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Aakul Gkb
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शिक्षा- एम0कॉम0, जून, 2015 में सेवानिवृत्‍त, वर्तमान में स्‍वतंत्र लेखन एवं ऑन लाइन जॉब वर्क, दैनिक सांध्‍य समाचार पत्र 'न्‍यूज टूडे' में हिन्‍दी वर्ग पहेली एवं ई-पत्रिका अभिव्‍यक्ति में हिन्‍दी वर्ग पहेली। 5 पुस्‍तकें (काव्‍य, लघुकथा, नाटक, गीत संग्रह ) प्रकाशित। अब तक समाचार पत्रों में 6000 से अधिक वर्गपहेली प्रकाशित। ब्‍लॉग 'saannidhya.blogfsot.com' पर सक्रिय
शिक्षा- एम0कॉम0, जून, 2015 में सेवानिवृत्‍त, वर्तमान में स्‍वतंत्र लेखन एवं ऑन लाइन जॉब वर्क, दैनिक सांध्‍य समाचार पत्र 'न्‍यूज टूडे' में हिन्‍दी वर्ग पहेली एवं ई-पत्रिका अभिव्‍यक्ति में हिन्‍दी वर्ग पहेली। 5 पुस्‍तकें (काव्‍य, लघुकथा, नाटक, गीत संग्रह ) प्रकाशित। अब तक समाचार पत्रों में 6000 से अधिक वर्गपहेली प्रकाशित। ब्‍लॉग 'saannidhya.blogfsot.com' पर सक्रिय

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जिंदगी को न हार जाना है (गीतिका)
छंद-
रारायगा छंद मापनी-
2122   1212   22 पदांत-
है समांत-
आना कुछ
न बोलो, यही जमाना है. बढ़
के’ आफत, गले लगाना है. धैर्य
जब से, है’ आदमी भूला, भूल
होगी, उसे सिखाना है. सब
दिखावे, के’ रह गये रिश्‍ते, सोच
कर ही, उन्‍हें निभाना है.     उम्र
ने हैं, कई मिसालें ...

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शृंगार करूँ (गीतिका)
पदांत- करूँ समांत- आर मापनी- 16//14 धीरज रख मन , पी आयेंगे , कुछ तो मैं शृंगार करूँ. पहले म्‍हावर या मे ' हँदी से , हाथ-पैर गुलज़ार करूँ. पहनूँ चुनरी और लहरिया , छम-छम पहनूँ
पैंझनियाँ , फिर सोचूँगी पी आने पर , कैसे मैं मनुहार करूँ. सखियों के सँग झूला झूलूँ ...

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बच्‍चों को वर्षा क्‍या सारे मौसम भाते हैं. (गीतिका)
   पदांत-
हैं   समांत-
आते     बच्चों को
वर्षा क्या सारे , मौसम भाते हैं.      इसलिए कि उनको न कभी सुख , दुख तरसाते है.     कहाँ जानते
हैं वे होता , है क्या सच व झूठ , क्या होता है डर कब कैसे , इसे सिखाते हैं.     पहली बारिश
में कितने ही , होते कौतूहल ,   न...

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**
छंद-
विधाता मापनी-
1222 1222 1222 1222 पदांत-
है समांत-
आई धरा
पर आज पावस ने, हरित चादर बिछाई है. मुदित
कण कण हवा भी सर्द हो कर मुसकुराई है. नई
कोंपल नई शाखें, नये मधुकोश, नव-जीवन, सभी
को सृष्टि ने पहली, हरी चूनर उढ़ाई है. कहीं
नर्तन मयूरी के, कहीं छूते गगन...

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गुरु पूर्णिमा पर तीन मुक्‍तक
1 अक्षर ज्ञान दिवाय के, उँगली पकड़ चलाय. गुरु की पार लगाय या, केवल पार लगाया. मात-पिता-गुरु तीन के, उस पर रहते हाथ, शिक्षा कोई क्षेत्र हो, बिन गुरु कभी न आय.  2 नमन करो तुम कृतज्ञता से, जनक, गुरु, ईश्‍वर का. तदुपरांत तुम नमन करो, धरा, देश और घर का. अपने और ...

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गुरु पूर्णिमा पर 3 मुक्‍तक
1 अक्षर ज्ञान
दिवाय के, उँगली पकड़ चलाय. गुरु ही पार
लगाय या, केवट पार लगाय. मात-पिता-गुरु
तीन के, उस पर रहते हाथ, शिक्षा कोई
क्षेत्र हो, बिन गुरु कभी न आय. 2 नमन करो तुम कृतज्ञता से जनक, गुरु, ईश्‍वर का. तदुपरांत मुम नमन करो धरा, देश और घर का. अपने और पराय...

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दो 'दोहा मुक्‍तक'
मन इस
मन की अब क्या कहूँ , बैठा है ले आस. निर्मोही पी लो सुधी , आया चातुर्मास. सावन के झूले पड़े , नहिं सोहे शृंगार , अंतर्मन विचलित रहे , बढ़ती जाती प्यास. चतुर्मास   मुनि,
महंत अरु संत सब, करते प्रभु का ध्‍यान. देवशयन
करते प्रभू, जब तक देवोत्‍थान. चतुर्मा...

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2 मुक्‍तक (1 जुलाई के संदर्भ में)
1 नई कर प्रणाली (GST) विलासिता अब कम करें, रखें याद यह बात. दृढ़प्रतिज्ञ हो कर सभी, बचत करें दिन-रात. नव कर पद्धति आज से, भारत में आरम्‍भ, खोज करें क्‍या मिली है, तुमको नव सौगात. 2 चिकित्‍सक दिवस (Doctor's Day) आज चिकित्‍सक दिवस है, उनको दें सम्‍मान. चलते ह...

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गीतिका
गीतिका छंद-
चौपई (जयकरी) मात्रा
भार-15 , अंत
में 2-1 अनिवार्य पदांत-
लोग समांत-
आते बचते और बचाते लोग अपनी बीन बजाते लोग जीवन में पछताते लोग. बहकावे में आते लोग. रुपयों का दे दे कर लोभ , पत्‍थर भी फिंकवाते लोग. लहसुन आज कभी थी प्याज , अपनी जान लुटाते लोग. आ...

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चार मुक्‍तक
स्‍तुति
(दोहा मुक्‍तक) स्तुति भी इक योग है, जैसे
चिन्‍तन, ध्यान. यह दृढ इच्‍छा शक्ति को,
प्रबल करे यह मान. योग शुभंकर वृद्धि का, बल,
मति, कर्म समेत. मान प्रतिष्‍ठा दे सदा,
गुरु, प्रभु, जनक, समान निन्‍दा
(दोहा मुक्‍तक) बुरा जो देखन मैं चला, पढ़,
क्‍या साबित ...
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