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Suresh Sahani
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काफी सोच समझकर लिखिए।
काफी सोच समझकर लिखिए। जो लिखिए डर डर कर लिखिए।। सच लिखना इक बीमारी है बीमारी से बचकर लिखिए।। बाबा जादू टोना लिखिए ओझा जन्तर मन्तर  लिखिए।। माना कि सरकार बुरे हैं फिर भी हद के अन्दर लिखिए।। इन सबसे मन भर जाए तो गइया लिखिए गोबर लिखिये।।

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समन्वयवाद(COHERISM)
उपलब्धता ,आवश्यकता और उपभोग के बीच संतुलन ही समन्वय है।समन्वय सहज भौतिक क्रियाओं और वैज्ञानिक प्रतिपादनों को स्वीकार करता है।प्रकृति,विकास और समाज के बीच किसी भी प्रकार का असंतुलन विनाश को जन्म देता है।जो घट चुका है,जो घट रहा है और जो घटेगा इन सब के मध्य सम...

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इन गहरी चालों में फंसकर सत्ता के जालों में फंसकर अपना दुःख पीछे करती है जनता ऐसे ही मरती है।। तुम बसते हो इसका कर दो तुम हँसते हो इसका कर दो तब जनता खुद पर हंसती है जनता ऐसे ही मरती है ।। अब नोट नए ही आएंगे कुछ नोट नहीं चल पाएंगे फाके में फिर भी मस्ती है जन...

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ग़ज़ल
हम से कहता है इबादत में रहो। साफ कह देता कि खलवत में रहो।। तय हुआ हम अपना इमां बेच दें तुमको रहना है तो गुरबत में रहो।। आदमी  से जानवर हो जाओगे और कुछ दिन उसकी सोहबत में रहो।। तुमको भी ऎयारियां आ जाएंगी चन्द दिन तुम भी सियासत में रहो।। यूँ न रो उसकी जफ़ाओं क...

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वो औरों की तरह
ये औरों की तरह नहीं है। अपने दिल में गिरह नहीं है।। पत्ते टूटे हैं शाखों से मौसम ही इक वज़ह नही है।। रात और दिन हैं एक बराबर मेहनतकश की सुबह नहीं है।। क्या लड़ना ऐसी बातों पर जिनकी कोई सुलह नहीं है।। तुम बिन मैं रह सकूँ कहींपर ऐसी कोई जगह नहीं है।।

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अनहद नाद सुना दे कोई। मन के तार मिला दे कोई।। खोया खोया रहता है मन सोया सोया रहता है तन तन से तान मिला दे कोई।। कितने मेरे कितने अपने सबके अपने अपने सपने जागी आँख दिखा दे कोई।। जनम जनम की मैली चादर तन गीली माटी का अागर आकर दाग मिटा दे कोई।। साजन का उस पार ब...

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तू कैसी भी नजर से देख जालिम तेरा हर तीर दिल पर ही लगे है। ये कैसी बेखुदी है,क्या नशा है कि तू ही तू नज़र आती लगे है।।  गली आबाद हो जिसमे तेरा घर बहारों की गली जैसी लगे है।। तेरा नज़रे-करम जबसे हुआ है तू अपनी है नही अपनी लगे है।। किसी भी गैर के पहलू में दिखना ...

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वो सलामे-इश्क़ था या और कुछ। शोर महफ़िल नें मचाया और कुछ।। यकबयक उठ कर निगाहें झुक गयी वज्म ने मतलब लगाया और कुछ।। जल उठे नाहक़ रकाबत में सभी था मेरे हिस्से में आया और कुछ।। हमने अर्जी दी थी गोशे-यार की वक्त ने हमको थमाया और कुछ।। वो उम्मीदन मेरी मैयत में मिले...

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उसे जो शान-ओ-शौकत मिली है। रईसी ये बिना मेहनत मिली है।। कोई तो नेकियाँ उसकी बताओ उसे किस बात की शोहरत मिली है।। करें क्या इसको ओढ़ें या बिछाएं हमें जो आपसे इज्ज़त मिली है।। करेगा क्या किसी से वो रकाबत जिसे पैदाईशी गुरबत मिली है।। बिना मांगे उसे वो सब मिला है ...

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मुझे खोई दिशाओं का पता दो। मुझे बहकी हवाओं का पता दो।। मैं अपने आप से कैसे मिलूंगा मुझे मेरी अदाओं का पता दो।। मेरा महफ़िल में दम घुटने लगा है कोई आकर ख़लाओं का पता दो।। गुनाहे-इश्क़ का मुजरिम हूँ यारों मुझे मेरी सज़ाओं का पता दो।। मुझे क्यूँकर बचाया डूबने से म...
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