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Cycle Pure Agarbathies
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We are the leading manufacturer and exporter of incense sticks based in Mysore, India. Established in 1948.
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आज, 18 दिसंबर 2017 को पौष अमावस्या का पर्व मनाया जाएगा| इस त्यौहार के मुख्य अनुष्ठानों में से एक अनुष्ठान तर्पण श्राध का हैं|

तर्पण विधि का अनुष्ठान करते समय कृपया कर इन बातों का ध्यान रखें-
शास्त्रों के अनुसार, एक नदी के किनारे तर्पण रस्म का प्रदर्शन करना चाहिए| इस तरह नदी में खड़े रहें कि पानी आपके पेट तक हो अन्यथा नदी के तट पर बैठें।
यदि आप तर्पण भगवान या ऋषि के लिए कर रहें हैं तो इस अनुष्ठान का प्रदर्शन पूरब दिशा की ओर देखते हुए करें| अथवा अपने बाएं कंधे पर एक पवित्र धागा पहनें| देवताओं को तर्पण प्रदान करने के लिए दूर्वा की नोक से इस विधि का अनुष्ठान किया जाता हैं| अपनी अंजलि में जल लेकर अपनी उंगलियों से जल प्रदान करें| अथवा एक ही बार प्रदान करें|

यदि आप अपने पूर्वजों के लिए यह अनुष्ठान कर रहें हैं तो दक्षिण दिशा की ओर देखते हुए करें| अथवा धागे को दायें कंधे पर पहनना चाहिए| अथवा अपने पूर्वजों को तर्पण प्रदान करने के लिए दूर्वा की नोक अथवा जड़ों दोनों से ही यह प्रक्रिया करी जाती हैं| तीन मुट्ठी भर पानी अंगूठे के मध्य अथवा तर्जनी से प्रदान करें|
यदि ऋषियों के लिए अनुष्ठान किया जा रहा हैं, तो धागे को हार की तरह पहनना चाहिए| यदि आप दूर्वा को बीच में से मोड़ देते हैं और फिर तर्पण प्रदान करते हैं तो यह तर्पण की विधि ऋषियों को प्राप्त होती हैं| अपनी छोटी उंगली अथवा मध्यम उंगली से दो बार जल अर्पण करें| #PureDevotion


Cycle Pure Agarbathies की ओर से आप सभी को पौष अमावस्या की हार्दिक शुभकामनाएँ|
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आज, 18 दिसंबर 2017 को पौष अमावस्या का पर्व मनाया जाएगा| इस त्यौहार के मुख्य अनुष्ठानों में से एक अनुष्ठान तर्पण श्राध का हैं|

तर्पण विधि का अनुष्ठान करते समय कृपया कर इन बातों का ध्यान रखें-
शास्त्रों के अनुसार, एक नदी के किनारे तर्पण रस्म का प्रदर्शन करना चाहिए| इस तरह नदी में खड़े रहें कि पानी आपके पेट तक हो अन्यथा नदी के तट पर बैठें।
यदि आप तर्पण भगवान या ऋषि के लिए कर रहें हैं तो इस अनुष्ठान का प्रदर्शन पूरब दिशा की ओर देखते हुए करें| अथवा अपने बाएं कंधे पर एक पवित्र धागा पहनें| देवताओं को तर्पण प्रदान करने के लिए दूर्वा की नोक से इस विधि का अनुष्ठान किया जाता हैं| अपनी अंजलि में जल लेकर अपनी उंगलियों से जल प्रदान करें| अथवा एक ही बार प्रदान करें|

