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Aakul Gkb
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शिक्षा- एम0कॉम0, जून, 2015 में सेवानिवृत्‍त, वर्तमान में स्‍वतंत्र लेखन एवं ऑन लाइन जॉब वर्क, दैनिक सांध्‍य समाचार पत्र 'न्‍यूज टूडे' में हिन्‍दी वर्ग पहेली एवं ई-पत्रिका अभिव्‍यक्ति में हिन्‍दी वर्ग पहेली। 5 पुस्‍तकें (काव्‍य, लघुकथा, नाटक, गीत संग्रह ) प्रकाशित। अब तक समाचार पत्रों में 6000 से अधिक वर्गपहेली प्रकाशित। ब्‍लॉग 'saannidhya.blogfsot.com' पर सक्रिय
शिक्षा- एम0कॉम0, जून, 2015 में सेवानिवृत्‍त, वर्तमान में स्‍वतंत्र लेखन एवं ऑन लाइन जॉब वर्क, दैनिक सांध्‍य समाचार पत्र 'न्‍यूज टूडे' में हिन्‍दी वर्ग पहेली एवं ई-पत्रिका अभिव्‍यक्ति में हिन्‍दी वर्ग पहेली। 5 पुस्‍तकें (काव्‍य, लघुकथा, नाटक, गीत संग्रह ) प्रकाशित। अब तक समाचार पत्रों में 6000 से अधिक वर्गपहेली प्रकाशित। ब्‍लॉग 'saannidhya.blogfsot.com' पर सक्रिय

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बसंत
गीतिका   जाने को है शरद,  माघ का सावन हुआ बसंती. रुत बसंत की भोर, आज मनभावन हुआ बसंती.    बौर खिले पेड़ों पर, लहराई गेहूँ की बाली,      मनुहारों, पींगों की रुत मनमादन हुआ बसंती. आहट होने लगी फाग की, पवन चली मधुमासी, चढ़ने लगा रंग तन-मन पर दामन हुआ बसंती. डा...

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है प्रभुत्‍व नारी का
गीतिका   क्‍या दंगल क्‍या खेल, सभी में है प्रभुत्‍व नारी
का. क्‍या धरती क्‍या आसमान में है प्रभुत्‍व नारी
का. सत्‍ता की ऊँचाई हो या, भद्र प्रशासन का पद, रंगमंच, तीनों सेना में है प्रभुत्‍व नारी का. पर्वों त्‍योहारों में सर्वोपरि सम्‍मान निहित
है, घर की हर प...

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छंद- नराचिका   वाचिक मापनी पर आधारित 2212 1212 जो जीत के न पा सके वो रीति से न पा सके जो पालता है दंभ को वो नीति से न पा सके हैं वीर वो स्‍वदेश की सेवा में’ काम आ सके वो राज है जहान में जो प्रीति से बना सके बी‍ती वही बिसारते जो वर्द्धमान ला सके

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देख सको तो देखो
(गीतिका) छंद- ‘सार’  मात्रिक भार - 16-12 पदांत- देख सको तो देखो समांत- अत रुके हुए पानी की हालत, देख सको तो देखो. बेघर बेचारों की आफत, देख सको तो देखो. जिनके सिर पर हाथ नहीं है, उन अनाथ की आँखें, भूख-प्यास की बेदम राहत, देख सको तो देखो. नारी की अस्मिता बचेग...

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दो मुक्‍तक
1. मकर संक्रांति देश काल अब नूतन करवट बदल रहा है. सूर्य संक्रमण कर अपना पथ बदल रहा है. आज एक मृत्‍युंजय का निर्वाण दिवस है, भीष्‍म प्रतिज्ञा करें जीवन पथ बदल रहा है. 2. दान-पुण्‍य दान-पुण्‍य हो, दान-धर्म हो या हो जीवन धर्म. रक्षा इसका कवच दयानिधि है जीवन का...

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तीन मुक्‍तक
1 आदमी आलस्‍य त्‍याग नई ऊर्जा भरते हैं,  जब सूर्य उदय होता है. पंछी भी नई ऊर्जा ले परवाज भरते हैं,  जब सूर्य उदय होता है. प्रकृति भी अपनी अनुपम छटाएँ बिखेरती है,  ऊर्जा ले कर सूर्य से, जीवन सारे इसी ऊर्जा से उम्र तय करते हैं,  जब सूर्य उदय होता है. 2 आजादी ...

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वाचिक भुजंग प्रयात   मापनी -- 122 122 122 122 (गीतिका)   अगर आप से दिल लगाया न होता. हमें जिंदगी ने सताया न होता. मुलाकात हर इक शरारत हुई थी, हमें काश यह सब बताया न होता. बहुत दूर तक आ गये अब सफर में हमें चाहतों से जताया न होता. गुजारे नहीं दिन कभी गर्दिशों...

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सुबह किया सलाम
नवगीत कुहरे में दुबके सूरज को सुबह किया सलाम. बया झाँकती गोख से झूला गीला ओस में पंछी सारे दुबक रहे आस-पास पड़ौस में रजत कटोरे से सूरज को सुबह किया सलाम. देख विवश सूरज को खग चहक रहे डेरे में  विवश बाथ भरने को वे गगन ढका कुहरे में मोती ओस कणों वाली सुबह को क...

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जिंदगी ने कभी हार मानी नहीं
(गीतिका) मापनी- 212  212  212 
212  समांत-
आनी पदांत’
नहीं (अरुण
छंद) जिंदगी
ने कभी हार मानी नहीं मौत
ने की कभी महरबानी नहीं मौत
ने ठहर के जिंदगी को सुना आदमी
ने कभी बात मानी नहीं वक्‍त
ने नाया’ब उसे दिये तोहफे मात्र
बचपन बुढ़ापा जवानी नहीं काश
न करे कभी वह...

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तीन मुक्‍तक
1 समय अनुकूल हो , सफलता के आसार बढ़ जाते हैं. अपनों से दूरियाँ , गैरों के व्यवहार बढ़ जाते हैं. सफलता का नशा भी कुछ ऐसा ही है जैसे ' आकुल ', चाँद को बढ़ता देख समंदर में ज्वार बढ़ जाते
हैं.  2 समय प्रतिकूल हो तो , जहाँ में कुदरत भी बदल जाती है गैरों को क्‍या...
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