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विजय राज बली माथुर
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विजय राज विद्रोही
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This was a sad day to see how the supreme patriot and nationalist of the country, Bhagat Singh was treated by phoney and violent nationalists, who had played no role in freedom struggle, but grabbed power by cheating people with false slogans. They are now insulting the whole freedom struggle of the nation, including Gandhi, Nehru, Bose, Ambedkar and Bhagat Singh.


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 कई लोगों ने इस बात की पुष्टि की कि पीड़ितों को ‘बदनामी से बचने के लिए’ मामले को न उठाने की बात समझाई गई। पीड़ित और उनके परिजनों की भीड़ के बीच इस मौके पर सेना के भी कुछ अधिकारी मौजूद थे।------

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:देश के दुश्मनों की साज़िश कामयाब हो जाएगी ------ विजय स्वामी
** https://www.facebook.com/photo.php?fbid=531116720381508&set=a.160565297436654.1073741825.100004495530231&type=3 Vijay Swami  with  Piyush Trivedi  and  2 others . February 16 at 11:25pm  ·  दर्शन करने के चक्कर में कुछ भी किसी को भी बकने से बचे, घटनाक्रम ...

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कम्‍युनिस्‍ट पार्टियोँ का एकीकरण.....मगर क्‍या यह सँभव हो सकेगा....?? ------ Ramendra Jenwar
बहुत बदलाव लाना होगा कम्‍युनिस्‍ट पार्टियोँ को..खुलापन भी लाना पडेगा..अभी तक ये पार्टियाँ रूस और चीन की क्राँतियोँ को गले से लगाए जी रही हैँ...परिस्‍थितियाँ बहुत बदल चुकी हैँ ।------ Zoya Ansari Ramendra Jenwar 03 july 2015 at 01 :00:00 hrs. कम्‍युनिस्‍ट पा...

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पार्टी के लिए लेनिन और भाषा के प्रश्‍न की कोई अहमियत नहीँ थी --- Ramendra Jenwar
Ramendra Jenwar 11 hrs  ·  Edited  ·  https://www.facebook.com/rjenwar/posts/779321792148941 भारतीय वामदल और भाषा का प्रश्‍न: --------------------------------------- हिँदी को जब कुत्‍तोँ और सुवरोँ की -----------------------------------------भाषा कहने पर छात...

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समय पूर्व क्रांति-
२९ मार्च १८५७ ई. को बैरकपुर छावनी में चर्बी वाले कारतूसों को लेकर 'वीर मंगल पाण्डेय'ने अपने साथियों के साथ खुल्लमखुल्ला विद्रोह कर दिया घायलावस्था में उन्हें गिरफ्तार करके प्राण-दंड दे दिया गया.देशी पलटनें ख़तम कर दी गयीं.जब ये विद्रोही सिपाही मेरठ पहुंचे तो १० मई १८५७ को वहां से क्रांति शुरू कर दी गयी जिसे २२ जून को शुरू होना था .यह अधूरी तैयारी भी विफलता का कारण बनी और अधीरता भी.क्रांति की सफलता के लिए धैर्य एवं संयम बेहद जरूरी हैं.फिर भी क्रांतिकारियों के त्याग तथा बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता और हमें उनसे प्रेरणा एवं कर्तव्य-बोद्ध ग्रहण करना चाहिए. 
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