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Anupam Chaubey
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i am electrical engineer by proffession but writer and poet by heart
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एक पगली याद बहुत ही आती है
जब यारों की महफ़िल में अचानक छिड़े चर्चा मोहब्बत बाली, या फिर नुक्कड़ बस्ती दूर गली में कोई दिखती है भोली भाली, करूँ जतन पर,दिल पर मेरे छुरियाँ सी चल जाती हैं सच कहता हूँ,एक पगली मुझको याद बहुत ही आती है एक नाम जो,तीरथ था मेरा एक गली जो,काशी मथुरा थी अब कहाँ र...
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पढ़िएगा और शेयर करिएगा
अपने उस गाँव में
अपने उस गाँव में
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अपने उस गाँव में
पीपल की छाँव में
अपने उस गाँव में सकरी और उजड़ी पर
दिलकश उन राहों में टूटे से घर में जलती
दोपहर में छिपते छिपाते दिल के
शहर में क्या अब भी कोई सुबह
शाम से मिलती है राधा कोई क्या
घनश्याम से मिलती है जमुना के कोई मुहाने
की दस्तक होती है दिल के
किबाड़ों पे अब तक...
अपने उस गाँव में
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जितना है याद तुम्हें
जितना अब तक है याद तुम्हें, मैं उतना भूल आया हूँ तुमने हर राह दिये थे काँटे, मगर मैं फूल लाया हूँ जिन गलियों की अमर कहानी, जिनकी यादें पानी पानी कुछ बची है शब्दों में मेरे, उन गलियों की धूल लाया हूँ कुछ भ्रम थे मेरे टूट गए थे, जब अपने ही रूठ गए थे जब मैं बद...
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तुझे जो पालिया हमने(मुक्तक-a sad heart)
तुझे जो पालिया हमने तमन्ना कुछ नहीं हमको तुझे जो खोदिया हमने गिला भी कुछ नहीं हमको जो पाया था वो खोया है इसमें अफ़सोस कैसा है मगर दिल से मेरे पूछो सिला ये क्यूँ मिला हमको. मैं तेरा हूँ तू मेरी है फिर क्यूँ इनकार करती है खुदी में चूर है इतना खुदी पर बार करती ...
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