यदि आप अपने पूर्वजों के लिए यह अनुष्ठान कर रहें हैं तो दक्षिण दिशा की ओर देखते हुए करें| अथवा धागे को दायें कंधे पर पहनना चाहिए| अथवा अपने पूर्वजों को तर्पण प्रदान करने के लिए दूर्वा की नोक अथवा जड़ों दोनों से ही यह प्रक्रिया करी जाती हैं| तीन मुट्ठी भर पानी अंगूठे के मध्य अथवा तर्जनी से प्रदान करें|
यदि ऋषियों के लिए अनुष्ठान किया जा रहा हैं, तो धागे को हार की तरह पहनना चाहिए| यदि आप दूर्वा को बीच में से मोड़ देते हैं और फिर तर्पण प्रदान करते हैं तो यह तर्पण की विधि ऋषियों को प्राप्त होती हैं| अपनी छोटी उंगली अथवा मध्यम उंगली से दो बार जल अर्पण करें|


Cycle Pure Agarbathies की ओर से आप सभी को पौष अमावस्या की हार्दिक शुभकामनाएँ|
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Paush Amavasya is observed today, 18th December 2017. One of the main rituals of this festival is performing Tarpan.

Here’s what you should keep in mind while performing this ritual:
According to scriptures, one should perform the Tarpan ritual at the side of a river, and stand such that the water is till one’s stomach, or sit on the banks of the river. If one is performing this ritual for gods or sages, one should face the East. One should face the South if the ritual is being performed for one’s ancestors.

When one performs this ritual for gods, one should wear a sacred thread on his left shoulder (Savya). If the ritual is being performed for sages, one should wear the thread like a necklace (Nivit), and if the ritual is being performed for one’s deceased ancestors, the thread should be worn on the right shoulder (Apasavya).
The tarpan ritual offered to gods should be performed from the tip of a darbha grass; the one for sages by folding the grass in the middle; and the one for ancestors should be performed from the tips and roots of two darbhas.
A handful of water (Anjali) should be offered with the fingertips if the Tarpan is offered for gods (implying that the ritual should be offered only once), two handfuls of water should be offered with the base of the little finger and middle finger for sages, and three handfuls of water should be offered with the mid of the thumb and index finger for ancestors.

Cycle Pure Agarbathies wishes you a blessed Paush Amavasya.
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Somvati Amavasya is observed today, 18th December 2017. Here is the story behind Somvati Amavasya.

There once lived a moneylender who had a daughter and seven sons. Even though the daughter was of age, the moneylender could not get her married. Saddened by this, he sought the advice from a learned sage wo told him that his daughter can only have a long and happy married life if she observed the Somvati Amavasya Vrat and received sindhur from the hands of a washerwoman who lived in an island.

Soon, the girl left along with one of her brothers to find the washerwoman. As they were approaching, the daughter noticed that a snake was eating eggs from a nest of a vulture atop a tree. The daughter then killed the snake and when the vulture saw what she had done, it took them to the island where the washerwoman lived.
Without letting the washerwoman know, the daughter helped her with her chores. Upon realising that the girl was the one who helped her with her chores, the washerwoman blessed her and gave her sindhur. After receiving the blessing, the girl observed the Somvati Amavasya Vrat with devotion. This pleased Lord Shiva, who blessed her with a good spouse and a happy married life. #PureDevotion

Cycle Pure Agarbathies wishes you a fulfilling Somvati Amavasya Vrat.
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सोमवती अमावस्या आज, 18 दिसम्बर 2017 को मनाई जाएगी| सोम्वती अमावस्या के पीछे की कहानी कुछ इस प्रकार हैं-

एक बार एक साहूकार ब्राह्मण रहता था, जिसकी एक बेटी और सात पुत्र थे| यद्यपि बेटी की बड़ी उम्र होने के बावजूद, साहूकार उसकी शादी नहीं करा सका। इससे दुखी, उन्होंने एक विद्वान ऋषि से सलाह मांगी| ऋषि ने समस्या को सुनने के बाद, उसने कहा कि उनकी बेटी का लंबा अथवा सुखी विवाहित जीवन हो सकता हैं यदि वह सोमवती अमावस्या के व्रत का अवलोकन करें| परंतु यह काफ़ी नहीं था| व्रत रखने के साथ साथ यदि ब्राह्मण की बेटी को एक द्वीप में बसने वाली धोबिन से सिंदूर प्राप्त होता हैं तो ही उसका विवाहित जीवन सुखमयी रहेगा|

