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Upasna Siag
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इन चुप्पियों के समन्दरों में...
चुप है हवाएँ , चुप है धरती , चुप ही है आसमान , चुप से  हैं उड़ाने भरते पंछी... पसरी है दूर तलक चुप्पियाँ। इन घुटन भरी  चुप्पियों के समन्दरों में. छिपे हैं, जाने कितने ही ज्वार...  और छुपी है कितनी ही बरसने को आतुर घुटी -घुटी सी घटाएं...

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बाबा मेरे बच्चे कैसे हैं .....
बाबा, मेरे बच्चे कैसे हैं ?" "............. " " बोलो बाबा ! हर बार मेरी कही अनसुनी कर देते हो ...., अब तो बोलो !" " ................ " " बाबा ! " "............................" " मैं क्या कहूँ पुत्री ।" " क्यों नहीं कह सकते हैं ?  तीन साल हो गए हैं ; अपने ब...

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तेरी बेरुखी और तेरी मेहरबानी
यही मौत है और यही जिंदगानी
लबो पर तबस्सुम तो आँखों में पानी
यही है यही दिल जलो की निशानी
वही इक फ़साना वही इक कहानी
जवानी जवानी जवानी जवानी
बताऊँ है क्या आंसुओं की हकीक़त
जो समझो तो सब कुछ, न समझो तो पानी ...

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ये महलों, ये तख्तों, ये ताजों की दुनिया,
ये इंसान के दुश्मन समाजों की दुनिया,
ये दौलत के भूखे रवाजों की दुनिया,
ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है।

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इस बरस..
इस बरस नज़र आ रहे हैं  चहुँ ओर उगे हुए  आक , धतूरे  और भांग के पौधे | इस बरस भुजंग  आने लगे हैं बाहर  आस्तीनों से , उठाने लगे है फन | लगता है  इस बरस, चन्दन भी अधिक  लपेटना होगा शिव को |   

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उसके बाद .....?
          गाँव की गलियों के सन्नाटे को चीरती एक जीप एक बड़ी सी हवेली के आगे रुकी।  हवेली की ओर बढ़ते हुए चौधरी रणवीर सिंह की  आँखे अंगारे उगल रही है  चेहरा तमतमाया हुआ है। चाल  में तेज़ी है जैसे बहुत आक्रोशित हो, विजयी भाव तो फिर भी नहीं थे चेहरे पर। चेहरे प...

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उसके बाद .....?
          गाँव की गलियों के सन्नाटे को चीरती एक जीप एक बड़ी सी हवेली के आगे रुकी।  हवेली की ओर बढ़ते हुए चौधरी रणवीर सिंह की  आँखे अंगारे उगल रही है  चेहरा तमतमाया हुआ है। चाल  में तेज़ी है जैसे बहुत आक्रोशित हो, विजयी भाव तो फिर भी नहीं थे चेहरे पर। चेहरे प...

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जिन्दगी --- एक दिन
            रात के दस बजे हैं सब अपने -अपने कमरों में जा चुके हैं। आरुषि ही है जो अपने काम को फिनिशिंग टच दे रही है कि कल सुबह कोई कमी ना रह जाये और फिर स्कूल को देर हो जाये। अपने स्कूल की वही प्रिंसिपल है और टीचर भी, हां चपड़ासी भी तो वही है ! सोच कर मुस्क...

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माँ तो माँ है ..
     एक दिन छोटी सी बात हो गई। कई बार कुछ छोटी बातें दैनिक जीवन में छोटी बातें  गहरा असर करती  है और याद भी रह जाती है। तो उस दिन यह हुआ कि मैं रसोई के काम से थोड़ी सी फुरसत पाते ही बैठक की तरफ गई। वहां अंशुमान अख़बार में , प्रध्युम्न मोबाईल में और संजय जी फो...

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अब अगर आओ तो जाने के लिए मत आना,
सिर्फ़ एहसान जताने के लिए मत आना,

मैंने पलकों पे तमन्नाये सजा रखी है,
दिल मे उम्मीद की सौ शमे जला रखी है,

यह हसी शमे बुज़ाहाने के लिए मत आना,
प्यार की आग मे जंजीरे पिघल सकती है,

चाहने वालो की तकदिरें बदल सकती है,
तुम हो बेबस ये बताने के लिए मत आना,

अब तुम आना जो तुम्हे मुज्ह्से मोहबत है कोई,
मुज्से मिलने की अगर तुमको भी चाहत है कोई,

तुम कोई रसम निभाने के लिए मत आना...
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