहले लिखी कविता कहीं छुपी आदर्श कविता का संशोधन मात्र तो नहीं यह कविता? या कहीं शब्दों की यह दीवार चित्र मांगती ईटों की दीवार में लगी खूंटी पर टंगने का सपना लिए जन्में चित...

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जुराब
बचपन में जब जूता कुछ बड़ा होता था जुराब भर लेते थे उसमें. यादें भी कुछ ऐसी ही होती हैं जूतों में भर लो तो सफ़र आसान कर देती हैं और जब जूता खोलो तो घर भर में भर जाती हैं.

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नाबदान
कुछ लोग जीते जीते इतने पुराने हो जाते हैं महल के बजाए बस खंडहर रह जाते हैं. भटकती हैं, दीवारों पर सिर पटकती हैं आवाजें यहाँ गूंजने की गुंजाईश कम ही रहती हैं. बसेरा है उलटी लटकी चिमगादड़ों का यहाँ टपकती लार की नदियाँ बहती रहती हैं. नाबदान में कुछ उग आया है शा...

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फुटबॉल
कभी कभी लोग फुटबॉल बन जाते हैं, चलती गाडी से लुडक कर टोपीधारी खिलाड़ियों के पांवों तक पहुँच जाते हैं, उनकी लात खा कर ऊंचा उछलते है और फिर धम से गिर जाते हैं. कभी कभी लोग फुटबॉल बन जाते हैं.

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कलमकार
सफ़ेद बर्फ से ठंडे कागज़ पर काले खून सी गर्म स्याही गिरी - एक और कलमकार मारा गया, गर्माहट कुछ और बढ़ी.

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फिर हरी होंगी
सदाबहार वृक्षों का एक वन था उसके सीने में, चिड़ियाएँ चहकती रहती थीं, कुछ हिरण भी थे शायद पत्तियों में छुपे हुए. न जाने कब इतना घना हो गया था, कितना भी पानी बरसे वह सब सोख लेता था, बाढ़ में बहता नहीं था. ___ एक दिन हवा चली बहुत तेज़, टहनियाँ बज उठीं रगड़ उठी, ...

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इशिकावा ताकुबोकू
उदास आदत है सुबह बिस्तर में ठहरना पर डांट मत मुझे, माँ. _ सड़क के किनारे, एक कुत्ते ने अंगड़ाई ली मैंने भी ली जल कर.

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My Literary Career - Roberto Bolano
अस्वीकृति सभी प्रकाशकों से सभी पाठकों से सभी विक्रेताओं से... पुल के नीचे, बारिश में, एक सुनहरा मौका खुदको परखने का : उत्तरी ध्रुव के किसी साँप जैसा, पर लिखता हुआ. बेवकूफों की दुनिया में कविता लिखता हुआ. घुटने पर बेटे को बिठाए लिखता हुआ. हजारों राक्षसों की ...
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