जल्द ही, ब्रामिन की पुत्री ने अपने भाइयों में से एक धोबिन को खोजने के लिए भेज दिया। जैसे ही उसके भाई वापस आ रहे थे, पुत्री ने देखा कि एक सर्प पेड़ के ऊपर, चील के घोंसले से अंडे खा रहा था। बेटी ने सर्प को मार डाला और जब चील ने यह देखा तो प्रसन्न हो वह उन्हें उस द्वीप पर ले गया जहां धोबिन महिलाएं रहती थी|

धोबिन को अपना मकसद बताए बिना, ब्राह्मण की पुत्री यूयेसेस धोबिन की रोज़मर्रा के कामों में मदद करने लगी| इस व्यवहार से प्रसन्न हो धोबिन ने लड़की को आशीर्वाद दिया और साथ ही साथ उसे सिंधुर भी दिया| आशीर्वाद प्राप्त करने के पश्चात, लड़की ने सोमवती अमावस्या के व्रत का निष्पादन किया| इससे भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न हुए अथवा आशीर्वाद के रूप में एक अच्छे पति अथवा सुखी विवाहित जीवन प्रदान किया|

Cycle Pure Agarbathies की ओर से सोमवती अमावस्या की हार्दिक शुभकामनाएँ| #PureDevotion
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हनुमान जयंती का पर्व, तमिलनाडु राज्य में कल, 18 दिसम्बर 2017 को मनाई जाएगी| अन्जनेयर जयंती के रूप में भी इस त्योहार को जाना जाता हैं| यह तमिल महीने मारगाज़ी में मनाया जाता हैं| अधिकांश भक्तजन इस दिन रामायण, खासकर सुंदर-कांड को पढ़कर और मारुति स्त्रोत्रम का जप करते हैं। #PureDevotion

मारुति स्त्रोत्रम और उसके अर्थ को पढ़ने के लिए पेज Cycle Pure पर बने रहें।
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Hanuman Jayanthi is celebrated in the state of Tamil Nadu tomorrow, 18th December 2017. Also known as Anjaneyar Jayanthi, it is celebrated in the Tamil month of Margazhi. Most devotees spend this day by reading the Ramayana, especially the Sundara Kandam, and chanting the Maruti Stotram. #PureDevotion

Stay tuned to Cycle Pure to read the Maruti Stotram and its meaning.
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Somvati Amavasya is observed tomorrow, 18th December 2017. The significance of this festival was explained to Yudhishthira by Bhishma and is mentioned in the Mahabharata. The rituals of this Amavasya include offering Anna Daan (food charity) to the underprivileged, observing Mauna Vrat (vow of silence), worshipping the Peepal tree, chanting the Shani Mantra, and taking dips in holy rivers (Snana).

Stay tuned to Cycle Pure to read the story behind Somvati Amavasya. #PureDevotion
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सोमवती अमावस्या कल, 18 दिसम्बर 2017 को मनाई जाएगी| इस त्यौहार का महत्व भीष्म द्वारा युधिष्ठिर को समझाया गया था और महाभारत में इसका उल्लेख किया गया हैं| इस अमावस्या के अनुष्ठान में वंचितों को अन्न दान, मौन व्रत, पिपल के पेड़ की पूजा, शनि मंत्र का जाप करते हुए अथवा पवित्र नदियों में स्नान करके पूर्ण करी जाती हैं| #PureDevotion

सोमवती अमावस्या के पीछे की कहानी को पढ़ने के लिए Cycle Pure पेज पर बने रहें|
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The 46th #VijayDiwas is celebrated today, 16th December 2017, to commemorate the victory of the #IndianArmy over #Pakistan in 1971. Today, let’s take a moment to remember and honour all the brave soldiers and their sacrifice for the nation and its greater good. #salute #Dec16 #IndianHistory
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